ICAR-CISH Events

XIV Agricultural Science Congress

XIV Agricultural Science Congress to be organized by National Academy of Agricultural Sciences, New Delhi & ICAR-Indian Agricultural Research Institute, New Delhi from February 20-23, 2019.

Please Visit: XIV Agricultural Science Congress 2019. Event Date:- 20-02-2019

Students of Sam Higginbottom Institute of Agriculture, Technology and Sciences visit CISH

109 students (B.Sc.) along with teachers of Sam Higginbottom Institute of Agriculture, Technology and Sciences, Prayagraj (Allahabad) visited the different research units and experimental fields of ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture (CISH) at dated 16.11.2018. Dr. V.K. Singh, Principal Scientist given a lecture on the research and development activities of the Institute.

सैम हिगिजिनबॉटम इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज के छात्रो का कें.उ.बा.सं. का भ्रमण

सैम हिगिजिनबॉटम इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज, प्रयागराज (इलाहाबाद), के बी.एससी. के 109 छात्रों एवं शिक्षकों ने दिनांक 16.11.2018 को कें.उ.बा.सं. के विभिन्न शोध इकाइयों और प्रयोगात्मक क्षेत्रों का भ्रमण किया। डॉ वीके सिंह, प्रधान वैज्ञानिक- कें.उ.बा.सं. ने संस्थान के अनुसंधान और विकास की गतिविधियों पर एक व्याख्यान भी दिया।

Event Date:- 16-11-2018

दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्रामीण विकास संस्थान के अधिकारियो का कें.उ.बा.सं. का भ्रमण

दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्रामीण विकास संस्थान, बक्शी का तालाब, लखनऊ के 26 अधिकारियो ने दिनांक 15.11.2018 को भा.कृ.अनु.प.- कें.उ.बा.सं. के परिसर और प्रायोगिक क्षेत्र का भ्रमण किया। डॉ. आर. ए. राम, प्रधान वैज्ञानिक ने अधिकारियो को संस्थान द्वारा विकसित विभिन्न प्रौद्योगिकी के बारे में जानकारी दी। इसके बाद उन्होने जैविक खेती पर अधिकारियो को एक व्याख्यान भी दिया।

Officers of Deendayal Upadhyaya State Institute of Rural Development visit ICAR-CISH

Twenty six officers of Deendayal Upadhyaya State Institute of Rural Development, Bakshi ka Talaab, Lucknow visited the institute campus and experimental field of ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture (CISH) at dated 15.11.2018. Dr. R.A. Ram, Principal Scientist gave a brief introduction on the research and development activities of the Institute followed by given a lecture on organic farming.

Event Date:- 15-11-2018

Students of Sam Higginbottom Institute of Agriculture, Technology and Sciences visit ICAR-CISH

52 students of (B.Sc. Ag Finals) along with teachers of Sam Higginbottom Institute of Agriculture, Technology and Sciences, Prayagraj (Allahabad) visited the different laboratories and experimental fields of ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture (CISH) at dated 15.11.2018. Dr. V.K. Singh, Principal Scientist interact with students and given the information of different technology developed by institute.

सैम हिगिजिनबॉटम इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज के छात्रो का कें.उ.बा.सं. का भ्रमण

सैम हिगिजिनबॉटम इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज, प्रयागराज (इलाहाबाद), के बी.एससी. कृषि विभाग के 52 छात्रों एवं शिक्षकों ने दिनांक 15.11.2018 को कें.उ.बा.सं. के विभिन्न प्रयोगशालाओं और प्रयोगात्मक क्षेत्रों का भ्रमण किया। डॉ वीके सिंह, प्रधान वैज्ञानिक ने छात्रों को संस्थान द्वारा विकसित विभिन्न प्रौद्योगिकी के बारे में जानकारी दी।

Event Date:- 15-11-2018

IPR awareness program was organized on 14 November 2018

दिनांक 14.11.2018 को बौद्धिक सम्पदा अधिकार पर कार्यशाला का आयोजन

भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान रहमानखेड़ा, लखनऊ में आज दिनांक 14.11.2018 को बौद्धिक सम्पदा अधिकार पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला संस्थान के वैज्ञानिकों के द्वारा विकसित नयी तकनीकियों को सुरक्षित करने एवं तकनीकी स्थान्तरण को ध्यान में रखकर आयोजित की गयी। इसके उद्घाटन अवसर पर संस्थान के निदेशक, डा. शैलेन्द्र राजन ने सभी वैज्ञानिको को इस पर अमल करने की सलाह दी। इस अवसर पर वक्ता के रूप में श्री अमित कलकल, बिजनस मैनेजर, एग्रीइनोवेट इंडिया ने तकनीकी स्थान्तरण के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की| उन्होंने बताया कि एक इनोवेटिव आईडिया और प्रोटोटाइप से विकसित उत्पाद/तकनीकी का मूल्यांकन कैसे करें एवं ऐसे तकनीकी को किसी स्टार्टअप, इंटरप्रेन्योर को स्थानांतरित करने के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखें। इसके लिए तकनीकी से सम्बंधित सत्यापित तथ्यों एवं सम्बंधित एजेंसी से प्रमाणीकरण का होना बहुत आवश्यक है, इसके बिना तकनीकी समिति द्वारा तकनीकी स्थान्तरण पर कोई निर्णय नहीं किया जा सकता है| संस्थान द्वारा अभी तक ३० से अधिक तकनीकियों को विकसित किया है और उनमें से ११ तकनीकियों को विभिन्न कंपनियों को स्थान्तरित किया जा चुका है|

An Intellectual Property Rights (IPR) awareness program was organized at ICAR-Central Institute of Sub-tropical Horticulture (CISH) Lucknow on 14 November 2018. On this occasion, Mr. Amit Kalkal, Business Manager, Agrinnovate India Ltd. (AgIn), New Delhi discussed in detail on different aspects of this issue. He told about that how to move technology from an idea or prototype to a licensed product/ technology. Technology commercialization is the process of converting ideas into businesses. For this, certification from authorized agency and certified data of the experiment is essential, without this, any technical committee is not able to decide the value of IP of the technology and unable to recommend for commercialization. He also discussed the legal issues for technology commercialization. Institute has developed more than 35 technologies, out of this 11 technologies transferred to different companies/stakeholders. All Scientist of the Institute and agriculture officers from different state were attended the program.

Event Date:- 14-11-2018

Workshop on Strawberry production in subtropics- challenges and strategies

"उपोष्ण क्षेत्रो में स्ट्रॉबेरी का उत्पादन- चुनौतियों और रणनीतियों" पर कार्यशाला

भा.कृ.अनु.प.- केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान ने दिनांक को 29/10/2018 को "उपोष्ण क्षेत्रो में स्ट्रॉबेरी का उत्पादन - चुनौतियों और रणनीतियों" पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में कुल 16 लोगों ने भाग लिया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य उपोष्ण क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी उत्पादन के लिए स्थानीय लोगो को प्रशिक्षित करना था। कार्यशाला की व्यवस्था प्रधान वैज्ञानिक, डॉ अशोक कुमार द्वारा की गई थी।

ICAR-Central Institute of Subtropical Horticulture, organized a workshop on "Strawberry production in subtropics- challenges and strategies' on 29/10/2018. A total 16 peoples were participated in this workshop. The main aim of this workshop had to promote the production of strawberry in subtropics area by mitigating the difficulties and trained the local people for cultivation of strawberry. The arrangement of the programme was made by Dr. Ashok Kumar (Principal Scientist).

Event Date:- 12-11-2018

Vigilance Awareness Week

सतर्कता जागरूकता सप्ताह

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ के वैज्ञानिकों, तकनीकी अधिकारियों और कर्मचारियों ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह को (दिनांक 29.10.2018- 03.11.2018) का आयोजन किया गया। इस अवसर पर दिनांक 29.10.2018 को संस्थान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा सतर्कता की शपथ ली गयी। शपथ के दौरान उन्होंने सतर्कता के बारे में लोगो को जागरूक किया। संस्थान में दिनांक 01.11.2018 को आमंत्रित अतिथि श्री धीरेन्द्र कुमार, सेवानिवृत्त, प्रशासन नियंत्रक, सीमैप ने सतर्कता के विषय पर व्यख्यान दिया।

The Scientists, Technical officers and other employees of ICAR- Central Institute of Subtropical and Horticulture, Rahmaankhera, Lucknow organized Vigilance Awareness Week from 29.10.2018 to 03.11.2018. On this occasion, oath was taken by staff of the institute on 29.10.2018. During the week awareness about vigilance was made. Shri Dhirendra Kumar, Retired, COA of CSIR-CIMAP delivered the lecture on vigilance on 01.11.2018.

Event Date:- 03-11-2018

Student Visit

भालचंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड मैनेजमेंट के छात्रों का कें.उ.बा.सं. का भ्रमण

भालचंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड मैनेजमेंट, दुबग्गा, लखनऊ के 16 विघार्थियों एवं प्राध्यापको ने दिनांक 31.10.2018 को भा.कृ.अनु.प.- कें.उ.बा.सं. में विभिन्न शोध प्रयोगशालाओं एवं प्रायोगिक प्रक्षेत्रो का भ्रमण किया और संस्थान के द्वारा विकसित विभिन्न तकनीको के बारे में वैज्ञानिको से जानकारी ली।

Sixteen students along with teachers of Bhalchandra Institute of Education and Management, Dubagaa, Lucknow visited the experimental fields and different laboratories of ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture (CISH) at dated 31.10.2018 and interact with scientists to gain the information of different technology developed by institute.

Event Date:- 31-10-2018

राष्ट्रीय एकता दिवस

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ में दिनांक 31.10.2018 को पूर्वाहन 10 बजे भारत के भूतपूर्व गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय एकता दिवस की शपथ संस्थान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने निदेशक महोदय के नेतृत्व में ली। शपथ के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय एकता को फैलाने का भरसक प्रयास करने की बात दोहराई। इसके अलावा संस्थान के वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, संविदा कर्मियों और महिलाओं ने राष्ट्रीय एकता की दौड़ में हिस्सा लिया। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक, डॉ. शैलेन्द्र राजन ने सरदार वल्लभ भाई पटेल द्वारा दिये गये योगदान की चर्चा करते हुए उनकी भूरी-भूरी प्रशंसा की।

Event Date:- 31-10-2018

Refresher training programme on opportunities of value addition in horticulture

बागवानी उपज में मूल्यवर्धन के अवसर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम

भा.कृ.अनु.प.- केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा द्वारा तेलीबाग परिसर, लखनऊ, में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर एक्सटेंशंस मैनेजमेंट (मैनेज), हैदराबाद के द्वारा वित्तपोषित 4 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “बागवानी उपज में मूल्यवर्धन के अवसर" की दिनांक 22/10/2018 से 25/10/2018 का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न जगहों से प्रशिक्षु आये हुए थे। इस प्रशिक्षण के अंतर्गत प्रशिक्षुओ को बागवानी उपज में मूल्यवर्धन के विभिन्न उपायों पर गहन ज्ञान दिया गया।

The 4-day training programme on "Refresher training programme on opportunities of value addition in horticulture" was organized by ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Rahmaankhera, at their Telibaag campus, Lucknow, from 22/10/2018 to 25/10/2018. This training programme was funded by National Institute of Agricultural Extension Management (MANAGE), Hyderabad. In this programme, trainees come from different states of India. Under this training, intensive knowledge was given to the trainees on value addition in horticulture produce.

Event Date:- 25-10-2018

Workshop on Nutrismart Tribal Village

"पोषणवाद आदिवासी गांव" पर कार्यशाला

भा.कृ.अनु.प.- केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, के मालदा स्थित क्षेत्रीय केंद्र ने दिनांक 13/10/2018 को डॉलपुर श्री श्री ज्ञानानंद सरस्वती आश्रम, चटना, बांकुरा, पश्चिम बंगाल के सहयोग से "पोषणवाद आदिवासी गांव" पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पोषणवाद आदिवासी गांव की अवधारणा को बढ़ावा देना था और संसाधन गरीब गांवों की वांछित मांग को पूरा करने के लिए स्थानीय लोगों को केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (आम-अंबिका, अरुणिकांद) और अन्य संस्थानों की सब्जी किस्मों की उगाने के लिए प्रोत्साहित करना था। इस कार्यक्रम में 210 से अधिक किसानों ने भाग लिया था । कार्यक्रम की व्यवस्था सचिव, डॉलपुर श्री श्री ज्ञानानंद सरस्वती आश्रम ने की थी। इस अवसर पर गणमान्य अतिथि, श्री सुभाषिस बटाबाल (उपाध्यक्ष, बांकुरा जिला परिषद), उप निदेशक कृषि (प्रशासन), बांकुरा, परियोजना निदेशक (एटीएमए), बीएलआरडीओ, चटना भी उपस्थित थे और उन्होंने अपने अनुभव साझा करके कार्यशाला की सराहना भी की।

The regional centre of ICAR-Central Institute of Subtropical Horticulture, organized a workshop on 'Nutrismart Tribal Village' in collaboration with Shree Shree Gyanananda Saraswati Ashrama, Chatna, Bankura, West Bengal on 13/10/2018. The main aim of this workshop had to promote the concept of nutrismart tribal village and encourage the local people to grow the improved fruit varieties of CISH (Mango- Ambika, Arunikaand) and vegetable varieties of other institutes to fulfil the desired demand of resource poor villages. More than 210 farmers were attended the programme. The arrangement of the programme was made by Secretary, Dolpur Shree Shree Gyanananda Saraswati Ashrama. Dignitaries, Mr. Subhasis Batabyal (Vice Chairperson, Bankura Zilla Parishad), Deputy Director of Agriculture (Admn.), Bankura, Project Director (ATMA), BLRDO, Chatna had been also present on this occasion and graced the workshop by sharing own experiences.

Event Date:- 13-10-2018

Lecture on Sexual harassment of women at working place

कार्यस्थल पर महिलाओं की यौन उत्पीड़न विषय पर व्याख्यान

भा. कृ. अनु. प.- कें. उ. बा. सं. में दिनांक 12/10/2018 को बागवानी अपशिष्ट प्रबंधन पर डॉ. नीलिमा गर्ग,विभागाध्यक्ष, फसल तुड़ाई उपरांत प्रबंधन, द्वारा "कार्यस्थल पर महिलाओं की यौन उत्पीड़न" विषय पर व्याख्यान दिया गया। जिसमें संस्थान के सभी स्टाफ ने भाग लिया। इस व्याख्यान का मुख्य उद्देश्य यौन उत्पीड़न के विषय में भा. कृ. अनु. प.- कें. उ. बा. सं लखनऊ के कर्मचारियों को जागरूक करना था। डॉ. नीलिमा गर्ग ने महिला कर्मचारियों को किसी भी प्रकार का डर न होने और इस तरह के उत्पीड़न से संबंधित समस्याओं की रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए भारत सरकार द्वारा अधिनियमित सभी नियमों और कृत्यों पर चर्चा की तथा कार्यस्थल पर महिलाओं के उत्पीड़न से संबंधित घटनाओं से निपटने के लिए गठित संगठनो के बारे में चर्चा की।

A Lecture has been given by Dr. Neelima Garg, Head, Division of Postharvest Management on "Sexual harassment of women at working place" at ICAR-CISH, Rahmaankhera Lucknow Campus. All staff were participated in this extreme lecture. The main aim of this lectured was to aware the staff from sexual harassment. She specially encourage and motivated the female staff have not to feared and report the problems, if any unusual thing happen to her. She discussed all the rules and acts enacted by Government of India for protection of women at work place and also talk about the established complaints committee for receiving and solving of matter related to sexual harassment.

Event Date:- 12-10-2018

Model Training Course on Food and Nutritional security of farm women through horticulture based interventions

बागवानी आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से कृषि महिलाओं की खाद्य और पोषण सुरक्षा पर आदर्श प्रशिक्षण पाठ्यक्रम

Event Date:- 10-10-2018

Celebration of Rice day programme at regional centre of CISH, Malda

केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र में चावल दिवस कार्यक्रम का जश्न

भा.कृ.अनु.प.- केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, के मालदा स्थित क्षेत्रीय केंद्र ने जनजातीय उप-योजना कार्यक्रम के तहत मालदा के हबीबपुर ब्लॉक के श्यामदंगा गांव में दिनांक 10.10.2018 को चावल दिवस का आयोजन किया। डॉ दीपक नायक (वैज्ञानिक और प्रभारी, भा.कृ.अनु.प.- केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, आरआरएस, मालदा) उपर्युक्त कार्यक्रम का समन्वय किया और विकसित लघु अवधि वाली चावल की किस्म शभंगी की उत्पादन क्षमता का प्रदर्शन किया, जो कि बीज के लिए खेत में उगाया गया था। इस कार्यक्रम में 300 से अधिक किसानों ने भाग लिया था और शभंगी धान के प्रदर्शन से बहुत प्रभावित हुए थे। इस अवसर पर गणमान्य अतिथि, जिला विकास प्रबंधक, नाबार्ड, कृषि निदेशक (बीज प्रमाणन), मालदा, सहायक सहायक निदेशक, हबीबपुर ब्लॉक, श्री स्वप्न सेन (सेवानिवृत्त बैंक प्रबंधक) भी उपस्थित थे।

The regional centre of ICAR-Central Institute of Subtropical Horticulture, organized a rice day on 10.10.2018 at Shyamdanga village of Habibpur block, Malda under Tribal Sub-Plan Programme. Dr. Dipak Nayak (Scientist & In-charge, ICAR-CISH RRS, Malda) had co-ordinated the aforementioned programme and showcase the production potential of newly introduced short duration rice variety (Var. Sahabhagi), which was grown in field for seed production. More than 300 farmers were attended the programme and had very impressed from the performance of Sahabhagi dhan. Dignitaries, District Development Manager, NABARD, Assistant Director of Agriculture (Seed Certification), Malda, Assistant Director of Agriculture, Habibpur block, Mr. Swapan Sen (Retired bank manager) were also present on this occasion.

Event Date:- 10-10-2018

Agriculture Exhibition and Farmers Gosthi

कृषि प्रदर्शनी और किसान गोष्ठी

On the occasion of birth anniversary of Pt. Deen Dayal Uppadaya, ICAR-CIRG organized Agriculture Exhibition and Farmers Gosthi at his birth place, Fareh, Mathura. In this exhibition ICAR-CISH also participated and install the exhibition stall. the exhibition has been opened for general public at 06/10/2018 but their inauguration has been done on 07/10/2018 by our honourable minister for Agriculture & Farmers welfare, Govt. Of India, Shri Radhamohan Singh. During this event demonstration of different advance technology related to agriculture was observed by honourable minister. On the next day, Hon’ble Governor of Jharkhand, Smt. Dropadi Murmu was the Chief Guest of closing ceremony. More than 500 farmers interacted and benefitted from the information of advance technology of mango, guava, bael, aonla & jamun given by Scientist of CISH during the exhibition.

पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जन्मदिन के अवसर पर उनके स्मृति स्थल दीनदयाल धाम, फारेह, मथुरा में भा.कृ.अनु.प.- केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान द्वारा तीन दिवसीय (6-8 अक्टूबर ) कृषि प्रदर्शनी और किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमे भा.कृ.अनु.प.- केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ ने भी भाग लिया। कृषि प्रदर्शनी 06 अक्टूबर से जनता के लिए शुरू की गयी परन्तु इसका औपचारिक उद्घाटन माननीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री, श्री राधामोहन सिंह, भारत सरकार द्वारा दिनांक 07 अक्टूबर को किया गया। इस अवसर पर कृषि से सम्बंधित विभिन्न तकनीको का प्रदर्शन किया गया। जिसका अवलोकन कृषि मंत्री ने किया । प्रदर्शनी का समापन दिनांक 08/10/2018 को हुआ । जिसमे मुख्य अथिति के रूप में झारखण्ड की राज्यपाल उपस्थित थी। प्रदर्शनी में 500 से ज्यादा किसानो ने प्रदर्शनी स्टाल का अवलोकन किया और भा.कृ.अनु.प.- केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान द्वारा आम, अमरुद, बेल, जामुन, आदि से सम्बंधित उन्नत तकनीको की जानकारी से लाभान्वित हुए।

Event Date:- 08-10-2018

Training programme on Organic farming in horticulture crops

बागवानी फसलों की जैविक खेती पर प्रशिक्षण कार्यक्रम

भा.कृ.अनु.प.- केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा द्वारा तेलीबाग परिसर, लखनऊ, में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग, के द्वारा वित्तपोषित 4 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम" बागवानी फसलों की जैविक खेती" की दिनांक 03/10/2018 से 06/10/2018 का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, त्रिपुरा, चंडीगढ़ और नई दिल्ली से 30 प्रशिक्षु आये हुए थे। इस प्रशिक्षण के अंतर्गत प्रशिक्षुओ को जैविक खेती के विषय पर जानकारी दी गई।

The 4-day training programme on "Organic farming in horticulture crops" was organized by ICAR-Central Institute for subtropical Horticulture, Rahmaankhera, Lucknow, Uttar Pradesh from 03/10/2018 to 06/10/2018. Officers of Central Public Works Department attended the training. In this programme, 30 trainees had been come from different states of India including Maharashtra, Uttar Pradesh, Madhya Pradesh, Tamilnadu, Karnataka, Telangana, Andhra Pradesh, Maharashtra, Tripura, Chandigarh and New Delhi. Under this training, rigorous knowledge on various aspects of organic farming was imparted.

Event Date:- 06-10-2018

For Professional Excellence in Certified Farm Advisor of Fruits training programme started by ICAR-CISH, Lucknow

फलों के प्रमाणित फार्म सलाहकार मे पेशेवर उत्कृष्टता के लिए भा.कृ.अनु.प.- केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ, उत्तर प्रदेश द्वारा 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आरम्भ

भा.कृ.अनु.प.- केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ, में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर एक्सटेंशंस मैनेजमेंट (मैनेज), हैदराबाद के द्वारा वित्तपोषित 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “फलों के प्रमाणित फार्म सलाहकार” की दिनांक 03/10/2018 शुरुवात की गयी। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों महाराष्ट्र, हिमांचल प्रदेश, झारखण्ड, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, मिजोरम से प्रशिक्षु आये हुए है। इस प्रशिक्षण के अंतर्गत प्रशिक्षुओ को फलो के विषय में गहन ज्ञान दिया जायेगा और चयनित फसल से संबंधित नवीनतम तकनीकों को सिखाया जायेगा। कठोर प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, प्रशिक्षुओ को क्षेत्रीय स्तर की चुनौतियों का सामना करने के लिए एक वर्ष की अवधि तक संबंधित अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक को तकनीकी मार्गदर्शन के लिए आवंटित किया जाएगा और मैनेज द्वारा "प्रमाणित फार्म सलाहकार विशेषज्ञ" का प्रमाणपत्र दिया जायेगा एवं इसे वेबसाइट पर फलों के प्रमाणित फार्म सलाहकार विशेषज्ञो के रूप में सूचीबद्ध किया जायेगा।

The 15-day training programme on "Certified Farm Advisor of Fruit" has been started by ICAR-Central Institute for subtropical Horticulture, Rahmankhera, Lucknow, Uttar Pradesh on the date 03/10/2018. This training programme has been funded by National Institute of Agricultural Extension Management (MANAGE), Hyderabad. In this programme, trainees has been come from different states of India including Maharashtra, Himachal Pradesh, Jharkhand, Uttar Pradesh, Tamilnadu and Mizoram. Under this training, intensive knowledge will be given to the trainees and the latest techniques related to the selected crop will be taught. After completing of strict training, the trainees will be allocated for technical guidance of the concerned research institute for a period of one year to face regional level challenges. Apart from this, a certificate of "Certified Farm Advisory Expert" will be given by MANAGE and their name will be listed on the website as a Certified Farm Advisory Specialist.

Event Date:- 03-10-2018

महात्मा गाँधी की 150वी जयंती समारोह

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ के वैज्ञानिकों, तकनीकी अधिकारियों और कर्मचारियों ने महात्मा गाँधी की 150वी जयंती को दिनांक 02.10.2018 को बड़ी धूम-धाम से मनाया। इस समारोह में कनार गांव के राजकीय जूनियर हाईस्कूल के 50 बच्चो एवं उनके अध्यापको ने भी हिस्सा लिया । इस अवसर पर श्री कैलाश जी एवं उनकी टीम ने रामधुन और गाँधी जी के अन्य प्रियभजनो का भजन के द्वारा गायन किया। राजकीय जूनियर हाईस्कूल के बच्चो ने गाँधी जी के ऊपर लिखी अपनी कविताओं और गीतों का पाठ किया। डॉ. एस.के. शुक्ला प्रधान वैज्ञानिक ने गाँधी जी के जीवन सम्बन्धी घटनाओ का उल्लेख किया एवं उन पर रचित स्वरचित कविता का पाठ किया। तत्पश्चात डॉ. नीलिमा गर्ग, प्रभागाध्यक्ष, पीएचएम एवं अध्यक्ष संस्थान स्वच्छता समिति ने स्वच्छता पखवारे के दौरान संस्थान की स्वच्छता सम्बन्धी गतिविधियों की फिल्म का प्रदर्शन किया। संस्थान के निदेशक डॉ. शैलेन्द्र राजन ने गाँधी जी की जीवन दर्शन - सत्य, अहिंसा, स्व-अनुशासन, सकारात्मकता, आदि का संदर्भ लेते हुए संस्थान के सभी सदस्यों को जीवन में स्वच्छता अपनाने का सन्देश दिया। डॉ. एस.के. शुक्ला द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव दिया गया।

Event Date:- 02-10-2018

स्वच्छता ही सेवा रिपोर्ट (28.09.2018 से 01.10.2018)

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ के वैज्ञानिकों और तकनीकी अधिकारियों और कर्मचारियों ने दिनांक 28.09.2018 को स्वच्छता सेवा मिशन में सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रधान वैज्ञानिक डॉ० नीलिमा गर्ग के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम ने रसूलपुर, दुगोली, टिकैतगंज और सन्यासीबाग गांव का दौरा किया। सन्यासीबाग में राजकीय जूनियर हाईस्कूल एवं रसूलपुर की प्राथमिक पाठशाला के बच्चो को बेहतर स्वच्छता सम्बन्धी नियमो के विषय में जागरूक किया। बच्चो को शौचालय की महत्तवता, हाथ धोने,एवं वयक्तिगत तथा आस-पास की स्वच्छता के विषय में बताया गया। स्कूल में स्वच्छता जागरूकता रैली भी निकली गयी तथा स्वच्छता से सम्बन्धित पोस्टर लगाए गए। संस्थान की टीम ने रसूलपुर, दुगोली, टिकैतगंज गांव की गलियों की सफाई की तथा गांव के लोगो के घर-घर जाकर कूड़ा-प्रबंधन के विषय में जागरूक किया। गांव वालो को संस्थान की वैज्ञानिक समूह द्वारा जैव-अपशिष्ट को प्लास्टिक कचरे से अलग करने का प्रदर्शन किया गया तथा जैव-अपशिष्ट से जैविक खाद बनाने के विषय में बताया गया।

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ के वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने दिनांक 29.09.2018 संस्थान की सफाई में सक्रिय रूप से भाग लिया। संस्थान के प्रथम एवं द्वितीय खंडो को सफाई के लिए चिन्हित किया गया और सुबह 10 से 12 बजे तक सफाई की गयी। इसके अलावा संस्थान के आवासीय परिसर में रहने वाले वैज्ञानिकों और तकनीकी अधिकारियों और कर्मचारियों ने आवासीय परिसर के उगे घास-फूस को उखाड़ा एवं उसकी सफाई की।

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ के वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने दिनांक 01.10.2018 संस्थान की सफाई में सक्रिय रूप से भाग लिया। संस्थान के निदेशक की अगुआई में वैज्ञानिकों के एक दल ने कनार गांव में स्थित विद्यास्थलीय स्टडी हाल इण्टर कॉलेज का दौरा किया। वहां पर संस्थान के सहयोग से स्वच्छता से सम्बन्धित नुक्कड़-नाटक का आयोजन किया। स्वच्छता पर आधारित भित्ति चित्रण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। जिसमे विद्यालय के छात्रों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। विद्यालयो द्वारा स्वच्छता जागरूकता रैली भी निकली गयी। संस्थान के निदेशक महोदय ने स्वच्छता से सम्बन्धित विषय पर स्वच्छता को जागरूक किया।

Event Date:- 01-10-2018

स्वच्छता ही सेवा रिपोर्ट (25.09.2018 से 27.09.2018)

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ के वैज्ञानिकों और तकनीकी अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्वच्छता सेवा अभियान में सक्रिय रूप से भाग लिया। दिनांक 25.09.2018 को, संस्थान परिसर में स्वच्छता के लिए दो क्षेत्रों को चिन्हित किया गया और उस क्षेत्र को साफ किया गया। संस्थान की सीमा दीवार के चारों ओर एक सौ मीटर क्षेत्र को साफ किया गया। इसके अलावा डॉ० नीलिमा गर्ग के नेतृत्व में पीएचएम विभाग के पीछे का क्षेत्र साफ किया गया। प्रधान वैज्ञानिक डॉ० ए. के. सिंह के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम ने , कनार, महमूदनगर और नईबस्ती का भमण किया और वहाँ के लोगों को स्वच्छता सेवा मिशन के बारे में जागरूक किया ताकि उन क्षेत्रों को साफ किया जा सके। इस स्वच्छता मिशन में गांव के किसान, महिलाएं, बच्चे आदि ने सक्रिय रूप से भाग लिया और स्वच्छता सेवा अभियान से सम्बंधित तीन पोस्टरो को स्कूल तथा अन्य क्षेत्रों की दीवारों पर लगाया गया। इस मिशन में गांव के लगभग 260 पुरुष, महिलाएं और बच्चों ने भाग लिया। प्रधान वैज्ञानिक डॉ० एस के शुक्ला के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम ने ग्राही, रहमानखेड़ाऔर घनश्यामपुर गांवों का दौरा किया और स्वच्छता के बारे में जागरूकता फैलायी। इस मिशन के अंतर्गत लगभग 75 लोगों को जागरूक किया गया।

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ के वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने 26.09.2018 को स्वच्छता ही सेवा 2018 के तहत सुबह की नियमित सफाई अभियान में सक्रिय रूप से भाग लिया। डॉ० वी के सिंह के नेतृत्व में मेरा गाँव मेरा गौरव कार्यक्रम के अन्तर्गत दो गाँव मोहिद्दीनपुर एवं सैदपुर महेरी के दो विद्यालयों के छात्र-छात्राओं तथा शिक्षकों में स्वच्छता के बारे में जागरूकता फैलायी। पहले सैदपुर महेरी(मोहिद्दीनपुर), काकोरी के प्राथमिक विद्यालय के छात्रों को एक जगह एकत्रित करके भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा स्वच्छता अभियान के बारे में अवगत कराया। डॉ० वी.के. सिंह व डॉ० के.के. श्रीवास्तव ने छात्रों को स्वच्छता की शपथ दिलाई और साथ में व्यक्तिगत एवं सार्वजनिक स्वच्छता बनाए रखने के बारे में बताया। छात्रों एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक विद्यालय प्रांगण में सफाई अभियान में भाग लिया। फिर वैज्ञानिकों ने सैदपुर महेरी गाँव के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में जाकर भी छात्रों एवं शिक्षकों को स्वच्छता की शपथ दिलायी एवं विद्यालय प्रांगण में सफाई अभियान में भाग लिया। इस स्वच्छता अभियान में 78 लोगों ने भाग लिया और स्वच्छता सेवा अभियान से सम्बंधित पोस्टरो को स्कूल तथा आसपास के क्षेत्रों की दीवारों पर लगाया गया।

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ के वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने 27.09.2018 को स्वच्छता ही सेवा मिशन में सक्रिय रूप से भाग लिया और संस्थान के लॉन और आसपास के क्षेत्रों को साफ किया। संस्थान के फार्मर फर्स्ट परियोजना से संबंधित वैज्ञानिकों ने दिनांक 27.09.2018 को स्वर्ण जयंती मोंटेसरी स्कूल, नबी पानह, मालिहाबाद, लखनऊ में स्वच्छता ही सेवा दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया। डॉ० मनीष मिश्रा के नेतृत्व में पांच वैज्ञानिक, तकनीकी और सहायक कर्मचारियों ने स्कूल के बच्चों के साथ सफाई अभियान का आयोजन किया। संस्थान के वैज्ञानिकों ने बच्चों के साथ बातचीत की और उन्हें व्यक्तिगत स्वच्छता, गांव स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में सिखाया। बच्चो में स्वच्छता के बारे में जागरूकता का आकलन करने के लिए एक स्वच्छता प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। जिसमे छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। संस्थान की वैज्ञानिक समूह ने बायो-डीग्रेडेबल और गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे को इकट्ठा करने के तरीके के रूप को प्रदर्शित किया। इस मिशन में 114 लोगों को जागरूक किया गया।

Event Date:- 29-09-2018

स्वच्छता ही सेवा रिपोर्ट 2018

संस्थान के वैज्ञानिकों ने दिनांक 19.09.2018 को स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम में एकत्र होकर स्वच्छता के नानाविध आयामों पर परिचर्चा की। इसके पश्चात प्रशासनिक खण्ड से सटे क्षेत्रों में साफ-सफाई की। साथ ही डॉ. राम अवध राम के मार्ग दर्शन में वैज्ञानिकों ने वर्मी कंपोस्ट बनाकर बाहर से आये लोगों को इसकी जानकारी दी।

दिनांक 20.09.2018 को संस्थान द्वारा अपशिष्ट प्रबंधन पर एक व्याख्यान आयोजित किया। इस अवसर पर संस्थान की ओर से डॉ. नीलिमा गर्ग, अध्यक्ष, तुड़ाई उपरांत प्रबंधन प्रभाग द्वारा फलों एवं सब्जियों के अवशेषों से कैसे अवशिष्ट प्रबंधन करें की जानकारी दी गयी। इसके अलावा संस्थान के ही प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राम अवध राम ने कृषि अवशेषों से अवशिष्ट प्रबंधन पर व्याख्या की।

दिनांक 22.09.2018 को संस्थान के वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों ने पूर्वाहन 10ः30 बजे एकत्र होकर स्वच्छता के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की तथा संस्थान के ही प्रांगण में अनेक अवांछित पौधों, घास, गाजर घास आदि का उन्मूलन किया। इसके पश्चात वैज्ञानिकों का एक दल मलिहाबाद स्थित गाँव में जाकर स्वच्छता से संबंधित जागरूकता पैदा की।

दिनांक 24.09.2018 को संस्थान के वैज्ञानिकों ने प्रातः 10 बजे संस्थान के पोर्टिको में एकत्र होकर स्वच्छता के अनेक पहलूओं पर चर्चा की तत्पश्चात् संस्थान के वैज्ञानिकों के दल ने संस्थान के पास के लडौसी एवं बेेलगड़ा नामक ग्रामों का भ्रमण कर वहाँ के निवासियों में जागरूकता पैदा की। साथ ही दोनों गाँवों में स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिये फलों के पेड़ लगाये गये तथा स्कूल के बच्चों में जागरूकता पैदा की।

Event Date:- 24-09-2018

Students visit CISH for value-added course

मूल्य वर्धित पाठ्यक्रम के लिए छात्रों का भा.कृ.अनु.प.-कें.उ.बा.सं. का भ्रमण

श्री रामस्वरुप मेमोरियल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के बायो-साइंसेज और इंजीनियरिंग विभाग के ८० छात्रों ने दिनांक २२.०८.२०१८ को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के दिशा-निर्देशानुसार कृषि संबंध मूल्य वर्धित पाठ्यक्रम का अनुपालन में भा.कृ.अनु.प.- कें.उ.बा.सं. का भ्रमण किया। संस्थान में आये हुए सभी छात्रों एवं प्राध्यापकों ने संस्थान की विभिन्न शोध इकाइयों जैसे जीन बैंक, पॉली-हाउस,टपक सिंचाई,मल्चिंग,सब्जियों के प्रसंस्करण और मूल्यवर्धित उत्पादों के उत्पादन के लिए आवश्यक मशीनरी से लाभवान्वित हुए। डा० शैलेन्द्र राजन, निदेशक- कें.उ.बा.सं. ने संस्थान के अनुसंधान और विकास की गतिविधियों पर एक व्याख्यान भी दिया।

Eighty students from the Institute of Bio-sciences and Technology, Shri Ramswaroop Memorial University, Lucknow visited ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Lucknow to attend a value added course on sustainable agriculture in compliance with the Uni-versity Grants Commission (UGC) guidelines. The students benefitted with various institutional facilities such as gene bank, poly-house, drip irrigation, mulching, training, vegetables processing and value-added products related to fruit and vegetables crops. Dr. Shailendra Rajan, Director-CISH gave a brief introduction on the research and development activities of the Institute.

Event Date:- 22-09-2018

Workshop on Bio-waste management

जैव-अपशिष्ट प्रबंधन पर कार्यशाला

भा.कृ.अनु.प.- कें.उ.बा.सं., लखनऊ में दिनांक २०/०८/२०१८ को बागवानी अपशिष्ट प्रबंधन पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें संस्थान एवं भा. कृ. अनु. प.- राष्ट्रीय कृषि मतस्य अनुसन्धान ब्यूरो के वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विभिन्न तरीकों द्वारा बागवानी, मंडियों, किसानों के खेतों और प्रसंस्करण कारखानों से प्राप्त अवशेष को मूल्यवर्धित उत्पादों में कैसे परिवर्तित किया जा सके, चर्चा करना था। इस अवसर पर श्रीमती नीलिमा गर्ग, विभागाध्यक्ष, फसल तुड़ाई उपरांत प्रबंधन ने "सूक्ष्मजीवो के प्रयोग द्वारा बागवानी अपशिष्ट का प्रबंधन" विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि कचरो में उपस्थित कार्बनिक घटक जैसे सेलूलोज़, स्टार्च, पेक्टिन, विटामिन, खनिजों आदि की प्रचुरता होती है और वर्तमान में बागवानी अवशेषों और प्रसंस्करण द्वारा उत्पन्न अपशिष्ट के कुशल प्रबंधन के लिए कोई उचित प्रबंधन प्रणाली उपलब्ध नहीं है। इसको प्रबंधन करने का एक तरीका यह भी है कि इस अपशिष्ट को सूक्ष्मजीवो के प्रयोग द्वारा उपयोगी चीजे जैसे कि आहार संबंधी फाइबर, इथेनॉल, टार्ट्रेट्स, रंगद्रव्य, बीज तेल और प्रोटीन, खाद्य, फ़ीड, कार्यात्मक खाद्य पदार्थ, कॉस्मेटिक उत्पाद, वर्मीकंपोस्ट इत्यादि जैसे मूल्यवर्धित पदार्थो का उत्पादन कर सकते है। इस तरह कचरे के उपयोग से न केवल आवश्यक उत्पाद तैयार होंगे बल्कि प्रदूषण स्तर भी कम होगा। डा० राम अवध राम, प्रधान वैज्ञानिक ने "भारत में फसल और नगरपालिका से प्राप्त अपशिष्ट प्रबंधन के समाधान" पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष किसानो के लिए बहुत उपयोगी हो सकते है । इन अवशेषों को ग्रामीण घरेलू उपयोग के लिए जैसे कि ईंधन, खाद, पशुओ के चारे के आदि के रूप में उपयोग करते है। हालांकि, इन अवशेषों का एक बड़ा हिस्सा फसल तुड़ाई उपरांत मैदान में जला दिया जाता है।

ICAR-Central Institute of Subtropical Horticulture organised a workshop on horticulture waste management which was attended by its scientists and those of National Bureau for Fish Genetic Resources, Lucknow on 20.9.2018 with an objective to brainstorm on different ways by which the horticulture produce residue from mandis, households, farmers’ fields and processing factories can be converted into value-added products. Dr. Neelima Garg, head, Division of Postharvest Management delivered a talk on ‘Horticultural waste management by microbial interventions’. She emphasised that these wastes were very rich in organic constituents like cellulose, starch, pectin, vitamins, minerals etc and posed serious health hazards due to high biological oxygen demand (BOD) and led to environmental pollution. Presently there is no appropriate waste management system for the efficient management of huge waste generated by horticultural residues and processing waste. One way of managing the situation is to reduce the losses and to utilise the available material for producing value-added products such as dietary fibre, ethanol, tartarates, pigments, seed oil and protein, food, feed, functional foods, cosmetic products, vermin-compost etc. through microbial interventions and fermentation. The utilisation of wastes will not only economise the cost of finished products but also reduce the pollution level. Similarly, Crop residues are natural resources with tremendous value to farmers. These residues are used as animal feed, composting, thatching for rural homes and fuel for domestic and industrial use. Dr. Ram Avadh Ram, Pr. Scientist also delivered a talk on ‘Viable solutions to crop and municipal solid waste management in India’ on this occasion. He said that crop residues were natural resources with tremendous value to the farmers. However, a large portion of these residues is burned in field after the harvest of the crop.

