केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान - एक परिचय

केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान की स्थापना 4 सितंबर 1972 को भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बैंगलोर के तत्वावधान में केन्द्रीय आम अनुसंधान केन्द्र के नाम से की गयी थी। अनुसंधान केन्द्र का उन्नयन कर 1 जून 1984 को इसे केन्द्रीय उत्तर मैदानी उद्यान संस्थान के रूप में पूर्ण संस्थान का दर्जा दिया गया। 14 जून 1995 को संस्थान का नाम बदलकर केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान कर दिया गया। संस्थान अधिदेशित उपोष्ण फलों के विभिन्न पहलुओं पर अनुसंधान कार्य के द्वारा राष्ट्र की सेवा कर रहा है। संस्थान के दो प्रायोगिक प्रक्षेत्र हैं। पहला प्रायोगिक प्रक्षेत्र शहर से लगभग 25 कि.मी. दूर रहमानखेड़ा में 132.5 हेक्टेयर का है जिसमें 4 ब्लाॅक (ब्लाॅक 1-15.5 हेक्टेयर, ब्लाॅक 2-35.5 हेक्टेयर, ब्लाॅक 3-37.42 हेक्टेयर, ब्लाॅक 4-44.08 हेक्टेयर) हैं जबकि दूसरा लखनऊ शहर में रायबरेली मार्ग पर 13.2 हेक्टेयर का है। संस्थान में उच्च स्तर की पौधशाला, वैज्ञानिक पद्धति पर स्थापित फलोद्यान तथा आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित प्रयोगशालाएँ हैं जिसके द्वारा उपोष्ण बागवानी के महत्वपूर्ण चुनौतियों पर कार्य किया जाता है। संस्थान ने सैम हिग्गिनबौटम कृषि एवं प्रौद्योगिकी संस्थान समतुल्य विश्वविद्यालय, इलाहाबाद, ए.पी. एस. विश्वविद्यालय, रीवा, बाबा साहेब भीमराव अंबेदकर विश्वविद्यालय, झांसी, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ के साथ स्नातकोत्तर एंव पीएच. डी. उपाधियों के अनुसंधान कार्य हेतु समझौता ज्ञापन किया हुआ है। संस्थान को इग्नू द्वारा फलों एवं सब्जियों के मूल्य सवंर्धित उत्पादों विषय पर एक वर्ष का डिप्लोमा एवं 6 माह का जैविक खेती में प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रमों के अध्ययन केन्द्र के रूप में भी मान्यता प्राप्त है। Read More..

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निदेशक की कलम से

केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ द्वारा फलों के राजा आम तथा गरीब लोगों के सेब अमरुद पर कार्य किये जाने के कारण इस संस्थान का विश्व में एक महत्वपूर्ण स्थान है। संस्थान के प्रक्षेत्र जीन बैंक में आम के 762 अभिगमनों का संकलन किया गया है। तेजी से कम होते आम की मूल्यवान आनुवंशिकी के संरक्षण के लिये संस्थान के वैज्ञानिक प्रतिबö हैं। उनके द्वारा किसानों को प्रेरित किया गया है जिससे आम अनुरक्षण विविधता समिति के किसानों को आम की विविध एंव अनूठे किस्मों को सुरक्षित करने में सफलता मिली है। इसके परिणामस्वरूप 34 किसानों को पौध किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण, नयी दिल्ली में पंजीयन हेतु अनुशंसित किया गया। इसके अलावा सामुदायिक पौधशालाओं को स्थापित किया गया तथा इसके बाहर गैर-वाणिज्य 1000 प्रकार के कलमी पौधों का उत्पादन किया गया। केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ द्वारा विकसित आम एवं अमरूद की विभिन्न किस्मों को देश के सभी हिस्सों के उपभोक्ताओं öारा स्वीकार किया गया। अमरूद की ललित किस्म ने अलग-अलग हिस्सांे में प्रभावशाली बढोत्तरी की जिसके कारण वाराणसी के कुछ हिस्सों जहाँ सब्जियाँ पैदा की जाती थी वहाँ भी ललित किस्म की बागवानी की गयी। इसके अतिरिक्त ललित किस्म का फैलाव महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश एंव तमिलनाडु के दूर-दराज स्थानों में भी हुआ है। संस्थान द्वारा विकसित अमरूद की दो किस्मों धवल एवं लालिमा को उत्तर प्रदेश के महामहिम राज्यपाल महोदय श्री राम नाइक ने 22 जून, 2015 को पर्यटन भवन में जनहित में जारी किया गया। Read More..

वार्षिक प्रतिवेदन

सी आई एस एच 2014-2015

प्रकाशन :डॉ एस राजन
संकलन एवं सम्पादन : डॉ अजय वर्मा, आर एम खान, मनीष मिश्रा,ए.के भट्टाचार्य, एच.केशव कुमार, श्रीमती प्रीती शर्मा एवं श्री धीरज शर्मा

सी आई एस एच 2013-2014

प्रकाशन : डॉ एच रविशंकर
संकलन एवं सम्पादन : डॉ अजय वर्मा, डॉ अंजू बाजपाई, डॉ एच.केशव कुमार, डॉ गुंडप्पा, श्रीमती प्रीती शर्मा, श्री संजय कुमार एवं श्री धीरज शर्मा

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