विश्व मृदा दिवस

विश्व मृदा दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान की कार्यवाहक निदेशिका डा. नीलिमा गर्ग की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। निदेशिका महोदया ने मृदा स्वास्थय के विषय में बताते हुयें मृदा में उपस्थित सूक्ष्म जीवों पर जानकारी दी उन्होने बताया कि सूक्ष्म जीवों के बिना मृदा मृत हो जाती है जिसकी उपयोगिता बनायें रखने के लियें कृषि में उपयोग होने वाले रासायनिक उर्वरको तथा कीट नाशकों के अनिमयित उपयोग के कारण मृदा स्वास्थ्य गिरता जा रहा है। संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डा. आर.ए. राम ने बताया कि मृदा स्वास्थ हेतु जैव विविधता बनायें रखना आवश्यकता होती है।विभन्न प्रकार की फसलों को अपने प्रक्षेत्र में लगाना चाहियें एक ही प्रकार की फसल को बार-बार अपने प्रक्षेत्र में उगाने से मृदा स्वास्थ्य गिर जाता है। फसल काटने के बाद शेष फसल अवशेष को जलाने की बजाय खाद बनाकर खेती में उपयोग करने से मृदा का स्वास्थ्य बढ़ता है और प्रदूषण भी नही होता है। उन्होंने खाद बनाने के विभिन्न तकनीकियो जैसे नाडेप, बायोडायनामिक, केचुआ खाद, वर्मी वाश के साथ जैविक कीट नाशको को किस प्रकार बनाया जाय इस पर विस्तार से चर्चा की इस कार्यक्रम में फार्मर फस्ट परियोजना के 10 कृषकों तथा संस्थान के 17 वैज्ञानिकों सहित अन्य कर्मचारी सम्मिलित हुए। कार्यक्रम के अन्त में कृषकों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण निदेशक महोदया द्वारा किया गया।

World Soil day

ICAR-CISH, Lucknow organized World Soil Day on 5th December, 2018. CISH Scientists and farmers of Farmer FIRST project participated in the program. The program was chaired by Dr. Neelima Garg, In Charge Director, ICAR-CISH, Lucknow who delivered a talk on role of microbes for improving soil health. Dr. Ram Awadh Ram, Principal Scientists of Institute deliberated on role of organic input for sustainable health of soil. Soil health card was distributed to farmers of Mohammad Nagar Talukedari village of Malihabad, Lucknow