Event Date:- 20-09-2018

Tribute on the first monthly death anniversary of Bharat Ratna late Sh. Atal Bihari Vajpayee Ji

पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपई जी की याद में

परिषद से प्राप्त परिपत्र के अनुपालन में भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ में दिनांक 16.09.2018 को भारत के भूवपूर्व देदीप्यमान प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेई जी के देहावसान को हुये एक महीना होने पर वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा कविता पाठ किया गया। संस्थान की ओर से इस कार्यक्रम का संचालन श्री धीरज शर्मा, सहायक निदेशक (राजभाषा) द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. सुशील कुमार शुक्ल, प्रधान वैज्ञानिक, श्री धीरज शर्मा, सहायक निदेशक (राजभाषा), श्री सुमित कुमार सोनी, तकनीशियन तथा श्री दीपक कुमार ने बाजपेई जी की कविता “उजीयारे में अंधकार में”, “कौरव कौन-कौन पाण्डव”, “क्षमा करो बापू तुम हमको” तथा “गीत नया गाता हूँ” का पाठ किया। इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. शैलेन्द्र राजन, निदेशक ने की|

Event Date:- 16-09-2018

Officers group of Seven States Learned Entrepreneurship

Doubling farmers’ income requires entrepreneurship development and enhancing employment opportunities from horticulture sector. In this background, ICAR-CISH, Lucknow organized a Model Training Course on “Entrepreneurship Development through Market Driven Production and Processing of Horticultural Crops” during 10-17th September, 2018. The training was sponsored by Ministry of Agriculture & Farmers Welfare, Government of India. District horticulture officers/ rural development officers/ extension personnels from seven different states viz., Uttar Pradesh, Uttarakhand, Bihar, Chattisgarh, Odisha, Rajasthan and Madhya Pradesh participated in the training program. The officers were aged from 30-59 years with about 20 per cent women participants. They were trained on entrepreneurial ecosystem, start ups, nursery, floriculture based enterprises, orchard based poultry farming, market driven production of exotic fruits in subtropics viz. strawberry and pepino, processing of fruits and vegetables, herbal cosmetics, essential oil extraction, hydroponics cultivation of vegetables, mushroom production, organic farming, inspection and certification of organic produce, FSSAI registration, protected cultivation, bio fertilizer production, packaging, branding, food safety laws, dry flower technology etc. Lecture session experts were drawn from ICAR, CSIR, IIT, SAU and Corporate Sector. The officers also interacted with progressive farmers and new entrepreneurs who have made their name in horticulture. They were taken on exposure visits of nursery, CISH experimental farms and Farmer FIRST program adopted villages. This training course included pre- and post-feedback evaluation and validation. The training course has given an insight of start ups and entrepreneurship to the horticulture officers which was very handy and could easily be implemented in their areas of operation. Dr. Rajan, Director ICAR-CISH, Lucknow informed that Government of India has sanctioned three Model Training Courses to the Institute this year. Two more MTCs will be organized in the Institute soon. Course Director, Dr. Maneesh Mishra informed that a WhatsApp Group of MTC participants has also been created to exchange technological advancements with each other.

Event Date:- 10-09-2018

Fruit fly management through rain sustainable pheromone traps developed by CISH

फल मक्खियों के प्रकोप से बारिश के मौसम में आकर्षक दिखने वाले फल और सब्जियां मैगट (सूंडियों) से भरी हो सकती हैं। बाहर से देखने पर इनकी उपस्थिति ज्ञात नहीं हो पाती है और काटने के बाद भी धोखा हो सकता है। अतः जरुरी है कि हर कोई इनको पहचाने और खाने से पहले गौर से देख कर इनकी अनुपस्थिति सुनिश्चित कर ले। मादा फल मक्खियां विकसित हो रहे सब्ज़ियों और फलों में अंडे देती हैं, जो एक सप्ताह के भीतर मैगट्स के रूप में विकसित हो जाते हैं और गूदे को खाते हैं। प्रारम्भ में इनकी उपस्थिति पहचानना कठिन होता है। यह गूदे से मिलते जुलते सफ़ेद या मटमैले रंग की होती हैं। अधिक संख्या होने पर गूदे में सड़न हो जाती हैं और फल ख़राब होकर गिर जाता है। प्रभावित फल और सब्जियां खाने के लिए अनुपयुक्त हो जाती हैं। बरसात के मौसम में इस तरह की क्षति बहुत अधिक होती है जो कि किसानों को भारी नुकसान पहुंचाती है। फलों के मक्खियों के गंभीर प्रकोप के कारण आम की देर से पकने वाली प्रजातियों, अमरुद की बरसात की फसल और सब्जी फसलों को अधिक हानि पहुंचती है। यदि समय पर उचित हस्तक्षेप नहीं किया जाता है तो बरसात के मौसम में लगभग 80 प्रतिशत फल क्षतिग्रस्त हो जाते हैं ।

कीट के महत्व को ध्यान में रखते हुए, प्रभावी फल मक्खी फेरोमोन ट्रैप विकसित किए गए हैं। ये फेरोमोन ट्रैप नर मक्खियों को आकर्षित करते हैं और इससे मादा मक्खियों द्वारा उत्पन्न होने वाले अण्डों के निषेचन में व्यवधान होता है। फल मक्खियों के प्रबंधन के लिए बाजार में विभिन्न प्रकार के ट्रैप उपलब्ध हैं जो कि या तो महंगे हैं या सस्ते लेकिन बरसात के मौसम के अनुरूप तकनीकी रूप से ठीक नहीं हैं। जुलाई महीने के दौरान उत्तरी भारत में भारी बारिश होती है। बारिश के कारण फल मक्खी ट्रैप में जल के प्रवेश से गुटके डूब जाते हैं और जल्द ही अप्रभावी हो जाते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, आईसीएआर-केंद्रीय उपोषण बागवानी संस्थान, लखनऊ ने दोषों को दूर करने के लिए ट्रैप का एक प्रभावी डिजाइन विकसित किया। संशोधित ट्रैप में गर्दन पर दोनों तरफ से मक्खी के प्रवेश छेद को विशेष फ्लैप बरसात के मौसम के दौरान पानी के प्रवेश को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। यह डिजाइन प्रभावी है और बारिश के पानी से गुटके की रक्षा करता है। बाजार में अन्य मौजूदा ट्रैप डिजाइनों की तुलना में यह सस्ता एवं प्रभावी है। फल मक्खियों के भारी प्रकोप के चलते बारिश के मौसम में अमरूद के अच्छे फलों की फसल कम होती है। यदि यह ट्रैप सही समय पर लगाया जाता है तो बरसात के मौसम में भी अमरूद की फसल कम प्रभावित होती है। किसानों के लिए उनकी आवश्यकता के अनुसार समय पर ट्रैप हर जगह उपलब्ध होना कठिन रहता है। अतः आईसीएआर-सीआईएसएच ने संस्थान से और डाक के द्वारा मामूली कीमत पर किसानों को ट्रैप की आपूर्ति करने के लिए सुविधा प्रदान की है। फल मक्खियों से फसल को बचाने के लिए इच्छुक किसान इस ट्रैप का लाभ उठा सकते हैं।

ट्रैप खरीदने के लिए, कृपया निदेशक को ई-मेल: nursery.cish@gmail.com या पोस्ट से पत्र भेजें।

पता: निदेशक, आईसीएआर-सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर, रहमानखेड़ा, पोस्ट : काकोरी, लखनऊ-226 101

एनईएफटी / आरटीजीएस के माध्यम से खाते में भुगतान किया जा सकता है :

खाता धारक : आईसीएआर-यूनिट-सीआईएसएच, लखनऊ

खाता क्रमांक। 1153012101000034, आईएफएससी कोड : PUNB0619500

प्रति 5 ट्रैप कीमत : ₹ 65×5 = ₹ 325/- + डाक व्यय (दूरी के अनुसार)

Fruits and vegetables may be full of maggots during rainy season due to infestation by the fruit flies. Female fruit flies lays eggs in the young vegetables and fruits, which hatches as maggots within a week and the young ones continues to feed on pulp. As result of which fruit starts decay and drop down. The affected fruits and vegetables become unfit for consumption. Such damage is very high during rainy season which cause enormous losses to farmers. Severe incidence of fruit flies has been observed in late season varieties of the mango, rainy season crop of the guava and many vegetable crops. It has been estimated that approximately 80 per cent of late season mango fruits get damaged by fruit flies if the timely appropriate intervention is not taken.

Keeping the importance of the pest, effective fruit fly pheromone traps have been developed. These pheromone traps attracts the male flies and there by its mating disruption is achieved. Different types of traps are available in the market for the management of fruit flies. The existing traps available in the market are either costlier or cheaper but not technically sound to suit the local conditions. In northern plains mango season will be there upto last week of July. During July month Northern India receive heavy rains. Due to rains water will enters into the fruit fly trap, lures are getting drowned and lose its viability soon. Keeping this in view, ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Lucknow developed a cost effective design of fruit fly trap to overcome technical drawbacks. Modified trap is having peculiar feature with entry holes made at both the sides at the neck and also the flap along the edge of cap top are designed in such a way to minimize the entry of water during rainy season. The design is effective and protects the lure from drowning in to the rain water. It is cost effective when compared to other existing trap designs in the market. These traps are economical, effective and suitable for efficient management of fruit flies infesting mango, guava and vegetable crops especially during rainy season. Due to heavy infestation of fruit flies in guava farmers are not taking the rainy season guava crop. If this trap installed timely good crop of guava can be grown even under rainy season also. It is difficult for farmers to procure ready to hang traps and lures as per their requirement on time. Therefore, ‘ICAR – CISH has developed a system to supply the traps to farmers at nominal price from Institute and even by post. The interested farmers can take the benefit of this trap to save the crop from fruit flies.

To procure traps, may please send letter through E-mail: nursery.cish@gmail.com or by post to the Director, ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Rehmankhera, PO: Kakori, Lucknow – 226 101.

Payment can be made through NEFT/RTGS to the Account: ICAR-UNIT-CISH, Lucknow

Account no. 1153012101000034, IFSC code: PUNB0619500.

Price per 5 traps:Rs.65x5=Rs.325/- + postal charges (as per distance).

Event Date:- 05-09-2018

प्रक्षेत्र अनुभव प्रशिक्षण

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के 6 वैज्ञानिक अपने 21 दिवसीय प्रक्षेत्र अनुभव प्रशिक्षण के लिए केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान रेहमानखेड़ा लखनऊ पहुंचे हैI छः सदस्यीय टीम में डॉ. देवीदीन यादव, अर्चना सान्याल, डॉ. प्रियंका खाती, संतोष कुमार, डॉ. अब्दुल रहीम और सुनील सुनानी ने संस्थान के सहयोग से 10 सितम्बर तक नबी पनाह गॉंव में कृषि एवं पशुओं के समस्याओं पर अध्ययन किया, इसके साथ ही पूरी टीम गॉंव की सामाजिक, आर्थिक, कृषि उपकरणों तथा खाद्य प्रसंस्करण इकाई का अध्ययन एवं औलोकन किया I दिनाँक 04 /09 /2018 को टीम के वैज्ञानिकों ने केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान एवं राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंध अकादमी, हैदराबाद के सहायता से कृषक परिसंवाद का आयोजन नबी पनाह गॉंव में किया I इस अवसर पर राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंध अकादमी के प्रधान वैज्ञानिक वी. के. जी. राव और केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के निदेशक डॉ. शैलेन्द्र राजन, प्रधान वैज्ञानिक, डॉ.मनीष मिश्रा मुख्य अन्वेषक फार्मर फर्स्ट परियोजना, डॉ.राम अवध राम और गांव के किसानो ने मिलकर गॉंव का सामाजिक, भौगोलिक मानचित्र बनाकर गॉंव की सामाजिक, आर्थिक और कृषि समस्याओं पर चर्चा की साथ ही उनसे निपटने के उपाय भी बताये।

Event Date:- 04-09-2018

ICAR- Central Institute for Subtropical Horticulture invites application for Agri-Clinic and Agri-Business Centre Scheme

भा.कृ.अनु.प.-के.ऊ.बा.सं. रहमानखेड़ा, लखनऊ, उत्तर प्रदेश द्वारा कृषि क्लिनिक और कृषि व्यापार केंद्र योजना के लिए दो महीने की निशुल्क प्रशिक्षण हेतु आवेदन पत्र का आमंत्रण

नाबार्ड के सहयोग से कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने पूरे देश में प्रत्येक किसान को खेती के बेहतर तरीके से अवगत कराने के लिए एक अनूठा कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि स्नातक के बड़े पूल में उपलब्ध विशेषज्ञता को टैप करना है। भले ही आप एक नए स्नातक हैं या नहीं, या आप वर्तमान में नियोजित हैं या नहीं, आप अपना खुद का कृषि क्लिनिक या एग्री बिजनेस सेंटर स्थापित कर सकते हैं और असंख्य किसानों को व्यावसायिक विस्तार सेवाएं प्रदान कर सकते हैं। इस कार्यक्रम के लिए प्रतिबद्ध सरकार अब कृषि में स्नातक, या बागवानी, रेशम कीट पालन, पशु चिकित्सा विज्ञान, वानिकी, डेयरी, कुक्कुट पालन, और मत्स्य पालन आदि जैसे कृषि से जुड़े किसी भी विषय को प्रशिक्षण प्रदान कर रही है। प्रशिक्षण पूरा करने वाले लोग उद्यम के लिए विशेष स्टार्ट-अप ऋण के लिए आवेदन कर सकते हैं। किसानों के लिए परामर्शदाता बनकर पैसा और प्रतिष्ठा कमाएं। कृषि व्यवसाय केंद्र कृषि उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने के लिए भुगतान सेवाएं प्रदान करेंगे। केंद्रों को किसानों को फसल चयन, सर्वोत्तम कृषि प्रथाओं, फसल-फसल के मूल्यवर्धित विकल्पों, महत्वपूर्ण कृषि सूचनाओं (यहां तक कि इंटरनेट आधारित मौसम पूर्वानुमान सहित), मूल्य प्रवृत्तियों, बाजार समाचार, जोखिम शमन और फसल बीमा, क्रेडिट और इनपुट पहुंच, साथ ही साथ महत्वपूर्ण स्वच्छता और फाइटो-सेनेटरी विचार, जिन्हें किसानों को ध्यान में रखना है। इस देशव्यापी पहल द्वारा कृषि क्लिनिक या कृषि व्यापार केंद्र स्थापित करने के लिए नि: शुल्क प्रशिक्षण एवम इस तरह के केंद्र की स्थापना में रुचि रखने वाले कृषि स्नातकों को विशेष प्रशिक्षण मुफ्त में मुहैया कराया जा रहा है, देश भर में चुनिंदा संस्थानों द्वारा 2 महीने का प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पेश किया जाएगा। पाठ्यक्रम में उद्यमिता और व्यापार प्रबंधन, साथ ही गतिविधि के आपके चुने हुए क्षेत्रों में कौशल सुधार मॉड्यूल शामिल हैं। कृषि क्लिनिक या कृषि व्यापार केंद्र के लिए उपलब्ध बैंक ऋण सब्सिडी के लिए परियोजना लागत 20 लाख रुपये कर दिया गया है (बेहद सफल व्यक्तिगत परियोजनाओं के मामले में 25 लाख) और समूह परियोजना के लिए 100 लाख रुपये। इस निशुल्क प्रशिक्षण में सम्मिलित होने हेतु ऑनलाइन आवेदन MANAGE की वेबसाइट लिंक https://acabcmis.gov.in/ApplicantReg.aspx पर कर सकते हैं जो की पूर्णतया निशुल्क है. उम्मीदवारों के चयन के पश्चात दो महीने की प्रशिक्षण भी निशुल्क दिया जायेगा. प्रशिक्षण ढहरने एवं खाने का इंतज़ाम भी भा.कृ.अनु.प.- के. ऊ. बा. सं. रहमानखेड़ा, लखनऊ, उत्तर प्रदेश द्वारा किया जायेगा.

आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 सितंबर, 2018 है।

संपर्क करें

कृषि क्लिनिक और कृषि बिजनेस ट्रेनिंग सेंटर (एसी और एबीसी) लखनऊ

भा.कृ.अनु.प.- केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान,रायबरेली रोड कैंपस,

बड़ी लालकुर्ती बाजार, तेलबाग, पोस्ट -दिलकुशा, लखनऊ -226002 (ऊ प्र)

संपर्क: ईमेल-, cish.lucknow@gmail.com cishmanage@gmail.com

+91 9140228806 (मो) 0522- 2841022-24 (O), 0522-2841025 (fax)

The Ministry of Agriculture and farmers welfare, Government of India, in association with NABARD has launched a unique programme to take better methods of farming to each and every farmer across the country. This programme aims to tap the expertise available in the large pool of Agriculture Graduates. Irrespective of whether you are a fresh graduate or not, or whether you are currently employed or not, you can set up your own Agri-Clinic or Agri-Business Centre and offer professional extension services to innumerable farmers. Committed to this programme, the Government is now also providing start-up training to graduates in Agriculture, or any subject allied to Agriculture like Horticulture, Sericulture, Veterinary Sciences, Forestry, Dairy, Poultry Farming, and Fisheries, etc. Those completing the training can apply for special start-up loans for venture. Agribusiness Centres would provide paid services for enhancement of agriculture production and income of farmers. Centres would need to advice farmers on crop selection, best farm practices, post-harvest value-added options, key agricultural information (including perhaps even Internet-based weather forecast), price trends, market news, risk mitigation and crop insurance, credit and input access, as well as critical sanitary and phyto-sanitary considerations, which the farmers have to keep in mind. As an integral part of this nationwide initiative, specialised training will be provided to Agriculture Graduates interested in setting up such a centre. Being provided free of cost, the two months training course will be offered by select institutes across the country. Initiated by SFAC, and co-ordinated by MANAGE, the course comprises Entrepreneurship and Business Management, as well as skill improvement modules in your chosen areas of activity. Ceiling of project cost for subsidy has been enhanced to Rs.20 lakhs for an individual project (25 lakhs in case of extremely successful individual projects) and to Rs.100 lakhs for a group project. In order to join this totally free training, the online application can be made on MANAGE website link https://acabcmis.gov.in/ApplicantReg.aspx. After the selection of candidates, two months of residential training will provided to the candidates.

Last date of application is September 20, 2018.

Contact us at:

Agri Clinic & Agri Business Training Center (AC & ABC) Lucknow

ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture (CISH), Raebareli Road Campus,

Bari Lalkurti Bazar,Telibagh, P.O.-Dilkusha, Lucknow-226002 (U.P.)

Contact: Email- cish.lucknow@gmail.com cishmanage@gmail.com,

+91 9140228806 (M) 0522- 2841022-24(O), 0522-2841025 (F)

Event Date:- 30-08-2018

Horti-Entrepreneurship Workshop on Green House, Nursery, Tissue Culture and Value Addition 18-08-2018

ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture in collaboration with Society for Development of Subtropical Horticulture, Lucknow will organize a Horti-Entrepreneurship Workshop on 18-08-2018 at ICAR-CISH, Rehmankhera, Lucknow. Horticultural technologies such as protected cultivation of high value horticultural crops, nursery, tissue culture and value addition could play a major role in developing entrepreneurship in India. The workshop will bring in policy makers, bankers, research institutions, private players and potential entrepreneurs under one platform to promote Horti-Food Processing Entrepreneurship in the country. Any citizen of India who is willing to develop Horti-Entrepreneurship can register online. A total number of 100 candidates will be selected on first cum first serve basis. Successful candidates will be informed subsequently.

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Traffic stats

Event Date:- 18-08-2018

CISH coaches young horti-entrepreneurs

भा.कृ.अनु.प.-के.उ.बा.सं में दिनांक 18.08.2018 को नर्सरी, संरक्षित खेती, मूल्यवर्धन, जैविक खेती और ऊतक संस्कृति पर होर्टी-उद्यमिता कार्यशाला का आयोजन किया गया। देश के युवाओं हेतु नौकरी के अवसर पैदा करने के लिए बागवानी क्षेत्र तीव्रगति से उभर रहा है। पिछले दो वर्षों में बागवानी आधारित उद्यमशीलता के लिए बड़ी संख्या में युवाओं ने के.उ.बा.सं, लखनऊ से संपर्क किया। ग्रामीण और शहरी युवाओं के बीच बढ़ती दिलचस्पी ने के.उ.बा.सं को इस कार्यशाला को आयोजित करने के लिए प्रेरित किया जो न केवल स्टार्टअप और उद्यमिता की मूल बातें बताता है बल्कि विशिष्ट बागवानी प्रौद्योगिकियों के आधार पर व्यापार मॉड्यूल भी प्रदान करता है। चार राज्यों (बिहार, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और उत्तर प्रदेश) के 16 जिलों का प्रतिनिधित्व करते हुए कुल 68 प्रतिभागियों (पीएचडी के स्नातक) और 4 शिक्षित किसानों ने कार्यशाला मंल भाग लिया। नर्सरी व्यवसाय शुरू करने में बहुत से लोग रुचि रखते हैं, इसलिए फल, सजावटी और सब्जी फसलों पर विशिष्ट नर्सरी में उद्यमशीलता के विषय पर एक सत्र आयोजित किया गया। रोपण सामग्री की बढ़ती मांग और बढ़ती भुगतान क्षमता के साथ, नर्सरी की संख्या बढ़ रही है। संस्थान द्वारा विकसित मॉडल नर्सरी को हजारों किसानों और उद्यमियों ने देखा और वे अपना स्वयं का उद्यम शुरू करने के लिए प्रेरित हुए। मूल्यवर्धन युवाओं को छोटे पैमाने पर उद्योग या मूल्यवर्धित उत्पादों के घरेलू स्तर के उत्पादन की स्थापना के लिए आकर्षित करता है। फल और सब्जी फसलों की प्रसंस्करण और उ.प्र. में छोटे पैमाने पर अचार उद्योग के दायरे में व्यापार के अवसर चर्चा की गई थी। उ.प्र. में ग्रीन हाउस की खेती लोकप्रिय हो रही है और सरकार द्वारा वित्तीय सहायता से संरक्षित खेती के तहत क्षेत्रों में वृद्धि भी हुई है। उच्च मूल्य वाले फल और सब्जी फसलों की संरक्षित खेती, कार्बनिक खेती और मशरूम उत्पादन उद्यमिता चर्चा के महत्वपूर्ण मुद्दे थे। ऊतक सुसंस्कृत केला पौधों की बढ़ती मांगों के साथ, ऊतक संवर्धन और सेकेंडरी हार्डनिंग में उद्यमिता ने कुछ महीनों के भीतर पैसे कमाने हेतु कई स्नातकों को आकर्षित किया है। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ बातचीत की और प्रशिक्षण पर टिशू कल्चर लैब, प्रसंस्करण प्रयोगशाला, मशरूम उत्पादन सुविधा, नर्सरी / हाइड्रोपोनिक्स, पॉलीहाउस आदि का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

Horti-Entrepreneurship Workshop on nursery, protected cultivation, value addition, organic farming and tissue culture was organized at ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Rehmankhera, Lucknow on 18-08-2018. Horticulture sector is proving to be boom for creating job opportunities for youth of this country. Large number of youths contacted CISH Lucknow during last two years for horticulture based entrepreneurship. The growing interest among rural as well as urban youth prompted CISH to schedule this workshop which not only deal with the basics of startup and entrepreneurship but also caters to specific horticulture technologies based business modules. A total of 68 participants (graduate to Ph. D.) and 7 well educated farmers representing 16 districts of 4 states (Bihar, Jammu & Kashmir, Rajasthan and Uttar Pradesh) participated in the workshop. A good number of people are interested in starting the nursery business, therefore a session was planned for entrepreneurship in dealing with specific nurseries on fruit, ornamental and vegetable crops. With the growing demand of planting material and increasing paying capacity, number of nurseries are increasing. Institute has developed a model nursery, visited by thousands of farmers and entrepreneurs and they get motivated for starting their own venture. Value addition attracts youth for establishing small scale industry or household level production of value added products. Business opportunities in processing of fruits and vegetable crops and scope of small scale pickles industry in U.P. were discussed. Green house cultivation is becoming popular in UP and financial support by the Government has led to increase in areas under protected cultivation. Protected cultivation of high value fruit and vegetable crops, entrepreneurship in organic farming and mushroom production were the important issues for discussion. With increasing demands of tissue cultured banana plants, entrepreneurship in tissue culture and secondary hardening has attracted many graduates for earn money within few months. The participants interacted with specialists and visited tissue culture lab, processing lab, mushroom production facility, nursery/hydroponics, polyhouse hands on training.

Event Date:- 18-08-2018

Parthenium Awareness Week-2018

गाजरघास जागरूकता सप्ताह-अगस्त16-22,2018

Event Date:- 16-08-2018

Awareness Programme on Scientific Bee Keeping

भा.कृ.अनु.प.-के.उ.बा.सं-रीजनल रिसर्च स्टेशन मालदा, प.बं. और एआईसीआरपी मधुमक्खी एवं परागण ने संयुक्त रूप से 13 और 14 अगस्त 2018 को मालदा कॉलेज ऑडिटोरियम और धन्यागंगा कृषि विज्ञान केंद्र, सरगाची, मुर्शिदाबाद में पीआई फाउंडेशन, गुड़गांव से वित्तीय सहायता द्वारा वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन पर दो दिन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। डॉ. पी.के. चक्रवर्ती (एडीजी पीपी और बी, आईसीएआर, नई दिल्ली), डॉ. एस. राजन (निदेशक आईसीएआर-सीआईएसएच, लखनऊ), स्वामी विश्वमयनंदा जी (अध्यक्ष, धन्यागंगा केवीके, सरगाची), डॉ. सी.आर. सतपथी (सेवानिवृत्त प्रोफेसर, ओयूएटी, भुवनेश्वर), डॉ. हरीश शर्मा (प्रोफेसर, वाईएसपी यूएचएफ, नौनी, सोलन, हि.प्र.), डॉ. कुमारानाग (एआईसीआरपी एचबी और पी, नई दिल्ली), श्री प्रबीर कुमार गारैन (आरकेएमए केवीके, निमपिठ) की उपस्थिति में कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। 13 अगस्त 2018 को मालदा जिले से 350 मधुमक्खीपालकों की सक्रिय भागीदारी और 14 अगस्त 2018 को मुर्शिदाबाद जिले के 300 प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को सफल और जीवंत बनाया। डॉ. एस. राजन (निदेशक आईसीएआर-सीआईएसएच, लखनऊ) ने सभी गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया और मधुमक्खियों के प्रचार के लिए आईसीएआर-सीआईएसएच आरआरएस, मालदा के कार्यक्रम और भविष्य की योजना के महत्व पर बात की। उद्घाटन भाषण में डॉ. पी.के. चक्रवर्ती ने गुणवत्तायुक्त शहद और कुशल परागण के लिए मधुमक्खी पालन के महत्व पर बात की। डॉ. सी.आर. सतपथी, डॉ. हरीश शर्मा और श्री प्रबीर कुमार गारैन ने वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन पर अपने अनुभव साझा किए और गुणवत्तायुक्त शहद उत्पादन और मधुमक्खी आधारित उत्पादों हेतु मधुमक्खी उद्यमियों को प्रेरित करने के लिए कुछ सफल कहानियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने उल्लेख किया कि मधुमक्खियों का उद्योग ग्रामीण गरीब/जनजातीय/वन आधारित और भूमिहीन आबादी हेतु आजीविका का स्रोत है जिसके माध्यम से बेरोजगार युवा इस व्यवसाय को न्यूनतम धन (1.00 से 2.00 लाख रुपये) के साथ शुरू कर सकते हैं। उन्होंने विभिन्न प्रकार के मधुमक्खी उत्पाद, मास क्वीन मधुमक्खी पालन, शाही जेली निष्कर्षण, फसलों की उपज पर शहद मधुमक्खी के प्रभाव, कुशल परागणकों और परागण के लिए शहद मधुमक्खी उपनिवेशों के प्रबंधन पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि एकीकृत मधुमक्खियों के किसान को अपनाने से उनकी आय दोगुनी होकर उनकी सामाजिक आर्थिक स्थिति में वृद्धि हो सकती है। अंतिम सत्र में मधुमक्खी उद्यमियों के साथ बातचीत हुई जिसमें मधुमक्खी पालन की समस्या को समझने के लिए उद्यमियों की समस्या को तुरंत सुलझाने हेतु साथ ही भविष्य की रणनीतियों की योजना बनाने के विषय पर विचार विमर्श हुआ। गुणवत्तायुक्त शहद और निवेश की बेहतर वापसी हो सके। डॉ. दीपक नायक (वैज्ञानिक और प्रभारी, आईसीएआर-सीआईएसएच आरआरएस और केवीके, मालदा) ने डॉ. अशोक यादव (वैज्ञानिक, आईसीएआर-सीआईएसएच आरआरएस, मालदा) और आईसीएआर-सीआईएसएच आरआरएस और केवीके के स्टाफ सदस्यों, मालदा एवं पीआई फाउंडेशन के अधिकारियों की सहायता से कार्यक्रम का समन्वय किया।

Two days Awareness Programme on Scientific Bee Keeping was jointly organized by ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture Regional Research Station Malda, W.B & AICRP Honey Bees and Pollination on 13th & 14th August 2018 at Malda college auditorium and Dhannyaganga Krishi Vigyan Kendra, Sargachi, Murshidabad respectively with financial support from PI Foundation, Gurgaon. The programmes were inaugurated in gracious presence of Dr. P.K. Chakraborty (ADG PP & B, ICAR, New Delhi), Dr. S. Rajan (Director ICAR-CISH, Lucknow), Swami Viswamayananda Ji (Chairman, Dhannyaganga KVKendra, Sargachi), Dr. C. R. Satapathy (Retd. Professor, OUAT, Bhubaneswars), Dr. Harish Sharma (Professor, YSP UHF, Nauni, Solan, H.P.), Dr. Kumaranag (AICRP HB&P, New Delhi), Mr. Prabir Kumar Garain (RKMA KVK, Nimpith). Active participation of 350 beekeepers from Malda district on 13th August 2018 and 300 participants from Murshidabad district on 14th August 2018 made the programme colourful and vibrant. Dr. S. Rajan (Director ICAR-CISH, Lucknow) welcomed all the dignitaries and spoke on importance of the programme and future plan of ICAR-CISH RRS, Malda for promotion of beekeeping. In inaugural speech, Dr. P.K. Chakraborty (ADG PP & B, ICAR, New Delhi) spoke on importance of beekeeping for quality honey and efficient pollination. Dr. C. R. Satapathy, Dr. Harish Sharma and Mr. Prabir Kumar Garain has shared their experiences on Scientific Beekeeping and highlighted few success stories for motivating beekeepers of quality honey production and bee based products. They mentioned that beekeeping industry is source of livelihood for rural poor/tribal/forest based and landless population through which unemployed youth can start this business with minimal funds (Rs. 1.00 to 2.00 lakhs). They also discussed on diversified bee product, mass queen bee raring, royal jelly extraction, effect of honey bee on yield of crops, efficient pollinators and management of honey bee colonies for pollination. He emphasized that by adopting integrated beekeeping farmer can increase their socioeconomic status by doubling their income. The last session was kept for interaction and dialogue with beekeepers to understand the problem of beekeepers for providing on spot solution and in planning future strategies for providing possible support to beekeepers to have quality honey and better return. Dr. Dipak Nayak (Scientist & In-charge, ICAR-CISH RRS & KVK, Malda) coordinated the event with assistance from Dr. Ashok Yadav (Scientist, ICAR-CISH RRS, Malda) and staff members of ICAR-CISH RRS & KVK, Malda as well as officials of PI Foundation.

Event Date:- 13-08-2018

Workshop on integration of rural poultry in mango orchard ecosystem

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ ने दिनांक 09.08.2018 को आम बागान पारिस्थितिकी तंत्र में ग्रामीण कुक्कुट के एकीकरण पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। संस्थान के निदेशक डॉ. शैलेन्द्र राजन ने बताया कि देश की प्रसिद्ध आम फल पट्टी, मलिहाबाद के किसानों की आजीविका आधार को बढ़ाने के लिए आम के बागों के तहत ग्रामीण कुक्कुट का प्रदर्शन किया गया। एक साल के भीतर ही यह मॉड्यूल इतना लोकप्रिय हो गया कि यह मलिहाबाद के चार से अधिक गांवों में फैल गया। इस तकनीक को फैलाने में मीडिया द्वारा निभाई गई सक्रिय भूमिका के कारण, अब यह मॉड्यूल अन्य बागान पारिस्थितिक तंत्रों में भी अपनाया जा रहा है। उत्साही कुक्कुट किसानों ने कार्यशाला में भाग लिया और वैज्ञानिकों से कई प्रश्न पूछे। डॉ. आर.बी. राय, प्रसिद्ध पोल्ट्री विशेषज्ञ एवं पूर्व निदेशक- सी.ए.आर.आई. पोर्टब्लैयर, ने किसानों से बातचीत की और उन्हें प्रोत्साहित किया कि एज़ोला को आम बाग में पोल्ट्री फ़ीड के रूप में एकीकृत किया जाना चाहिए। यह न केवल लागत को कम करेगा बल्कि यह प्रोटीन और खनिजों का अच्छा स्रोत होगा। फार्मर्स फर्स्ट परियोजना मलिहाबाद के किसानों के बीच एज़ोला फ़ीड को फैलाएगी। डॉ. राय ने किसानों को सूचित किया कि वे कार्बनिक पोल्ट्री को अपनाने से अपनी आय बढ़ा सकते हैं। किसानों ने वचन दिया कि वे आम के लिए जैव कीटनाशकों और जैव उर्वरकों का उपयोग करेंगे। डॉ. राय ने मुर्गी के लिए हल्दी, अदरक और लहसुन आधारित मिश्रण तैयार करने के लिए सुझाव दिया और पूरी तरह से एंटीबायोटिक दवाओं को छोड़ने को कहा। उन्होंने कार्बनिक पोल्ट्री के लिए विस्तृत एसओपी दिया। डॉ. मनीष मिश्रा, परियोजना अन्वेषक, फार्मर्स फर्स्ट परियोजना और डॉ. राम अवध राम, प्रधान वैज्ञानिक, केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान ने किसानों के साथ बातचीत करते हुए बताया कि यह एक नई पहल है क्योंकि देश में कार्बनिक पोल्ट्री खेती का अभ्यास नहीं किया जा रहा है। किसान प्रारंभ में अप्रमाणिक कार्बनिक उपज के रूप में कुक्कुट मांस और अंडे बेच सकते हैं। डॉ. राजन ने कहा कि बाजार स्थापित करने के लिए जैविक आम बागों को प्रमाणित करने के प्रयास किए जाएंगे। डॉ. राजन ने बताया कि इस उद्यम को स्वयं टिकाऊ बनाने के लिए फार्मर्स फर्स्ट परियोजना के तहत गांव में दो हैचरियां स्थापित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय पक्षी अनुसन्धान संस्थान, बरेली के वैज्ञानिकों को आम बागों के लिए उपयुक्त कुक्कुट स्ट्रेन को विकसित करने के लिए तैयार किया जाएगा। वर्तमान में कड़कनाथ स्ट्रेन मलिहाबाद के आम बागानों में लोकप्रिय विकल्प है क्योंकि इसकी बाजार में उच्च कीमत प्राप्त होती है। उच्च मूल्य प्राप्ति के अलावा, कड़कनाथ आम कीट को नियंत्रित करने के लिए भी उपयुक्त है। यह ऊंची उड़ान भर सकता है एवं आम कीटों को खा सकता है और इस तरह यह कीटनाशकों की आवश्यकता को कम करता है। कुक्कुट आम बागों हेतु एक उपयुक्त आवास है क्योंकि इसे खाने के लिए बहुत सारी कीड़े मिलते हैं। यह आम के बागों की मिट्टी को भी समृद्ध करता है।

ICAR-CISH, Lucknow organized one day workshop on integration of rural poultry in mango orchard ecosystem on 09.08.2018. Dr. Shailendra Rajan, Director, CISH, Lucknow informed that in order to enhance livelihood base of farmers of Malihabad, a famous mango fruit belt of the country, we demonstrated rural poultry under mango orchard. Within a year, this module became so popular that it spread to more than four villages in Malihabad. Due to active role played by media in spreading this technology, now this module is being adopted in other orchard ecosystems. Enthusiastic poultry farmers attended the workshop and asked several questions to scientists. Dr. R.B. Rai, renowned poultry expert and Ex-Director- CARI Portblair, A & Island interacted with farmers and exhorted that Azolla must be integrated in mango orchard as poultry feed. This will not only reduce the cost substantially but its good source of protein and minerals. Farmer FIRST project will spread Azolla feed among the farmers in Malihabad. Dr. Rai informed the farmers that they can augment their income by adopting organic poultry. Farmers pledged that they will use bio pesticides and bio fertilizers for mango. Dr. Rai gave tip to prepare turmeric, ginger and garlic based concoction for poultry and completely shun antibiotics. He gave detailed SOP for organic poultry. Dr. Maneesh Mishra, Principal Investigator, Farmer FIRST and Dr. Ram Awadh, Principal Scientist, CISH while interacting with farmers informed that this is a new initiative as organic poultry farming is not being practiced in the country. Farmers can sell poultry meat and egg as uncertified organic produce initially. Dr Rajan said efforts will be made to certify organic mango orchards for establishing niche market. Dr. Rajan informed that two hatcheries will be installed in the village under Farmer First project to make this venture self sustainable. He said scientist of CARI, Barelli will be roped in to develop suitable strain of poultry for mango orchards. At present Kadaknath strain is getting popular choice in mango orchards of Malihabad as it fetches high price in market. Besides high price realization, Kadaknath is suitable strain for controlling mango pest. It can fly high and feed on mango pests from the canopy and thereby reduce the need for pesticides. Poultry finds suitable habitat under mango orchards as it gets plenty of insects to feed. It also enriches soil of mango orchards.

Event Date:- 09-08-2018

MP horticulture officers trained at ICAR-CISH, Lucknow

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ में मध्य प्रदेश के बागवानी अधिकारी के लिए आम और अमरूद के उत्पादन, संरक्षण और तुड़ाई उपरांत प्रबंधन प्रौद्योगिकी पर दिनांक ६ से १० अगस्त २०१८ तक पांच दिन का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। मध्य प्रदेश फलों के उत्पादन में बहुत तेजी से प्रगति कर रहा है और अब इस क्षेत्र में उच्च लाभ प्राप्त होने के कारण किसानों द्वारा अधिकांश कृषि भूमि को बागों में परिवर्तित कर दिया गया है। यह प्रशिक्षण आम और अमरूद उत्पादन की विभिन्न प्रौद्योगिकियों पर आयोजित किया गया था। मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से इस प्रशिक्षण में शामिल हुए बागवानी अधिकारी के साथ बातचीत से पता चला कि किसान सघनता की उपयुक्तता के कारण विशेष रूप से अमरूद के फल की सघन बागवानी में रूचि रखते हैं। राज्य में अमरूद और आम की कई किस्में स्थापित की गयी लेकिन किसानों को इन किस्मों में विभिन्न प्रकार की समस्याएं का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए किसानों के सामने आने वाली समस्याओं और बागवानी अधिकारियों द्वारा अनुभव की गई समस्याओं के समाधान के लिए चर्चा की गई। प्रशिक्षुओं को अमरूदए नींबू और अनार के लिए कैनोपी प्रबंधन तकनीकों में रुचि थी ताकि पौधों की संख्या अधिक को सीमित जगह में व्यवस्थित किया जा सके और फसल को अवधि के मौसम में स्थानांतरित कर उन्हें बेहतर मुनाफा मिल सके। प्रशिक्षुओं को अमरूद के लिए विकसित अल्ट्रा सघन बागवानी प्रौद्योगिकी और इस तकनीक का उपयोग करते समय सावधानी बरतने के बारे में समझाया गया। अधिक उत्पादन और स्थानीय बाजार में अधिक मांग न होने के कारण दिनों दिन फलों के लिए मूल्यवर्धन महत्वपूर्ण होता जा रहा है। विपणन समूहों के निर्माण के माध्यम से किसानो को कैसे लाभ मिले, जो विपणन किसानों फल की सीमित मात्रा का उत्पादन कर रहे हैं और स्थानीय बाजार में कीमत से संतुष्ट नहीं हैं, इस बिषय पर भी चर्चा की गईं। अधिकारियों ने सुंदरजा आम में समस्या के बारे में भी चर्चा की जो रीवा और आसपास के क्षेत्रों की एक अनूठी किस्में है और कभी.कभी 150 रुपए प्रति किलो बेची जाती है। मूल्यवर्धन की संभावनाओं पर भी प्रशिक्षुओं के साथ चर्चा की गई ताकि उत्पादों को खेत स्तर पर ही बनाया जा सके या छोटे पैमाने पर उद्योग की स्थापना की जा सके। संस्थान में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रशिक्षण का भी आयोजित किया गया। उन्हें नर्सरी स्थापन तकनीकों से अवगत कराया गया और यह बताया गया कि कैसे वे छोटे शहरों में छत और सीमित स्थान में नर्सरी का प्रबंधन कर सकते हैं। सजावटी पौधों को छोटे पात्र में कलियों या फूलों के चरण तक उगाकर एवं देखभाल करके अच्छे लाभ अर्जित करने के उद्यमों में से एक हो सकती है। डॉ। नीलिमा गर्ग ने मूल्यवर्धित उत्पादों के उत्पादन के लिए घरेलू पैमाने के उद्योगों और स्वयं सहायता समूहों के विकास की स्थापना करके ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण के बारे में चर्चा की।

Five days training program on production, protection and postharvest technology of mango and guava was organized for the Horticulture officer of Madhya Pradesh at CISH Lucknow. Madhya Pradesh is progressing very fast in fruits production and now much of the agricultural land is been converted into the orchards by the farmers because of high returns in this sector. The training was organised on various technologies of mango and guava production. Horticulture officers from different parts of MP joined this training and interaction with the them indicated that farmers are interested in high density planting of fruits particularly of guava because of its suitability for intensive culture. Many varieties of guava and mango have been introduced in the state but varieties and farmers are experiencing various types of problems, therefore discussions were made to address the problems face by farmers and experienced by the Horticulture officers. The trainees were interested in canopy management techniques for guava, citrus and pomegranate so that more number of plants are adjusted in a limited piece of land and also the crop is shifted to the period season when they can get a better profits. The trainees were explained about the Ultra high density Technology developed for guava and the precautions to be observed while using this technique. Value addition to the fruits is becoming day by day important because of fruit glut in the market due to the over production sometimes demands is not high in local market. Discussions were made how the marketing through forming marketing groups can be useful for farmers who are producing limited volume of fruits and are not satisfied with the price in the local market. The officers also discussed about the problem in Sunderja mango which is a unique varieties of Rewa and adjoining areas and sold sometimes Rs 150 rupees a kg. Prospects of value addition were also discussed with the trainees so that products can be produced at farm gate-level or small-scale industry can be established. A training of women was also organized at the institute for their empowerment. They were exposed to the nursery establishment techniques and also discussed how they can manage nursery in a small town rooftop and limited space available in small towns. Rearing of potted ornamental plants can be one of the ventures for earning good profit by growing ornamentals in pots to the flowering stage. Dr Neelima Garg discussed about the empowerment of rural women by establishing home scale industries and development of self help groups for producing value added products.

