ICAR- CISH Scientists took stock of mango pest and disease status in different districts of Uttar Pradesh and Uttarakhand

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में आम कीट और रोग की स्थिति का जायजा लिया

आम के कीट थ्रिप्स एवं भुनगा ने न केवल आम उत्पादकों को बल्कि भा.कृ.अनु.प.-के.उ.बा.सं., रहमानखेड़ा, लखनऊ के वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी चुनौती बनायी है। इस सन्दर्भ में के.उ.बा.सं. के निदेशक डॉ. एस. राजन ने बताया कि पिछले एक महीने में हम प्रत्येक दिन किसानों से कई फोन कॉल प्राप्त कर रहे हैं। किसान रिपोर्ट कर रहे हैं कि कोई कीटनाशक इन कीटों का प्रबंधन करने में सक्षम नहीं है। इसे ध्यान में रखते हुए इस समस्या के समाधान हेतु प्रयासों को आवश्यक समझा गया। आम के कीट एवं व्याधि के साथ-साथ कीटों के प्राकृतिक शत्रु के विषय में जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. पी.के. शुक्ला और डॉ. गुंडप्पा ने दिनांक 1 से 5 अप्रैल, 2018 को हरदोई, बदायूँ, संभल, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत, शामली, सहारनपुर, हरिद्वार, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर और बरेली जिले का सर्वेक्षण किया। वैज्ञानिकों ने बताया कि कीटनाशक और रोगों के उचित प्रबंधन के लिए पारिस्थितिक तंत्र संतुलन बहुत महत्वपूर्ण है। प्राकृतिक शत्रु (लेडी बर्ड बीटल, क्रायसोइपिड्स, सीरफिड्स, मकड़ियों और पैरासिटोइड) अच्छी तरह से व्यवस्थित बागों के विपरीत कम प्रबंधित बागों में प्रचुर मात्रा में पाए गए। कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग ने न केवल कीटों और रोगजनकों के प्राकृतिक शत्रुओं को मार डाला है बल्कि कीटों में प्रतिरोध का विकास भी किया है। वैज्ञानिकों ने यह देखा कि किसान कम मात्रा में कीटनाशकों का उपयोग कर रहे हैं जो कीटों को प्रभावी रूप से प्रबंधित करने में सक्षम नहीं हैं ओर ये कारक कीट आबादी में प्रतिरोध के विकास के लिए योगदान कर रहे हैं।

Mango thrips and hopper has created a great challenge not only before growers but also for scientists of ICAR-CISH, Rehmankhera, Lucknow. Speaking about it, Dr. S. Rajan, Director, CISH told that we have been receiving many calls from farmers everyday during last one month. Farmers have been reporting that no pesticide is able to manage those pests. Keeping in view that calls are coming from those farmers who are unsuccessful, it was felt necessary to workout ground reality. Two scientists, Dr. P.K. Shukla and Dr. Gundappa surveyed Hardoi, Badaun, Sambhal, Meerut, Muzaffanagar, Bagpat, Shamli, Saharanpur, Haridwar, Bijnor, Amroha, Moradabad, Rampur and Bareilly districts for incidence of insect pests and disease of mango along with natural enemies of pests during 1st to 5th April. Scientists reported that “ecosystem balance is very important for getting the proper management of insect pests and diseases”. Natural enemies (Lady bird beetles, Crysopids, syrphids, spiders and parasitoids) population was found abundant in least managed orchards in contrast to well managed orchards. Indiscriminate use of pesticide has not only killed natural enemies of pests and pathogens but also contributed development of resistance in insect pests. Scientists has noticed that farmers are using cocktail of pesticides at lower dosages which are not able to manage the insects effectively and these factors further contribute towards the development of resistance in pest population.