Event Date:- 06-08-2018

Farmers Training and Awareness Programme at Agra and Hathras Districts

आगरा और हाथरस जिले में कृषक प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम

सुनियोजित कृषि विकास केन्द्र (पी.एफ.डी.सी.), भा.कृ.अनु.प.-के0उ0बा0सं0, लखनऊ द्वारा टपक सिंचाई, प्लास्टिक मल्चिंग एवं संरक्षित खेती की उपयोगिता पर आगरा जिले में दिनांक 02.08.2018 को प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में के.वी.के., उद्यान विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों सहित लगभग 55 किसानों ने भाग लिया। डा. वी. के. सिंह, प्रधान वैज्ञानिक एवं पी.आई. द्वारा पी.एफ.डी.सी. एवं संस्थान द्वारा विकसित तकनीकों पर विस्तृत रूप से चर्चा की गयी। जिनमें मुख्य रूप से टपक सिंचाई, प्लास्टिक मल्चिंग एवं संरक्षित खेती पर किसानों को प्रोजेक्टर की सहायता से तकनीकी फिल्मों एवं व्याख्यानों के द्वारा बागवानी में इन तकनीकों की उपयोगिता एवं महत्व के विषय में जानकारी दी गयी। उसके बाद किसानों द्वारा किये गये प्रश्नों का उत्तर दिया गया। किसानों के लिए यह कार्यक्रम बहुत ही सफल एवं उपयोगी रहा। इस कार्यक्रम के तहत दिनांक 03.08.2018 को हाथरस जिले में अमरूद की सघन बागवानी की स्थिति और प्रदर्शन का निरीक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। आई.टी.सी. की मदद से इस जिले में लगभग 250-300 एकड़ क्षेत्र में अमरूद की ललित प्रजाति के पौधों को सघन बागवानी तकनीक को अपनाकर वृक्षारोपण किया गया है। प्रूनिंग तकनीक, सिंचाई की मात्रा एवं उचित पोषक तत्वों के उपयोग की कम जानकारी के कारण किसानों को बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कुछ पौधे मरने की स्थिति में पाये गये परन्तु जड़ में नीमेटोड गाँठ दिखाई नहीं दे रही थी। अच्छी गुणवत्ता वाले अमरूद को प्राप्त करने के लिए प्रगतिशील किसानों को उचित सुझाव दिये गये।

Training program on drip irrigation, plastic mulching and importance of protected cultivation in horticulture crops was organized at KVK, Agra on 02.08.2018 by PFDC, ICAR-CISH, Lucknow. Nearly 55 farmers excluding staff of KVK, state horticulture department, senior faculty of horticulture department of RBS College, Agra participated in the event. Dr. V.K. Singh, Pr. Scientist & PI, PFDC, ICAR-CISH, Lucknow enumerated the technologies developed by PFDC, ICAR-CISH, especially on drip irrigation and plastic application techniques in the crops. Literature related to these topics were distributed besides, lectures on background of drip irrigation, advantage of drip irrigation, its working, laying out of drip line & lateral, care and management, maintenance of the system, fertigation filter etc. projected in technical films. The queries raised by the farmers were answered amicably. Along with programme, a survey and awareness programme was also conducted at Hathras district of Uttar Pradesh on 03.08.2018 to assess the status and performance of high density plantation guava by interacting with the farmers. It was observed that with the help of ITC high density plantation guava was spread in an area of 250-300 acre in this district alone. The common variety planted was Lalit and were in prolific flowering and fruiting. Farmers were facing several problems due to partial knowledge about the time and depth of pruning, application of appropriate nutrients and irrigation schedule for quality production. Bark splitting was recorded common in some of the orchard even in 3 years old plants. Some plants were found in the stage of dying but root knot nematode was not visible. Strategies for getting good quality guava were suggested to the progressive farmers.

Event Date:- 02-08-2018

CISH-RRS, Malda organized a workshop on vegetable seed production

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान द्वारा क्षेत्रीय स्टेशन मालदा, पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय बीज कारपोरेशन (एनएससी) पश्चिम बंगाल के सहयोग से 27-28 जुलाई, 2018 को सब्जी बीज उत्पादन पर एकीकृत बागवानी (एमआईडीएच) प्रायोजित कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पहल पर बात करते हुए, के.उ.बा.सं. के निदेशक शैलेंद्र राजन ने कहा कि राज्य सब्जी उत्पादन में पहले स्थान पर है तथा बंगाल राज्य में सब्जी बीज की बहुत खपत है। गुणवत्ता बीज उत्पादन में वृद्धि कर सकता है और इसे राज्य की किसानों द्वारा अपनी आय बढ़ाने के लिए एक उद्यम के रूप में भी लिया जा सकता है। के.उ.बा.सं.-मालदा किसानों के लिए प्रजनकों के बीज उपलब्ध कराने हेतु बीज उत्पादन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। के.उ.बा.सं. किसानों के लाभ के लिए मालदा में बीज प्रसंस्करण संयंत्र की स्थापना कर रहा है। एनएससी के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम, उत्पादकों से विपणन विशेषज्ञों तक मजबूत बीज श्रृंखला स्थापित करने में मदद करेगा। संस्थान बीज श्रृंखला को मजबूत करने के लिए गुणन हेतु नव विकसित किस्मों के ब्रीडर के बीज प्रदान कर रहा है। इस कार्यशाला में 250 आदिवासी किसानों ने भाग लिया एवं चर्चा की। एनएससी ने खेती के लिए प्रत्येक प्रतिभागी को बीज किट प्रदान की।

A Mission for Integrated Horticulture (MIDH) sponsored programme on vegetable seed production was organized on July 27-28, 2018 by CISH at its Regional Station Malda, West Bengal in collaboration with National Seed Carporation (NSC), West Bengal. Talking on this initiative, CISH director Shailendra Rajan said that the state ranks first in vegetable production and there is a lot of vegetable seed consumption in the state of Bengal. Quality seed production can increase the production and it can also be taken up as a venture by the state farmers for increasing their income. CISH-Malda is instrumental in promoting seed production through farmers by making breeders seed available to farmers. CISH is establishing seed processing plant at Malda for the benefit of farmers. This collaborative programme, will help in establishing strong seed chain from producers to marketing experts. The institute is providing breeder’s seed of newly developed varieties for multiplication for strengthening the seed chain. 250 Tribal farmers attended the workshop and participated in the discussions. NSC provided seed kits for distribution to each participant for cultivation in their field.

Event Date:- 27-07-2018

Orientation programme on Food Processing and Value Chain Management

आईसीएआर-सीआईएसएच आरआरएस, मालदा में श्री कौशिक भट्टाचार्य, आईएएस (जिलाधिकारी, मालदा), प्रो. आर.के. पाल (पूर्व निदेशक आईसीएआर-एनआरसीपी सोलापुर, महाराष्ट्र), परियोजना निदेशक, डीआरडीसी, मालदा एवं डॉ. डी. महलोनोबिश (उप परियोजना निदेशक, एटीएमए, मालदा) की उपस्थिति में 20.07.2018 को एसएचजी सदस्यों के लिए “खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्य श्रृंखला प्रबंधन” पर एक दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम जिला ग्रामीण विकास कक्ष (डीआरडीसी), मालदा और परियोजना निदेशक, एटीएमए, मालदा, पश्चिम बंगाल द्वारा वित्तीय सहायता के सहयोग से आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में मालदा के हबीबपुर, गज़ोल, अंग्रेजी बाज़ार और हरिश्चंद्रपुर ब्लॉक से डीआरडीसी ऑफिसियल और 83 एसएचजी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी हुई। डॉ. आर.के. पाल ने कुटीर उद्योगों के प्रचार हेतु "बागवानी फसलों में तुड़ाई उपरांत प्रबंधन, प्रसंस्करण और मूल्य श्रृंखला प्रबंधन" पर व्याख्यान दिया। डीएम ने एसएचजी सदस्यों को संबोधित किया और मालदा जिले में खाद्य प्रसंस्करण के महत्व और दायरे को उजागर करके आईसीएआर-सीआईएसएच आरआरएस, मालदा के प्रयासों की सराहना की एवं उन्होंने मालदा जिले में फसल प्रसंस्करण और मूल्यसंवर्धन के क्षेत्र में वृद्धि के लिए सभी प्रकार के मजिस्ट्रेट समर्थन का वादा किया। डॉ. दीपक नायक ने "एसएचजी सदस्यों, ग्रामीण युवाओं एवं उद्यमियों के प्रशिक्षण और रखरखाव हेतु प्रक्षेपित एवं मूल्यसंवर्धित उत्पाद विकास विषय पर व्याख्यान दिया।

One day orientation programme on “Food Processing and Value Chain Management for SHG Members” was organized on 20.07.2018 at ICAR CISH RRS Malda in august presence of Mr. Kaushik Bhattacharya, IAS (District Magistrate, Malda), Prof. R. K. Pal (Ex-Director ICAR-NRCP Solapur, Mahrashtra), Project Director, DRDC, Malda & Dr. D. Mahalonobish (Deputy Project Drector, ATMA, Malda). The programme was organized in association with District Rural Development Cell (DRDC), Malda and financial support from Project Director, ATMA, Malda, W.B. There were active participation of DRDC officials and 83 SHG members from Habibpur, Gazole, English Bazar and Harishchandrapur blocks of Malda. Dr. R. K Pal delivered the key lecture on “Post-harvest Management, Processing and Value Chain Management in Horticultural crops” promotion of cottage industries. DM addressed the SHG members and appreciated the efforts of ICAR-CISH RRS, Malda by enlighting the importance and scope of food processing in Malda district and promised for all sorts of magisterial support for up scaling the sector post harvest processing and value addition in Malda district. Dr. Dipak Nayak also delivered the lecture on “Training and Handholding of SHG members, rural youth and entrepreneurs for processed and value added product developments.

Event Date:- 20-07-2018

Training programme on Agriculture protection and Insect pest management in Kharib crops

खरीफ फसलों में कृषि रक्षा कार्यक्रम एवं कीट प्रबंधन विषयक प्रशिक्षण कार्यक्रम

दिनांक 19 जुलाई 2018 को राज्य कृषि प्रबंध संस्थान, रहमान खेड़ा लखनऊ द्वारा आयोजित खरीफ फसलों में कृषि रक्षा कार्यक्रम एवं कीट प्रबंधन विषयक प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के ललितपुर, झांसी, जालौन, कुशीनगर, गोरखपुर तथा सुल्तानपुर जनपदों के 65 प्रतिभागियों ने भाकृअनुसं- केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान का भ्रमण किया तथा उन्हें औद्योगिक फसलों के कीट एवं रोग प्रबंधन एवं प्रसंस्करण हेतु सुरक्षित रसायनों के प्रयोग के संबंध में जानकारी दी गई

State Institute for Management of Agriculture, Rahman Khera, Lucknow organized a training programme on "Agriculture Protection and Insect Pest Management in Kharif Crops" on 19 July 2018. Sixty five participants were participated from Lalitpur, Jhanshi, Jalon, Kushinagar, Gorakhpur and Sultanpur districts and also visited ICAR- Central Institute for Subtropical Horticulture, Lucknow. During this visit, they were apprised about insect/pest and disease management of industrial crops also safely use of chemicals for processing.

Event Date:- 19-07-2018

Training programme under Mera Goan Mera Gaurav

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित मेरा गांव मेरा गौरव योजना के अंतर्गत भाकृअनुप--केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान द्वारा दिनांक 17-07-2018 को मलिहाबाद एवं काकोरी प्रखंड में स्थित अंगीकृत गांवो से बाबू त्रिलोकी सिंह इण्टर कालेज के छात्रों को आम का गूदा निकालने एवं आम का स्क्वाश बनाने पर प्रशिक्षण दिया गया। डा. श्रीमती नीलिमा गर्ग, प्रभागाध्यक्ष, तुड़ाई उपरांत प्रबंधन विभाग एवं प्रभारी निदेशक ने विस्तारपूर्वक सम्बंधित विषय की जानकारी प्रदान की एवं प्रतिभागी छात्रों का उत्साहवर्धन किया साथ ही अर्जित ज्ञान द्वारा छात्रों से घर एवं गांववासियों को लाभान्वित करने के लिए भी कहा गया।

ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture organized a training programme under Mera Goan Mera Gaurav scheme of Ministry of Agriculture and Farmers Welfare, Government of India on 17-07-2018. The students of Babu Triloki Singh Inter College from Malibabad and Kakori block were trained to make the squash and pulp form mango. Dr. Neelima Garg, HoD, Post Harvest Management Division and Acting Director of Institute provided detailed information about the subject and encouraged the participants. Students were also asked to disseminate the benefit to their family members and villagers.

Event Date:- 17-07-2018

Performance appraisal of high density guava by surveying Allahabad district and attending gosthi at Kaushambi

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले में अमरूद की सघन बागवानी की स्थिति और प्रदर्शन का निरीक्षण करने के लिए डा. वी.के. सिंह, प्रधान वैज्ञानिक एवं पीएफडीसी स्टाफ ने दिनांक 17.07.2018 को सर्वेक्षण किया। टीम द्वारा कोड़ापुर गाँव के किसान श्री बी.डी. सिंह, प्रगतिशील किसान के प्रक्षेत्र का भ्रमण किया जहाँ किसान द्वारा अमरूद की सरदार प्रजाति को संस्थान की संस्तुति के आधार पर सघन बागवानी के अन्तर्गत 6 मीटर X 3 मीटर की दूरी पर लगाया गया और प्रूनिंग के माध्यम से बगीचे का उचित प्रबन्धन किया जा रहा है। मिथाइल यूजीनॉल के उपयोग से बरसात के मौसम में अमरूद के पौधे बिना फल मक्खी के फलो से लदे हैं। इस तकनीक को अपनाकर अमरूद के उत्पादन की बढ़ोत्तरी के साथ-साथ 2.5 लाख रूपये प्रति हेक्टेयर का शुद्ध लाभ अर्जित किया जा रहा है। किसान प्रति वर्ष 40 टन वर्मीकम्पोस्ट का उत्पादन भी करता है और रूपये 300-350 प्रति किलो की दर से केचुआ बेच रहा है। उसी दिन सिलोखरा गाँव में अमरूद के बगीचे का भ्रमण किया जिसमें सभी पौधे फल से लदे पाये गये परन्तु कुछ पौधों में उकठा की स्थिति देखी गयी। बेरूई ग्राम में आम की आम्रपाली एवं मल्लिका प्रजाति के लगाये गये बगीचे को देखा गया जिसमें पाया कि फलत अच्छी थी परन्तु फलों का आकार छोटा पाया गया (सी ग्रेड )। बगीचे में आवश्यक पोषक तत्वों को डालने की सलाह दी गयी। दूसरे दिन (18.07.2018) की सुबह कौशाम्बी जिले के शाहपुर ग्राम का भ्रमण किया और 4000 वर्गमीटर के पॉलीहाउस में लगे जरबेरा की फसल का भ्रमण किया गया। जिसमें पाया गया कि कुछ पौधे थ्रिप्स और माइट्स से ग्रसित थे। किसान को उचित कीटनाशकों और एक्रेसाइड्स का छिड़काव करने की सलाह दी गयी। सिंचाई एवं पोषक तत्वों को देने के लिए ड्रिप का प्रयोग किया गया है। इस तकनीक से उच्च गुणवत्तायुक्त जरबेरा के फूलों का उत्पादन करके किसान काफी लाभान्वित हो रहा है। प्रक्षेत्र भ्रमण के बाद मंझनपुर, कौशाम्बी में आयोजित किसान मेला/गोष्ठी में भाग लिया। किसान मेला का उद्घाटन इस क्षेत्र के विधायक द्वारा जिला अधिकारी की उपस्थिति में किया गया। मेले में जिला उद्यान अधिकारी के अलावा अन्य अधिकारियों सहित लगभग 500 से अधिक किसानों ने भाग लिया।

A survey was conducted to assess the status and performance of high density plantation guava at Allahabad district of Uttar Pradesh on 17.07.2018 by Dr. V.K. Singh, PS, ICAR-CISH, Lucknow along with his PFDC team. The team visited at Kodapur where Shri B. D. Singh, a progressive farmer owned and maintained 2 ha guava orchard of cv. Sardar (L-49) under HDP (6 m x 3 m) through proper pruning operations as per our recommendations and the trees were in full bearing stage of rainy season crop. The orchards were found to be free from fruit flies as the farmer adopted our recommended technology of methyl eugenol trap. Overall scenario of the farmer earned an annual net income of Rs 2.5 lakh per ha from HDP guava orchard and benefited by on-farm vermi compost production of 40 ton/year and its sale besides selling worms @ Rs. 300-350 per kg. The team also visited an orchard located at Silokhara at full bearing stage where some guava plants were wilted. Heavy fruiting and under sized fruits (mostly C grade) was observed in mango cvs. Amrapali and Mallika orchards at Berui and the farmer was advocated to following nutrient management practices. In the next day (18.07.2018), the team visited Shahpur of Kaushambi district and witnessed polyhouse cultivation of gerbera by the progressive farmers in an area of 4000 sq. m. (1000 sq m each) in four polyhouses. Thrips and mite infestation was observed to be severe and the farmer was advised to spray suitable insecticides and acaracides. In the afternoon, the team participated at a district level Kisan Mela/gosthi Manjhanpur, Kaushambi. The Kisan mela was inaugurated by Honrable MLA of Kaushambi in the presence District Magistrate. DHO and officials of horticulture department, KVK and SHIATS, Naini and More than 500 farmers participated in the gosthi and actively participated in the stake holder’s interaction.

Event Date:- 17-07-2018

CISH AND SRMU SIGNED MoU

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ एवं श्री रामस्वरुप मेमोरियल विश्वविद्यालय के बीच दिनांक १२ जुलाई २०१८ को समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया गया जिस पर विश्वविद्यालय के कुलपति और संस्थान के निदेशक द्वारा हस्ताक्षर किए गए। यह पहल विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं के बीच अंतर को कम करने के लिए एक प्रयास है। यह समझौता ज्ञापन छात्रों और प्राध्यापकों के क्षमता निर्माण के लिए सहयोग और युवा शोधकर्ताओं के बीच कौशल और तकनीकी विशेषज्ञता को बढ़ाने के लिए उपयोगी सिद्ध होगा। संस्थान के वैज्ञानिक, विश्वविद्यालय के छात्रों हेतु प्रशिक्षण एवं परियोजनाओं के शोधकार्य के लिए मार्गदर्शक एवं सह-मार्गदर्शक के रूप में सहायता प्रदान करेंगे।

A memorandum of understanding (MoU) has been signed between ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture and Shri Ramswaroop Memorial University (SRMU), Lucknow on 12 July 2018. The MoU was signed by the SMRU Vice-Chancellor and CISH director. This initiative is collaboration for bridging the gaps between academicians and researchers in different areas of science. This MoU will support exchange of students and faculty for capacity building and to enhance skill and technical expertise among the young researchers. The faculty of CISH will also extend support to SRMU as resource persons for the training, orientation programmes and act as guides, co-guides for student project dissertations.

Event Date:- 12-07-2018

Training on preparing mango squash

आम का स्क्वैष बनाने पर प्रशिक्षण

कृषि एवं किसान कल्याण, मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित मेरा गांव-मेरा गौरव योजना के अंतर्गत भा.कृ.अनु.प-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान द्वारा दिनांक 07-07-2018 को मलिहाबाद एवं काकोरी प्रखंड से अंगीक्रत 45 गावों में से 16 गावों से प्रत्येक से 2 युवा विद्यार्थी जो कि मलिहाबाद के कनार गांव स्थित विद्यास्थली स्कूल के कक्षा 11 एव 12 के लगभग 35 छात्रों को आज संस्थान के रहमानखेड़ा परिसर पर आम का गूदा एवं आम का स्क्वैष बनाने पर प्रशिक्षण दिया गया जिसमें उक्त छात्रों ने पके आमों को साफ पानी से धोने, छिलका उतारने, गूदा निकाल कर गुठली अलग करने तत्पष्चात पल्पर की सहायता से छानने तथा इकटठा किये गये गूदे को उचित ताप तक गरम करने, निर्धारित मात्रा में साइट्रिक अम्ल मिलाने एवं संरक्षित करने एवं निकाले गये गूदे से स्क्वैष वनाने संबधी विधि को विस्तारपूर्वक संस्थान के तुड़ाई उपरांत प्रबंधन प्रभाग की अध्यक्षा डा. (श्रीमती) नीलिमा गर्ग तथा तकनीकी अधिकारी श्री डी के शुक्ला द्वारा करके बताया गया संस्थान के निदेषक डॉ. शैलेन्द्र राजन ने प्रतिभाग किये छात्रों का उत्साहबर्धन किया एवं डॉ. सुभाष चन्द्र, वरिष्ठ वैज्ञानिक कृषि प्रसार ने छात्रों एवं विद्यास्थली स्कूल, कनार छात्रों एवं स्टाफ का धन्यबाद किया। संस्थान के निदेषक ने प्रतिभाग किए छात्रों से आग्रह किया कि वे प्राप्त प्रशिक्षण से परिवार एवं गावंवासियों को भी लाभान्वित करें ।

Event Date:- 07-07-2018

ICAR-CISH displays diverse mango collections at 30th Delhi mango festival

दिनांक 6-9 जुलाई, 2018 को दिल्ली हाट, जनकपुरी, नई दिल्ली में आयोजित 30वें दिल्ली आम महोत्सव में संस्थान द्वारा विकसित किस्मों, स्वेदशी किस्मों सहित 200 आम संग्रहों को प्रदर्शित किया गया। आम महोत्सव का उद्घाटन उपमुख्यमंत्री, दिल्ली ने किया। श्री मनीष सिसौदिया अध्यक्ष, डीटीटीडीसी, श्री शूरवीर सिंह, एमडी एवं सीईओ दिल्ली पर्यटन, श्री अरविन्द चन्द्र, जीएम, डीटीटीडीसी और अन्य गणमान व्यक्तियों ने संस्थान की प्रदर्शनी स्टाल का दौरा किया और संस्थान द्वारा विकसित किस्म अंबिका और अरूणिका की सराहना की। विभिन्न संग्रहों के कारण संस्थान का प्रदर्शनी स्टाल जनसामान्य, किसानों, सरकारी अधिकारियों और मीडिया व्यक्तियों के बीच प्रमुख आकर्षण का केन्द्र रहा। संस्थान द्वारा विकसित संकर किस्में अपने रंग और आकार के लिए भीड़ का प्रमुख आकर्षण रहीं।

Institute participated and displayed around 200 mango collections including institute developed varieties, indigenous collections and exotic varieties at 30th Delhi mango festival held at Dilli Haat, Janakpuri, N. Delhi from 6-9th July, 2018. The festival was inaugurated by Deputy Chief Minister Delhi and Chairmas, DTTDC, Shri. Manish Sissodia. Shir. Shurbir Singh, MD &CEO Delhi Tourism, Shir, Arvind Chandra, GM, DTTDC and other dignitaries visited our exhibition stall and appreciated institute released hybrids Ambika and Arunika. Our exhibition stall was the major attraction of common visitors, farmers, government officials and media persons for display of diverse collections. Our institute developed hybrids which are under pipe line for release were the major attraction of the crowd for their attractive color and size.

Event Date:- 06-07-2018

23rd Meeting of Research Advisory Committee

अनुसंधान सलाहकार समिति की 23 वीं बैठक

संस्थान में दिनांक 26 और 27 जून, 2018 को डॉ. बीएस चुंडावत, पूर्व कुलपति, नवसारी कृषि विश्वविद्यालय, गुजरात की अध्यक्षता में 23वीं आरएसी की बैठक का आयोजन किया गया। डॉ केके जिंदल, पूर्व- उप महानिदेशक (बागवानी विज्ञान) भा.कृ.अनु.प., नई दिल्ली, डॉ. एनएस पसरीचा, पूर्व प्रभागाध्यक्ष, मृदा विज्ञान विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, लुधियाना, डॉ प्रेम शंकर सिंह, प्रोफेसर और प्रभागाध्यक्ष, एंटोमोलॉजी विभाग, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी, डॉ. सी. अस्वथ, पूर्व प्रभागाध्यक्ष, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भा.कृ.अनु.प.- भारतीय बागवानी अनुसन्धान संस्थान, बेंगलुरु और डॉ. डब्ल्यूएस ढिल्लों, उप महानिदेशक (बागवानी-I), भा.कृ.अनु.प., नई दिल्ली, डॉ. शैलेन्द्र राजन, निदेशक, भा.कृ.अनु.प. - केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ ने सभी वैज्ञानिकों और संबंधित विभागों के प्रभागाध्यक्ष के साथ विचार-विमर्श में भाग लिया। डॉ. अभिजीत कर, प्रधान वैज्ञानिक, फसल तुड़ाई प्रौद्योगिकी विभाग, भा.कृ.अनु.प.- भारतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान, नई दिल्ली और माननीय कृषि मंत्री द्वारा नामित गैर-आधिकारिक सदस्य श्री सुव्रत पाठक, मोहल्ला पटकना, कन्नौज बैठक में उपस्थित नहीं हो सके।

23rd meeting of RAC of the Institute convened on June 26 & 27, 2018 under the Chairmanship of Dr. B.S. Chundawat, Ex-Vice Chancellor, Navasari Agriculture University, Gujarat. Dr. K.K. Jindal, Ex-ADG (Hort. Science), Dr. N.S. Pasricha, Ex-Head, Deptt. of Soil Science, PAU, Ludhiana, Dr. Prem Shankar Singh, Professor & Head, Deptt. of Entomology, BHU, Varanasi, Dr. C. Aswath, Ex- Head, Division of Biotechnology, ICAR-IIHR, Bengaluru and Dr. W.S. Dhillon, ADG (Hort.-I), ICAR, New Delhi participated in the deliberations along with Director, ICAR-CISH, all the scientists and Heads of respective Divisions. Dr. Abhijit Kar, Pr. Scientist, Division of Post Harvest Technology, ICAR-IARI, New Delhi and Shri Suvrat Pathak, Mohalla Patkana Kannauj, Non-Official member nominated by Hon’ble AM could not spare time to grace the occasion.

Event Date:- 26-06-2018

Uttar Pradesh Mango Festival 2018

यू.पी.आम महोत्सव 2018

दिनांक 23-24 जून, 2018 को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर, लखनऊ में आयोजित "यू.पी.आम महोत्सव 2018" में संस्थान ने भाग लिया जिसमें संस्थान द्वारा विकसित देशी और विदेशी किस्मों सहित 300 से अधिक आम की किस्मों को प्रदर्शित किया गया। आईसीएआर-सीआईएसएच लखनऊ द्वारा विकसित आम किस्मों अंबिका और अरुणिका ने आम महोत्सव में लोगों को सबसे ज्यादा आकर्षित किया। संस्थान ने आमों की विभिन्न प्रजातियों को प्रदर्शित किया और महोत्सव के दौरान किसानों के बीच ज्ञान प्रसार में भी योगदान दिया।

Institute participated in U.P. Mango Festival 2018 held at Indira Gandhi Prathisthan, Gomti Nagar, Lucknow from 23- 24 June, 2018 and displayed more than 300 mango varieties including institute developed varieties, indigenous collections and exotic varieties. Ambika and Arunika mango varieties developed by ICAR-CISH Lucknow attracted most in the mango show. ICAR-CISH displayed large number of varieties of mango and also contributed towards knowledge dissemination amongst mango farmers during the mango festival.

Event Date:- 23-06-2018

Reschedule National Conference on Strategies and Challenges in Doubling Farmers Income ......

Reschedule National Conference on Strategies and Challenges in Doubling Farmers Income through Horticultural Technologies in Subtropics on 21-22 June 2018 at ICAR-CISH, Lucknow Event Date:- 21-06-2018

International Yoga Day celebration on 21 June, 2018

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून, 2018)

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने पूर्वाहन 09:00 बजे से योग किया। योग प्रशिक्षक के रूप में श्री धीरज शर्मा, सहायक निदेशक (राजभाषा) ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को योग करवाया। योग कार्यक्रम की शुरूआत ओम ध्वनि के उच्चारण से की गयी। उसके पश्चात पदमासन, वज्ररासन, सुखासन एवं सिद्धासन का भी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अभ्यास किया। तत्पश्चात सभी ने कपाल भाति एवं मंडूक आसन किया। अल्प विराम के पश्चात सभी ने अनुलोम विलोम प्राणायाम किया। इसके अलावा ताडासन, वृक्षासन, हस्त पादासन एवं अर्द्ध चक्रासन का भी अभ्यास किया गया। इस अवसर पर निदेशक महोदय ने योग की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दैनिक रूप से योग के प्रयोग के शरीर और मन दोनों को ही स्वस्थ रखा जा सकता है | योग का कार्यक्रम हास्यासन के साथ समाप्त हुआ |

On the occasion of the International Yoga Day, scientists, officers and employees of ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Rahamankheda, Lucknow performed Yoga at the Institute’s premises at Rehmankhera. As a Yoga instructor, Mr. Dhiraj Sharma, Assistant Director (OL) led all the officers and employees in the practice. The yoga program started with the chanting of mantra Om. After that Padamasana, Vajrasan, Sukhasan and Siddhasan were also exercised by the officers and staff. After that all made the Kapalbhati and Mandook Aasana. All of them also performed anloam vilom pranayama. Apart from this, Tadasan, Vrikshasana, hast padasana and ardh-chakrasan were also practiced. During the programme, Dr. Shailendra Rajan, Director of the Institute, highlighting the importance of yoga, told about the importance of yoga for healthy body and mind. He remarked that Yoga is a great method by which we can remain fit at the body and mind level. The program ended with hasyasana.

Event Date:- 21-06-2018

Live Telecast of Honorable Prime Minister Shri Narendra Modi and farmers conversation

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा देश के किसानों से सीधी वार्ता को डी. डी. किसान चैनल

दिनांक 20 जून, 2018 को पूर्वाहन 09:30 बजे से संस्थान के वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों तथा आस-पास के क्षेत्रों के किसानों ने भारत के माननीय प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा देश के किसानों से की गयी सीधी वार्ता को डी.डी. किसान चैनल पर संस्थान के प्रेक्षागृह में देखा। इस वार्ता के अंतर्गत माननीय प्रधानमंत्री महोदय ने गुजरात, राजस्थान, बंगाल, मणिपुर आदि प्रदेशों के किसानों द्वारा मछली पालन, बागवानी, पशुपालन, कुकुट पालन आदि के द्वारा किसान कैसे अपनी आय दुगुनी कर रहे हैं, इसकी विस्तृत जानकारी प्रदान की | इस अवसर पर दिए गए सम्बोधन में माननीय प्रधान मंत्री महोदय ने आशा व्यक्त की कि वर्ष 2022 तक भारत के किसानों की आमदनी दुगुनी करनी है जिसके लिए अथक प्रयास किया जा रहा है | उन्होंने कहा कि किसानों को यदि आय दुगुनी करनी है तो उन्हें नवीनतम प्रोद्योगिकियों तथा तकनीकों का इस्तेमाल करना होगा | इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों तथा किसानों सहित दो सौ सौ से अधिक लोग सम्मिलित हुए।

On June 20, 2018, at 09:30 AM, the scientists, officers, staff and farmers of nearby areas of the institute watched Hon’ble Prime Minister of India, Shri Narendra Modi talking to the farmers directly about the methods they have used to double their income on DD Kisan channel. In course of his address, Hon’ble PM talked with the farmers of West Bengal, Gujarat, Rajasthaan, Manipur, etc states. He was full of praise for the farmers who have ventured into agriculture inspite of having professional graduation degrees. Shri Narendra Modi Ji suggested the farmers to use latest technologies for doubling their income. He informed that the Central government is leaving no stone unturned so that the income of the farmers become double by 2022. On this occasion more than two hundred officers, staff and farmers were present. The farmers were very happy to listen to the Hon’ble Prime Minister.

Event Date:- 20-06-2018

BENGAL MANGO UTSAV-2018

बंगाल आम महोत्सव-2018

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, क्षेत्रीय अनुसन्धान संस्थान, मालदा (प.बं.) ने दिनांक 08-10 जून, 2018 को कोलकाता के मेला ग्राउंड, न्यू टाउन में आयोजित बंगाल आम महोत्सव-2018 में आम की 130 महत्वपूर्ण पारंपरिक किस्मों का प्रदर्शन किया गया। केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान द्वारा संरक्षित, आम के समृद्ध संग्रह एवं विविधता ने आम प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित किया। गदाधर आम की किस्म (1.75 किलोग्राम) विशेष आकर्षण का केंद्र रही। संस्थान द्वारा विकसित आम की किस्म अरुणिका ने आम उत्पादकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। विदेशी प्रतिनिधियों ने भी निर्यात के लिए आम की उपयुक्त किस्मों में रुचि ली। इस कार्यक्रम का उद्घाटन पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्रियों और विदेशी प्रतिनिधियों की उपस्थिति में हुआ।

ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture-Regional Research Station, Malda, W.B. showcased ever best collection of 130 traditional varieties of mango in Bengal Mango Utsav -2018 held at Mela Ground, New Town, Kolkta during 08-10 June, 2018. The rich collection of CISH has attracted huge mango lovers to witness the rich diversity of mango, where mango lovers were surprised to see Gadadhar (a gigantic mango of 1.75 kg in weight) and attracts huge fellow visitors. Among the our hybrids, Arunika has received attention of mango growers. Foreign delegates also took interest in exploring suitable varieties of mango for export. The programme was inaugurated in presence of galaxy of Ministers of Govt. of West Bengal and foreign delegates.

Event Date:- 08-06-2018

Workshop on postharvest handeling of mango on occassion of 35th Foundation Day of ICAR-CISH

The Central Institute for Subtropical Horticulture, Rehmankhera, Lucknow celebrated its 35th Foundation Day on 1st June 2018. Speaking on this occasion as a chief guest, Dr. K K Lal, Director, ICAR-NBFGR, Lucknow exhorted the farmers to integrate fisheries with horticultural crops for enhancing their income. While appreciating the achievements of ICAR-CISH, Lucknow in the sphere of improving the livelihood of mango growers, Dr. Lal told that in future both the Institute will work together also to augment farmers’ income. Increasing awareness among the consumers regarding fan of carbide has reduce the profits made by early mangoes. Consumers have become apprehensive that early mangoes in the market are forcefully ripened using carbide. As such, it is now common consensus that carbide is harmful for health and it can even cause cancer apart from other many health problems like nausea, giddiness and nervous breakdown. It is difficult to identify carbide treated mangoes at the fruit shop but one can easily understand while opening the box that carbide has been used for forced ripening. Alternative use of ripening methods where discussed among the farmers as some of the technology is our costly and require infrastructure such as infrastructure requirements are costly for using ethylene generator and cannot be used by general farmer. Ethylene releasing compound like ethrel can be used for ripening of mangoes. That has developed several techniques using this compound which is easily available in the market for safe ripening of the mango fruits. Ethephon based Chinese sachets for artificial ripening of the mango are also available in the Lucknow and nearby markets. Chinese sachets are in use abandantly in wholesale market of New Delhi as carbide is prohibited.

A gosthi was organised on improving income controlling post harvest losses. Dr. Neelima Garg, Dr Anil Verma, Dr. Ghanshyam Pandey, Dr. Devendra pandey and Dr A K Singh briefed the farmers how to deal with the problems from mango crop ready to harvest. The scientists kept in mind the prime goal of farmers getting best price of their produce. Therefore, in farmer-scientist interaction programme major issues were proper harvesting, de-sapping, ripening, packaging and transport. Since, harvesting of premature fruits and ripening by the use of carbide is a common unfair practice adopted by the farmers, they were told, how to indentify the proper maturity of fruits for harvesting. Scientists also emphasized the use of ethereal, in place of calcium carbide for safe ripening of fruits. Farmer and student quarries were satisfied by Dr. Neelima Garg , Dr. Anil Kumar Verma and other scientists of the Institute. Over 200 farmers and students from Uttar Pradesh and Rajasthan participated in this programme. On this occasion, Dr. Shailendra Rajan, Director, ICAR-CISH, Lucknow, a premier Institute under Indian Council of Agriculture Research, welcomed the farmers and dignitaries and simultaneously briefed them about the achievements of the Institute. He further added that the institute has been devoted in research and extension for the enhancement in fruit production and development of livelihood of farmers devoted in horticulture crops. Dr. Rajan informed that more than 775 varieties of mango are existing in field gene bank of the Institute, which is the highest in world. He also told that the Institute and the associated nurseries has supplied more than 18 Lakhs grafts of fruit crops to the farmers, which has largely contributed in area expansion under fruit crops. The Institute has helped more than 100 Krishi Vigyan Kendra and over 300 nurserymen in establishing mother blocks of our varieties throughout the country, remarked Dr. Rajan. Our guava varieties are replacing grapes in south India owing to high economic returns. Area under drip irrigation and green house cultivation has also increased owing to the efforts made by our Institute. We have also contributed a lot in disease and insect pest management. Our recommendations on major problems like mango wilt, shoulder browning, thrips, hopper, fruit fly, etc. management has been extended to over two lakh orchardists. In course of his address, Dr Rajan appraised the gathering that training programmes organized by the Institutes have also contributed in entrepreneurship development. In the end, he narrated that farmers trained in Wedge-grafting are even earning 40 to 65 lakhs rupees per year from their nursery.

Event Date:- 01-06-2018

City Montessori School Students study tour to ICAR-CISH, Lucknow

सिटी मोंटेसरी स्कूल के छात्रों का शैक्षिक भ्रमण

सिटी मोंटेसरी स्कूल, स्टेशन रोड, लखनऊ के 5 शिक्षकों के नेतृत्व में उच्च माध्यमिक के छात्रों (50) के एक समूह ने अपने अध्ययन कार्यक्रम के रूप में 8 मई 2018 को आईसीएआर-सीआईएसएच का दौरा किया। डॉ. वी.के सिंह, प्रधान वैज्ञानिक ने इस यात्रा का समन्वय किया और छात्रों को भारत में फल फसल विविधता की समृद्ध विरासत और आम और अमरूद जैसी अनिवार्य फसलों के लिए अपनाई गई जर्मप्लाज्म संरक्षण रणनीतियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने छात्रों को संस्थान की अनुसंधान गतिविधियों के विषय में भी जानकारी दी। डॉ. मुथुकुमार, वैज्ञानिक ने संक्षेप में आमों के विशेष संदर्भ के साथ जीनोमिक्स और फल फसलों के आणविक प्रजनन की उपलब्धियों और संभावनाओं को वर्णित किया। डॉ. मुथुकुमार एम. और डॉ. इसरार अहमद ने जैव प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला में उपकरणों और प्रयोगशाला सुविधाओं के बारे में छात्रों को समझाया एवं उन्हें बागवानी जैव प्रौद्योगिकी में भविष्य के अवसरों के बारे में भी बताया। बाद में उन्हें पीएफडीसी पॉली हाउस में भी ले जाया गया जहां उन्हें ऑफ-सीजन के तहत एवं प्रतिकूल परिस्थितियों में संरक्षित खेती में उच्च मूल्य वाली सब्जियों के उत्पादन के बारे में सिखाया गया।

A group of 50 students of higher secondary led by 5 teachers from City Montessori School, Station Road, Lucknow visited ICAR-CISH on 8th May 2018 as a part of their study tour programme. Dr. V.K. Singh, Principal Scientist coordinated the visit and enlightened the students about the rich heritage of fruit crop diversity in India and germplasm conservation strategies adopted for mandated crops like mango and guava. He also briefed the students about the facilities and on-going research activities of the Institute. Dr Muthukumar, Scientist (Biotech) briefly narrated accomplishments and prospects of genomics and molecular breeding of fruit crops with special reference to mango. Dr. Muthukumar. M. and Dr. Israr Ahmad explained the students about the instruments and laboratory facilities in Biotechnology Laboratory. They were also sensitized about the career opportunities in horticultural biotechnology. Later, they were also taken to PFDC poly house where they were taught about production of high value vegetables in protected cultivation under off-season or even at adverse conditions.

Event Date:- 08-05-2018

CISH organised Livelihood and Skill Development Diwas

आजीविका एवं कौशल विकास दिवस का आयोजन

संस्थान द्वारा दिनांक 05.05.2018 को लखनऊ जिले के बाबू त्रिलोकी सिंह इंटर कॉलेज, काकोरी और बड़ी गढ़ी गांव में ग्राम स्वराज अभियान के तहत आजीविका एवं कौशल विकास दिवस का आयोजन किया गया। डॉ. नीलिमा गर्ग, डॉ. घनश्याम पांडे, डॉ. नरेश बाबू, श्री सुभाष चन्द्रा एवं श्री अरविंद कुमार ने कार्यक्रम का समन्वय किया। इस अवसर पर छात्रों को संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा आजीविका और कौशल विकास में सुधार के बारे में जागरूक और संवेदनशील बनाया गया। वैज्ञानिकों ने गुणवत्ता युक्त रोपण सामग्री, उपयुक्त अन्तःफसल, मधुमक्खी पालन, आम बागवानी के साथ मुर्गीपालन द्वारा आय बढ़ाने के लिए विभिन्न तकनीकों के बारे में भी चर्चा की। छात्रों को कीटों को नियंत्रित करने के लिए कीटनाशकों के न्यायिक अनुप्रयोग के बारे में भी सलाह दी गई। डॉ. नीलिमा गर्ग ने नुकसान को कम करने के लिए आम फसल प्रबंधन और आम के मूल्यवर्धित उत्पादों पर जोर दिया। फलों के कटाई दक्षता और शेल्फ जीवन में वृद्धि के लिए छात्रों के बीच आम तुड़ाई यंत्र और पैकेजिंग सीएफबी बॉक्स का भी प्रदर्शन किया गया। कक्षा 12 के लगभग 60 छात्रों और संकाय सदस्यों ने कार्यक्रम में भाग लिया।

बड़ी गढ़ी में वैज्ञानिकों ने आय बढ़ाने एवं परिवार की पोषण सुरक्षा के लिए सब्जियों, फूलों, फलों, छत बागवानी और रसोई बागवानी, फसल कटाई प्रबंधन और आम के मूल्यवर्धित उत्पाद हेतु सुझाव दिए। कार्यक्रम में लगभग 30 महिलाओं और पुरुषों ने भाग लिया। डॉ. एस के शुक्ला, डॉ. नरेश बाबू, श्री सुभाष चन्द्रा और श्री अरविंद कुमार ने इस कार्यक्रम का समन्वय किया।

Institute organised Aaajivika evam Kausal Vikas Diwas under Gram Swaraj Abhiyan on 05.05.2018 at Babu Triloki Singh Inter collage, Kakori and Bari Garhi village of Lucknow district. Dr. Neelima Garg, Dr. Ghanshyam Pandey, Dr. Naresh Babu, Shri Subhash Chandra and Shri Arvind Kumar coordinated the programme. On this occasion students were made aware and sensitized about improving livelihood and skill development by the scientists of institute. Scientist also discussed about various technologies viz production of quality planting materials, suitable intercrops, bee keeping, poultry farming in mango orchard for increasing income. Students were also advised about judicious application of pesticides to control of insect pest. Dr. Neelima Garg emphasised upon post harvest management and value added products of mango to reduce losses. Mango harvester and packaging CFB box were also demonstrated among the students for increasing harvesting efficiency and shelf life of fruits. About 60 students of class 12 and faculty members attended the programme.

At Bari Garhi scientists uggested theg stakeholders about nursery management of vegetables, flowers fruits, roof gardening and kitchen gardening, post harvest management and preparation of value added products of mango for income generation and nutrition security of the family. About 30 women and men participated in the event. Dr. S K. Shukla, Dr. Naresh Babu, Dr. Subhash Chandra and Arvind Kumar coordinated the event

Event Date:- 05-05-2018

Workshop on doubling the farmers income

किसानों की आय को दोगुनी करने हेतु कार्यशाला का आयोजन

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ और अवध आम उत्पादक एवं बागवानी समिति (मलिहाबाद) ने 2022 तक किसानों की आय को दोगुनी करने हेतु दिनाँक 4 मई 2018 को एक कार्यशाला का आयोजन किया। संस्थान के निदेशक डॉ. एस. राजन ने बताया कि संस्थान किस प्रकार अपनी प्रौद्योगिकियों के माध्यम से किसानों को उनका लक्ष्य हासिल करने में मदद हेतु प्रयत्नशील है।

ICAR-Central Institute for subtropical Horticulture Rehmankhera Lucknow and Awadh Aam Utpadak Evam Bagwani Samiti (Malihabad) organized a workshop on 04.05.2018 on doubling the farmers income of mango growers by 2022. ICAR- CISH Director Dr. S. Rajan spoke about how they are trying to help farmers to achieve their target through institute technologies.

Event Date:- 04-05-2018

Peach Day celebrated at ICAR-CISH, Lucknow

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ में आड़ू दिवस का आयोजन

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ में दिनाँक 3 मई 2018 को ‘आड़ू दिवस’ (Peach Day) मनाया गया। उत्तर भारत के मैदानी भागों में उपोष्ण आड़ू की खेती की संभावना एवं किसानों की आय को दोगुना करने के संदर्भ में चर्चा की गयी। आड़ू दिवस पर मलिहाबाद, काकोरी, उन्नाव, बराबंकी, लखनऊ एवं माल के 62 से अधिक प्रगतिशील किसानों एवं पौधशाला मालिकों ने भाग लिया। संस्थान में बाहर से लाए गये कम अभिशीतन वाली आड़ू की प्रजातियो का मूल्यांकन उपरान्त फ्लोरडा प्रिंस, पंत पीच-1, शरबती, शरबती सुर्खा किस्म उत्तम पायी गयी। इन प्रजातियो में फल 40-75 ग्राम फल मिठास 15-180 ब्रिक्स तथा दूसरे वर्ष एक पेड़ से 5-7 किग्रा फलत दर्ज की गयी। किसानों ने आडू की खेती हेतु मिट्टी के प्रकार, पौध प्रर्वधन का तरीका, लगाने की दूरी, उत्तर मैदानी क्षेत्रों के लिए सबसे उपयुक्त प्रजाति, पौध की उपलब्धता, मार्केटिग एवं अन्य तकनीकी विषय पर प्रश्न पूँछे। इस कार्यक्रम में डॉ. घनश्याम पान्डे ने उपोष्ण क्षेत्रों में आम के अतिरिक्त अन्य फलेां की खेती पर विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. के.के. श्रीवास्तव ने आड़ू की खेती की उत्तर भारत में संभावना, आड़ू की सघन बागवानी, पौध लगाने का समय, उपयुक्त प्रजाति, पौध की सधाई, कटाई-छंटाई विषय पर जानकारी दी। आड़ू का फल ऐसे समय पर पककर तैयार होता है जिस समय बाजार मे कोई अन्य फल नही होता है अतः फल रू. 80-200 प्रति किग्रा की दर से विक्रय होता है। उत्तर भारत के मैदानी भागों में जनवरी से अप्रैल माह में आद्रता कम होती है अतः पेड़ में कीड़े एवं बीमारी आदि का खतरा नहीं रहता है। आड़ू को 3X3 मीटर पर लगाकर प्रति हेक्टेयर 1111 पौधे लगाये जाते हैं। संस्थान किसानों को पौध उपलब्ध कराने हेतु प्रयासरत है। किसानों ने आड़ू की खेती बड़े स्तर पर करने की इच्छा जताई एवं पौधशाला मालिकों ने इसके प्रवर्धन हेतु मूलवृन्त एवं सांकुर की उपलब्धता हेतु आश्वस्त किया।

Event Date:- 03-05-2018

Kisan Kalyan Karyashala under Gram Swaraj Abhiyan

ICAR-Central Institute Subtropical Horticulture (CISH) participated in ‘Kisan Kalyan Karyashala’ for farmer outreach at Malihabad and Kakori blocks on May 02, 2018. Deputy Chief Minister Dr. Dinesh Sharma was the chief guest at the function presided over by local MP Sh. Kaushal Kishore in Malihabad. Sharma said that officials should stay in the office till the problems of the people present in the meeting were solved. He explained how various activities mobilized at village level were benefiting people who were deprived earlier. He also explained how direct benefit transfer policy of the government had benefited the poor. Sh. Kaushal Kishore laid emphasis on the steps being taken for the uplift of the poor and how various insurance provisions and financial support have changed the view of people. Five progressive farmers were awarded by the deputy CM and their success stories were shared for changing their views about traditional agriculture. The farmer-scientist interaction was one of the important component of this programme. Many booklets and farmer-friendly literature were distributed for their benefit. The programme was attended by government officials, farmers and functionaries helping rural populace in improving their living standards. The programme was also attended by scientists from ICAR-CISH and ICAR-IISR. The officials explained how different development programmes were useful for farmers and in which the farmers of Malihabad block can get financial and technical support from the government. Block level officers projected achievements made under different Central government-supported schemes and the strategy for completing the targets in stipulated time.

Event Date:- 02-05-2018

Farmers Welfare Day Workshop organized under Gram Swaraj Abhiyan

ग्राम स्वराज अभियान के तहत किसान कल्याण दिवस कार्यशाला का आयोजन

अपर कृषि निदेशक (प्रसार), उत्तर प्रदेश द्वारा ग्राम स्वराज अभियान (14 अप्रैल से 5 मई 2018 तक) के तहत किसान कल्याण दिवस कार्यशाaला का आयोजन लखनऊ जनपद के काकोरी ब्लॉक के सभागार में दिनांक 02.05.2018 को किया गया। जिसमे संस्थान के डॉ. (श्रीमती) नीलिमा गर्ग, विभागाध्यक्ष, तुड़ाई उपरांत प्रबंधन, डॉ. घनश्याम पाण्डेय, विभागाध्यक्ष, फसल उत्पादन एवं श्री सुभाष चन्द्रा, वैज्ञानिक कृषि प्रसार ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का शुभारंभ करके काकोरी के ब्लॉक प्रमुख ने सम्मिलित कृषकों को सम्बोधित करते हुए प्रदेश सरकार एवं भारत सरकार द्वारा कृषकों के हित में चलाई जा रही योजनाओं का लाभ उठाकर उनकी आमदनी को बढ़ाने पर बल दिया। इस संदर्भ में विभिन्न विभागों से आये अधिकारियों द्वारा कृषकों को प्रदेश सरकार की योजनाओं के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी गयी। संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा कृषकों को उपोष्ण फलों पर विकसित तकनीकों की जानकारी दी गयी। साथ ही आम, अमरुद के साथ सब्जियों की सह-फसल उगाने, फलों की नर्सरी तैयार करने, बागवानी के साथ मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, आम की तुड़ाई आम तोड़क यंत्र की सहायता से करने, आम को दूर की बाजार में पहुचाने हेतु सी.एफ.बी बाक्स का प्रयोग एवं फलों से विभिन्न उत्पाद तैयार करने सहित संस्थान में कृषकों के लिये समय पर आयोजित होने वाले प्रशिक्षण, गोष्ठी, संस्थान में आकर वैज्ञानिकों से परामर्श, तथा संस्थान में कृषकों-वैज्ञानिकों के सीधे संवाद हेतु निःशुल्क किसान काल सेण्टर सेवा एवं फोन-इन-लाईव सेवा के बारे में जानकारी दी गयी। इस कार्यशाला में लगभग १०० किसानो ने भाग लिया। किसान कल्याण दिवस के अवसर पर काकोरी ब्लॉक के ग्राम सैदपुर में भी एक वैज्ञानिक-कृषक संपर्क कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें उपस्थित कृषकों को संस्थान द्वारा विकसित तकनीकों की जानकारी संस्थान के डॉ. नरेश बाबू, प्रधान वैज्ञानिक एवं श्री अरविन्द कुमार द्वारा प्रदान की गयी।

Under Gram Swaraj Abhiyan (from 14 April to 5 May 2018) a Farmers Welfare Day Workshop was organized by Department of Agriculture on 02.05.2018 in the Auditorium of Kakori Block in Lucknow district. Dr. (Mrs.) Neelima Garg, Head PHM, Dr. Ghanshyam Pandey, Head Crop Production and Shri Subhash Chandra, Scientist, Agriculture Extension participated in the workshop. Inaugurating the programme, Incharge of Kakori Block invited the farmers to take advantage of the schemes being run in the interest of the farmers. In this context, detailed information about the schemes of the government was given in detail by the officials from different departments. ICAR–CISH scientists provided information on growing inter-crops of vegetables in mango and guava orchards, nursery raising, bee keeping, post harvest management practices of mango and value addition. Information regarding free phone-in- service and mobile apps developed by the Institute were also given. About 100 farmers attended this workshop. On the occasion of Farmers Welfare Day a scientist-farmers interaction meet was also organized at village Saidpur of Kakori Block. Dr. Naresh Babu, Principal Scientist and Shri Arvind Kumar provided the information on the technology developed by the Institute.

Event Date:- 02-05-2018

Polyhouse tomatoes to help raise farmers’ earnings

पाॅलीहाउस में टमाटर की खेती से किसानों की आय में बढ़ोत्तरी

मौसम में लगातार परिवर्तन के कारण खुले वातावरण में सब्जियों का उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही है जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है। इस प्रकार की समस्याओं से बचने के लिए पाॅलीहाउस में सब्जियों का उत्पादन एक अच्छा विकल्प साबित हो रहा है। केन्द्र सरकार की योजना ”किसानों की लागत आधी करने और उत्पादकता बढ़ाने“ के लक्ष्य पर काम करते हुए भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ में स्थित सुनियोजित कृषि विकास केन्द्र (पी.एफ.डी.सी.) को पौष्टिक तत्वों से भरपूर गुणवत्तायुक्त टमाटर के उत्पादन में बड़ी सफलता हासिल हुयी। यह केन्द्र अधिक उपज के लिए प्लास्टीकल्चर से सम्बन्धित कृषि एवं बागवानी की प्रौद्योगिकी परिष्करण एवं क्षमता संवर्धन पर मुख्यतः कार्य कर रहा है। विगत 5-6 वर्षों से टमाटर की संकर प्रजातियों पर शोध के उपरान्त यह पाया गया कि पाॅलीहाउस में टमाटर की कुछ विषेष किस्में जैसे- हिमषिखर, हिमसोना, एनएस-1218, अभिलाष, अविनाष-2, नवीन, सरताज प्लस, देव, शहंषाह, अर्का रक्षक, अर्का सम्राट एवं चेरी टमाटर का उत्पादन संरक्षित खेती के माध्यम से लम्बे समय तक सफलतापूर्वक किया जा सकता है। पाॅलीहाउस में पौधों का उत्पादन बाहर लगाये गये उसी प्रजाति के पौधों की उत्पादकता से लगभग 3-5 गुना अधिक पाया गया। कुछ प्रजातियों में इसका उत्पादन पाॅलीहाउस में 15-20 किग्रा. प्रति पौधा तक मिला जबकि उसी प्रजाति के बाहर लगाये पौधों में मात्र 5-8 किग्रा प्रति पौधा पाया गया। इसके साथ ही प्रमुख पौष्टिक तत्व लाइकोपीन, पेक्टिन एवं अन्य एंटीआॅक्सीडेंट्स की मात्रा चेरी टमाटर में सबसे ज्यादा (8.7 मिग्रा./100 ग्रा.) पायी गयी। पाॅलीहाउस में लगाये गये पौधों में फलों का एकसमान आकार, लाल रंग, अधिक भण्डारण क्षमता जो कि मूल्य निर्धारण का एक प्रमुख कारक है भी बाहर के फलों की तुलना में ज्यादा अच्छा पाया गया है। परियोजना अन्वेषक एवं प्रधान वैज्ञानिक डा. वी. के. सिंह बताते हैं कि यह सफलता पौधों में छत्र प्रबन्धन, टपक सिंचाई, तथा मल्चिंग तकनीक को अपनाकर मिली है। इस तकनीक के तहत टमाटर के पौधों के केवल दो शाखाओं को फसल के अन्त तक रखा जाता है। यह शाखायें जड़ से समान रूप से पोषण प्राप्त करती हैं। जिसके उपरान्त दोनों शाखाओं पर समान आकार व गुणवत्तायुक्त फल आते हैं। इस तकनीक से उत्पादन लागत में काफी कमी पायी गयी, जिससे टमाटर उत्पादन द्वारा किसानों की आय वृद्धि में समुचित बढ़ोत्तरी हो सकती है। सामान्यतः टमाटर के एक पौधे पर 8-12 गुच्छे आते हैं। एक गुच्छे में 6-10 टमाटर पाये जाते हैं। परन्तु कुछ प्रजातियों में 14-18 गुच्छे तथा एक गुच्छे में 8-10 फल पाये गये जिसमें एक फल का वजन लगभग 150-180 ग्राम तक होता है। परन्तु चेरी टमाटर के एक गुच्छे में 25 फल तक पाये गये हैं जिसमें एक टमाटर का वजन 15-25 ग्राम तक होता है। इसके साथ-साथ पाॅलीहाउस में टमाटर की पैदावार 6 महीने तक ली जा सकती है। इसमें लगभग 2500-3000 कुन्तल सामान्य प्रजाति के टमाटर तथा 800-1000 कुन्तल चेरी टमाटर प्रति हेक्टेयर उत्पादन किया जा सकता है। अतः इस नयी तकनीक को अपनाकर किसान टमाटर की फसल उत्पादन की लागत में कमी करके अपनी आय में 3-4 गुना तक बढ़ोत्तरी कर सकते हैं। चेरी टमाटर में प्रचुर मात्रा में पोषण तत्वों के कारण इसकी उपयोगिता दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। पाॅलीहाउस ही एक सही विकल्प है जिससे इसकी आपूर्ति की जा सकती है। पाॅलीहाउस में टमाटर उत्पादन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उत्पादन का उच्चतम स्तर हमें तब प्राप्त हो जब बाजार में टमाटर का भाव अधिकतम हो जिससे किसान पाॅलीहाउस में टमाटर की खेती से कम समय में अधिक लाभ कमा सकें।

Due to continuous change in the weather, both the production and quality of vegetables are being affected in the open environment and farmers are facing huge losses. To avoid such problems, the production of vegetables in polyhouse is being considered as a good alternative to increase farmers’ income. Director of Central Institute of Horticulture (CISH) Shailendra Rajan pointed out that they were working to promote government’s policy of reducing input cost and increasing productivity. “Precision farming development centre (PFDC) located at CISH has achieved significant success in the production of quality tomato rich in nutrients. This centre is mainly working on the standardization of technology and capacity enhancement of agriculture and horticulture related to plastics for higher yield. After conducting research on tomato hybrids of the last 5-6 years, it was found that in polyhouse, there are some specific suitable varieties of tomatoes and cherry tomatoes which can be produced successfully through long-term sustainable farming. The plants in the polyhouse resulted in yield 3-5 times more than the productivity of the same crop in open conditions. “Some varieties produce 15-20 kg tomatoes in polyhouse conditions. In open conditions, they may produce 5-8 kg tomatoes per plant. Cherry tomatoes are the richest in major nutraceutical lycopene and other antioxidants. Plants cultivated in the polyhouse yielded uniform size and red coloured tomatoes, which is a major factor in indicating the market value. Dr. V.K. Singh, Principal Scientist and Project Investigator explained that success had been achieved by adopting canopy management drip irrigation, fertilizers applied with irrigation water and mulching in the plants. “Under this technique, after 20-25 days of planting, plants are pruned at the height of 30 cm to develop branches from the top cut and are allowed to grow. In this technique, there is a significant reduction in the cost of providing nutrients from fertilisation. Water use efficiency is increased and weeds are effectively controlled, thus this technology can increase the income of farmers by high productivity and low cost. Generally, a tomato plant yield 8-12 bunches and each bunch may have 6-10 tomatoes. But in some varieties, 14-18 bunches of 8-10 fruits per cluster have been harvested. Fruit weighs around 150-180 grams is attained in most of the varieties. But in a bunch of cherry tomatoes, 25 fruits have been found, weighing 15-25 grams,” he added. The scientists said that the storage capacity of tomatoes produced in the polyhouse was much higher than the fruits produced in the open due to number of fungi, yeast, bacteria which may affect the upper surface of the fruit is open conditions. “In addition, a tomato crop can be grown in the polyhouse for up to 6 months, whereas in the open environment it is roughly half the period. In the polyhouse, per hectare about 2500-3000 quintals of tomato and 800-1000 quintals of cherry tomatoes can be produced. Therefore, by adopting this new technique, farmers can increase their income by 3-4 times. The success of tomato production in the polyhouse depends on peak production when the price of tomatoes is very high in the market, so that farmers can make more profit in short time than tomatoes cultivation in the open conditions. Consumption of cherry tomato is increasing due to health benefits as they are rich in potassium, lycopene and many antioxidants which protect human body damage of cells, lowering risk of a number of chronic diseases, including heart disease and cancer. “With increasing awareness, the market of cherry tomatoes will definitely grow in India as well. Since, cherry tomatoes are mostly consumed as salad and for producing high quality fruits, polyhouse cultivation is the best option for meeting the demand.

Event Date:- 26-04-2018

Root-knot nematode emerging as major threat to guava nursery industry

Shailendra Rajan, Director (CISH) apprising the magnitude of the problem conveyed that extensive/intensive surveys undertaken by Principal scientist Dr. R.M. Khan have brought to fore that Private and govt. nurseries located especially in Lucknow, Badaun and Farrukhabad regions have been principally found the source of inoculums and subsequent cause of infestation build up first in nurseries itself followed by its spread and subsequent infestation in the newly established orchards in the areas of Rajasthan where guava cultivation has captured significant acreage.

Symptoms of infestation appear in form of swelling of roots which goes unnoticed and eventually turn into elongated swelling giving an appearance of beads. Severe infestation leads to formation of galls of varying shape and size ranging from oval, globose to spherical. Root infestation and formation of galls restricts the root growth which is reflected in form of poor plant growth with lesser number of branches having leaves of smaller size. Severely infested grafts succumb to mortality even in poly bags/beds. Such grafts in poly bags when uprooted exhibit blackened and rotten roots due to subsequent infection of fungi. Grafts having smaller size galls become the potential source of spread of pest infestation in far and wider areas. Infested plant when introduced in the newer areas carries the infestation along. Infested plants initially depending upon the infestation level may exhibit normal growth initially for a period of 1 to 2 year. However, gradually the population increases resulting in poor stand of plants having smaller size, lesser number of leaves. Plants having infestation of nematodes becomes vulnerable to fungal infection and starts exhibiting rotting of the whole root system resulting in complete mortality of even grown up established plants on the orchards. The craze for a higher profit margin, poor understanding of the pests and disease scenario and non-adoption of good nursery maintenance practices (GNMP) has led to the emergence of root-knot nematode a soil-based pest responsible for ruining even the grown-up guava orchards as one of the important factors in the arena of pest complex.

Event Date:- 26-04-2018

Students from Banda visit CISH for knowledge update

ज्ञानार्जन हेतु बांदा के छात्रों का सीआईएसएच भ्रमण

बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में संचालित फल प्रजनन पाठ्यक्रम के छात्रों (45) ने ज्ञानार्जन हेतु दिनांक 21.04.2018 को भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ का दौरा किया। छात्रों ने पपीते के ट्रांसजेनिक क्षेत्र में हुई प्रगति और फसलों के सुधार के लिए आणविक प्रजनन के उपयोग में रुचि दिखाई। संस्थान के निदेशक डॉ. शैलेंद्र राजन ने कहा कि बांदा विश्वविद्यालय में फल प्रजनन पर पाठ्यक्रम चलाया जा रहा है जिसमें भारत में उगाए जाने वाले प्रमुख फलों के प्रजनन के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है और छात्रों हेतु यह एक्सपोजर विज़िट नई किस्मों को तैयार करने वाले व्यावहारिक और वैज्ञानिक पहलुओं को समझने में सहायक होगी

The students (45 nos.) attending fruit breeding course at Banda University of Agriculture and Technology visited ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Lucknow on 21.04.2018 to update their knowledge. The students were interested in knowing the recent developments in the area of transgenic in papaya and use of molecular breeding for improvement of fruit crops. Dr. Shailendra Rajan, Director (CISH) said that the university was offering fruit breeding course which covers various aspects of breeding of major fruits grown in India and this exposure visit is helpful in understanding practical and scientific aspects crafting new varieties.

Event Date:- 21-04-2018

Quinquenial Review Team Meeting of ICAR-AICRP-Fruits on mango, Guava and Litchi at Lucknow

लखनऊ में आम, अमरूद और लीची पर आईसीएआर-एआईसीआरपी-फलों की क्यूआरटी की बैठक

एआईसीआरपी-फलों की क्यूआरटी बैठक दिनांक 11-13 अप्रैल, 2018 को आईसीएआर-सीआईएसएच, लखनऊ में आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य कृषि-जलवायु परिस्थितियों के आधार पर स्थान एवं आवश्यकतानुरूप प्रौद्योगिकियों का परीक्षण एवं सिफारिश करना था। क्यूआरटी की बैठक डॉ. एस. राजन, निदेशक, सीआईएसएच, लखनऊ के स्वागत सम्बोधन के साथ प्रारम्भ हुई। पद्मश्री डॉ. के.एल. चड्ढा की अध्यक्षता में हुई बैठक में अन्य विशिष्ट सदस्य डॉ. एस. मैती, डॉ. डी.एस. खुर्दिया, डॉ. बी.एम.सी. रेड्डी और डॉ. वी.एस. ठाकुर समिल्लित हुये। परियोजना समन्वयक डॉ. पी. पाटील, आईसीएआर-आईआईएचआर, बेंगलुरु ने एआईसीआरपी रिपोर्ट को विस्तार से प्रस्तुत किया। सीआईएसएच, लखनऊ के एआईसीआरपी-फलों के नोडल अधिकारी, डॉ. के.के. श्रीवास्तव, प्रधान वैज्ञानिक ने बताया कि भारत के हर हिस्से से आम, अमरूद और लीची के विभिन्न पहलुओं पर काम करने वाले 40 से अधिक वैज्ञानिकों ने क्यूआरटी की समीक्षा के दौरान 2011 से 2017 की अवधि में किए गए विभिन्न प्रयोगों की प्रगति पर चर्चा करने के लिए भाग लिया। आम, अमरूद और लीची के 80 प्रयोगों की विस्तृत रूप में चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने आम, अमरूद, लीची और अन्य फलों की खेती से जुड़े प्रगतिशील किसानों के साथ बातचीत की। किसानों ने दशहरी की कम कीमत, आम और अमरूद के कीट/व्याधि आदि के लिए चिंता व्यक्त की। विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने ई-विपणन के माध्यम से कृषि आय बढ़ाने के लिए किसानों को जागरूक भी किया।

QRT meeting of AICRP -Fruits was held during April 11-13, 2018 at ICAR-CISH, Lucknow. The objective of the meeting was to testing and recommending of location and need based technology depending on agro-climatic conditions. QRT meeting started with welcome remark of Dr. S. Rajan, Director, CISH Lucknow. Meeting held under the Chairmanship of Padmashri Dr. K.L. Chadha. Other distinguished members were Dr. S. Maiti, Dr. D.S. Khurdia, Dr. B.M.C Reddy and Dr. V.S. Thakur. Project Coordinator Dr. P. Patil, ICAR-IIHR, Bengaluru submitted the AICRP Report in detail. Nodal Officer of AICRP-Fruits of Lucknow, Dr. K.K. Srivastava, Principal Scientist, told that more than 40 scientists working on different aspects of mango, guava and litchi fruits from every part of India participated to discuss the progress made in different experiments from 2011 to 2017 during the review of QRT. A total of 80 experiments of mango, guava and litchi were discussed in length and breadth. Experts had interactions with progressive farmers associated with cultivation of mango, guava, litchi and other fruits. Farmers expressed concern for low price of Dashehari, insect, pest and disease of guava, and mango etc. Expert scientists also told trick to the farmers for increasing farm income through E-marketing.

Event Date:- 11-04-2018

Participation in Kisan Mela at NDUAT, Faizabad

एनडीयूएटी, फैजाबाद में किसान मेला में संस्थान की भागीदारी

नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, फैजाबाद में 5-6 अप्रैल, 2018 को आयोजित राज्य स्तरीय किसान मेले में संस्थान ने शोध तकनीकों को प्रदर्शित किया। राज्य कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि थे। पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों ने संस्थान के स्टाल का दौरा किया और रूट-स्टाक की उपलब्धता, आम में फलन न होना, आम और अमरूद में अति सघन बागवानी, आम की तुड़ाई तकनीक, मैंगो हारवेस्टर, एफिड, भुनगा, पाउडरी मिल्डयू, एन्थ्रेक्नोज, डायबैक नियंत्रण आदि के विषय में जानकारी प्राप्त की। कई उद्यमियों ने नर्सरी एवं फल आधारित प्रसंस्करण इकाईयों की स्थापना में रूचि दिखाई। प्रदर्शनी के लिए संस्थान को सांत्वना पुरस्कार प्राप्त हुआ।

Institute displayed its exhibits during state level Kisan Mela (Farmers Fair) organized at NDUAT, Faizabad from 5-6 April 2018. Honorable Minister for Agriculture Shri Surya Pratap Shahi was the Chief Guest of inaugural ceremony. Farmers from eastern UP visited the Institute stall and enquired about availability of root stocks scion, unfruitfulness in mango, HDP of mango and guava, mango harvesting techniques, mango harvester, control of aphid, bhunga, powdery mildew, anthracnose, dieback etc. Many new entrepreneurs showed their interest in establishing nursery and fruit based processing units. The Institute bagged consolation prize for the exhibits during mela.

Event Date:- 05-04-2018

Puducherry farmers and officials visited CISH

पुदुचेरी के किसानों एवं अधिकारियों द्वारा संस्थान का भ्रमण

संस्थान द्वारा विकसित आम एवं अमरूद उत्पादन की नवीनतम तकनीकों को जानने के उद्देश्य से पुदुचेरी के किसानों (20) एवं अधिकारियों (5) ने दिनांक 02.04.2018 को संस्थान का भ्रमण किया। उन्हें संस्थान की शोध तकनीकों से अवगत कराया गया और उनकी समस्याओं पर भी चर्चा की गई। विशेषता किसानों ने अमरूद की अति सघन बागवानी तकनीक को सराहा। उन्होंने अपने क्षेत्र में नर्सरी स्थापित करने में रूचि दिखाई एवं संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा पुदुचेरी में प्रशिक्षण देने हेतु आग्रह भी किया ताकि उस क्षेत्र के अन्य किसान भी लाभान्वित हो सकें।

Twenty farmers and five officials from Puducherry visited ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Lucknow on 02.04.2018 to learn new technologies for mango and guava cultivation developed by the institute. They were made aware about research technologies developed by the Institute and also discussed various problems related to mango and guava cultivation faced by them. Farmers were fascinated to see ultra high-density planting in guava. They were interested to develop nursery at their place and also have training in their area by CISH scientists so that many more farmers are benefitted.

Event Date:- 02-04-2018

ICAR- CISH Scientists took stock of mango pest and disease status in different districts of Uttar Pradesh and Uttarakhand

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में आम कीट और रोग की स्थिति का जायजा लिया

आम के कीट थ्रिप्स एवं भुनगा ने न केवल आम उत्पादकों को बल्कि भा.कृ.अनु.प.-के.उ.बा.सं., रहमानखेड़ा, लखनऊ के वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी चुनौती बनायी है। इस सन्दर्भ में के.उ.बा.सं. के निदेशक डॉ. एस. राजन ने बताया कि पिछले एक महीने में हम प्रत्येक दिन किसानों से कई फोन कॉल प्राप्त कर रहे हैं। किसान रिपोर्ट कर रहे हैं कि कोई कीटनाशक इन कीटों का प्रबंधन करने में सक्षम नहीं है। इसे ध्यान में रखते हुए इस समस्या के समाधान हेतु प्रयासों को आवश्यक समझा गया। आम के कीट एवं व्याधि के साथ-साथ कीटों के प्राकृतिक शत्रु के विषय में जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. पी.के. शुक्ला और डॉ. गुंडप्पा ने दिनांक 1 से 5 अप्रैल, 2018 को हरदोई, बदायूँ, संभल, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत, शामली, सहारनपुर, हरिद्वार, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर और बरेली जिले का सर्वेक्षण किया। वैज्ञानिकों ने बताया कि कीटनाशक और रोगों के उचित प्रबंधन के लिए पारिस्थितिक तंत्र संतुलन बहुत महत्वपूर्ण है। प्राकृतिक शत्रु (लेडी बर्ड बीटल, क्रायसोइपिड्स, सीरफिड्स, मकड़ियों और पैरासिटोइड) अच्छी तरह से व्यवस्थित बागों के विपरीत कम प्रबंधित बागों में प्रचुर मात्रा में पाए गए। कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग ने न केवल कीटों और रोगजनकों के प्राकृतिक शत्रुओं को मार डाला है बल्कि कीटों में प्रतिरोध का विकास भी किया है। वैज्ञानिकों ने यह देखा कि किसान कम मात्रा में कीटनाशकों का उपयोग कर रहे हैं जो कीटों को प्रभावी रूप से प्रबंधित करने में सक्षम नहीं हैं ओर ये कारक कीट आबादी में प्रतिरोध के विकास के लिए योगदान कर रहे हैं।

Mango thrips and hopper has created a great challenge not only before growers but also for scientists of ICAR-CISH, Rehmankhera, Lucknow. Speaking about it, Dr. S. Rajan, Director, CISH told that we have been receiving many calls from farmers everyday during last one month. Farmers have been reporting that no pesticide is able to manage those pests. Keeping in view that calls are coming from those farmers who are unsuccessful, it was felt necessary to workout ground reality. Two scientists, Dr. P.K. Shukla and Dr. Gundappa surveyed Hardoi, Badaun, Sambhal, Meerut, Muzaffanagar, Bagpat, Shamli, Saharanpur, Haridwar, Bijnor, Amroha, Moradabad, Rampur and Bareilly districts for incidence of insect pests and disease of mango along with natural enemies of pests during 1st to 5th April. Scientists reported that “ecosystem balance is very important for getting the proper management of insect pests and diseases”. Natural enemies (Lady bird beetles, Crysopids, syrphids, spiders and parasitoids) population was found abundant in least managed orchards in contrast to well managed orchards. Indiscriminate use of pesticide has not only killed natural enemies of pests and pathogens but also contributed development of resistance in insect pests. Scientists has noticed that farmers are using cocktail of pesticides at lower dosages which are not able to manage the insects effectively and these factors further contribute towards the development of resistance in pest population.

Event Date:- 01-04-2018

ICAR-CISH Technologies for Expression of Interest

Application are invited from interested entrepreneur for the purchase of following technologies.

CISH- Herbal Chew

CISH- Aonla Cider

CISH-Aonla Fibre Biscuits

CISH- Aonla Tea

CISH- Mango Wine

CISH- Aonla Dill Squash and RTS

CISH- Aonla Fennel Squash and RTS

CISH- Aonla Coriander Squash and RTS

CISH-Sugar cane Aonla Vinegar

Please send expression of interest latest by 7.4.2018 to Director ICAR-CISH, Lucknow by email to cish.lucknow@gmail.com, with a copy to itmu.cish@gmail.com (0522-2841022) on the following format along with a application fee of Rs. 10,000 (refundable).

The Firm bidding highest will be selected. Decision of Director ICAR-CISH will be final.

FORMAT FOR EXPRESSION OF INTEREST

1. Name and full address of the Organization:

2. Brief description of the present business:

3. Current operational area and qualification:

4. Contact person with Designation:

5. Contact telephone numbers and email:

6. Turnover for last three years, if any:

7. Company registration with GST No.:

8. Reason for interest :

Signature of authorized person

Event Date:- 28-03-2018

Cleanliness awareness programme organized under MGMG

मेरा गांव मेरा गौरव कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान द्वारा दिनांक 28.03.2018 को ग्राम टिकैतगंज मंडोली विद्यालय तथा ग्राम दुगौली आंगनवाड़ी केंद्र में स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

दिनांक 28.03.2018 को मेरा गांव मेरा गौरव कार्यक्रम के अंतर्गत भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के वैज्ञानिकों डॉ नीलिमा गर्ग, डॉ दिनेश कुमार तथा श्री हरिश्चंद्र वर्मा द्वारा टिकैतगंज मंडोली विद्यालय तथा ग्राम दुगौली आंगनवाड़ी केंद्र में स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर वैज्ञानिकों ने बच्चों को स्वच्छता के नियमों से अवगत कराया। इसके उपरांत बच्चों में स्वच्छता संबंधी भाषण प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। बच्चों ने स्वच्छता के विषय में अपने विचार प्रस्तुत किए। भाग लेने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार वितरित किए गए।

Event Date:- 28-03-2018

Farmers excelling in strawberry cultivation

युवाओं द्वारा स्ट्रॉबेरी की खेती के सफल प्रयास

लखनऊ के आसपास के क्षेत्रों में स्ट्रॉबेरी की खेती अपनी पहचान बना रही है और विशेषकर युवा आय सृजन के लिए एक प्रमुख फसल के रूप में स्वीकार कर रहे हैं| इसकी खेती लखनऊ के आसपास लगभग दो दशकों से हो रही है परंतु विगत 3 सालों में जो उत्साह किसानों ने इसकी खेती के लिए दिखाया है वह उत्साहवर्धक है| कई नए युवाओं ने केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान से परामर्श करके इसकी खेती सफलतापूर्वक प्रारंभ की| लखनऊ में कानपुर रोड के बन्थरा में श्री धीरेंद्र सिंह और श्रीमती सरिता गुप्ता ने लीज भूमि पर स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू करने के लिए 2015 में सीआईएसएच के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ अशोक कुमार से परामर्श किया। वैज्ञानिक के मार्गदर्शन में उन्होंने चांडलर किस्म के 500 पौधों के साथ इस उपक्रम की शुरूआत की और पहले वर्ष में सफलतापूर्वक अच्छी फसल का उत्पादन किया। वर्तमान में वे 10,000 से अधिक पौधे लगाकर अच्छी गुणवत्ता वाले स्ट्रॉबेरी का उत्पादन कर रहे हैं| उनका उत्पाद माल एवं स्ट्रॉबेरी के विपणन कर्ताओं के बीच में अपनी पहचान बना चुका है | यह विशेषज्ञों से परामर्श और दिए गए सुझावों को कार्य रूप में लाने का ही फल है कि एक बड़े क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की खेती करते हुए यह किसान प्रतिदिन 40 से 50 किलो स्ट्रॉबेरी का उत्पादन कर रहे हैं जिसका उन्हें बाजार फरवरी में डेढ़ सौ से 200 रुपये प्रति किग्रा मूल्य मिल रहा है| महमूदनगर तालुकेदारी (मलिहाबाद) गांव के एक अन्य भूमिहीन मजदूर श्री विरेंद्र रावत ने पूरे उत्साह के साथ स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। उन्होंने 1000 पौधे लगाए और हर वैकल्पिक दिन 5 से 6 किलोग्राम फल प्राप्त किये और उन्हें 200 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से आसानी से बेचा।

Farmers in areas nearby Lucknow have identified strawberry as one of the paying crops and thus its cultivation is being adopted by many of the youngsters for increased income. Although, strawberry was grown in subtropics for last few decades, but the enthusiasm which has been observed during last three years is remarkable as the farmers are not only consulting scientists from research institutes, but also they are ready to get the planting material transported from long distant places of Himachal Pradesh. This has empowered them for the cultivation as well as innovations in the cultivation of this exotic fruit crop under subtropics. Mr. Dhirendra Singh and Mrs. Sarita Gupta at Banthra, Kanpur Road, Lucknow consulted Dr. Ashok Kumar, Senior Scientist from CISH in 2015 for starting strawberry cultivation in the leased land. In close association with scientist they started this venture with 500 plants of variety Chandler and successfully produced a good crop in first year. Now, they are more than 10000 plants and a good quality strawberry is being produced which has created their identity in malls and among the strawberry suppliers. Learning by doing and consultation with expert for different problems faced in strawberry had made them successful. Gradually, they have become the expert of this crop and are able to guide others for its cultivation. This resulted into cultivation of strawberry at a larger area and these farmers are able to harvest 40 to 50 kg strawberry on alternate days with a market price of Rs.150/- to Rs. 200/- per kg from February onwards. Another land less farm worker Shri Virendra Rawat of Village Mehmoodnagar Talequdari (Malihabad) also started strawberry cultivation with full enthusiasm. He planted 1000 plants and every alternate day he is able to harvest 5 to 6 kg of fruits and has become self employed and sells his produce at Rs. 200 per kg easily.

Event Date:- 26-03-2018

Cleanliness awareness programme organized under Mera Gaon Mera Gaurav

मेरा गांव मेरा गौरव कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान द्वारा स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

दिनांक 24.03.2018 को मेरा गांव मेरा गौरव कार्यक्रम के अंतर्गत भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के वैज्ञानिक तथा कर्मचारीगण डॉ नीलिमा गर्ग, श्री हरिश्चंद्र वर्मा, श्री सुभाष चंद्रा, श्री अरविंद कुमार, श्री राजबहादुर एवं श्री बलविंदर ने ग्राम रसूलपुर प्राथमिक विद्यालय तथा ग्राम अल्लूपुर आंगनवाड़ी केंद्र में स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर वैज्ञानिकों ने बच्चों को स्वच्छता के नियमों से अवगत करवाया कराया। इसके उपरांत बच्चों में स्वच्छता संबंधी भाषण प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। बच्चों ने स्वच्छता के विषय में अपने विचार प्रस्तुत किए। भाग लेने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार वितरित किए गए।

Event Date:- 24-03-2018

Krishi Unnati Mela at IARI New Delhi on 17 March 2018

It is inform that Honorable Prime Minister, Sri Narendra Modi will address to farmers, scientists and extension personnel form Krishi Unnati Mela Ground, IARI, New Delhi on 17.03.2018. Please Visit: http://iari.res.in/kum2018/kum/index.html Event Date:- 17-03-2018

Webcast for Krishi Unnati Mela-2018

Live Webcast of Honorable Prime Minister Address to Farmers, Agriculture Scientists and Other Stakeholders in Krishi Unnati Mela 2018 on 17th March 2018 at 11:30 AM. Please Visit: Webcast link of live telecast of Krishi Unnati Mela 2018. Event Date:- 17-03-2018

Report on the webcasting of the Krishi Unnati Mela Event at ICAR-CISH, Lucknow

कृषि उन्नति मेला 2018 के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री जी के भाषण का सीधा प्रसारण एवं कृषक गोष्ठी का आयोजन

भारतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान, पूसा नई दिल्ली में 16 से 18 मार्च तक आयोजित कृषि उन्नति मेला 2018 के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने रिमोट द्वारा देश में 25 नए कृषि विज्ञान केंद्रों का उद्घाटन किया जिसमें अमेठी, अमरोहा, संभल सहित उत्तर प्रदेश को 5 नए कृषि विज्ञान केंद्र मिले| माननीय प्रधानमंत्री ने देश भर से आये लाखो किसानो को सम्बोधित किया जिसमे किसानोपयोगी योजनाओ के विषय में विस्तृत जानकारी दी| इस अवसर पर भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान ने निदेशक डॉ. शैलेन्द्र राजन के मार्गदर्शन में संस्थान का स्टाल लगाया गया जिसमे संस्थान द्वारा किये गए शोधों एवं तकनीकों को प्रदर्शित किया गया | देश भर से आये किसानो-बागवानों ने संस्थान द्वारा विकसित तकनीकों की जानकारी ली एवं उन्हें अपनाने में उत्सुकता दिखाई| साथ ही संस्थान द्वारा केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमान खेड़ा परिसर तथा क्षेत्रीय केंद्र मालदा (पश्चिम बंगाल) में किसानो को माननीय प्रधानमंत्री जी का सीधा भाषण सुनने एवं वैज्ञानिको के साथ विचार विमर्श हेतु किसानो को आमंत्रित किया गया| रहमानखेड़ा परिसर में 400 से अधिक किसान एवं मालदा में लगभग 500 किसान शामिल हुए| रहमानखेड़ा परिसर में प्रधानमंत्री जी के भाषण के सीधे प्रसारण के उपरांत किसानो-वैज्ञानिको के बीच बागवानी से सम्बंधित समस्याओं पर परिचर्चा का भी आयोजन किया गया जिसमें संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मनीष मिश्रा, डॉ. वी. के. सिंह, डॉ. एस. के. शुक्ला, डॉ. पी. के. शुक्ला, डॉ. (श्रीमती) नीलिमा गर्ग ने बागवानों की विभिन्न समस्याओं का समाधान बताया|

Event Date:- 17-03-2018

Horti-Entrepreneurship Seminar on Value Addition, Nursery and Tissue Culture 12-02-2018

ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Lucknow in Collaboration with Centre for Agriculture & Rural Development will organize a Horti-Entrepreneurship Seminar on 12-02-2018 at ICAR-CISH, Rehmankhera, Lucknow. Horticultural technologies such as value addition, protected cultivation of high value horticultural crops, nursery and tissue culture could play a major role in developing entrepreneurship in Uttar Pradesh. The seminar will bring in policy makers, bankers, research institutions, private players and potential entrepreneurs under one platform to promote Horti-Food Processing Entrepreneurship in the state. Any citizen of Uttar Pradesh who is willing to develop Horti-Entrepreneurship can register online. A total number of 100 candidates will be selected on first cum first serve basis. Successful candidates will be informed subsequently. Registration Closed Event Date:- 12-02-2018

Application invited for Gardner trainees

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत २०० घंटे का माली कार्य प्रशिक्षण

ICAR-CISH is organizing "Gardener Skill Development Training" programme under PMKVY (Prime Minister Kaushal Vikas Yojana), interested person may submit the following information for their participation in the training programme.

Click here to register yourself Event Date:- 05-02-2018

Refresher Course organized at ICAR-CISH, RRS, Malda for ATMA Officials

भा.कृ.अनु.प.-के.उ.बा.स., क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, मालदा द्वारा एटीएमए अधिकारियों के लिए रिफ्रेशर कोर्स का आयोजन

भा.कृ.अनु.प.-के.उ.बा.स., क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, के.उ.बा.स.-कृषि विज्ञान केंद्र, मालदा द्वारा एटीएमए के अधिकारियों के ज्ञानवर्धन के लिए दिनांक 1 से 3 फरवरी 2018 तक रिफ्रेशर कोर्स का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के सफलतापूर्ण आयोजन में राज्य नोडल अधिकारी, एटीएमए और कृषि निदेशक, पश्चिम बंगाल सरकार के कार्यालय से वित्तीय सहायता एवं कृषि उपनिदेशक (प्रशासन) का महत्वपूर्ण योगदान रहा। मालदा के 15 अलग अलग ब्लॉकों से 50 एटीएमए कार्यकर्ताओं (बीटीएम और एटीएम) ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल सरकार और भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न नवीनीकृत तकनीकों और योजनाओं की जानकारी दी गयी। यह पाया गया है कि एटीएमए की योजनाएं, एटीएमए के कार्यकर्ताओं की भागीदारी द्वारा जमीनी स्तर पर अधिक कारगर हैं इसलिए के.उ.बा.स.-कृषि विज्ञान केंद्र एवं के.उ.बा.स.-क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, उत्पादकों और किसानों के बीच प्रौद्योगिकियों के बेहतर प्रसार के लिए एटीएमए अधिकारियों के साथ विभिन्न विस्तार गतिविधियों को क्रियान्वित करने की योजना बना रहा है एवं एटीएमए के कार्यकर्ताओं और किसानों के बीच प्रभावी बातचीत के लिए एक सयुंक्त मंच स्थापित करने जा रहा है।

CISH-KVK, CISH-RRS, Malda has taken initiative for up-scaling the knowledge of ATMA functionaries through 3 days Refresher Course during 1st February to 3rd February, 2018. This program was organized in collaboration with Deputy Director of Agriculture (Admn.) and financial support from Office of the State Nodal officer, ATMA and Director of Agriculture, Government of west Bengal. Fifty ATMA functionaries (BTMs & ATMs) attended the course from 15 different blocks of Malda actively participated in updating different improved technologies and schemes running by Government of West Bengal and Government of India. It has been noticed that ATMA schemes have great potential with intensive deployment of ATMA functionaries at grass root level. ICAR-CISH RRS & KVK has been planning to execute various extension activities by handholding the ATMA functionaries in disseminating improved technologies among the growers and farmers. A common platform is going to establish for effective interaction with ATMA functionaries and farmers.

Event Date:- 01-02-2018

Participation in Kisan Mela at CSIR-CIMAP, Lucknow

किसान मेला में भागीदारी

संस्थान ने 31 जनवरी 2018 को सीएसआईआर-केन्द्रीय औषधीय एवम सगंध पौधा संस्थान, लखनऊ द्वारा आयोजित किसान मेला में प्रदर्शनी में भाग लिया। श्री गिरिराज सिंह, माननीय मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) माइक्रो, लघु और मध्यम उद्यमों, भारत सरकार, नई दिल्ली ने श्री सूर्य प्रताप शाही, माननीय कृषि मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार के साथ इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

Institute participated and displayed its exhibits in Kisan Mela organised by CSIR- Central Institute for Medicinal and Aromatic Plants (CIMAP), Lucknow on January 31, 2018. The event was inaugurated by Hon’ble Minister Sate (Independent Charge) for Micro, Small & Medium Enterprises, Govt. of India, New Delhi Shri. Giriraj Singh alongwith Hon’ble Minister for Agriculture, Govt. of U.P. Shri Surya Pratap Shahi.

Event Date:- 31-01-2018

Participation in TEDx Event at SRM University, Lucknow

डॉ. शैलेन्द्र राजन, निदेशक. भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान लखनऊ ने दिनांक 20.01.2018 को एस आर एम यूनिवर्सिटी, लखनऊ में आयोजित टीईडी एक्स (TEDx) के अवसर पर फलो के राजा "आम" और उसकी किस्मो के बारे में व्याख्यान दिया। टीईडी एक्स सफल उद्यमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओ, कलाकारों, इंजीनियरों, डॉक्टरों आदि लोगो को अपने अनुभवों को साझा करने के लिए एक मंच प्रदान करता है। डॉ. सुधीर के. मिश्रा, महानिदेशक (ब्रह्मोस) डीआरडीओ, रक्षा मंत्रालय ने बताया कि भारत डिजिटल क्रांति के सहयोग से अपनी सभ्यता और संस्कृति की विरासत को समृद्ध बनाने के लिए अग्रसर है। श्री आर पी सिंह, फास्ट-मीडियम तेज गेंदबाज ने एक छोटे शहर रायबरेली से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व करने की यात्रा को साझा किया। रोहतक की निवासी ऋतु सैन ने अपने ऊपर एसिड हमले की कहानी को साझा किया।

Dr. Shailendra Rajan delivered lecture on KING OF FRUITS "MANGO" and the craft that goes into creating new varieties in TEDxSRMU at SRM University, Lucknow on 20.01.2018. TEDx provides a platform where many successful en¬trepreneurs, social workers, artists, engineers, doctors etc share their experiences. Dr Sudhir K Mishra, Director General (BrahMos), DRDO, Ministry of Defense, talked about how the country was experiencing a digital revolution that has taken, over India, a country with rich heritage, civilization and culture. RP Singh fast-medium pacer recalled journey from a small town Rae Bareli to representing India in interna¬tional cricket. Rohtak resident Ritu Sain acid attack survivor shared her story.

Event Date:- 20-01-2018

Horti-Entrepreneurship Seminar organized on 19 January, 2018

बागवानी -उद्यमिता सेमिनार का आयोजन

लखनऊ में कृषि और ग्रामीण विकास केंद्र (कार्ड) के सहयोग से भाकृअनुप-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ ने दिनांक 19-01-2018 को एक दिवसीय संगोष्ठी होर्टि-उद्यमिता का आयोजन किया। इसका उद्घाटन श्री सुधीर गर्ग, प्रधान सचिव (बागवानी), उत्तर प्रदेश सरकार ने किया | डॉ. अनिस अन्सारी, अध्यक्ष कार्ड, डॉ. एस. राजन, निदेशक, भाकृअनुप-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ, श्री नबीन रॉय, सहायक महानिदेशक, नाबार्ड, श्रीमती नीरा चक्रवर्ती, जोनल मैनेजर, इंडियन बैंक तथा आईसीएआर-सीआईएसएच और विभिन्न अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों ने भी संगोष्ठी में हिस्सा लिया। संगोष्ठी के दौरान, टिशू कल्चर के क्षेत्र में उद्यमशीलता के विकास पर तकनीकी सत्र, ग्रीन हाउस की खेती, हाई टेक नर्सरी और मूल्य वृद्धि का आयोजन किया गया जिसमें सत्तर उद्यमिता उम्मीदवारों, विशेषज्ञों और बैंकरों ने भाग लिया। बागवानी-उद्यमिता के विभिन्न क्षेत्रों के लिए वित्तीय सहायता की उपलब्धता पर राज्य सरकार के अधिकारियों, बैंकरों और प्रतिनिधियों द्वारा चर्चा की गई। इस अवसर पर विभिन्न प्रतिभागियों को वित्तीय आवश्यकता से संबंधित कानूनी मुद्दे, पंजीकरण और सरकारी मंजूरी को विशेषज्ञों द्वारा समझाया गया।

The ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Lucknow in collaboration with Center for Agriculture and Rural Development (CARD) organized a one day seminar Horti-entrepreneurship on 19 January, 2018. It was inaugurated by Shri Sudhir Garg, Principal Secretary, (Horticulture), Lucknow Dr Anis Ansari, Chairman CARD, Horticulture; Dr. S. Rajan, Director, ICAR-CISH, Mr. Nabin Roy, AGM, NBARD, Ms. Neera Chakrabvarty, Zonal Manager, Indian Bank and scientists from ICAR-CISH and different other Institutes attended the seminar. During the Seminar, technical sessions on entrepreneurship development in the field of tissue culture, green house cultivation, high tech nursery and value addition were organized and attended by seventy experts and entrepreneurship aspirants and bankers. Financial assistance available for different areas of Horti-entrepreneurship was discussed among state department officers, bankers and delegates. The potential Horti-entrepreneurs attended the seminar from various districts of the Uttar Pradesh. On this occasion, Legal issues, registration and government clearances related with financial requirement of different technologies were explained by the resource persons.

Event Date:- 19-01-2018

Applications for Green House Operator Trainees

सुनियोजित कृषि विकास केन्द्र परियोजना अंतर्गत 200 घंटों के ग्रीन हाउस प्रचालक प्रशिक्षण

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ द्वारा प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की महत्वकाँक्षी स्कीम में सुनियोजित कृषि विकास केन्द्र परियोजना अंतर्गत 200 घंटों के ग्रीन हाउस प्रचालक प्रशिक्षण का आयोजन 15 जनवरी, 2018 से 14 फरवरी, 2018 तक किया जाएगा जिसमें युवाओं को ग्रीन हाउस प्रचालन में सुयोग्य बनाकर उन्हें कौशल प्रमाणीकरण प्रदान किया जाए जिससे कि ग्रीन हाउस प्रचालन सम्बन्धी कौशल प्रशिक्षण के द्वारा बेहतर आजीविका सुनिश्चित कर सकें। इस प्रशिक्षण में रूचि रखने वाले कम-से-कम पाँचवीं कक्षा तक पढ़े हुए लोग (ग्रीन हाउस में कार्य किये हुए लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी) अपना आवेदन डॉ. वी.के. सिंह, प्रधान वैज्ञानिक एवं परियोजना अन्वेषक, पी.एफ.डी.सी, आई.सी.ए.आर-सी.आई.एस.एच., रहमानखेड़ा, पोस्ट-काकोरी, लखनऊ-226101 को 5 जनवरी, 2018 तक डाक के माध्यम से या ई-मेल से singhvk_cish@rediffmail.com को प्रेषित कर सकते हैं। सीमित सीट होने के कारण पहले आने वाले आवेदनों को प्राथमिकता दी जाएगी। संस्थान द्वारा रहने, आने-जाने तथा भोजन का खर्च वहन किया जाएगा।

ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Rehmankhera, Lucknow invites the applications for Green House Operator Trainees organized under Pradhan Manti Kaushal Vikas Yojna (PMKVY) in flagship scheme of the Ministry of Skill Development & Entrepreneurship (MSDE) under Agricultural Skill Council of India (ASCI) in PFDC project with objective to provide the expertise in Green House operation and crops production techniques with skill certification that will help the youth in securing a better livelihood. The training will be conducted from 15th January to 14th February, 2018 for 200 working hours. Interested persons who are at least 5th pass (preference will be given to person having experience in Green House working) may send their application to Dr. V.K. Singh, Principal Scientist & Principal Investigator, PFDC, ICAR-CISH, Rehmankhera, P.O.-Kakori, Lucknow-226101 up to 5th January, 2018 by post or by email: singhvk_cish@rediffmail.com. Due to availability of limited seats selection will be made on first come first serve basis. All the boarding and lodging expenses of trainees will be born by the Institute.

Event Date:- 15-01-2018 to 14-02-2018

Agro-biodiversity Exhibition

कृषि जैवविविधता प्रदर्शनी का आयोजन

भाकृअनुप-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ द्वारा दिनांक 15 जनवरी , 2018 को अपने प्रक्षेत्र में संरक्षित आम, अमरूद, जामुन और ऑंवला की विविधता को आईसीएआर-आईआईएसआर, लखनऊ में आयोजित कृषि जैवविविधता प्रदर्शनी के दौरान प्रदर्शित किया गया। जैवविविधता प्रदर्शनी के दौरान संस्थान ने स्थानीय समुदायों की मदद से किसानों की किस्मों के संरक्षण के लिये किये गये कार्यों को प्रदर्शित किया गया। 400 से अधिक किसानों ने प्रदर्शनी का भ्रमण किया और जैव विविधता संरक्षण के महत्व को समझा। प्रदर्शनी में आँवला, अमरुद, बेल और सेम (डोलिकोस बीन) की विविध किस्में भी प्रदर्शित की गयीं। शीतोष्ण सब्जियों की किस्मों का भी प्रदर्शन किया गया जिसमें विभिन्न प्रकार के सलाद, स्विस चार्ड एवं केल शामिल थे।

The ICAR-CISH, Lucknow showcased the diversity of mango, guava, jamun and aonla maintained by the Institute at the ICAR-IISR, Lucknow premise on 15th January, 2018. Initiatives made by the Institute for the protection of farmers’ varieties with the help of communities were also displayed. More than 400 farmers visited the exhibition. Diversity in anola, guava, bael and sem (dolicos bean) were also displayed. A good number of temperate vegetable varieties were displayed which include different types of lettuce, Swiss chard and kale.

Event Date:- 15-01-2018

Annual Review Meeting of DUS

डीयूएस की वार्षिक समीक्षा बैठक का आयोजन

भाकृअनुप-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ एवं आईसीएआर-आईआईएसआर, लखनऊ में दिनांक 15-17 जनवरी , 2018 को पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण, नई दिल्ली ने डीयूएस की वार्षिक समीक्षा बैठक का आयोजन किया। डॉ एस. राजन, निदेशक ने फल वृक्षों के डीयूएस परीक्षणों के ऑन साइट प्रणालियों का मानकीकरण किये जाने की आवश्यकता के महत्व पर प्रकाश डाला जिससे फल वृक्षों का परीक्षण 2 वर्षों में पूरा किया जा सके। बैठक के दौरान आम, कागजी नींबू और अखरोट किस्मों के ऑन-साइट प्रमाणन की प्रगति की समीक्षा की गयी। संस्थान द्वारा किसानों को फल किस्मों के पंजीकरण के लिए तकनीकी सहायता प्रदान की गयी।

The ICAR-CISH organized the Annual DUS Review Meeting on January, 15-17, 2018 at ICAR-IISR, Lucknow. Dr. S. Rajan, Director underlined the need to standardize on-site test methodology of DUS testing of fruit tree crops for completing the testing in 2 years which usually takes more time due to long juvenile period. Progress on on-site certification of mango, kagji lime and walnut varieties were reviewed during the meeting. During the meet, it was observed that the Institute should provide technical assistance to facilitate the farmers’ variety registration.

Event Date:- 15-01-2018

Greenhouse operator training under ASCI

भारत के कृषि कौशल परिषद के अंतर्गत ग्रीनहाउस ऑपरेटरों के लिये प्रशिक्षण

भारत के कृषि कौशल परिषद के दिशा-निर्देशों के अनुसार भाकृअनुप-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ के सुनियोजित कृषि विकास केन्द्र के तत्वावधान में ग्रीनहाउस प्रचालकों के लिए ग्रीन हाउस उत्पादन और प्रबंधन संबंधी उद्यमशीलता विकसित करने के लिये संस्थान अपने प्रायोगिक प्रक्षेत्र में दिनांक 15 जनवरी से 14 फरवरी, 2018 तक (200 घंटे) कौशल विकास प्रशिक्षण का आयोजन कर रहा है। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से तीस प्रशिक्षु प्रशिक्षण में भाग ले रहे हैं। उच्च मूल्य वाले सब्जियों, फूल और नर्सरी उत्पादन की खेती के लिए ग्रीनहाउस की बढ़ती संख्या के साथ, ग्रीनहाउस ऑपरेटरों की मांग बढ़ रही है जो संरक्षित संरचनाओं को प्रभावी ढंग से प्रबंधित कर सकते हैं। प्रशिक्षण उन युवाओं के लिए बेहद उपयोगी है जो ग्रीनहाउस ऑपरेटर को व्यवसाय के रूप में अपनाना चाहते हैं। डॉ. वी.के. सिंह और डॉ. एस.आर. सिंह, प्रधान वैज्ञानिकों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है।

The ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Lucknow under the aegis of Precision Farming Development Centre (PFDC) is conducting Skill Development Training from 15 January to 14 February 2018 (200 hours) as per the guidelines of Agriculture Skill Council of India for Greenhouse Operators at its experimental farm of the Institute at Rehmankhera for developing entrepreneurship in the area of green house production and management. Thirty trainees from different parts of the country are attending the training. With the increasing number of greenhouses for cultivation of high value vegetables flowers and nursery production, there is an increasing demand of greenhouse operators who can manage protected structures effectively. The training is exceedingly useful for those youth who wish to opt for greenhouse operator as a profession. Dr V.K. Singh and Dr. S.R. Singh, Principal scientists of the institute are the key resource persons.

Event Date:- 15-01-2018

Horticultural Society of India Fellowship- 2017

Dr. Kanchan Kumar Srivastava born on 25th February, 1972 Sultanpur, U.P, obtained his B.Sc. (Ag) and M.Sc. Ag. (Hort.-Fruit Science) degree from NDUAT, Faizabad, U.P. and Ph.D. (Hort- Fruit Science) from Institute of Agricultural Sciences, B.H.U. Varanasi. He is recipients of Junior Research Fellowship (ICAR), 1995, and UGC Award after attaining first rank in Research Entrance Test of BHU. Dr. Srivastava is a recipient of Rajbhasba Gaurav Award (2015) for writing original scientific book in Hindi, Young Scientist Associate Award (2012, SIEMAT, Bioved) and best DUS test centre award 2010-11.

Dr. Srivastava started his career as Assistant Professor at SKUAST-K, Srinagar, J&K in 2001 and joined as Senior Scientist in Fruit Science at ICAR-CITH, Srinagar in 2008 and joined as, Principal Scientist in 2014. Dr Srivastava’s field of specialization is Tree Architecture Management, Fruit Crop Improvement. He has been Principal Investigators of 22 External and internal funded projects. Dr. Srivastava has released 04 sweet cherry, 05 walnut, 01 apricot varieties and also collected good numbers of Malus, Pyrus, Prunus and Ambri apple genotypes, added in National Active Germplasm Sites Repository.

Dr Srivastava developed the efficient tree architecture techniques i.e. Espalier and Vertical axis (Single axis) for Ultra High Density Planting of apple and Rejuvenation techniques for old and senile almond orchards. Divisive the DUS descriptors for testing of pome fruits (apple and pear) and stone fruits (sweet cherry and apricot). During his carrier he has published more than 80 research papers in National and International Scientific journals, 03 scientific books and dozen extension bulletins in English, Hindi and Urdu.

Event Date:- 04-01-2018

27th Meeting of Institute Management Committee (IMC) संस्थान प्रबंधन समिति की 27 वीं बैठक

संस्थान में दिनांक 20 दिसंबर, 2017 को संस्थान प्रबंधन समिति की 27 वीं बैठक का आयोजन किया गया। निदेशक डॉ. शैलेंद्र राजन ने अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में संस्थान की प्रगति का विस्तृत विवरण दिया। श्री आर एन मल्लिक, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने कार्रवाई की गई रिपोर्ट प्रस्तुत की। डॉ. मनीष मिश्रा, प्रधान वैज्ञानिक ने "फार्मर फर्स्ट" की उपलब्धियाँ प्रस्तुत की। समिति के समक्ष कुल सात स्वीकृत एजेंडाओं को प्रस्तुत किया गया। डॉ. अमरेश चंद्र, प्रभागाध्यक्ष, पादप दैहिकी विभाग, भा.कृ.अनु.प.- भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ, डॉ. बी.एल. राम, प्रमुख बागवानी, बागवानी निदेशालय, उत्तर प्रदेश सरकार, डॉ. नीलिमा गर्ग, प्रभागाध्यक्ष, तुड़ाई उपरांत प्रबंधन विभाग और डॉ. घनश्याम पांडेय, प्रभागाध्यक्ष, फसल उत्पादन विभाग बैठक के दौरान उपस्थित थे।

Institute organized 27th meeting of Institute Management Committee (IMC) on 20th December, 2017. Dr. Shailendra Rajan, Director in his introductory remark gave detailed account of the progress made by Institute since last IMC meeting. Action taken report was presented by Sri R. N. Mallik, Senior Administrative Officer. Dr. Maneesh Mishra, Principal Scientist and special invitee of IMC made presentation on achievements of Farmer FIRST project. A total of 7 agenda items were presented before the committee which was approved. Dr. Amresh Chandra, Head, Plant Physiology, ICAR-IISR, Lucknow, Dr. B.L. Ram, Chief Horticulturist, Directorate of Horticulture, Govt. of UP., Dr. Neelima Garg, Head PHM Division and Dr. G. Pandey, Head, Crop Production were present during the meeting.

Event Date:- 20-12-2017

Exposure visit of farmers

किसानों का भ्रमण

पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिला संतकबीर नगर के 25 किसानों हेतु दिनांक 16.12.2017 को आई.सी.ए.आर.-सी.आई.एस.एच. में उपोष्ण फलों के उत्पादन की विभिन्न तकनीकों पर एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। किसानों को उन्नत किस्मों, फसल उत्पादन, व्याधि एवं कीट प्रबन्धन के विभिन्न सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया गया। यह जागरूकता कार्यक्रम किसानो के लिए नर्सरी प्रबन्धन, बेहतर खेती की तकनीकों, मूल्य वृद्धि और जिले में फल के लिए बड़े पैमाने पर नर्सरी स्थापित करने के लिए उपयोगी होगा।

ICAR- CISH Lucknow organized a exposure visit and awareness programme (sponsored by ATMA) on various technologies for subtropical fruit production on 16.12.2017. Twenty farmers of Sankabir Nagar, Uttar Pradesh were exposed on various technology developed by the Institute viz., varieties, crop production, insect pest management and post harvest management aspects. The exposure visit was useful to the farmers for learning various aspect of advance nursery management practices, improve cultivation practices and value addition of fruit crops in their area.

Event Date:- 16-12-2017

Education tour of Govt. Girls Inter College, Hazratganj, Lucknow

राजकीय बालिका इण्टर कालेज, हजरतगंज, लखनऊ का शैक्षिक भ्रमण

राजकीय बालिका इण्टर कालेज, हजरतगंज, लखनऊ की 50 छात्राओं एवं 5 अध्यापिकाओं ने प्राचार्या के नेतृत्व में दिनांक 16.12.2017 को आई.सी.ए.आर.-सी.आई.एस.एच. का भ्रमण किया। जिला परियोजना कार्यालय के निर्देश को ध्यान में रखते हुए छात्राओं के लिए यह एक शैक्षिक भ्रमण था। इस भ्रमण में आम, अमरूद, बेल, लीची, जामुन आदि के प्रायोगिक पौधे और विभिन्न प्रयोगशालाओं को देखकर छात्राएं और शिक्षिकायें लाभान्वित हुयीं। संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डा. वी. के. सिंह एवं डा. अन्जू बाजपेयी ने बच्चों को बतायी गयी प्रौद्योगिकियों को अपने-अपने क्षेत्रों में प्रयोग में लाने के लिए प्रोत्साहित किया।

About fifty students along with five teachers and principal of the of GGIC, Hazratganj school visited ICAR-CISH, Lucknow as a part of their educational tour on 16.12.2017. The education tour of student was a result of the directive of the district project office to visit national reputed institute for getting the innovated idea of the students for their betterment of knowledge. In course of their visit, the students were addressed by the scientist. Students visited the field where collections of mango varieties are available. Students were also visited the cultivation of different crops under poly house condition, post harvest laboratory and products and molecular biology laboratory. The have interacted with the scientists on different aspects of fruit crops. The students as well as teachers were extremely happy to see mango, guava, bael, litchi, jamun, etc., experimental plots. Dr. V.K. Singh and Dr. Anju Bajpai, Principal Scientists of the Institute suggested children to take the knowledge to their areas and apply them in their respective farm field.

Event Date:- 16-12-2017

Technology demonstration and awareness programme organised at farmers field

तकनीक स्थानान्तरण कार्यक्रम के तहत किसानों के प्रक्षेत्र में प्रदर्शन

भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ के वैज्ञानिक डा. वी. के. सिंह, डा. ए. के. भट्टाचार्य, डा. ए. के. त्रिवेदी तथा पी.एफ.डी.सी. परियोजना में कार्यरत डा. मनोज कुमार सोनी, नीरज कुमार शुक्ला द्वारा दिनांक 16.12.2017 को ग्राम-बेलगढ़ा, विकास खंड-मलिहाबाद, जनपद-लखनऊ में टमाटर की खेती एवं सब्जियों के उच्च गुणवत्तायुक्त उत्पादन हेतु तकनीकी जानकारी देने के लिए किसान के प्रक्षेत्र में प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि प्रो-ट्रे या प्लास्टिक ट्रे नर्सरी उगाने की एक नवीन पद्धति है जिसमें उच्च पैदावार वाली टमाटर की संकर किस्मों को लगाकर उच्च गुणवत्ता वाली फसलों की नर्सरी का उत्पादन सफलता पूर्वक किया जा सकता है। प्लास्टिक ट्रे में उगाये गये पौधों में रोपाई के दौरान पौधों की जड़ों को कम नुकसान पहुँचता है तथा कीट एवं व्याधियों का प्रकोप नहीं पाया जाता है और किसान टमाटर की अच्छी फसल प्राप्त कर सकते हैं। इस अवसर पर किसानों को प्रो-ट्रे का वितरण भी किया गया। इसके बाद किसानों ने सब्जियों के उत्पादन में होने वाली अन्य समस्याओं पर चर्चा की। टमाटर की हिमसोना प्रजाति (इनडिटरमिनेट टाइप) का किसान के प्रक्षेत्र में लगभग 6000 वर्ग फ़ीट में टमाटर का पौध रोपण कर प्रदर्शन किया गया।

ICAR- CISH Lucknow scientists Dr. V.K. Singh, Dr. A.K. Bhattacharya and Dr. A.K. Trivedi conducted a demonstration trial and awareness programme for high quality nursery production with assistance of PFDC staffs Dr. Manoj Kumar Soni and Shri Neeraj Kumar Shukla at Belgarha, Malihabad, Lucknow on 16.12.2017. During this programme, scientists create awareness among farmers about advance technology; pro-tray and plastic tray for nursery production. This technology would beneficial for high quality production of nursery for tomato and vegetable crops. Nursery raising in soil less culture in pro tray was demonstrated for successful quality production of tomato. About 300 seedling of tomato cv. Heemsona in pro tray were also distributed. Thereafter, farmers discussed about problems faced during vegetable production. The appropriate management practices were also demonstrated in planted indeterminate tomato cv. Heemsona.

Event Date:- 16-12-2017

Awareness workshop on ‘Safe use of pesticides in Agriculture’

मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर कीटनाशकों के कुप्रभाव को कम करने एवं प्रयोग के दौरान सावधानी पर चर्चा करने के लिए संस्थान में दिनांक 11 दिसंबर 2017 को बायर क्रॉप साइंस लिमिटेड के सहयोग से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कीटनाशकों के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने, अच्छे कृषि अभ्यासों को प्रोत्साहित करने तथा किसानों के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की भागीदारी के महत्व पर भी विचार-विमर्श किया गया। फार्मर फर्स्ट परियोजना के किसानों ने भी कार्यशाला में भाग लिया तथा अपने प्रश्नों के द्वारा सम्बन्धित समस्याओं से अवगत कराया।

One day workshop organized on December 11, 2017 on ‘Safe use of pesticides in Agriculture’ was organized in collaboration with Bayer Crop Science Limited for discussing careful use of pesticide to reduce its dreadful effects on the human health and environment. Importance of Public Private Partnership to create awareness among the farmers to inculcate good agricultural practice to reduce the adverse effects of the pesticides was also deliberated. Farmers of the farmer FIRST project also participated in the workshop.

Event Date:- 11-12-2017

Training on Aonla products

आई.सी.ए.आर.-सी.आई.एस.एच. के फसल तुड़ाई उपरांत प्रबंधन विभाग द्वारा दिनांक 11 दिसंबर 2017 को मेरा गांव मेरा गौरव कार्यक्रम के अंतर्गत आंवला के उत्पादों पर प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें नई बस्ती गांव से 38 महिलाओं एवं छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। डॉ. नीलिमा गर्ग और डॉ. तरुण अदक ने प्रशिक्षण का समन्वय किया।

ICAR-CISH organized one day hands on training on December 11, 2017 on aonla products in the Division of Post Harvest Management. A group of 38 women and students from the Naibasti village under Mera Gaon Mera Gaurov programme enthusiastically participated in the training programme. Dr. Neelima Garg and Dr. Tarun Adak co-ordinated the training.

Event Date:- 11-12-2017

Educational tour of Government Girls Inter College, Malihabad, Lucknow

सरकारी बालिका इंटर कॉलेज, मलिहाबाद, लखनऊ की 20 छात्राओं ने प्राचार्या श्रीमती कमलेश सोनकर के नेतृत्व में 8 दिसंबर, 2017 को शैक्षिक भ्रमण के रुप में भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ का भ्रमण किया। छात्रों के शैक्षणिक दौरे के लिए जिला परियोजना कार्यालय के निर्देश को ध्यान में रखते हुए छात्राओं के लिये यह एक शैक्षणिक भ्रमण था। इस अवसर पर छात्राओं को संबोधित करते हुए डॉ. शैलेंद्र राजन, निदेशक, आईसीएआर-सीआईएसएच, लखनऊ ने संस्थान के जीन बैंक प्रक्षेत्र में उपलब्ध आम की भारतीय एवं विदेशी किस्मों के बारे में जानकारी दी। उनसे आम की किस्मों और मलिहाबाद के महत्व के बारे में चर्चा की। आम, अमरूद, बेल, लीची, जामुन, आदि प्रायोगिक पौधों को देखकर छात्राएं और शिक्षिकाएं लाभान्वित हुए। बच्चों को बतायी गयी प्रौद्योगिकियों को अपने-अपने क्षेत्रों में प्रयोग में लाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

Twenty students of standard IX of Government Girls Inter College, Malihabad, Lucknow led by Smt. Kamlesh Sonkar, Principal visited ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Rehmankhera, Lucknow as a part of their educational tour on 8th December, 2017. The educational tour of the students was a result of the directive of the District Project Office to visit six research Institutes for the betterment of the students’ knowledge. In course of their visit, the students were addressed by Dr. Shailendra Rajan, Director, ICAR-CISH, Lucknow. Students visited large collection of Indian as well as exotic mango varieties available in the Institute’s field gene bank. As the students were from the nearby areas, he asked them about mangoes and the importance of Malihabad in relation to mangoes. The students as well as teachers were extremely happy to see mango, guava, bael, litchi, guava, jamun, etc. experimental plants. Dr. Rajan also dealt with the significance of local and Malihabadi mango varieties. He further suggested children to take the knowledge to their areas and apply them in their respective farm fields.

Event Date:- 08-12-2017

विश्व मृदा दिवस का आयोजन

भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान रहमानखेड़ा, लखनऊ में दिनांक 5 दिसम्बर 2017 को विश्व मृदा दिवस मनाया गया। इसके अंतर्गत लखनऊ जिले के किसानों विशेषकर पौधशाला कर्मियों को उनकी नर्सरी की मृदा को किस प्रकार स्वस्थ रखते हुए रोगमुक्त पौध सामग्री तैयार की जाये विषय पर जानकारी दी गयी। डॉ. प्रकाश पाटिल परियोजना समन्वयक (फल) एआईसीआरपी ने इस समारोह की अध्यक्षता की और उन्होंने कहा कि बेहतर गुणवत्ता वाले फल उत्पादन के लिए मिट्टी का स्वास्थ्य महत्वपूर्ण है। उन्होंने मिट्टी के स्वास्थ्य के बारे में पौधशाला स्वामियो को संवेदित करने में सीआईएसएच के प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर बोलते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. शैलेन्द्र राजन ने कहा कि निरंतर उच्च उत्पादन की प्राप्ति के लिये मृदा स्वास्थ्य अत्यंत महत्वपूर्ण है । फसलों के मृदा स्वास्थ्य तथा संतुलित पोषक तत्वों के प्रयोग के महत्व को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने किसानों में 10 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किये हैं। केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान रहमानखेड़ा लखनऊ भी इस दिशा में योगदान दे रहा है तथा मृदा दिवस के अवसर पर मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित करता रहा है। इस मृदा दिवस कार्यक्रम में किसान, पौधशाला स्वामी, वैज्ञानिक एवं तकनीकी अधिकारियों सहित लगभग 70 लोग सम्मिलित हुए।

World Soil Day

World Soil Day was celebrated by ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Lucknow on 5th December 2017 to sensitize farmers especially nurserymen of Lucknow district towards keeping nursery soil healthy for the production of disease free planting material. Dr. Prakash Patil, Project Co-ordinator of AICRP, Fruits chaired this function and he told that ‘Soil health is important for better quality fruit production and he appreciated the efforts of CISH in sensitizing the nurserymen about the soil health’. On the occasion Director of the Institute, Dr. Shailendra Rajan told “Soil health is important for sustainable food production system”. Keeping in view the importance of soil health and balance nutrition application to crops, Government of India has already distributed over ten crores of soil health cards to the farmers in the country. ICAR-CISH is also contributing in this direction and soil health cards were distributed to the farmers on the occasion of world soil day. Farmers, nurserymen, scientists and technical officers (70) attended the programme.

Event Date:- 05-12-2017

Project Coordinator, AICRP (Fruits) visit

अखिल भारतीय समन्वित शोध परियोजना (फल) के परियोजना समन्वयक डॉ. प्रकाश पाटिल ने दिनांक 5-6 दिसम्बर 2017 को संस्थान में चल रहे प्रयोगों का निरीक्षण एवं समीक्षा की।

Project Coordinator, AICRP (Fruits) visited the institute during December 5-6, 2017 for review of the progress of experiments being carried out. During his visit he observed experiments at site.

Event Date:- 05-12-2017

Agriculture Education For Rural Youth

ग्रामीण युवाओं के लिए कृषि शिक्षा

कृषि शिक्षा दिवस को आईसीएआर-सीआईएसएच, लखनऊ द्वारा ग्रामीण छात्रों के बीच मल्लीहाबाद, उत्तर प्रदेश के नबी पनाह में मनाया गया। युवाओं को कृषि शिक्षा एवं उसके विभिन्न पहलुओं से परिचित कराने के लिएवैज्ञानिक, प्रगतिशील किसानों और शिक्षकों ने गोल्डन जुबली स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। छात्रों को कृषि, जैविक खेती आदि के विभिन्न क्षेत्रों के बारे में सिखाया गया। कृषि के ग्रामीण युवाओं को कृषि मेंप्रोत्साहित करने के लिए फार्मर फर्स्ट गांव में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। दो गैर सरकारी संगठनों अवध आम उत्पादक एवं बागानी समिति और सोसाइटी फॉर कन्जर्वेशन ऑफ मैंगो डायवर्सिटी ने भी इस कार्यक्रम मेंभाग लिया। केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान रहमान खेड़ा के वैज्ञानिकों एवं समुदाय आधारित संगठनों ने छात्रों को कृषि शिक्षा के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी दी तथा बैंक, कृषि विभाग, राज्य कृषिविश्वविद्यालयों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं प्राइवेट क्षेत्र में कृषि विद्यार्थियों के लिए बढ़ते हुए अवसरों के बारे में जानकारी पर चर्चा की।

In order to make young children acquaint about agriculture education, scientists of ICAR-CISH, progressive farmers and teachers organized a sensitization program at Golden Jublee School at Nabi Panah (Malihabad). Director of the Institute stressed on importance of agriculture education in improving health and wealth of the nation. Students were taught about the various fields of agriculture, organic farming etc. The program was organized in Farmer FIRST village to encourage rural youth in agriculture. Two NGOs Awadh Aam Utpadak Bagwani Samiti and Society for Conservation of Mango Diversity also participated in the event. Scientist from the ICAR-CISH along with the local members of the community based organization organized awareness programme and explained the students about the prospects and requirements for the career in Agricultural Sciences. This steam of education can make them ready for available opportunities in banks, agriculture departments, state agriculture universities, ICAR and not the least in the increasing number of private companies working on production of agricultural inputs.

Event Date:- 03-12-2017

One day Kisan Mela and Technology Exhibition at ICAR-CISH Lucknow

एक दिवसीय किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी का आयोजन

भाकृअनुप-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान अपने रहमानखेड़ा परिसर में दिनांक 30.11.2017 को एक किसान मेले का आयोजन कर रहा है। इस कार्यक्रम में माननीय उप-मुख्यमंत्री, डॉ. दिनेश शर्मा एवं श्रीमती स्वाती सिंह, कृषि निर्यात-विपणन एवं विदेश व्यापार राज्यमंत्री, 500 से अधिक आमन्त्रित किसानों को संबोधित करेंगे। इस मेले का मुख्य उद्देष्य उत्पादन उपरांत विपणन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं निर्यात क्षेत्र की समस्याओं पर मंथन एवं निराकरण हेतु मार्ग प्रशस्त करना है। किसान मेले के अवसर पर किसानों से संबंधित सूचना का ‘ई-प्लेटफार्म’ भी उपलब्ध कराया जायेगा जिससे उपभोक्ता आधुनिक तकनीकी के प्रयोग से सीधे कृषकों से संपर्क कर सकें और कृषक विपणन कर अधिक लाभ प्राप्त कर सकें। इस अवसर पर कृषि तकनीकी प्रदर्शनी के अतिरिक्त कृषकों को कृषि विविधीकरण अंगीकरण हेतु साहित्य वितरण भी किया जायेगा।

ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Lucknow is organizing one day Kisan Mela cum technology exhibition at Rehmankhera on 30th November, 2017. The Deputy Chief Minister of Uttar Pradesh Dr. Dinesh Sharma and Mrs. Swati Singh, Minister of State for Agriculture Import, Agriculture Marketing, and Agriculture Foreign will participate and address the gathering of about 500 farmers. The main objective of the programme is to provide solutions to major problems faced by horticulture farmers and create awareness about improved production technologies, crop protection and post harvest management practices. During the Kisan Mela E-platform Portal providing single window e-solutions to farmers’ problems will be launched and the exhibition of agro-horticultural technologies, distribution of information bulletins related to increasing horticultural productivity will also be held.

Event Date:- 30-11-2017

Kisan Mela cum Agricultural Technology Exhibition Organized

किसान मेला-सह-कृषि प्रौद्योगिकीय प्रदर्शनी का आयोजन

भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ में 30 नवंबर, 2017 को किसान मेला-सह-कृषि प्रौद्योगिकीय प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इसका आयोजन फार्मर्स फस्र्ट, सुनियोजित कृषि विकास केन्द्र, उपोष्ण बागवानी समिति तथा केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ के संयुक्त तत्वाधान में किया गया जिसमें 450 किसान सम्मिलित हुए। इस किसान मेला का उद्घाटन डॉ. बी.एस. चूंडावत, पूर्व कुलपति नवसारी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. मथुरा राय, पूर्व निदेशक भारतीय सब्जी अनुसंधान केन्द्र, बनारस वाराणसी तथा डॉ. यू.एस. गौतम निदेशक अटारी, कानपुर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर अपने संबोधन में संस्थान के निदेशक डॉ. शैलेन्द्र राजन ने कहा कि किसानों के लिए उनकी आय का सर्वाधिक महत्वपूर्ण श्रोत बागवानी हो सकता है। फार्मर्स फस्र्ट परियोजना के तहत मेरा गाँव मेरा गौरव कार्यक्रम के द्वारा किसानों की आय को दोगुना करने को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने आम आधारित कुकुट फार्मिंग व्यवस्था प्रारंभ की है जो मलिहाबाद के चार गाँव में प्रसारित हो चुकी है। इसके तहत लगभग 100 किसानों की आय को दोगुनी करने का प्रयास किया जा रहा हैं। किसान मेला-सह-कृषि प्रौद्योगिकीय प्रदर्शनी के अवसर पर संस्थान ने 10 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया जिन्होंने अपनी आय दोगुना या उससे अधिक की है। इस अवसर पर प्रगतिशील किसान, श्री शैलेन्द्र रघुवंशी ने बताया कि किस प्रकार उन्होंने नर्सरी उद्यमिता के द्वारा संस्थान के सहयोग से सफलता प्राप्त की है। इसके अलावा महाराष्ट्र के अमरूद उत्पादक श्री मानिक राव महावीर प्रसाद ने संस्थान के सहयोग से अपनी आय दोगुनी की है, ने भी सफलता की जानकारी दी । श्री उपेन्द्र सिंह जो एक सफल आम उत्पादक एवं उद्यमी हैं, ने भी फार्मर फस्र्ट परियोजना के अंतर्गत मोबाईल वैन से आम बेचे। इस अवसर पर फार्मर फस्र्ट डायरी तथा बागवानी प्रौद्योगिकीयों से संबंधित सूचना पैमफ्लेट और फोल्डर भी किसानों के लिये जारी किये गये।

Kisan Mela-cum-Agricultural Technology Exhibition was organized by ICAR-CISH, Lucknow on 30th November, 2017. More than 450 farmers hand held through Farmer FIRST and PFDC projects took part in the event. Kisan Mela-cum-Agricultural Technology Exhibition was inaugurated by Dr. B.S. Chundawat, Former Vice-Chancellor, Navsari Krishi Vishwa Vidyalaya along with Dr. Shailendra Rajan, Director, ICAR-CISH, Lucknow, Dr. Mathura Rai, Former Director, IIVR, Varanasi, Dr. U.S. Gautam, Director, ICAR-ATARI, Kanpur. Dr. Shailendra Rajan reiterated that horticulture remains the best option in fulfilling the vision of Hon’ble Prime Minister of India Sri Narendra Modi towards doubling farmer’s income particularly in sub tropics. The farmers expressed their gratitude to the Institute and its mission mode program such as Farmer FIRST, Precision Farming Development Centre and Mera Gaon Mera Gaurav for providing technological back up for augmenting their income. Farmers hand held under Farmer FIRST project brought their produce (Vegetables, grafted plants, flowers, eggs, and poultry) for sale at the Exhibition. Institute has introduced a diversified horti-module viz., Mango based poultry farming which has spread to 4 villages in Malihabad and helped in doubling income to close to 100 farmers in 8 months time. Institute honored 10 progressive farmers who could augment their income many fold through Institute’s initiative. During the occasion Mr. Shailendra Raguvansi, progressive guava farmer narrated his success story of becoming a nursery entrepreneur through skill development provided by ICAR-CISH whereas Mr. Manik Rao Mahavir Prasad another guava farmer from Maharashtra who could double his income through guava orcharding in two years time with Institute’s intervention. Mr. Upendra Singh became a successful mango entrepreneur and sold his Dashehari mango using mango mobile van, a new initiative he got from Farmer FISRT project. Many pamphlets and folders containing information on horticultural technology and Farmer FIRST diary was inaugurated during the event.

Event Date:- 30-11-2017

Training programme on Improved cultivation of subtropical fruits

"उपोष्ण फलों की बेहतर खेती" पर प्रशिक्षण कार्यक्रम

भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ ने कृषि तकनीकी प्रबंधन शाखा, नाशिक, महाराष्ट्र के सहयोग से नाशिक के २० किसानों के लिए " उपोष्ण फलों की बेहतर खेती" पर दिनांक २९ नवंबर से १ दिसंबर, २०१७ तक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इस प्रशिक्षण में किसानों को आम, अमरूद, आंवला और बेल के जीर्णोद्धार, छत्र प्रबंधन और सघन बागवानी तकनीकी के विभिन्न पहलुओं पर प्रबुद्ध किया गया ।

ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Lucknow organised training programme (November 29 to December 01, 2017) sponsored by Agricultural Technology Management Agency (ATMA), Nashik, Maharastra on “Improved cultivation of subtropical fruits” for twenty farmers of Nashik, Maharastra”. Trainees were enlightened on various aspects of production technology including rejuvenation, canopy management and high density planting of mango, guava, aonla and bael.

Event Date:- 29-11-2017

Students of Government High School Sindharwa, Malihabad, visited ICAR-CISH, Lucknow

राजकीय माध्यमिक विद्यालय सिंधवा, मलिहाबाद लखनऊ के छात्र-छात्राओं का संस्थान भ्रमण

राजकीय माध्यमिक विद्यालय सिंधवा, मलिहाबाद के छात्र-छात्राओं ने दिनांक २९ नवंबर २०१७ को भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ का भ्रमण किया। इस भ्रमण के दौरान, संस्थान के वैज्ञानिको ने विभिन्न तकनीकियों जैसे उपोष्ण फसलों (आम, अमरूद, आंवला, बेल आदि) के जीर्णोद्धार, छत्र प्रबंधन और सघन बागवानी तकनीकी, तुड़ाई उपरांत प्रबंधन एवं खाद्य प्रसंस्करण, मूल्य वर्धित उत्पाद के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की।

Students of Government High School Sindharwa, Malihabad visited ICAR-CISH, Lucknow on 29 November, 2017. During this visit, Scientists briefed about institute technologies viz. rejuvenation, canopy management, high density planting, post harvest management and value added products of mango, guava, aonla and bael.

Event Date:- 29-11-2017

22nd Research Advisory Committee Meeting

२२वीं अनुसंधान सलाहकार समिति की बैठक

भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ की २२वीं अनुसंधान सलाहकार समिति की बैठक डॉ. बी.एस. चुण्डावत (पूर्व-वीसी नवसारी कृषि विश्वविद्यालय, गुजरात) की अध्यक्षता में दिनांक २८ नवम्बर २०१७ को आयोजित की गयी। डॉ. डब्ल्यू.एस. ढिल्लन (उप महानिदेशक, उद्यान विज्ञान, भा.कृ.अनु.प.), डॉ. के.के. जिंदल (पूर्व-उप महानिदेशक, उद्यान विज्ञान, भा.कृ.अनु.प.), डॉ. एन.एस. पसरीचा (पूर्व-निदेशक, भारतीय पोटाश संस्थान), डॉ. प्रेम शंकर सिंह (प्रभागाध्यक्ष-कीट विज्ञान, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय), डॉ. एस. राजन (निदेशक, के.उ.बा.सं.), आर.एम. खान (सदस्य सचिव, आर.ए.सी.), संबंधित विभागों के प्रमुख और संस्थान के वैज्ञानिको ने इस बैठक में भाग लिया। अनुसंधान सलाहकार समिति ने संस्थान के पिछले एक वर्ष के शोध कार्यक्रमों की समीक्षा की एवं भविष्य के शोध कार्यक्रमों पर चर्चा की।

The twenty-second meeting of the Research Advisory Committee of ICAR-Central Institute for subtropical Horticulture, Lucknow was held on November, 28, 2017 at its Rehmankhera campus under the chairmanship of Dr. B.S. Chundawat (Ex-VC, Navsari Agriculture University, Gujrat). Drs. W.S. Dhillon (ADG-HS-II, ICAR), K. K. Jindal (Ex-ADG-HS, ICAR), N. S. Pasricha (Ex-Director, Indian Potash Institute), Prem Shankar Singh (Head, Dept. of Entomology, BHU) members of RAC, S. Rajan (Director, CISH), R.M. Khan (Member Secretary, RAC), Heads of respective divisions as well as scientists of institute participated in the deliberations. RAC committee critically reviewed the on-going research programmes of the institute were carried out during past one year future programmes and offered inputs for further refinement.

Event Date:- 28-11-2017

Constitution Day

संविधान दिवस

भा. कृ. अनु. प.- केंद्रीय उपोष्ण वागबनी संस्थान, लखनऊ ने संविधान दिवस मनाया।

ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Lucknow celebrated Constitution Day

Event Date:- 26-11-2017

P.F.D.C., ICAR-CISH, Lucknow organized Farmers’ Awareness Programme at Sitapur district

पी.एफ.डी.सी., भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ द्वारा बागवानी फसलों में उपयोगी नई प्रौद्योगिकियों की तकनीकी जानकारी देने हेतु सीतापुर जिले में कृषक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

बागवानी फसलों में उपयोगी नई प्रौद्योगिकियों की तकनीकी जानकारी देने के लिए दिनांक 24.11.2017 को ग्राम-पाल्हापुर, जिला-सीतापुर में कृषक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में अनेक प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। इस अवसर पर डा. वी. के. सिंह, पी.आई., सुनियोजित कृषि विकास केन्द्र (पी.एफ.डी.सी.), एन.सी.पी.ए.एच., भारत सरकार, भा.कृ.अनु.प.-के.उ.बा.सं., लखनऊ ने टपक सिंचाई प्रणाली एवं संरक्षित खेती के महत्व एवं पोलीहॉउस द्वारा तकनीक अपनाकर उच्च गुणवत्तायुक्त उत्पादन के विषय में जानकारी प्रदान की । किसानों को बागवानी में जल संरक्षण को ध्यान में रखकर टपक सिंचाई और मल्चिंग का उपयोग कर कम से कम पानी से सिंचाई करने के साथ-साथ पाॅलीहाउस अथवा लो टनल बनाकर सब्जियों को उगाने की भी सलाह दी। साथ ही किसानों से आम, अमरूद एवं सब्जियों के गुणवत्तायुक्त उत्पादन में हो रही समस्याओं पर विस्तृत रूप से चर्चा की गयी एवं समय-समय पर मिट्टी की जाँच कराने की सलाह दी गयी।

An awareness programme was organized at Village-Palhapur, District-Sitapur on 24.11.2017 to impart technical knowledge of new technologies useful in horticultural crops. a number of progressive farmers participated in this programme. On this occasion Dr. V.K. Singh, Project Investigator of Precision Farming Development Centre (P.F.D.C.), N.C.P.A.H., Govt. of India, ICAR-CISH, Lucknow explained the importance of drip irrigation system and protected farming for high quality production of horticultural crops. To keep the water conservation in the horticulture farmers were advised to use drip irrigation for minimizing water requirement of the crop. They have also advised to grow good high value vegetables crop under polyhouse or low tunnel condition for extending their production pierod. After that the farmers discussed in details on the problems being faced in quality production of mango, guava and vegetables and advised to check the field nutrient level of soil time to time.

Event Date:- 24-11-2017

Vigilance Awareness Week 2017

सतर्कता जागरूरकता सप्ताह 2017

भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान रहमानखेड़ा, लखनऊ में 30 अक्टूबर से 04 नवंबर,2017 तक सतर्कता जागरूरकता सप्ताह 2017 मनाया गया | इसके अंतर्गत दिनांक 03.11.2017 को एक कार्यशाला का आयोजन किया गया | कार्यशाला का विषय था "मेरा लक्ष्य - भ्रष्टाचार मुक्त भारत" | इस विषय राष्ट्रीय मत्स्य अनुसंधान संसाधन ब्यूरो के प्रशासनिक अधिकारी श्री अभिषेक राणा ने व्याख्यान दिया | कार्यशाला के दौरान संस्थान के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे |

The Central Institute for Subtropical Horticulture, Rehmnakhera, Lucknow organised Vigilance Awareness Week 2017 from 30th October to 04 November, 2017. In course of the Week, a Workshop was organised on 03.11.2017. During the Workshop, Shri Abhishek Rana, Administrative Officer delivered a lecture on Mera Lakshya - Bhrashtachar Mukt Bharat. During the Workshop, scientists and staff of the Institute were present.

Event Date:- 03-11-2017

ICAR- Zonal Tournament (North Zone) 2017

भा.कृ.अनु.प.- आंचलिक खेल कूद प्रतियोगिता (उत्तर क्षेत्र) २०१७

भा.कृ.अनु.प.- आंचलिक खेल कूद प्रतियोगिता (उत्तर क्षेत्र) 2017 का आयोजन, भा.कृ.अनु.प.- भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में दिनांक 30 अक्टूबर से 2 नवंबर, 2017 के मध्य संपन्न हुआ। डॉ. प्रभात कुमार शुक्ल, वरिष्ठ वैज्ञानिक (पादप रोग) और श्रीमती रेखा चौरासिया, सहायक मुख्य तकनीकी अधिकारी ने भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागबानी संस्थान, रेहमानखेड़ा, लखनऊ का प्रतिनिधित्व करते हुए क्रमशः शतरंज और कैरम प्रतियोगिता में रजत पदक प्राप्त किये। संस्थान के निदेशक के साथ-साथ सभी कर्मचारियों ने उनके उज्ज्वल भविष्य का शुभकामनाएं एवं बधाई दी।

The ICAR- Zonal Tournament (North Zone) 2017 was organized at ICAR- Indian Institute of Sugarcane Research, Lucknow during 30th October to 2nd November, 2017. Dr. Prabhat Kumar Shukla, Senior Scientist (Plant Pathology) and Mrs. Rekha Chaurasia, Assistant Chief Technical officer of the Instituite have received Silver Medal in Chess and Carrom events respectively. The Director along with all staff members of Institute congratulate both of them and wish them a bright future.

Event Date:- 02-11-2017

National Unity Day 2017

राष्ट्रीय एकता दिवस 2017

संस्थान में सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर 31 अक्टूबर, 2017 को राष्ट्रीय एकता दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्थान के पोर्टिको में डॉ शैलेंद्र राजन, निदेशक, आईसीएआर-सीआईएसएच और सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने संप्रभुता की सुरक्षा एवं राष्ट्रीय एकता की शपथ ली। डॉ नीलिमा गर्ग, डॉ एस के शुक्ला और श्री सत्य देव दीक्षित ने राष्ट्रीय एकता पर अपने विचार व्यक्त किए।

Rashtriaya Etka Diwas (National Unity day) was celebrated on the occasion of birth anniversary of Sardar Vallabhbhai Patel at the institute on 31st October 2017. Dr. Shailendra Rajan, Director, ICAR-CISH administered the oath of protecting sovereignty and observing safety at 11.00 A.M. in the portico of the Institute. All officials and employees present in large numbers on the occasion. Dr. Neelima Garg, Dr. S.K. Shukla and Sh. Satya Dev Dixit expressed their views on National Unity.

Event Date:- 31-10-2017

Memorandum of Cooperation MoC on development of Food Processing Sector in Andhra Pradesh signed between ICAR-CISH and The State Government of AP

आईसीएआर-सीआईएसएच और आंध्र प्रदेश राज्य सरकार के बीच खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विकास पर सहयोग ज्ञापन-पत्र (एमओसी)

डॉ. एस. राजन, निदेशक, आईसीएआर-सीआईएसएच ने आंध्र प्रदेश की राज्य सरकार द्वारा 16 अक्तूबर, 2017 को विश्व खाद्य दिवस पर आयोजित खाद्य प्रसंस्करण शिखर सम्मेलन में भाग लिया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य मंत्री एन चंद्राबाबू नायडू और सरकार के अतिरिक्त सचिव ए.पी.एम.गिरिजा शंकर ने की। इस अवसर पर, आंध्र प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विकास पर आईसीएआर-सीआईएसएच और आंध्र प्रदेश की राज्य सरकार के बीच सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

Dr, S. Rajan, Director, ICAR-CISH participated in Food Processing Summit organized by State Government of Andhra Pradesh on 16 October, 2017 by celebrating World Food Day. This event chaired by chief minister N Chandrababu Naidu and presided over by secretary to government of A.P. M Girija Shankar. On this occasion, Memorandum of Cooperation (MoC) signed between ICAR-CISH and The State Government of Andhra Pradesh on development of Food Processing Sector in Andhra Pradesh.

Event Date:- 16-10-2017

Mahila Kishan Diwas at ICAR CISH Krishi Vigyan Kendra, Malda

महिला किसान दिवस

आईसीएआर-सीआईएसएच, कृषि विज्ञान केंद्र, मालदा में दिनांक 15.10.2017 को महिला किसान दिवस का आयोजन किया गया। बंगा रत्न पुरस्कार प्राप्तकर्ता डॉ देबाव्रत मजूमदार, वैज्ञानिक-एफ, टीआईएफएसी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार ने विशेष अतिथि के रूप में और जिले के लाइन विभाग के अधिकारियों एवम लगभग 75 आदिवासी दीदी (जनजातीय फार्म महिला) ने कार्यक्रम में भाग लिया।

Mahila Kishan Diwas was organized at ICAR CISH Krishi Vigyan Kendra, Malda on 15.10.17 in presence of Banga Ratna Awardee Dr. Debabrata Majumdar, Scientist-F, TIFAC, Ministry of Science and Technology, Govt of India as Special Guest and officials from District Line Departments. About 75 Adibasi Didis (Tribal Farm Women) attended the programme. Their wholehearted participation and performance was witnessed as celebration of ADIBASI MAHILA KISHAN DIWAS.

Event Date:- 15-10-2017

Training farmers from Eastern Uttar Pradesh

पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण

उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों के 30 किसानों के लिए 9 अक्टूबर, 2017 से आईसीएआर-सीआईएसएच में उपोषण फलों के उत्पादन लिए विभिन्न तकनीकों पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। प्रशिक्षण बस्ती में स्थित आम के लिए उत्कृष्टता केंद्र द्वारा प्रायोजित है। प्रशिक्षुओं को किस्मों, फसल उत्पादन, व्याधि एवं कीट प्रबंधन और के पहलुओं के विभिन्न सिद्धांतों और व्यावहारिक पहलुओं के प्रशिक्षित किया जाएगा । यह प्रशिक्षण नर्सरी प्रबंधन बेहतर खेती की तकनीकों, मूल्य वृद्धि और पूर्व उत्तर प्रदेश में फल के लिए बड़े पैमाने पर नर्सरी स्थापित करने के लिए उपयोगी होगा।

A three days training programme started on various technologies for subtropical fruit production at ICAR-CISH from 9th October, 2017 with 30 farmers from eastern districts of Uttar Pradesh. The training is sponsored by the centre of excellence from for mango situated at Basti. The trainees will be exposed to various theory and practical aspects on varieties, crop production, insect pest management and post harvest management aspects. This training will be usefull for learning various aspects of advance nursery management practices,improved cultivation practices, value addition and setting up large scale nursery for fruits in Eastern UP.

Event Date:- 09-10-2017

Workshop on Methodological framework on Implementation of Farmer FIRST

फार्मर फर्स्ट के क्रियान्वयन हेतु कार्यविधि रूपरेखा पर कार्यशाला

संस्थान में दिनांक 3-6 अक्टूबर, 2017 को फार्मर फर्स्ट परियोजना के क्रियान्वयन हेतु कार्यविधि रूपरेखा पर एक चार दिवसीय कार्यशाला का आईसीएआर-एनएआरएम, हैदराबाद और आईसीएआर-सीआईएसएच, लखनऊ द्वारा संयुक्त रूप से आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में ग्यारह आईसीएआर संस्थान और राज्य कृषि विश्वविद्यालय जोन -2 और जोन-3 ने भाग लिया। आईसीएआर-एनएआरएएम, आईसीएआर-डीकेएमए, आईसीएआर-आईएएसआरआई और आईसीएआर-एनसीएपी के विशेषज्ञों ने गुणात्मक और मात्रात्मक प्रभाव मूल्यांकन विश्लेषण, भागीदारी प्रौद्योगिकी विकास, सहभागिता मूल्यांकन उपकरण, दस्तावेज और रिपोर्ट लेखन और डेटाबेस प्रबंधन पर प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया। परियोजना प्रबंधन समिति ने आईसीएआर-सीआईएसएच की फार्मर फर्स्ट परियोजना की प्रगति की समीक्षा के लिए मलहिबाद लखनऊ के नबीपनाह और मोहम्मदनगर तालुकदारी गांवों का दौरा किया।

A four day workshop on Methodological framework on Implementation of FFP was organized jointly by ICAR-NAARM, Hyderabad and ICAR-CISH, Lucknow during 3-6 October, 2017 at Institute. Eleven ICAR Institute and SAU from zone-II and zone-III participated in the workshop. Experts from ICAR-NAARM, ICAR-DKMA, ICAR-IASRI and ICAR-NCAP gave training to participants on qualitative and quantitative impact assessment analysis, participatory technology development, participatory appraisal tools, documentation and report writing and database management. Project Management Committee also visited Nabi Panah and Mohammad Nagar Talukedari villages of Malihabad to review the progress of Farmer FIRST project of ICAR-CISH, Lucknow.

Event Date:- 03-10-2017

Workshop on income generation from Mushroom diversity for rural women and landless farmers

मशरूम विविधता अंगीकरण कार्यशाला

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ द्धारा किसानों की आय के स्रोत को बढ़ाने हेतु ‘‘फार्मर्स फर्स्ट परियोजना’’ के अंतर्गत दिनांक 20 सितंबर 2017 को ‘‘मशरूम विविधता अंगीकरण कार्यशाला’’ का आयोजन किया गया। जिसमें लखनऊ, उन्नाव, लखीमपुर खीरी और हरदोई जिलों के 70 कृषकों ने सहभागिता की। इस कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक डॉ. शैलेन्द्र राजन ने अगले पाँच वर्षो में कृषकों की आय को दो गुना करने हेतु मशरूम उत्पादन, मुर्गी पालन और उच्च कीमत वाली अन्तः फसलों को आम के बागों में समावेश करने पर जोर दिया। चन्द्र शेखर कृषि एवं प्रोद्यौगिक वि.वि., कानपुर के प्रो. वेद रतन ने बटन मशरूम उत्पादन की सविस्तार चर्चा की। इस अवसर पर कृषकों को मशरूम उत्पादन प्रारंभ करने हेतु मशरूम किट का वितरण भी किया गया।

The income opportunities for rural women and landless labors are scanty in Malihabad, a famous mango belt in Uttar Pradesh. Viable livelihood options are needed for this most vulnerable group of farmers. In this connection ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture Rehmankhera, Lucknow has organized “Mushroom Diversity Adoption Workshop” on 20-09-2017 under Farmer FIRST program to augment income of this targeted group of farmers. Seventy farmers mostly rural women and small and landless farmers from Lucknow, Unnao, Lakhimpur Kheri and Hardoi districts participated in the workshop.

Event Date:- 20-09-2017

सिरका बनाने की उन्नत विधि का प्रशिक्षण कार्यक्रम

दिनांक 18 सितम्बर 2017 को विज्ञान भवन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उ.प्र. के नवप्रवर्तन खण्ड में केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ द्वारा विकसित मीठे फलों के रस से सिरका बनाने की उन्नत विधि का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें औद्योगिक संस्थानों एवं स्वयं सहायता समूहों के साथ ग्रामीण लोगों ने प्रतिभाग किया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उ.प्र. के संयुक्त निदेशकों डॉ. शशि राणा एवं श्री राधे लाल की उपस्थिति में डॉ. नीलिमा गर्ग, केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान द्वारा इस विधि से औद्योगिक स्तर पर सिरका निर्माण करने की विधि का प्रदर्शन किया गया। इस विधि से औद्योगिक एवं व्यावसायिक स्तर पर भी मीठे फलों के रस से सिरके का उत्पादन करके आय के साधनों तथा रोजगार में वृद्धि भी की जा सकती है। कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले प्रशिक्षणार्थियों को परिषद के द्वारा प्रमाण पत्र भी प्रदान किये गये।

Event Date:- 18-09-2017

Sensitization workshop on micronutrient management, crop diversification, and post harvest management for doubling farmers’ income

किसानों की आय बढ़ाने के लिए सूक्ष्म पोषक प्रबंधन और अन्य बागवानी तकनीकी हस्तक्षेपों पर संवेदीकरण कार्यशाला

पोषण प्रबंधन, फसल विविधीकरण, संरक्षण, फसल के तुड़ाई उपरांत मूल्य में वृद्धि और अन्य संबंधित बागवानी तकनीकियों के माध्यम से किसानों की आय के वृद्धिकरण की आवश्यकता है। इस दिशा में,आई.सी.ए.आर. नेटवर्किग परियोजना "बागवानी की पैदावार और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए पौधों में सूक्ष्म पोषक प्रबंधन" के तहत ग्राम कीटनाखेड़ा, माल, लखनऊ में 16 सितंबर, 2017 को एक संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। डॉ नीलिमा गर्ग, डॉ तरुण अदक, डॉ दिनेश कुमार और डॉ ए.के. भट्टाचार्य ने प्रतिभागियों के साथ बातचीत की और अपनी आय बढ़ाने के लिए कई तरीकों का सुझाव दिया। किसान, महिलाओं, ग्रामीण युवाओं और लड़कियों ने उत्साहपूर्वक इस कार्यक्रम में भाग लिया और गुणवत्ता वाले फल और सब्जियों के उत्पादन के लिए कई सवाल उठाए। डॉ तरुण अदक ने आम और अमरूद में फलों के फटने की समस्या को हल करने के लिए जिंक और बोरान प्रबंधन की सलाह दी तथा अक्टूबर के महीने तक मिट्टी में ज़िंक और बोरोन के प्रयोग के साथ ही फलों के विकास की विभिन्न अवस्थाओं में करने का सुझाव दिया। गुणवत्तायुक्त फल उत्पादन के लिए भी ज़िंक और बोरोन की कमी को दूर करने का सुझाव दिया गया। अक्टूबर के अंत तक आम और अमरूद के लिए पोषक तत्वों के प्रयोग और जल प्रबंधन के बारे में भी किसानों को जाग्रत किया गया। जल की कमी के दौरान नमी संरक्षण और गुठली के पास जेली नियंत्रण के लिए कैल्शियम क्लोराइड के छिड़काव के बारे में भी सुझाव दिया। इसके अलावा,आम और अमरूद में कीटों तथा रोग के नियंत्रण उपायों के बारे में सलाह दी। डॉ नीलिमा गर्ग ने किसानों और खेतीहर महिलाओं को आम तौर पर कच्चे आमों से अमचूर बनाकर आय पैदा करने के लिए प्रेरित किया। यह उत्पाद कम से कम 300 रुपये प्रति किलोग्राम की अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकता है। आम का गूदा व अन्य उत्पादों को बनाने के लिए भी सलाह दी गई थी। किसानों को आम और अमरूद के बगीचों में कीटनाशकों के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी गई। डा दिनेश कुमार ने किसानों को प्रभावी कैनोपी प्रबंधन,अन्तः फसल, नर्सरी उत्पादन, सब्जियों का उत्पादन विशेषकर ऑफ-सीजन सब्जियों के बारे में सुझाव दिया त कि ग्रामीणों द्वारा अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें। उन्होंने गांव में पोषक स्मार्ट उद्यान के निर्माण में पोषण और अतिरिक्त कमाई के लिए,बेल,आंवला तथा केला की फसल की शामिल करने का पर जोर दिया। जागरूकता कार्यक्रम में सभी प्रासंगिक साहित्य को किसानों के बीच वितरित किया गया।

Doubling the farmers’ income is the thrust area of scientific community through nutrient management, crop diversification, protection, post harvest value addition and other related horticultural interventions. Keeping this in view, sensitization workshop was organized at Kitnakhera village, Maal, Lucknow under the ICAR networking project on “Micronutrient management in Horticultural Crops for Enhancing Yield and Quality” on 16th September, 2017. Dr Neelima Garg, Dr Tarun Adak, Dr Dinesh Kumar and Dr. AK Bhattacharjee interacted with the participants and suggested several ways to enhance their income. Farmers, farm women, rural youths and girls enthusiastically participated in this programme and raised several question for quality fruit and vegetables production. Dr Tarun Adak advised for Zinc and Boron management to solve fruit cracking in mango and guava and their soil application by the end of October as well as spraying at fruit developmental stages. Nutrient application for mango and guava by the end of October was also suggested and farmers were also sensitized about water management. Farmers made aware about mulching for moisture conservation during dry periods and application of calcium chloride for control of jelly seed formation in mango. Further, control measures of mango and guava pests were advised. Dr Neelima Garg motivated the farmers and farm women for income generation by making aam chur using unripe mangoes (Kaccha mango). This product may fetch additional income of at least Rs. 300 per kg of unripe mango as compared to their local marketing. Value addition of riped mangoes for making pulp and other products were also advised. Farmers made aware about safe use of pesticides in mango and guava orchards. Dr. Dinesh Kumar interacted and suggested farmers regarding effective canopy management, intercropping, nursery production, vegetable production particularly off-seasons vegetables may earn extra income by the villagers. He had emphasized on creation of nutri smart garden in the village for nutrition and extra earning, incusion of bael, aonla and banana cultivation. All relevant literatures were distributed.

Event Date:- 16-09-2017

Doubling farmers’ income through awareness programme on micronutrient management, value addition and other horticultural technologies for fruits and vegetables

फलों और सब्जियों के लिए सूक्ष्म पोषक प्रबंधन, मूल्य वर्धन और अन्य बागवानी पौधोगिकियों पर जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से किसानों की आय को द्विगुणीकृत करना

सूक्ष्म पोषक प्रबंधन, मूल्यवर्धन और अन्य बागवानी पौधोगिकियों पर जागरूकता कार्यक्रम के जरिए किसान की आय बढ़ाने के लिए, आई.सी.ए.आर. नेटवर्किग परियोजना "बागवानी की पैदावार और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए पौधों में सूक्ष्म पोषक प्रबंधन" के तहत 15 सितंबर, 2017 को टिकैतगंज गांव, मलिहाबाद, लखनऊ में आयोजित किया गया। गुणवत्तायुक्त फल उत्पादन, प्रभावी सूक्ष्म पोषक प्रबंधन, ड्रिप सिंचाई और वास्तविक समय आधारित कीट नियंत्रण उपायों के अपनाने के लिए सुझाव दिया गया। फसल विविधीकरण, मशरूम की खेती, सघन बागबानी, तथा प्रसंस्करण द्वारा आम और अन्य फलों के मूल्य में वृद्धि के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि पर जोर दिया गया। किसानों के बीच सभी प्रासंगिक साहित्य हिंदी में वितरित किया गया।

Doubling farmer’s income through awareness programme on micronutrient management, value addition and other horticultural technologies for fruits and vegetables was organized at Tikaitganj village, Malihabad, Lucknow under the ICAR networking project on “Micronutrient management in Horticultural Crops for Enhancing Yield and Quality” on 15th September, 2017. For quality fruit production, effective micronutrient management, drip irrigation and real time based pest control measures were suggested to participants. Doubling farmers’ income through crop diversification, mushroom cultivation, high density plantations and value addition of mango and other fruits were advocated. All relevant literatures were distributed among the farmers.

Event Date:- 15-09-2017

Scientist-Farmers interactions programme/kisan gosthi on doubling farmers’ income through micronutrient management and other horticultural technologies

सूक्ष्म पोषक प्रबंधन और अन्य बागवानी प्रोधोगिकियों के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि के लिए वैज्ञानिक-किसान बातचीत कार्यक्रम

तकनीकी हस्तक्षेप के माध्यम से किसान की आय को बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक-किसान बातचीत कार्यक्रम का आयोजन 13 सितंबर, 2017 को खलीसपुर गांव, मलिहाबाद, लखनऊ में आई.सी.ए.आर. नेटवर्किग परियोजना "बागवानी की पैदावार और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए पौधों में सूक्ष्म पोषक प्रबंधन" के तहत किया गया। गुणवत्तायुक्त फल उत्पादन के लिए किसानों और ग्रामीण युवाओं को विशिष्ट पोषक प्रबंधन, ड्रिप सिंचाई, आम और अमरूद में कीटनाशकों के नियंत्रण के लिए जागरूक किया गया तथा हिंदी में सभी प्रासंगिक साहित्य वितरित किया गया। आमदनी में सुधार के लिए सब्जियों का उत्पादन विशेषकर ऑफ-सीजन सब्जियां, पकाया आमों के प्रसंस्करण द्वारा मूल्य में वृद्धि और अन्य फलों की खेती का भी सुझाव दिया गया। आम में सघन बागबानी,प्रभावी कैनोपी प्रबंधन, अन्तः फसल, नर्सरी उत्पादन, जल की कमी के दौरान नमी संरक्षण तथा आम में जेली बीज नियंत्रण के लिए कैल्शियम क्लोराइड के छिड़काव के बारे में किसानों को संवेदनशील किया गया।

Scientist-Farmers interactions programme on enhancing farmer’s income through technological intervention was organized at Khalispur village, Malihabad, Lucknow under the ICAR networking project on “Micronutrient management in Horticultural Crops for Enhancing Yield and Quality” on 13th September, 2017. Farmers and rural youths were sensitized for effective nutrient management, drip irrigation, control measures of mango and guava pests for quality fruit production and all relevant literature was distributed. Vegetable production particularly off-seasons vegetables, value addition of riped mangoes and cultivation of other fruits were also suggested for improving the income. Farmers were also sensitized about high density plantations, effective canopy management, intercropping, nursery production, mulching for moisture conservation and application of calcium chloride for control of jelly seed formation in mango.

Event Date:- 13-09-2017

Meeting on DAESI course at ICAR-CISH Krishi Vigyan Kendra, Malda

आईसीएआर-सीआईएसएच कृषि विज्ञान केंद्र, मालदा में डीएएसईआई पाठ्यक्रम पर बैठक

सीआईएसएच कृषि विज्ञान केन्द्र, मालदा में दिनांक 11.09.2017 को डीएएसईआई कोर्स की बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के शुभारम्भ में डॉ. दीपक नायक (प्रभारी, सीआईएसएच केवीके) ने डीएएसईआई बैठक के अध्यक्ष डॉ मानस घोष (निदेशक, एसएएमटीआई, कोलकाता) और अन्य अधिकारियों का स्वागत किया। डॉ घोष ने पाठ्यक्रम के दिशा निर्देश और इसकी सफलता के बारे में बताया। परियोजना निदेशक, एटीएमए, मालदा, उप निदेशक, कृषि विस्तार, यूबीकेवी, प्रभारी प्रमुख यूबीकेवी आरआरएस, मजिहान, यूबीकेवी आरआरएसएस, मानिकचक, मालदा कृषि विज्ञान केंद्र और जिला के अन्य अधिकारियों ने बैठक में भाग लिया और अक्टूबर, 2017 से सीआईएसएच- कृषि विज्ञान केंद्र, मालदा में शुरू किये जाने वाले डीएईएसई पाठ्यक्रम को अग्रसरित करने के लिए चर्चा की।

The meeting on DAESI course was held on 11.09.17 at CISH Krishi Vigyan Kendra, Malda. At the outset, Dr Dipak Nayak (In charge, CISH KVK) welcomed to Dr. Manas Ghosh (Director, SAMETI, Kolkata), the chairman of meeting on DAESI and other officials. Dr. Ghosh narrated the guidelines, success story of the course and necessary instructions. Project Director, ATMA, Malda, Deputy Director of Extension, UBKV, In-charge Heads of UBKV RRS, Majihan, UBKV RRSS, Manikchak, Malda Krishi Vigyan Kendra and other district officials attended the meeting and had discussion in finalizing the away forwards for DAESI course to be started at CISH Krishi Vigyan Kendra, Malda from October, 2017.

Event Date:- 11-09-2017

Women empowerment: Improving farm women’s income through technological interventions

महिला सशक्तीकरण: तकनीकी के माध्यम से खेतीहर महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक-किसान बातचीत का आयोजन

तकनीकी के जरिए कृषि की महिलाओं की आय में सुधार करना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और आर्थिक योग्यता बनाने के लिए तत्काल आवश्यकता है। इस दिशा में, 8 सितंबर, 2017 को किसानों और खेतीहर महिलाओं की आय में वृद्धि के लिए आई.सी.ए.आर. नेटवर्किग परियोजना "बागवानी की पैदावार और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए पौधों में सूक्ष्म पोषक प्रबंधन" के तहत ग्राम नईबस्ती, मलिहाबाद, लखनऊ में वैज्ञानिक-किसानों के बीच बातचीत का आयोजन किया गया। डॉ घनश्याम पांडे, डॉ देवेंद्र पांडे, डॉ नीलिमा गर्ग, डॉ अदक, डॉ राम कुमार, डॉ एस आर सिंह और डॉ ए.के. भट्टाचार्य ने प्रतिभागियों के साथ बातचीत की। किसान, खेती की महिलाओं, ग्रामीण युवाओं और लड़कियों ने उत्साहपूर्वक इस कार्यक्रम में भाग लिया और गुणवत्ता वाले फल और सब्जियों के उत्पादन के लिए कई सवाल उठाए। किसानों ने सवाल उठाया कि आम और अमरूद में फलों के फटने को कैसे रोका जाए तथा आम के कीटों जैसे पत्ती के जालाकीट, उकठा, सूखा रोग, फलमक्खी आदि के नियंत्रण के बारे में भी सवाल उठाए। डॉ तरुण अदक ने गुणवत्तायुक्त फल उत्पादन के लिए ज़िंक और बोरोन की कमी को दूर करने का तथा अक्टूबर के महीने तक मिट्टी में ज़िंक और बोरोन के प्रयोग के साथ ही फलों के विकास की विभिन्न अवस्थाओं में करने का सुझाव दिया। अक्टूबर के अंत तक आम और अमरूद के लिए पोषक तत्वों के प्रयोग और जल प्रबंधन के बारे में भी किसानों को जाग्रत किया गया। इसके अलावा,आम और अमरूद कीटों के नियंत्रण उपायों के बारे में सलाह दी गई और तथा सभी प्रासंगिक साहित्य (हिंदी में) को किसानों के बीच वितरित किया गया। डॉ नीलिमा गर्ग ने किसानों और खेतीहर महिलाओं को आम तौर पर कच्चे आमों से अमचूर बनाकर आय पैदा करने के लिए प्रेरित किया। यह उत्पाद कम से कम 300 रुपये प्रति किलोग्राम की अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकता है। आम का गूदा व अन्य उत्पादों को बनाने के लिए भी सलाह दी गई थी। संस्थान द्वारा विकसित आम प्रसंस्करण से सम्बंधित मुफ्त मोबाइल ऐप के बारे में बताया। प्रतिभागियों ने फलों और सब्जियों की प्रसंस्करण द्वारा मूल्य में वृद्धि पर प्रशिक्षण के लिए गहरी दिलचस्पी दिखाई। डॉ जी. पांडे ने किसानों को प्रभावी कैनोपी प्रबंधन, अन्तःफसल, नर्सरी उत्पादन, जल की कमी के दौरान नमी संरक्षण और आम में जेली बीज नियंत्रण के लिए कैल्शियम क्लोराइड के छिड़काव के बारे में सुझाव दिया। सब्जियों का उत्पादन विशेषकर ऑफ-सीजन सब्जियां ग्रामीणों द्वारा अतिरिक्त आय अर्जित कर सकती हैं जैसा कि डॉ एसआर सिंह ने बातचीत की और सुझाव दिया। पोषण और अतिरिक्त कमाई के लिए, डॉ देवेन्द्र पांडे और डॉ राम कुमार ने गांव में पोषक स्मार्ट उद्यान के विकास के लिए बेल, आंवला और केला की फसल शामिल करने का पर जोर दिया। डॉ ए.के. भट्टाचार्य ने आम और अमरूद के बगीचों में कीटनाशकों के सुरक्षित इस्तेमाल के विषय में अवगत कराया।

Event Date:- 08-09-2017

Scientist-Farmers interaction meet for enhancing farmers’ income through nutrient management and crop diversification

पोषक प्रबंधन और फसल विविधीकरण के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक-किसान बातचीत का आयोजन

किसानों की आय की वृद्धि के लिए आई.सी.ए.आर. नेटवर्किग प्रोजेक्ट "बागवानी की पैदावार और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए पौधों में सूक्ष्म पोषक प्रबंधन" के तहत ग्राम बेड़िइयाखेड़ा, मॉल, लखनऊ में वैज्ञानिक कृषक वार्ता का आयोजन दिनांक 07 सितंबर 2017 को किया गया। डॉ देवेंद्र पांडे, डॉ नीलिमा गर्ग, डॉ तरूण अदक, डॉ राम कुमार, डॉ पीके शुक्ला,डॉ ए.के. त्रिवेदी, श्री सुभाष चंद्र और श्री अरविन्द कुमार ने किसानों के साथ बातचीत की तथा सभी प्रासंगिक साहित्य (हिंदी में) को किसानों के बीच वितरित किया गया। इस कार्यक्रम में किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। डॉ देवेन्द्र पांडे ने पोषण और अतिरिक्त कमाई के लिए गांवों के ऊसर भूमि में बेल और आंवला की बागवानी के लिए प्रेरित किया। डॉ राम कुमार ने गांव में पोषक स्मार्ट उद्यान के विकास के लिए केला की फसल शामिल करने का सुझाव दिया। डॉ तरुण अदक ने किसानों के साथ बातचीत की तथा इस दौरान उन्होंने उन्हें मिट्टी के स्वास्थ्य और गुणवत्तायुक्त फल उत्पादन को बनाए रखने के लिए पोषक तत्वों के, विशेष रूप से सूक्ष्म पोषक प्रबंधन, के लाभ के बारे में सूचित किया। इसके अलावा, किसानों को बेहतर बाग प्रबंधन के लिए ड्रिप सिंचाई प्रणाली को अपनाने हेतु जागरूक किया और मौसम पूर्वानुमान पर आधारित कृषि सलाह सूचना के बारे में भी संवेदनशील किया गया। डॉ नीलिमा गर्ग ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए किसानों के फसल कटाई के बाद के प्रबंधन के लिए प्रशिक्षण और फल एवं सब्जियों के मूल्य संर्वधन द्धारा आय वृद्धि आवश्यकता का सुझाव दिया। उन्होंने गूगल प्ले स्टोर पर अपलोडेड कच्चे और परिपक्व आम उत्पादों पर विकसित दो मुफ्त मोबाइल ऐप के विषय में अवगत कराया। डॉ ए के त्रिवेदी ने जल की कमी के दौरान नमी संरक्षण के लिए आच्छादन और आम में जेली बीज नियंत्रण के लिए कैल्शियम क्लोराइड के छिड़काव को अपनाने की सूचना दी। डॉ पी के शुक्ला ने आम और अमरूद कीटों के नियंत्रण उपायों के बारे में बातचीत की और सुझाव दिया।

A scientist-farmers interaction meet was organized at Bhediyakhera village, Maal, Lucknow under the ICAR networking project on “Micronutrient management in Horticultural Crops for Enhancing Yield and Quality” on 7th September, 2017 for improving farmers’ income. Dr Devendra Pandey, Dr Neelima Garg, Dr Tarun Adak, Dr Ram Kumar, Dr PK Shukla, Dr. A K Trivedi, Mr Subhas Chandra and Mr. Arvind Kumar interacted with the farmers. Farmers enthusiastically participated in this programme and all relevant literatures in Hindi were distributed among the farmers. Dr Devendra Pandey emphasized the scope of bael and aonla cultivation in the Usher land of the villages for nutrition and extra earning. Dr Ram Kumar suggested inclusion of banana for developing nutri smart garden in the village. Dr Tarun Adak interacted with the farmers and sensitized them regarding benefits of nutrient particularly micronutrient management for maintaining good soil health and quality fruit production. Further, farmers were also sensitized about adoption of drip irrigation system and real time weather agroadvisory for better orchard management. Dr Neelima Garg suggested the need for training of farmers in post harvest management and value addition for enhancing farmers’ income. She also informed and displayed two free mobile apps developed on raw and ripe mango products on Google Play Store. Dr. AK Trivedi informed to adopt mulching for moisture conservation during dry periods and application of calcium chloride for control of jelly seed formation in mango. Dr P K Shukla interacted and suggested farmers regarding control measures of mango and guava pests.

Event Date:- 07-09-2017

Scientist-Farmers interactions meet for doubling the farmers’ income

किसानो की आय वृद्धि हेतु वैज्ञानिक कृषक वार्ता

आई.सी.ए.आर. नेटवर्किग प्रोजेक्ट "बागवानी की पैदावार और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए पौधों में सूक्ष्म पोषक प्रबंधन" के तहत बागवानी फसलों में सूक्ष्म पोषक तत्व प्रंबधन द्धारा उत्पादन एवं गुणवत्ता बढानें के लिये ग्राम बेलगरहा मलिहाबाद में दिनांक 29 अगस्त 2017 को वैज्ञानिक कृषक वार्ता का आयोजन किया गया। इस वार्ता में 40 किसानो ने भाग लिया और उनकी आय की वृद्धि के बारे में सुझाव दिये गये। डा0 नीलिमा गर्ग, घनश्याम पाण्डेय, ए.के. त्रिवेदी, सुभाष चनद्रा, तरूण अदक और अरविन्द कुमार ने किसानो की समस्याओ का समाधान किया। डॉ घनश्याम पान्डेय ने पुराने एवं अनुत्पादक बागों के बेहतर उत्पादन के लिये छत्र प्रबन्धन की भूमिका के बारे मे बताया एवं गुणवत्तायुक्त फल उत्पादन एवं किसानों को अधिक लाभ के लिये प्रबन्धन पर जोर दिया। डॉ तरुण अदक ने इस वार्ता के दौरान किसानो की समस्याओं का निराकरण किया एवं विशिष्ट पोषक प्रबंधन, ड्रिप फर्टीगेशन एवं सटीक खेती के लिये प्रौद्योगिकियों को अपनाने हेतु जागरूक किया। डॉ नीलिमा गर्ग ने फल एवं सब्जियों के मूल्य संर्वधन द्धारा अधिक आय प्राप्त करने एवं सी.आई.एस.एच. द्धारा विकसित कच्चे एवं पक्के आम के उत्पाद बनाने के दो निशुल्क गूगल एप के बारे में बताया। डॉ त्रिवेदी ने सूखे के दौरान नमी संरक्षण के लिये मल्चिंग की भूमिका के बारे में बताया।

A scientist-farmers interactions meet was organized at Belgaha village, Malihabad, Lucknow under the ICAR networking project on “Micronutrient management in Horticultural Crops for Enhancing Yield and Quality” on 29th August, 2017. In this meet, about 40 farmers participated and were suggested measures for enhancing their income. Dr Ghansham Pandey, Dr Neelima Garg, Dr Tarun Adak, Dr. A K Trivedi, Mr Subhas Chandra and Mr. Arvind Kumar were interacted with the farmers. Dr Ghansham Pandey discussed about the need for rejuvenation in old and senile orchards, role of canopy management for better productivity. Dr Tarun Adak discussed in detailed about the nutrient management in fruit crops. He emphasized on micronutrient management for quality fruit production and better profitability of farmers. Further, farmers’ quarries were successfully addressed and during the interaction, farmers were sensitized about better orchard productivity through adoption of site specific nutrient management, drip fertigation and precision farming technologies. Dr Neelima Garg interacted with the farmers about post harvest practice for value addition of fruits and vegetables with an objective of increasing the profitability of farmers. She also informed and displayed two free mobile apps developed on raw and ripe mango products on Google Play Store. Dr. Trivedi discussed about role of mulching for moisture conservation during dry periods and intercropping in mango orchards for higher income.

Event Date:- 29-08-2017

Workshop on Sensitization on Agri incubation for Startup

कृषि स्टार्टअप विषय पर कार्यशाला

भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान रहमानखेड़ा, लखनऊ में दिनांक 17.08.2017 को कृषि स्टार्टअप विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक, डॉ. शैलेन्द्र राजन ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए बागवानी में उद्यमिता के बारे में अनेक दृष्टांतों के माध्यम से विस्तारपूर्वक बताया। भा.कृ.अनु.प. के विभिन्न संस्थानों से वक्ता के रूप में आये वैज्ञानिकों: डॉ. पूनम जयंत सिंह, डॉ. ए. के. शर्मा, डॉ. टी. दामोदरन ने उद्यमिता एवं कौशल विकास पर विचार प्रस्तुत किये। डॉ. सिंह ने अटल नवोन्मेषी मिशन, नीति आयोग की योजना, सीड कैपिटल, एंजिल इन्वेंटर्स और वेंचर कैपिटल आदि विषयो पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. ए. के. शर्मा ने राष्ट्रीय उद्यमिता नीति, ई-एग्रीकल्चर स्टैटेजीएस तथा उद्यमिता विकास नीति एवं “ग्रामीण युवाओं में उद्यमिता एवं कौशल विकास” की विस्तृत पहलुओं पर जानकारी दी। डॉ. दामोदरन ने अपने संबोधन में विभिन्न जीवित उदाहरणों से बायो-फ़र्टिलाइज़र एवं बायो- पेस्टिसाइडस एंटरप्रेन्योरशिप, सीएसआर बायो-फार्मूलेशन, बायोफ़र्टिलाइज़र एक्ट 1985, सीआईबी रजिस्ट्रेशन के बारे में बताया। डॉ. तरुण अदक, आईटीएमयू के सदस्य सचिव ने किसानो को उद्यमिता एवं स्टार्टअप के लिए कौशल विकास कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण के सम्बन्ध में जानकारी दी।

Workshop on “Sensitization on Agri-incubation for Startup” was organized at ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Rehmankhera, Lucknow on 17 August, 2017. On this occasion, Dr. Shailendra Rajan, Director, ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture welcomed all participants and enlightened on entrepreneurship in horticulture. Dr. Poonam Jayant Singh, Dr. A. K. Sharma and Dr. T. Damodaran Scientists from different ICAR institute delivered lectures on entrepreneurship and startup. Dr. Singh from ICAR-NBFGR, Lucknow told about Atal Innovation Mission, NITI AYOG Policy, Seed Capital, Angle Inventors and Venture Capitals. Dr. Sharma from ICAR-IISS, Lucknow said about National Entrepreneurship Policy, E- Agriculture Strategies, Entrepreneur Development Policy etc. Dr. T. Damodaran, RRS, ICAR- CSSRI, Lucknow delivered a lecture on “Prospects of Entrepreneurship Development in bio-hardening and bio-formulation production venture” and Dr. Tarun Adak, ICAR-CISH, Lucknow delivered a lecture on Training need of farmers under skill development programme for Entrepreneurship and start-up.

Event Date:- 17-08-2017

Pledge to build new India

नए भारत के निर्माण का संकल्प

Event Date:- 09-08-2017

Former Director General ICAR and Secretary (DARE) visited ICAR- CISH RRS and KVK Malda

पूर्व महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् एवं सचिव (डेयर), नई दिल्ली द्वारा केंद्रीय उपोष्ण बागबानी संस्थान के क्षेत्रीय अनुसन्धान केंद्र एवं कृषि विज्ञानं केंद्र, मालदा का भ्रमण

डॉ. एस. अयप्पन, पूर्व महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् एवं सचिव (डेयर), नई दिल्ली ने केंद्रीय रेशम बोर्ड के अपर अधिकारियो के साथ केंद्रीय उपोष्ण बागबानी संस्थान के क्षेत्रीय अनुसन्धान केंद्र एवं कृषि विज्ञानं केंद्र, मालदा, पश्चिम बंगाल का भ्रमण किया उन्होंने केंद्र के सभी वैज्ञानिको, प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारियो से बातचीत की और केंद्र द्वारा उष्णकटिबन्धीय फल फसलों के विभिन्न पहलुओं पर किये गए कार्य के लिए सराहना की

Honourable Dr. S. Ayyappan (Former Director General, ICAR & Secretary, DARE, Govt. of India) along with higher official of Central Silk Board visited ICAR-CISH Regional Research Station & CISH Krishi Vigyan Kendra, Malda, West Bengal. He also interacted with the scientists, administrative and technical staff of the station and praised the activities and development of various aspects of subtropical fruit crops at ICAR-CISH RRS & CISH KVK, Malda.

Event Date:- 04-08-2017

Farmers Gosthi and distribution of high yielding and high quality hybrid seedling of vegetables

कृषक गोष्ठी एवं सब्जियों के उच्च उत्पादकता एवं गुणवत्ता वाले संकर पौध वितरण

मेरा गाँव मेरा गौरव कार्यक्रम के अन्तर्गत दिनांक 04.08.2017 को काकोरी] लखनऊ के गाँव मोहद्दीपुर में एक कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। मोहद्दीपुर] सैदपुर] नबीनगर एवं पहिया आजमपुर गाँव के मुख्यतः सब्जी एवं फूलों की खेती से जुड़े 40 किसानों ने भाग लिया। किसानों को करेले] लौकी एवं कद्दू के उच्च उत्पादकता एवं गुणवत्ता वाले संकर पौध बाँटे गये। किसानों ने आम एवं अमरूद के कीटों] ग्लेडिओलस एवं गेंदे की खेती] सब्जियों में उर्वरकों के प्रयोग आदि के विषय में वैज्ञानिकों से जानकारी प्राप्त की।

Institute organized a farmer’s goshti under Mera Gaon Mera Gaurav Programme on 04.08.2017 at Mohiddipur village of Kakori block of Lucknow district. More than 40 farmers mainly vegetable growers from Mohiddipur, Saidpur, Nabinagar and Pahiya Azampur were participated in the gosthi as these villagers are mainly involved in vegetable farming and floriculture. The hybrid seedling of high yielding and high quality vegetables of Bitter gourd (Karela), Bottle gourd (Lauki) and pumpkin were also distributed to the farmers. The farmers were also enlightened about the techniques to double their farm income through vegetable production. The farmers raised problems of fruit fly infestation in guava and mango, leaf webber (Jalakeet) in mango. The Farmers also enquired method and time to apply different fertilizers for high yield in vegetables and cultivation method to grow high quality gladiolus and marigold.

Event Date:- 04-08-2017

Farmers meeting and interactive session under Mera Gaon Mera Gaurav Scheme

मेरा गाँव मेरा गौरव कार्यक्रम के अंतर्गत किसान गोष्ठी एवं कद्दू कुल के पौधों का वितरण

मेरा गांव मेरा गौरव कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा दिनाँक ३ अगस्त २०१७ को ग्राम बेलगढ़ा, लोधौसी, अल्लूपुर, खालिसपुर में किसान गोष्ठी एवं कद्दू कुल के पौधों का वितरण किया गया। किसानों, बागवानों एवं वैज्ञानिकों के बीच खेती तथा बागवानी से सम्बंधित सम-सामयिक समस्याओं पर चर्चा हुई तथा वैज्ञानिकों द्वारा निदान के उपाय बताये गए। वैज्ञानिकों द्वारा वर्षा ऋतु में खेती के लिए सब्जी की प्रजातियों एवं किस्मों के चुनाव से सम्बंधित जानकारी दी गयी। गोष्ठी में सब्जियों की विभिन्न सस्य-क्रियाओं एवं उनके उचित समय के विषय में विस्तार से चर्चा हुई। किसानों एवं वैज्ञानिकों के बीच प्रश्नोत्तर काल के दौरान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. घनश्याम पांडेय, डॉ. ए. के. त्रिवेदी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. (श्रीमती) आभा सिंह ने किसानों की शंकाओं का समाधान करने के साथ बिंदुवार वैज्ञानिक जानकारी दी। किसान गोष्ठी में चारों गाँवों के लगभग ६५ किसानों ने भाग लिया।

Under Mera Gaon Mera Gaurav Scheme farmers meeting and interactive session was organized by Scientists of ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Rehmankhera, Lucknow at villages Belgarha, Ladhausi, Allupur and Khalishpur of block Malihabad, district Lucknow. Seedlings of cucurbitaceous vegetables viz., bottle gourd, bitter gourd and pumpkin were distributed to farmers. During interactive session problems of farmers were discussed and remedial measures were suggested. Scientists have informed farmers about different inter culture operations and their proper time. Principal Scientists Dr. G. Pandey, Dr. A. K. Trivedi and Senior Scientist Dr. (Mrs.) Abha Singh have point wise clarified problems of farmers. In this meeting approximately 65 farmers of four villages have participated.

Event Date:- 03-08-2017

Sensitization programme for management of leaf webber जाला कीट नियंत्रण सलाह

​आज दिनाँक 01.08.2017 को मेरा गांव मेरा गौरव के अंतर्गत ग्राम कनार, महमूदनगर (ढाल) तथा नई बस्ती, मलीहाबाद लखनऊ में जाला कीट नियंत्रण हेतु किसानों को सलाह दी गयी तथा नुट्रि –स्मार्ट गांवों बनाने के लिए किसानों को निःशुल्क ऑफ-सीजन सब्जी के पौधों का वितरण किया गया ।

Sensitization programme for management of leaf webber among mango growers of Kanar, Mehmoodnagar Dhal and Naibasti Villages, Malihabad, Lucknow under Mera Gaon Mera Gaurav on 01.08.2017. Distribution of free of cost off-season vegetable seedling to farmers for making nutri smart villages.

Event Date:- 01-08-2017

Kisan Gosthi’s at villages Rasoolpur, Tikaitganj and Dugauli

मेरा गाँव मेरा गौरव कार्यक्रम के अंतर्गत टिकैतगंज, रसूलपुर, दुगौली गाँवों में किसान गोष्ठियों का आयोजन

On 1st August, 2017 Kisan gosthi’s were conducted in villages Rasoolpur, Tikaitganj and Dugauli under Mera Gaon Mera Gaurav(MGMG). More than 750 seedlings of vegetables ( bitter guard,bottle guards & pumpkins) distributed among farmers for nutrition security & additional income in these villages . A Scientists- Farmers interaction was held in which the farm problems were discussed. Meeting was conducted by Dr. Neelima Garg, Dr. Dinesh Kumar, Sh. H.C.Verma and Sh. Arvind Kumar. During the meeting the emphasis was given on cleanliness and hygiene.

मेरा गाँव मेरा गौरव कार्यक्रम के अंतर्गत टिकैतगंज, रसूलपुर, दुगौली गाँवों में किसान गोष्ठियों का आयोजन 1 अगस्त, 2017 को डॉ• नीलिमा गर्ग, डॉ• दिनेश कुमार, श्री एच.सी.वर्मा और श्री अरविंद कुमार ने मेरा गांव मेरा गौरव के तहत रसूलपुर, टिकैतगंज और दुगौली गांवों में किसान गोष्ठियों का आयोजन किया। जिसमें किसानों की समस्याएं तथा उनके निदान पर चर्चा की गयी । बैठक के दौरान स्वच्छता और स्वास्थ्य पर जोर दिया गया। इन गांवों में पोषण सुरक्षा और अतिरिक्त आय के लिए किसानों को 750 से अधिक सब्जियों (करेला, लौकी और कद्दू) की पौध वितरित की गईं ।

Event Date:- 01-08-2017

Workshop on Stress Management: Causes and Prevention

तनाव प्रबंधन: कारण एवं निवारण विषय पर कार्यशाला

भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान रहमानखेड़ा, लखनऊ में दिनांक 29.07.2017 को तनाव प्रबंधन : कारण एवं निवारण विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसके उद्घाटन अवसर पर संस्थान के निदेशक, डॉ. शैलेन्द्र राजन ने समय प्रबंधन द्वारा तनाव को नियंत्रित किये जाने की सलाह दी एवं संस्थान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्व-मूल्यांकन कर आत्म अन्वेषण करने के लिये कहा। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय औषधीय सगंध पौधा संस्थान, लखनऊ के संयुक्त निदेशक (राजभाषा), डॉ. विजय नारायण तिवारी ने तनाव एवं उसके कारकों पर विशेष जोर देते हुए मस्तिष्क एवं हॉर्मोन्स के संबंध पर प्रकाश डाला तथा सामाजिक एवं धार्मिक पहलुओं पर भी जोर दिया। डॉ. नीलिमा गर्ग, प्रभागाध्यक्ष, तुड़ाई उपरांत प्रबंधन प्रभाग ने तनाव प्रबंधन विषय के विस्तृत पहलुओं पर जानकारी दी।

A Workshop on stress management: causes and prevention was organized at ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Rehmankhera, Lucknow on July 29, 2017. On this occasion, Dr. Shailendra Rajan, Director ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture suggested that how to controlled stress through time management and advised to all officials & employees of institute for self evaluation and self reconnoiter. Chief Guest, Dr. Vijay Narayan Tiwari, Joint Director (Rajbhasha), CSIR- CIMAP, Lucknow focused on correlation between brain, hormones and stress that is created due to mental, physical, social and religious issues. Dr. Neelima Garg, Head, Division of Post Harvest Management discussed various issues on stress management.

Event Date:- 29-07-2017

Demonstration and distribution of fruit fly trap फल मक्खी ट्रैप का प्रदर्शन एवं वितरण

आज दिनाँक 25.07.2017 को मेरा गांव मेरा गौरव के अंतर्गत ग्राम नई बस्ती, मलीहाबाद लखनऊ में जाला कीट नियंत्रण हेतु किसानों को सलाह दी गयी तथा फल मक्खी नियंत्रण हेतु फल मक्खी ट्रैप का प्रदर्शन एवं वितरण किया गया ताकि अगले वर्ष फल मक्खी का नियंत्रण समय से कर सकें|

Sensitization programme for management of leaf webber among mango growers of Naibasti Village, Malihabad, Lucknow under Mera Gaon Mera Gaurav on 25.07.2017. Demonstration and distribution of fruit fly trap to farmers for better management of fruit fly for next season/’s crop.

Event Date:- 25-07-2017

Cluster based value chain on mango study in Saharanpur UP

आम पर क्लस्टर आधारित मूल्य श्रृंखला का उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में अध्ययन

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के द्वारा एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत एन.सी.पी.ए.एच., नई दिल्ली के माध्यम से सुनियोजित कृषि विकास केन्द्र (पी.एफ.डी.सी.), केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ को सहारनपुर जिले में आम पर क्लस्टर आधारित मूल्य श्रृंखला का अध्ययन संस्थान के डा. वी. के. सिंह प्रधान वैज्ञानिक एवं पी.आई., पी.एफ.डी.सी., डा. एस. आर. सिंह, प्रधान वैज्ञानिक, डा. मनोज कुमार सोनी, शोध सहयोगी तथा श्री अरून कुमार, जिला उद्यान अधिकारी एवं के.वी.के. के वैज्ञानिक डा. वी. पी. शाही ने दिनांक 13-14 जुलाई तक गहनता से किया गया। सहारनपुर जिले में आम के बागों की प्रचुरता है और बड़े पैमाने पर उत्पादकता होती है जो काफी स्तर तक बर्बाद हो जाती है। अतः इस मूल्य श्रृंखला अध्ययन का उद्देश्य- किसानों द्वारा उत्पादित आम की आपूर्ति के लिए स्थानीय, क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय बाजारों से किसान का सम्बन्ध स्थापित करना, व्यापार सम्बन्धों और भूमिकाओं का विश्लेषण करके मूल्य श्रृंखला से सम्बन्धित इकाई के लिए बाधाओं और अवसरों को स्पष्ट करना एवं स्थानीय आम के बागवानों की एक सूची तैयार करना जो कि आम मूल्य श्रृंखला में निम्न आय वाले किसानों और अन्य प्रतिभागियों की प्रतिस्पर्धा में वृद्धि को सुविधाजनक बनाने में मदद कर सकें।

अध्ययन के दौरान दल द्वारा सहारनपुर जिले के बेहट, नकुड़, सढोली कदीम, मुजफफराबाद, अनवरपुर, बरोली, खिड़का, जुनारदार, संसारपुर, फतेहपुर कलां आदि के गांवों में बागानों एवं नर्सरियों का निरीक्षण किया एवं बागवानों से साक्षात्कार किया गया। साथ ही साथ नयी पद्धति से नर्सरी में कलम बनाना, आम के पेड़ों में होने वाली गंभीर समस्याओं जैसे एक वर्ष फल आना, दूसरे वर्ष फल का न आना, आम का फटना, आम का छोटा हो जाना, जेली सीड, कीट एवं फफूंदी का प्रकोप जैसे- थ्रीपस, जालाकीट, सूट गाल शिला का आना, सोल्डर ब्राउनिंग (काले धब्बे) के रोकथाम पर चर्चा हुई।

बागों के निरीक्षण एवं बागवानों के साक्षात्कार के बाद एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन उद्यान संस्थान, कम्पनीबाग में किया गया। जिसमें लगभग 35 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया और क्लस्टर आधारित मूल्य श्रृंखला में सम्भावित पहल की बाधाओं एवं अवसरों और प्राथमिकता पर विचार-विमर्श किया गया। जिसमें किसानों ने अपनी बागवानी से सम्बन्धित मुख्य समस्याओं की चर्चा की। इस कार्यक्रम में किसानों के साथ-साथ बेहट के पूर्व विधायक श्री महावीर सिंह राणा, संयुक्त निदेशक श्री राजेश प्रसाद, उप निदेशक डा. जय भगवान एवं उद्यान संस्थान के वैज्ञानिकों ने भाग लिया।

Event Date:- 13-07-2017

Mango Exhibition-cum-Festival Organized

आम प्रदर्शनी-सह-महोत्सव

भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ द्वारा 6 जुलाई, 2017 को नास परिसर, नयी दिल्ली में सचिव डेयर तथा महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की अध्यक्षता में आम प्रदर्शनी-सह-महोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर एक आम खाओं प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। आम महोत्सव में परिषद के अनेक वरिष्ठ अधिकारी तथा लोग सम्मिलित हुये।

Institute organized Mango exhibition-cum- festival at NASC Complex, New Delhi under the Chairmanship of Hon’ble Secretary, DARE and Director General, ICAR on July 6, 2017. A mango eating competition was also organized. The mango festival was visited by several senior officials of ICAR and public.

Event Date:- 06-07-2017

Mobile apps on methods for preparing RAW and RIPE MANGO PRODUCTS

कच्चे और परिपक्व आम के गुणवत्ता युक्त उत्पाद बनाने की विधियों के लिए मोबाइल ऐप्स

आईसीएआर-सीआईएसएच, लखनऊ के द्वारा कच्चे और परिपक्व आम के गुणवत्ता युक्त उत्पाद बनाने की विधियों के लिए, हिन्दी भाषा में मोबाइल ऐप्स विकसित किए हैं। इनमें दी हुई विधियों को अपना कर घरेलू अथवा कुटीर उदयोग स्तर पर आम का प्रसंस्करण किया जा सकता है।

CISH- ICAR has developed two mobile apps on methods for preparing RAW MANGO PRODUCTS and RIPE MANGO PRODUCTS. These apps will be helpful in preparing mango products at home or cottage scale. The apps are in Hindi for easy understanding by Hindi speaking people. The apps also have audio facility.

To visit the apps please copy and paste these following links:

Raw Mango Products - Click Here to Download Mango Raw Product App

Ripe Mango Products - Click here to Download Mango Ripe Product App

Event Date:- 29-06-2017

टपक सिंचाई, प्लास्टिक मलि्ंचग एवं संरक्षित खेती

सुनियोजित कृषि विकास केन्द्र (पी.एफ.डी.सी.), एन.सी.पी.ए.एच., कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, आई.सी.ए.आर.-सी.आई.एस.एच., रहमानखेड़ा, लखनऊ द्वारा दिनांक 15-16 जून, 2017 को बस्ती जिले में टपक सिंचाई, प्लास्टिक मलि्ंचग एवं संरक्षित खेती की उपयोगिता पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बस्ती जिले के विभिन्न ब्लाकों से आये प्रगतिशील किसान राकेश्वर प्रसाद चौधरी, कौशल कुमार सिंह, राजाराम यादव एवं गणेश मौर्या सहित लगभग 65 किसानों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम के अवसर पर डा. वी. के. सिंह प्रधान वैज्ञानिक एवं पी.आई., पी.एफ.डी.सी., लखनऊ ने बागवानी, टपक सिंचाई प्रणाली एवं संरक्षित खेती के महत्व को बताते हुए यह भी बताया कि पॉलीहाउस तकनीक अपनाने से पौधों के दैहिकीय गुणों को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर उच्च गुणवत्तायुक्त उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केन्द्र, बस्ती के संयुक्त निदेशक, डा. आर. के. तोमर एवं जिला उद्यान अधिकारी श्री राजमणि शर्मा द्वारा किसानों के लिए सरकार द्वारा चलायी जा रही लाभकारी योजनाओं से किसानों को अवगत कराया। संस्थान के डा. एस. आर. सिंह, प्रधान वैज्ञानिक ने संरक्षित संरचना के तहत सब्जियों की विदेशी प्रजाति के बारे में बताया एवं पी.एफ.डी.सी. लखनऊ के डा. मनोज कुमार सोनी के साथ मिलकर प्रोजेक्टर के माध्यम से किसानों को बागवानी की नई तकनीकों की जानकारी दी तथा जल संरक्षण को ध्यान में रखकर टपक सिंचाई और मल्चिंग का उपयोग कर कम से कम पानी से सिंचाई करने की बात कही। उसके बाद किसानों द्वारा किये गये प्रश्नों का उत्तर विशेषज्ञों द्वारा दिया गया। श्री नीरज कुमार शुक्ला ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में पूर्ण सहयोग किया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केन्द्र एवं जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय के समस्त स्टाफ उपस्थित रहे। Event Date:- 15-06-2017

Short-term summer training programme

B.Sc. (Ag) Students (12 nos.) from Agriculture and Veterinary Sciences, Mewar University, Gangrar (Chittorgarh) Rajasthan are undergoing 21 days short-term summer training programme on various aspect pertaining to improvement, crop health and postharvest management of subtropical fruits at ICAR–CISH, Lucknow from June 12 to July 3 2017. Event Date:- 12-06-2017

Connecting People to the Nature

भा.कृ.अ.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान में दिनांक 05 जून 2017 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के प्रभारी निदेशक डा. देवेन्द्र पाण्डेय ने की। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए विभिन्न किस्मों के पौधे लगाने पर जोर दिया। उन्होंने ऊर्जा एवं जल संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों को सीमित उपयोग करके पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त करने पर अपने विचार प्रस्तुत किये। डा. अशोक कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक ने जलवायु परिवर्तन में पौधों की अनुकूलनशीलता पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि जिन पौधों के लिए जलवायु अनुकूलित नहीं थी वह कुछ पौधों की किस्मों जैेसे स्टाªँबेरी,पपीनो आदि के लिए अनुकूलित हो रही है। अतः किसान इस बदलते परिवेश मे इन पौधे को लगाकर पर्यावरण को सुरक्षित रखकर लाभ कमा सकते हैं। डा. गुंडप्पा, वैज्ञानिक ने कीटनाशक मुक्त बागवान पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया, उन्होंने बताया कि किस तरह सीमित एवं सन्तुलित मात्रा में कीटनाशकों एवं वैकल्पिक पद्धति अपनाकर पर्यावरण को रासायनिक प्रदूषण से बचाया जा सकता है। यदि अधिक मात्रा में कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है तो कुछ समय बाद कीट इन रासायनों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न कर लेते हैं जिससे इन कीटनाशकों का प्रभाव समाप्त या कम हो जाता है। डा. जितेन्द्र कुमार, शोध सहयोगी ने पर्यावरण से सम्बन्धित विभिन्न कानूनों के बारे में जानकारी प्रदान की। डा. तरुण अदक, वैज्ञानिक ने मृदा प्रदूषण रोकथाम एवं कार्बन उत्सर्जन पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। Event Date:- 05-06-2017

Transfer of technology: MoU with CST UP

CISH signed MOU with CST UP for transfer of improved technology for making Vinegar. CST UP will extend the technology to the end user. MoU was signed by Dr. S. Rajan Director, CISH and Dr. Anil Yadav, Secretary CST UP. Dr. Neelima Garg, the inventor of technology informed that this protocol is very simple and has immense potential for farmers and small scale processors engaged in vinegar production. Vinegar is a sour-tasting condiment and preservative prepared by two successive microbial processes, the first being an alcoholic fermentation by yeasts and the second oxidation of alcohol by Acetobacter aceti. Generally it takes around 3 months for preparing vinegar from sugarcane juice using traditional protocol. CISH has worked out a protocol to reduce the time from 3 months to 1 month using immobilized microbial cells of Acetobacter aceti. Using this protocol about 9 percent of acetic acid can be produced from sugarcane juice in one month with 98 per cent fermentation efficiency. On this occasion Dr. Radhey Lal , Dr. Shashi Rana, Dr. G. Pandey, Dr. R. M. Khan, Dr. D. Pandey and Dr. Tarun Adak were present. Event Date:- 17-05-2017

Training cum demonstration on Kiwi Fruits & Oranges

One day training programme was organized on 22.03.2017 at Hapoli (Ziro) by Krishi Vigyan Kendra, Yachuli, Lower Subansiri district (Arunachal Pradesh). The main objective of this training programme was to demonstrate the Production of Hi-tech production of Kiwifruit along with possibilities of suitable subtropical and temperate fruits in Arunachal Pradesh as kiwifruit and Oranges are commercial fruits of. Dr G. Pandey, Principal Scientist and I/C Head, delivered a lecture on Hi-tech production of kiwifruit as well as possibilities of subtropical fruits in the mid and foot hill region of Arunachal Pradesh. Later on Dr K.K. Srivastava, covered the prospect of low chilling temperate fruits in subtropical zone of Arunachal Pradesh, he also addressed the problems related to apple, pear, peach, plum and availability of planting materials, cultivars. Later on both the scientist participated in Farmers & Scientists interaction sessions. Finally, after lunch, Dr Pandey made a practical demonstration on training and pruning of kiwifruit at farmer’s field, Village Kodak, Lower Subansiri. Approximately a total of 70 farmers, extension officers of the line departments and self help groups, kiwifruit growers association were participated. The training ended with great success. Event Date:- 22-03-2017

Honorable Governor inaugurated Farmers First Project

Farmers First Project was inaugurated by Shri Ram Naik Ji, Honorable Governor, Uttar Pradesh at the ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Lucknow on March 21, 2017. The project was inaugurated at the launch of the Farmers First project as well as “Farmers training programme on safe and judicious use of pesticides” jointly organized by ICAR-CISH, Lucknow and Hindustan Insecticides Limited, New Delhi. He called upon the scientific fraternity to develop mechanism by which agriculture could be more profitable by the use of latest technologies. Praising Malihabadi Dashehari mangoes, he told that he firmly believes them to have immense potential for export. On this occasion, Dr. Shailendra Rajan, Director, ICAR-CISH, Lucknow informed that the Farmers’ First project is being launched in the selected villages of Malihabad - Nabi Panah, Meethenagar and Mohammadnagar Talukedari to demonstrate the impact of various technological interventions in enhancing farmers income. He further added that 1100 farmers have been selected where the Farmers’ First project would be implemented. Event Date:- 21-03-2017

Exposure visit and training to farmers

One day exposure visit – cum – training programme, sponsored by Institute of Horticulture Technology, Greater Noida and ITC, Hathras, Aligarh, U.P. for 35 and 16 farmers, respectively, were conducted at the ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Rehmankhera, Lucknow on March 06 and 08, 2017 on High density plantation of guava and different management aspects was conducted. On these occasions Dr. Shailendra Rajan, Director apprised the participants about significance contribution of the Institute besides informing about nursery management and the performance of guava varieties released from the Institute. Dr. V.K. Singh and Dr. Balaji Rajkumar also deliberated on all the aspects of high density plantation of guava and insect pest management. A field visit of PFDC experimental plot of high density plantation of guava, vegetable and Post harvest management laboratory was also arranged for participants. Event Date:- 08-03-2017

Kisan goshti at Rasoolpur

Under MGMG programme a Kisan Gosthi was organised by members of team- 4 at the Rasoolpur Village on 06-03-2017. The team members participated including Dr.(Mrs.) Neelime Garg, Sh. H.C.Verma and Dr. Barsati Lal. The venue was primary school Rasoolpur. The team visited the school Kitchen for observing the cleanliness during preparation of mid day meal. The kitchen was found neat and clean. The meeting was attended by more than 50 farmers (men & women). The team members also interacted with the children of Rasoolpur primary school. Dr. Neelima Garg gave a lecture on cleanliness hygiene & explained the benefits of cleanliness. Further, she talked on the role of value addition of fruits for enhancing the income of rural women and youth. The team members discussed about existing problems of farming and suggested the solution for the same. The farmers and farm women expressed their desire for training in post harvest & value addition of fruits. Such training may be organised in the fruit season. The seedlings of Bottle gourd , pumpkin and cucumber were also distributed among the farmers for better productivity and to enhance their income through the quality productions of vegetable crops. Event Date:- 06-03-2017

Polyethylene mulching demonstration trial

On 22.02.2017, Evaluation of the demonstration trial at farmer’s field was conducted at vill. Bhawanipur, Jalalabad, Kannauj, U.P. by PFDC, ICAR-CISH, Lucknow. The potato crop was raised under different coloured polyethylene mulching i.e. silver, black and unmulched condition under drip irrigation. The higher yield was obtained under silver mulching (300 quintal/ha) followed by black mulching (275 q/ha) as compared to unmulched control (220 q/ha). Under silver mulching the yield was uniform in size with very less undersize and oversize tubers and extent of greening was reduced significantly. The demonstration trial was successfully conducted and the farmer Sh. Arun Kumar Tripathi was motivated to use mulching in potato. Event Date:- 22-02-2017

Residential Training Program

Residential Training Program on Scientific Backyard Poultry Farming for Tribal Master Trainers

The training programme was held at Ramakrishna Mission Ashrama, Sargachi during 3-5 February, 2017. 21 tribal master trainers from 9 adopted villages of Nabagram block of Murshidabad district attended the training programme and majority of participants were women. All the master trainers took active interest while interactive theoretical and practical classes taken by very experienced teachers.

This training programme will certainly helpful to introduce component of poultry under Nutrismart Tribal Village initiative for having plentiful animal protein in their diet and additional source of income in connection with sustainable livelihood.

This training programme was organized in collaboration with Ramakrishna Mission Ashrama, Sargachi, Murshidabad.

Event Date:- 05-02-2017

Group meeting with bee keepers

ICAR-CISH Regional Research Station, Malda, W. B. organized a group meet with beekeepers of Malda district on 22.01.17 at Malda Beekeeping & Honey Processing Industrial Co-operative society Ltd in the presence of Dr. R. K. Thakur (Project Coordinator, AICRP on Honey Bee and Pollinators, IARI, New Delhi), Dr. S. K. Shukla (Principal Scientist, ICAR-CISH, Lucknow), Dr. Dipak Nayak (Scientist & In-charge, ICAR CISH Regional Research Station, Malda) and others. Very fruitful discussion was held on problems of beekeeping and their probable solutions and away forward. More than 15 progressive beekeepers attended the meet and urged to ICAR-CISH Regional Research Station, Malda for technical support in scientific beekeeping and honey processing. Event Date:- 22-01-2017

RTP for Tribal Master Trainers

Two residential training programmes were organized for tribal master trainers at ICAR-CISH Regional Research Station, Malda, West Bengal, during 16th to 21st January, 2017 under the Initiative of Nutri smart Tribal Village of Tribal Sub-plan Programme. During the training programme, 66 nos. of tribal master trainers have been trained for establishment of kitchen garden and production of vegetable as intercrop. Resource persons from different organizations took classes and had very good interaction. Event Date:- 21-01-2017

Foundation stone laid for KVK at Malda

Foundation Stone Laying Ceremony for CISH-Krishi Vigyan Kendra, at Malda was held on 21st January, 2017 at ICAR-CISH Regional Research Station, Malda, West Bengal. The foundation stone was laid by Dr. A. K. Singh, Deputy Director General (Agricultural Extension & Horticulture) in presence of Swami Viswamayananda Ji (Secretary, Ramakrishna Mission Ashrama, Sargachi), Dr. Randhir Singh, Assistant Director General (Agricultural Extension), Dr. P. K. Chakrabarty, Assistant Director General (PP&B), Prof. S. K. Mitra, Former Dean, BCKV, Mohanpur, Dr. S. K. Roy, Director, ICAR-ATARI Kolkata, Dr. S. Rajan, Director, ICAR-CISH, Lucknow, Dr. B. K. Das, Director, ICAR-CIFRI, Barrackpore, Dr. R. K. Thakur, Project Coordinator (AICRP on Honey Bee & Pollinators, IARI) and other dignitaries. In the outset with welcome address, Dr. S. Rajan, Director, ICAR-CISH, Lucknow, highlighted the achievements of ICAR-CISH and future plan of work of its RRS and KVK at Malda. Swami Viswamayananda Ji stressed upon development of human character for development of agriculture and horticulture. Dr. A. K. Singh, Deputy Director General (Agricultural Extension & Horticulture) emphasized the importance of the new CISH- KVK and its possible role and services for wellbeing of farming community. He also expressed his satisfaction and happiness by seeing the huge gathering of tribal woman farmers and other growers as about 850 farmers (including 550 tribal famers) attended the programme. He categorically mentioned that CISH may play important role in tribal development programme being implemented at various villages. Dr. Randhir Singh, ADG (Agricultural Extension) and Dr. P. K. Chakrabarty, ADG (PP&B) highlighted the importance of technology dissemination and plant protection measures for sustainable crop yield. Prof. S. K. Mitra briefed about importance of horticulture for improving socio-economic status of farming community. Dr. S. K. Roy also emphasized the importance of technology dissemination for doubling the farmers’ income. Inauguration of Seed Hub for Pulses and Rabi Krishi Mela cum Adibasi Kishan Sammelan were also organized during the occasion. Dr. Dipak Nayak (Scientist In-charge, ICAR-CISH Regional Research Station, Malda) coordinated the programme and proposed vote of thanks. Event Date:- 21-01-2017

Visit of APC Govt. of UP

Shri Pradeep Bhatnagar, IAS, Agriculture Production Commissioner, Government of Uttar Pradesh visited the Institute to look into the ongoing activities of mango diversity, nursery and high density planting in guava. Dr. Neelima Garg, Incharge Director and Head, PHM Division briefed him about the research activities of the Institute whereas Dr. V. K. Singh, Principal Scientist and Incharge, PFDC, ICAR-CISH, Lucknow illustrated the PFDC activities to the Agriculture Production Commissioner. During his visit, he also planted the Dhawal & Lalima varieties of guava in the Institute premise. Event Date:- 21-12-2016

Mera Gaon Mera Gaurav - Rasoolpur

भा.कृ.अनु.प.- केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ के वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों के 07 सदस्यी दल ने मेरा गांव मेरा गौरव कार्यक्रम के अन्तर्गत लखनऊ के काकोरी ब्लॉक के रसूलपुर गाँव में किसानों एवं बागवानों के मध्य टमाटर के पौधों का वितरण कर उनसे बागवानी से संबंधित सामयिक विषयों पर आज दिनांक 17.12.2016 को चर्चा की | इस दल का नेतृत्व डॉ शर्मिला रॉय, प्रधान वैज्ञानिक ने किया | इस कार्यक्रम में गांव के प्रधान श्री सुरेश यादव के अलावा 40 से अधिक किसान एवं बागवान के अलावा गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक भी सम्मिलित हुए | Event Date:- 17-12-2016

स्वच्छ भारत अभियान

स्वच्छ भारत अभियान आंदोलन को गति प्रदान करने के लिए भा.कृ.अनु.प.- केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ के वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के दिनांक 15.12.2016 को अपराह्न 4:00 बजे से संस्थान परिसर में उग आये पार्थेनियम घास को हटाया तथा कुछेक हिस्सों की सफाई भी की | Event Date:- 15-12-2016

सफाई अभियान 28 अक्टूबर 2016

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ की 07 सदस्यी वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों की एक टीम ने लखनऊ के मलिहाबाद ब्लॉक के मोहम्मद-रहमतनगर स्थित प्राथमिक विद्यालय में आज दिनांक 28.10.2016 को स्वच्छता पखवाड़ा के अन्तर्गत सफाई अभियान चलाया। इस सफाई अभियान टीम का नेतृत्व डॉ. वी.के. सिंह, प्रधान वैज्ञानिक ने किया। स्वच्छता पखवाड़ा के आरम्भ में डॉ. वी.के. सिंह ने प्राथमिक विद्यालय में 75 विद्यार्थियों को स्वच्छता की शपथ दिलायी तथा उन्हें जीवन में स्वच्छता के महत्व पर जानकारी प्रदान की। डॉ. वी.के. सिंह ने इस अवसर पर संस्थान द्वारा चलाये जा रहे स्वच्छता कार्यक्रम की भी संक्षिप्त जानकारी भी दी। उन्होंने आगे बताया स्कूल के बच्चों में जागरुकता पैदा करने का मुख्य उददेश्य है कि बच्चे भी अपने-अपने घरों एवं आसपास के क्षेत्रों में जाकर अपने रिश्तेदारों एवं अन्य लोगों में स्वच्छता संबंधी जागरुकता पैदा करेंगे। स्वच्छता अभियान में विद्यार्थियों ने विशेष रुचि दिखायी। इस अवसर पर प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती नीतू गॉंधी सहित 05 अन्य शिक्षक भी उपस्थित थे। स्वच्छता कार्यक्रम के अन्त में संस्थान की ओर से डॉ. वी.के. सिंह ने विद्यालय को एक बड़ा कूड़ादान दिया गया ताकि भविष्य में स्कूल में बच्चे कूड़ा फेंकने के लिये इसका उपयोग करें। इस दौरान संस्थान की ओर से विद्यालय के प्रांगण में आम, अमरुद एवं बेल के पौधे भी लगाये गये।

A team of 07 members of the ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Lucknow embodying scientists, officers and staff visited the Primary School of the Mohamadnagar-Rahmatnagar area of Malihabaad block of Lucknow to accomplish cleanliness drive and create awareness amongst the students and teachers under Swachhta Pakhwada on 28 th October, 2016. The team was led by Dr. V. K. Singh, Principal Scientist who gave an oath of Swachhta to students of the Primary School in the presence of its Principal, Smt. Netu Gandhi and 05 other teachers. On this occasion, Dr. Singh briefed the gathering about the importance of our swachh jeevan. Dr. V. K. Singh also apprised the teachers and students of the school about the activities being carried out under Swachhta Abhiyan by ICAR-CISH, Lucknow. In his remarks, he informed that the Swachhta Pakhwada is being accomplished to create awareness amongst the students so that the younger generation could generate more awareness about cleanliness in their own houses, schools as well as surrounding areas. The students of the school displayed keen interest in the cleanliness drive. A dustbin was handed over to the School Principal by Dr. V. K. Singh so that, in future, littering should stop and the garbage amassed could be thrown into it. The visiting team also planted three plants of mango, guava and bael in the school premises.

Event Date:- 28-10-2016

Swachh Bharat drive at Pahiya Ajampur

CISH staff team visited village Pahiya Ajampur to create awareness among school children about Swachh Bharat mission, intended the participation of each and every individual in the drive to make India clean and beautiful. Need of sanitation, role of personal hygiene and cleanliness surrounding was emphasised in the interaction meeting. Primary School children taken pledge of Swachh Bharat and actively participated in the event, the children also planted fruit trees in their premises. Cleaning of road sides and eradication of Parthenium was also done to get attention of villagers on the mission. Event Date:- 07-10-2016

Training for DDs/DHOs under PMKSY

A two days training on micro irrigation Under Pradhan Mantri Krishi Sinchai Yojana “Per Drop More Crop – Micro irrigation” will be organized by the Precision Farming Development Centre, ICAR-CISH, Lucknow for up-gradation of the technical knowledge of the Dy. Directors/ DHOs and staff of the Horticulture and Food Processing Department, Uttar Pradesh at ICAR-CISH, Lucknow during 06-07 October, 2016. About 35 Dy. Directors/DHOs of the State Horticulture Department are likely to participate in the same. During the technical session, detailed deliberations given on drip irrigation system, its components, installation, operation and maintenance and its use in different horticultural crops along with field visit on-field practical training. Event Date:- 06-10-2016

Brainstorming session on success stories

Institute organized one day Brainstorming Session on Success Story on 04-10-2016 to promote awareness among scientific fraternity on documenting and writing success stories. Director Dr. Shailendra Rajan chaired the session and he spoke about ‘Success Stories under Adversities’. Dr. Maneesh Mishra elaborated on ‘How to Pen & Popularize Success Stories’, Dr. Neelima Garg deliberated on ‘Role of Scientists in Creating Success Stories’ Dr. Barsati Lal showed the Success Stories of CISH and Dr. Sharmila Roy gave examples of Successful Stories from other Institution. All Scientists participated in the session enthusiastically. Event Date:- 04-10-2016

Rashtriya Swacchta Diwas

The Swachhata Pakhwada of the ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Rehmankhera, Lucknow began here with the Swachh Bharat Abiyan on the Rashtriya Swacchata Diwas on October 2, 2016 at all its premises. On the Rashtriya Swacchata Diwas, all the Scientists, Technical and Administrative Officers and Staff, Supporting staff as well as Research Associates, Senior Research Fellows, etc. actively participated in the cleanliness drive that took at all its campuses including first block and Rae Bareli Road Campus. Event Date:- 02-10-2016

Training on Micro Irrigation under PMKSY

Two days training on micro irrigation Under Pradhan Mantri Krishi Sinchai Yojana “Per Drop More Crop – Micro irrigation” was conducted by the Precision Farming Development Centre, ICAR-CISH, Lucknow to up-gradation of the technical knowledge of the Deputy Directors/ DHOs and staff of the Horticulture and Food Processing Department, Uttar Pradesh at ICAR-CISH, Lucknow during 29-30 September, 2016. About 35 Deputy Directors/DHOs of the State Horticulture Department were participated in the same. During the technical session, detailed deliberations on drip irrigation system, its components, installation, operation and maintenance and its use in different horticultural crops along with field visit on-field practical training was given. Event Date:- 29-09-2016

Celebration of Hindhi Diwas at CISH

Hindi Pakhwara started with the Hindi Diwas on 14-09-2016 under the chairmanship of Dr. S. Rajan, Director, ICAR-CISH. In his inaugural address he emphasised the need for using hindi in day today official communication. Shri Dhiraj Sharma, A.D. (Hindi), talked about different methods for enhancing the use of hindhi in official communications along with the various programme to be organised in the hindi pakhwara. In the programme, special lectures were given by ICAR-CISH staffs Dr Ghanshyam Pandey and Dr Devendra Pandey, on method of popularization of hindi in offices as well as in daily routine. Event Date:- 14-09-2016

Farmer-scientist interaction meeting

A farmer-scientist interaction meeting was organised on 05-09-2016 at village Amethia Salimpur of Kakori under the Mera Gaoan Mera Gaurav Programme by ICAR-CISH, Lucknow. More than 40 farmers of the village attended the meeting. Dr V. K Singh, Principal Scientist, ICAR- CISH enumerated modern technology of mango and guava along with importance of protected cultivation of vegetables for enhancing income and employment of the farmers through off season raising of seedling in plastic protrays using soil less media. On the occasion farmers queries related to different aspects of fruits and vegetable production were also amicably answered by the scientists. The tomato saplings of high yielding varieties i.e. Abhilash, Himsona and Naveen were distributed among the farmers. The farmers were keen to grow the indeterminate tomato varieties. Event Date:- 05-09-2016

Plant Genome Savior Community Award

Society for Conservation of Mango Diversity (SCMD), a mango farmers association from Malihabad, Lucknow started by the initiative of ICAR-CISH is conferred this year with "Plant Genome Savior Community Award" for conservation of mango varieties by Protection of Plant Varieties and Farmers’ Rights Authority (PPV&FRA), India, in an award ceremony held on 24th August at National Academy of Agricultural Sciences, New Delhi. The award presented by honorable union minister of Agriculture and Farmers welfare Shri. Radha Mohan Singh and also the occasion graced with the presence of honorable minister(s) of state for Agriculture and Farmers welfare Shri S.S. Ahluwalia, Shri. Parshottam Rupala and Shri. Sudarshan Bhagat. The award included price money of Rs. 10 Lakhs and a memento. Dr. S. Rajan, Director, ICAR-CISH (facilitator) along with five members of SCMD attended function to receive the honor. Event Date:- 24-08-2016

ICAR-CISH to come up with KVK at Malda

A team led by former Vice Chancellor (RAU, Bihar) G Trivedi visited the regional research station of Central Institute of Subtropical Horticulture (CISH) at Malda to select the site for proposed Krishi Vigyan Kendra, on Tuesday. CISH director Shailendra Rajan said that the farmers will be benefitted by KVK project. “The site selection committee stressed upon that fact that mango being an important crop of the district, the proposed KVK should work to solve the problem of mango industry at Malda and also to diversify the fruit crop production by introducing different types fruits like, guava, pineapple, jamun, bael and aonla” he said. “Several CISH technologies like varieties, hi-tech nursery, canopy management, pest and diseases management, protected cultivation and value addition can directly be adopted by the farmers of the region, where KVK can play an important role. The committee also suggested to intensify our programme on fruit crop based integrated farming systems having livestock components for livelihood and nutritional security” he added. (Courtesy: The Pioneer daily, Wednesday Aug 24, 2016). Event Date:- 24-08-2016

कार्यशाला - राज भाषा नियम, विनियम एवं कार्यान्वयन

दिनांक २२.०८.२०१६ को केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ में श्री मनोज कुमार, सहायक मुख्य तकनीकी अधिकारी, राजभाषा विभाग, भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद्, नयी दिल्ली ने संस्थान के वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को राजभाषा हिंदी- नियम, विनियम एवं कार्यान्वयन विषय पर आयोजित कार्यशाला में व्यख्यान दिया। Event Date:- 22-08-2016

Training on drip irrigation and plastic mulching

On 3-4 August, 2016, training program on “drip irrigation, plastic mulching and importance of protected cultivation in horticulture” was organized at Vikas Bhawan, Lakimpur Kheri by PFDC, ICAR-CISH, Lucknow. Seventy farmers were participated in the training program and dignitaries from district horticulture department, Shri. Amit Bansal, IAS, Chief Development Officer with other officials presided over the training programme. Dr. V.K. Singh, PI, PFDC, ICAR-CISH, Lucknow enumerated the technologies developed by PFDC, ICAR-CISH, especially on drip irrigation & plastic mulching techniques. The technical session on drip irrigation, mulching and protected cultivation was delivered by the PFDC staff. The farmers were also made aware about new varieties of mango and guava released. Visit was also conducted at different farmer’s fields who have installed micro- irrigation system under polyhouse. The training was useful to the farmers and it was appreciated by officers. The print media also covered this training programe. Event Date:- 03-08-2016

Workshop on ‘Creating awareness’ on providing consultancy

परामर्श देने के विषय में जागरूकता पर कार्यशाला

संस्थान में परामर्श देने/ठेका सेवा/अनुसंधान/प्रशिक्षण तथा कृषि प्रौद्योगिकी तैयार करने पर 29 जुलाई, 2016 को जागरूकता पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। संस्थान के निदेशक ने इस अवसर पर अपने व्याख्यान में अच्छा, बुरा उपयोगी तथा अनुकरणीय अनुसंधान पर जानकारी प्रदान की।

One Day Workshop on ‘Creating awareness’ on providing consultancy/contract service/research/training and generating agricultural technology portfolio for business/entrepreneurship development/ Start-Ups” on July 29, 2016 at Institute. A lecture was delivered by the Director ICAR-CISH, Lucknow on “Good, Bad, Useful and Great Research” 29.07.2016).

Event Date:- 29-07-2016

National Workshop on Sustainable Mango Production Organized

सतत आम उत्पादन पर राष्ट्रीय कार्यशाला

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान-क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र, माल्दा (पश्चिम बंगाल) में 18-19 जून, 2016 को सतत आम के उत्पादन: उष्ण एवं उपोष्ण क्षेत्रों में हो रहे जलवायु परिवर्तन तथा आम विविधता पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। स्वामी विश्वमयानन्द जी (सचिव, रामकृष्ण मिशन आश्रम, सर्गाची, मुर्शिदाबाद) ने डॉ. पी. के. चक्रवर्ती (सहायक महाप्रबंधक-संयंत्र संरक्षण, भा.कृ.अनु.प., नई दिल्ली), डॉ. आर. के. ठाकुर (परियोजना समन्वयक, ए.आई.सी.आर.पी.-हनी बी और पोलिनेटर), डॉ. एस. राजन, निदेशक, केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। दस कार्यशाला में देश के विभिन्न हिस्सों से पचास आम शोधकर्ताओं, 100 आम उत्पादक और अन्य सहभागी सम्मिलित हुए। कार्यशाला में सतत आम उत्पादन के प्रासंगिक और उपयोगी विषयों को चर्चा की गयी। डॉ. पी.के. चक्रवर्ती ने कीट और रोगों के प्रबंधन के साथ-साथ आम में रासायनिक कीटनाशकों और फफूँदनाशियों के विवकेपूर्ण प्रयोग पर भी जोर दिया। डॉ. राजन ने पूर्वी भारत के किसानों के किस्मों के फार्म संरक्षण और पंजीकरण का दस्तावेज़ीकरण किये जाने पर दिया। कई विशिष्ट दिग्गजों की उपस्थिति में डॉ. पी.के. चक्रवर्ती (सहायक महानिदेशक-प्लांट प्रोटेक्शन, आईसीएआर, नई दिल्ली) ने आम डायवर्सिटी शो का उद्घाटन किया। पूर्वी और उत्तरी भारत के विभिन्न हिस्सों से आम किसानों और अन्य हितधारकों ने 350 किस्मों के आम का प्रदर्शन किया।

ICAR CISH-Regional Research Station, Malda (West Bengal) organized National Workshop on Sustainable Mango Production: Challenges under Changing Climate in Tropics and Subtropics and Mango Diversity Show during June 18-19, 2016. Swami Viswamayananda Ji (Secretary, Ramakrishna Mission Ashrama, Sargachi, Murshidabad) inaugurated the workshop in august presence of Dr. P. K. Chakrabarti (Assistant Director General-Plant Protection, ICAR, New Delhi), Dr. R. K. Thakur (Project Coordinator, AICRP-Honey Bee & Pollinators) and Dr. S. Rajan (Director, CISH, Lucknow) & other dignitaries. Fifty mango researchers, 100 mango growers & other stakeholders were part of the programme from different parts of country. The workshop covered relevant and useful topics of sustainable Mango Production. Dr. P. K. Chakrabarti emphasized for integrated pests & diseases management as well as judicious use of chemical pesticides and fungicides in mango. Dr. Rajan stressed for documentation, on farm conservation and registration of farmers varieties of mango from Eastern India. The Mango Diversity Show was inaugurated by Dr. P. K. Chakrabarti (Assistant Director General-Plant Protection, ICAR, New Delhi) in the presence of many distinguished diginitaries. 350 varieties of mango were exhibited by mango growers, mango federation and other stake holders from various parts of Eastern & Northern India.

Event Date:- 18-06-2016

Secretary, DARE and Director General, ICAR visits ICAR-CISH, Lucknow

सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ भ्रमण

डॉ. त्रिलोचना महापात्रा, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली ने डॉ. एन.के. कृष्ण कुमार, उप महानिदेशक (बागवानी विज्ञान) तथा डॉ. जे.के. जेना, उप महानिदेशक (मत्स्य विज्ञान) के साथ 8 जून, 2016 को केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ का भ्रमण किया। अपने यात्रा के दौरान डॉ. महापात्रा संस्थान ने नर्सरी का भ्रमण किया तथा वहां तैयार की जा रही गुणवत्ता वाले पौधों रोपण सामग्री के कार्य की प्रशंसा की गई। उन्होंने विभिन्न फलों के जननद्रव्य ब्लॉकों को भी देखा और बीजरहित जामुन में गहरी रूचि दिखायी। उन्होंने संस्थान परिसर में आम की अरुणिका किस्म लगाया। उन्होंने संस्थान के प्रसंस्कृत उत्पादों में से कुछेक का स्वाद लिया और उनकी सराहना की। उन्होंने संस्थान के वैज्ञानिकों, प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से बातचीत की तथा उन्हें परिषद से सभी संभव सहायता एवं मार्गदर्शन का आश्वासन दिया। उन्होंने उप-उष्णकटिबंधीय फल फसलों के विभिन्न पहलुओं पर किये गये प्रशंसनीय शोध के लिए संस्थान की प्रशंसा की।

Dr. Trilochan Mohapatra, Secretary DARE and Director General, ICAR, New Delhi accompanied by D.D.G. (Horticulture Science Division.), Dr. N. K. Krishna Kumar and D.D.G. (Fisheries Science Division), Dr. J. K. Jena visited ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture on June 8, 2016. In course of his visit, Dr. Mohapatra visited the Institute’s nursery and was praised the work of quality planting material. He also visited the germplasm blocks of different fruits and shown keen interest in seedless jamun. He planted the mango variety Arunika in the Institute’s premises. He tested some of the processed products of the Institute and appreciated them. He also interacted with the scientists, administrative and technical staff of the Institute and assured them of all possible support and guidance from the council. He praised the Institute for its commanding research on various aspects of subtropical fruit crops.

Event Date:- 08-06-2016

33rd Foundation Day Celebrated

33वाँ स्थापना दिवस समारोह

संस्थान में 01 जून, 2016 को रहमानखेड़ा परिसर में 33वाँ स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर सुश्री निवेदिता शुक्ला वर्मा, प्रमुख सचिव, बागवानी तथा खाद्य प्रसंस्करण मुख्य अतिथि थीं। इस अवसर पर संस्थान ने आम से जुड़े सहभागियों के लिये परामर्शक बैठक का आयोजन किया जिसके दौरान सुरक्षित, तुड़ाई रख-रखाव तथा विपणन के द्वारा अधिक-से-अधिक लाभ कमायें विषय पर जानकारी दी गयी। संस्थान ने अपने अनेक सेवानिवृत्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इस अवसर पर सम्मानित किया। आम सहभागिता परामर्शक बैठक ने मेरा गाँव मेरा गौरव के अंतर्गत अंगीकृत किये हुए आम उत्पादकों को जागरूक किया गया जिससे कि गुड मैनेजमेन्ट प्रैक्टिस के द्वारा तुड़ाई उपरांत रख-रखाव तथा प्रबंधन प्रोटोकाल्स पर ध्यान दिया जा सके। कार्यक्रम के दौरान किसानों में सब्जियों के बीज बाँटे गये।

Institute celebrated its 33rd foundation day on June 1, 2016 at its Rehmankhera campus, Lucknow. Ms. Nivedita Shukla Verma, Principal Secretary, Horticulture and Food Processing, Government of Uttar Pradesh was the chief guest. On this occasion, Institute also organized Mango Stakeholders’ Consultative Meeting on “Safe Harvesting, Handling and Marketing for Maximizing Profits”. Institute felicitated many of its retired staff for their excellent contribution in shaping the Institute. Mango Stakeholders’ Consultative Meeting helped in sensitizing mango farmers from 40 villages adopted under ‘Mera Gaon Mera Gaurav’ on good management practices linked to post harvest handling and management protocols. During the programme seeds of vegetables were distributed among the farmers.

Event Date:- 01-06-2016

Training on Export Promotion of Mango at Bankura

बांकुरा में निर्यात प्रसार पर प्रशिक्षण

बांकुरा पश्चिम बंगाल में नये आम पट्टी के रूप में उभरा है। बांकुरा जिला प्रशासन द्वारा 2000 जनजातिय महिलाओं की आजीविका को सुरक्षित करने के लिये आम्रपाली और मल्लिका के 300 आम के बागान लगाये गए। केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान लखनऊ अपेडा, कोलकाता की मदद से बांपुरा से आम का उत्पादन करने का प्रया स कर रहा है। बांकुरा के विभिन्न ब्लाकों में ताजे आम की गुणवत्ता का मूल्यांकन करने के लिए डी.जी.एम, अपेडा सी.आई.एस.एच लखनऊ तथा क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, मालदा के वैज्ञानिकों ने आम के बागानों का भ्रमण किया। बाद में संस्थान ने 29 मई, 2016 को बांकुरा जिला प्रशासन तथा उपनिदेशक कृषि (फल), बांकुरा के सहयोग से निर्यात बढ़ाने हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का वित्त पोषण अपेडा द्वारा किया गया। इस प्रशिक्षण में 55 आम उत्पादक, पंचायत के प्रतिनिधि गण तथा जिला प्रशासन के प्रतिनिधि सम्मिलित थे।

Bankura has emerged as new mango belt in West Bengal. Around 300 mango orchards of Amrapali and Mallika have been established by Bankura District Administration involving 2000 tribal women for ensuring their livelihood. ICAR-CISH, Lucknow is trying to initiate export of mango from Bankura with support from APEDA-Kolkata. A team comprising of DGM, APEDA and scientists from ICAR-CISH, Lucknow and ICAR-CISH-RRS, Malda visited mango orchards at different blocks of Bankura to assess the quality of fresh mangoes. Subsequently, Institute organized APEDA sponsored training programme on export promotion of mango on May 29, 2016 in collaboration with Bankura District Administration & Deputy Director of Agriculture (Fruits), Bankura. The programme was inaugurated by ADM (Development). Fifty five participants including mango growers, representatives of Panchayat, district administration were present in the training. It was decided to have a comprehensive project for supporting the established mango orchards for better livelihood opportunity of the Self Help Groups.

Event Date:- 29-05-2016

Progressive Mango Growers Meet at Murshidabad

मुर्शिदाबाद में आम उत्पादकों की बैठक

संस्थान द्वारा कृषि निदेशालय (फल,) मुर्शिदाबाद के सहयोग से प्रगतिशील आम उत्पादकों की एक बैठक का आयोजन 28 मई, 2016 को किया गया। इस कार्यक्रम का उदघाटन स्वामी विशोमयानंद जी (सचिव) राम कृष्ण मिशन आश्रम, (सरगाची) द्वारा किया गया। इस बैठक के दौरान 56 प्रगतिशील आम उत्पादक उपस्थित थे। स्वामी विशोमयानंद जी ने उदघाटन संबोधन दिया। जबकि डॉ. शैलेन्द्र राजन ने की-नोट एड्रेस किया। मुर्शिदाबाद जिले के आम में होने वाले उत्पादन तथा विपणन संबंधी समस्याओं के निदान के लिये प्रगतीशील उत्पादकों तथा वैज्ञानिकों के बीच संवाद का एक सत्र आयोजित किया गया। डॉ. गौतम राय, उप निदेशक कृषि (फल) ने मुर्शिदाबाद में होने वाले आम के उत्पादन तथा विपणन संबंधी विषय पर व्याख्यान दिया। डॉ. दीपक नायक ने अपने संबोधन में क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र मालदा द्वारा आम के संरक्षण तथा स्थानीय किस्मों के दस्तावेजीकरण संबंधी योजना पर संक्षेप में जानकारी दी।

Progressive Mango Growers Meet was organized by the Institute at Berhampore, Murshidabad on May 28, 2016 in collaboration with Directorate of Agriculture (Fruits), Murshidabad (West Bengal). The programme was inaugurated by Swami Viswamayananda Ji Maharaj (Secretary, Ramakrishna Mission Ashrama, Sargachi, Murshidabad). Fifty Six progressive mango growers were present in the meet. Swami Viswamayanand Ji delivered his inaugural lecture, whereas, key note address was delivered by Dr. S. Rajan. An interaction session between progressive growers and scientists was organized to understand their problems in production and marketing of mango at Murshidabad district. Dr. Goutam Roy, Deputy Director of Agriculture (Fruits), Murshidabad deliberated on problems of production and marketing of mango at Murshidabad district. Dr. Dipak Nayak addressed the mango growers and briefed the future plan of ICAR-CISH-RRS, Malda for conservation and documentation of local varieties of mango.

Event Date:- 28-05-2016

Progressive Mango Growers Meet at Malda

मालदा में प्रगतिशील आम उत्पादकों की बैठक

संस्थान द्वारा कृषि निदेशालय (फल,) मालदा के सहयोग से प्रगतिशील आम उत्पादकों की एक बैठक का आयोजन 27 मई, 2016 को किया गया। इसका उदघाटन संस्थान के निदेशक डॉ. शैलेन्द्र राजन द्वारा किया गया। बैठक के दौरान 60 प्रगतिशील आम उत्पादक, उपनिदेशक कृषि (फल) के कार्यालय के प्रतिनिधि, मालदा, रतुआ आम उत्पादक संघ यू.बी.के.बी-आर.आर.एस.एस-मानिक चक तथा कृषि विज्ञान केंद्र मालदा के प्रतिनिधि सम्मिलित हुए। अपने उदघाटन संबोधन में संस्थान के निदेशक ने उत्पादकों को केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र मालदा की गतिविधियों की जानकारी दी। डॉ. राहुल चक्रवर्ती उपनिदेशक कृषि (फल), मालदा ने उपस्थित लोगों को मालदा के आम उद्योग की जानकारी दी।

ICAR-CISH, Lucknow organized a Progressive Mango Growers Meet at its Regional Research Station, Malda, West Bengal. on May 27, 2016 in association with Directorate of Agriculture (Fruits), Malda. The programme was inaugurated by Dr. S. Rajan, Director, ICAR-CISH, Lucknow. Sixty progressive mango growers, representatives from office of the Deputy Director of Agriculture (Fruits), Malda, Ratua Mango Growers Association, UBKV-RRSS, Manikchak and KVK, Malda were present during the meet. Dr. Rajan in his inaugural lecture briefed the growers regarding activities of CISH-RRS, Malda. Dr. Rahul Chakraborty, Deputy Director of Agriculture (Fruits), Malda also delivered a lecture on present status of mango industry at Malda

Event Date:- 27-05-2016

Interface Meeting on Packaging of Mango

आम पैकेजिंग की बैठक

केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, मालदा द्वारा आम की पैकेजिंग पर 27 मई, 2016 को इंटरफेस बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में इंस्टर्न इण्डिया कौरूगेटेड बाक्स मैनुफैक्चरर एसोसिएशन के 15 पैकेजिंग उद्योग के प्रतिनिधि, मालदा मैंगो मर्चेंट चैम्बर आफ कौमर्स यू.बी.के.वी-आर.आर.एक, मनीचक तथा कृषि विज्ञान केंद्र मालदा के प्रतिनिधि तथा 60 प्रगतिशील आम उत्पादक सम्मिलित हुए। इस अवसर पर डॉ. शैलेन्द्र राजन ने की-नाट एड्रेस दिया। डॉ. चक्रवर्ती उपनिदेशक कृषि (फल), मालदा ने आम के पैकेजिंग और उसके महत्व पर प्रकाश डाला। पैकेजिंग उद्योग के प्रतिनिधियों द्वारा इस अवसर पर आम के पैकेजिंग की तकनीकी जानकारी प्रदान की गयी। उन्होंने प्रगतिशील आम उत्पादकों को पैकेजिंग के तरीके तथा सी.एफ.डी. बक्सों में आम के पैकेजिंग कैसे किये जाए की जानकारी दी।

An interface meeting on Packaging of Mango was organized at ICAR-CISH-RRS, Malda on May 27, 2016. Sixty progressive mango growers, representatives from 15 packaging industries under Eastern India Corrugated Box Manufacturers Association, Malda Mango Merchant Chamber of Commerce, UBKV-RRSS, Manikchak and KVK, Malda participated in the meeting. Dr. S. Rajan, Director, ICAR-CISH, Lucknow delivered the key note address. Dr. Rahul Chakraborty, Deputy Director of Agriculture (Fruits), Malda spoke on packaging of mango and its importance. Technical details regarding packaging of mango was described by the representatives of packaging industries. They have also shown the hands on practices and uses of CFB boxes for packaging of mango to progressive mango growers

Event Date:- 27-05-2016

Inauguration of Malda (RRS)

ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Lucknow’s Regional Research Station at Makdumpur, Malda, West Bengal was inaugurated 28.2.2016 by Shri Krishnendu Narayan Chowdhury, Hon’ble Minister In-Charge Department of FPI & Horticulture, Govt. of West Bengal in the presence of Dr. N. K. Krishna Kumar, Deputy Director General (Horticulture Science), ICAR, New Delhi in the presence many dignitaries. Speaking on the occasion Shri Chowdhury emphasized the need of technology dissemination in the field of Horticulture particularly mango and litchi for the overall development of the farmers of the region. He traced the history of the establishment of the Regional Research Station and the efforts made by Dr. S. Ayyappan, Former Secretary DARE and Director General ICAR and the Government of West Bengal and how the impediments in its establishment were surmounted. Dr. N. K. Krishna Kumar, DDG (Hort. Science) told the dignitaries and the farmers that he intends to form a team of experts working on mango throughout the country and identify the problems and draw a roadmap for future research. He assured that the Institute proposes to establish an elite nursery and commence the research on vegetables, floriculture and medicinal & aromatic plants, besides mango, guava and litchi. He also emphasized the need for creating export infrastructure for fruits as well as processed products and creating awareness on international standards. Welcoming the dignitaries, Dr. Shailendra Rajan, Director, talked about the conservation of mango and other fruit varieties at the farmers fields through community efforts. He assured that the nursery programme will get the desired impetus for producing elite planting material. He also emphasized the need for efficient training of the farmers towards technology dissemination.

Shri C.M, Bachawat, IAS, Additional Chief Secretary Department of FPI and Horticulture, Prof. Debasis Mazumdar, Vice Chancellor, Uttar Banga Krishi Vishwa Vidyalaya, Pundibari, Coochbehar, Dr. P. K. Pramanick, Director, Horticulture and Shri S. K. Dwivedi, District Magistrate and Collector, Malda also graced the ceremony.

Temporary office cum Laboratory building of ICAR-CISH Regional Research Station at Food Park, Malda was also inaugurated on 28.02.16 by Dr. N. K. Krishna Kumar, Hon’ble DDG (Hort. Science), ICAR in presence of Hon’ble Minister In-Charge Department of FPI & Horticulture, Govt. of West Bengal and other dignitaries.

Event Date:- 26-03-2016

हिन्दी माह 15 Sep 2014-12 Oct 2014

Celebrating Hindi diwas to Our institute. from 15 Sep 2014 to 12 Oct 2014 Event Date:- 07-05-2015

2nd Oct 2014 ( Swachh Bharat Abhiyan )

This campaign was officially launched on 2 October 2014 at Rajghat, New Delhi, where Prime Minister Narendra Modi himself cleaned the road. Event Date:- 02-10-2014

Entrepreneurs Training

Two day Entrepreneurs Training was organised in Institute permises from 03 -04 August 2016. 35 Participants were trained for Establishment of Fruit and Vegetable Nursery, High Density Plantation of Guava, Organic farming of Fruit and vegetables & Processing of Fruits. This programe was sponsered by Agri-Clinic & Agri Business Training Institute, Gomti Nagar, Lucknow. Event Date:- 2016-08-03

Awareness workshop

One day awareness workshop was organized on “Creating awareness on providing consultancy/contract service/research/training and generating agricultural technology Portfolio for Business / Entrepreneurship Development/ Start - Ups” for the scientific staffs. Dr. Shailendra Rajan, Director and chairman ITMU, ICAR-CISH, Lucknow briefed the purpose of the workshop and explained in detail through his presentation the importance of research and clear demarcation between good, bad and great research. Dr. R.M Khan, Chairman, PME cell described the central role of PME cell for providing the scope and processing of professional services in ICAR system. Ms. P. J Singh, Senior Scientist, ICAR-NBFGR, Lucknow and her team made presentation on Startups and entrepreneurship development. Event Date:- 2016-08-29

Awarness programme on GI

Programme was organized on the 30th July 2016 to make the farmers aware about Geographical Indication of “Malihabadi Dusseheri” to generate entrepreneurship amongst the farming community through constituting a registered society. About 25 mango growers/ farmers from Kasmandi Kalam, Mohammadnagar Talukedari, Sarsanda, Goparamau, Unnao and other parts of Lucknow participated. Dr. S Rajan, Director, ICAR-CISH motivated the farmers to develop and register a trademark of the registered society. Ms. Poonam Jayant Singh, IPR Expert from ICAR-NBFGR, Lucknow elaborated about GI and its uses in different country and exhorted the participants to make use of GI in mango season for promotion of eco/agri-horti tourism. Dr. Neelima Garg, Head, Post Harvest Management, ICAR-CISH, Lucknow highlighted the benefit accrual pertaining to minimizing the post harvest losses coupled with the availability of umpteen number of GI mango products. Event Date:- 2016-07-30

Awareness on “Conservation of mango diversity”

An awareness Program on “Conservation of mango diversity” (mango plantation and distribution of plants) was organised by ICAR-CISH, Lucknow on 11-8-16. The programme was organised under Mera Gaoan Mera Gaurav (MGMG) programme being implemented by the institute. The mango saplings of heirloom varieties conserved by the Society for Conservation of Mango Diversity (SCMD), Kashmandi kalam, Malihabad were distributed among the more than 50 farmers of 15 villages adopted under MGMG programme. Dr S. Rajan, Director, ICAR-CISH, briefed about SCMD and its achievements. Shri. Ram Kishore, a community farmer also shared his experience about the community participation and its advantages. Programme ended with vote of thanks proposed by Shri. Pardeep Joshi (L&T) and the event sponsored by Smt B. Joshi, a volunteer on her birthday. Event Date:- 2016-08-11

Brainstorming on “GAP certification in mango”

A brainstorming session on “GAP Certification in Mango” held on 09.08.2016 at ICAR-CISH, Rehmakhera Lucknow. Dr. Shailendra Rajan, Director, ICAR-CISH highlighted the importance of the subject and the benefits likely to be accrued to the stakeholders in terms of better marketing and price realization. Speaking at length, Mr. Mohit Sharma, Research Scholar from University of Rajasthan shared his experiences gathered through intensive tours and farmer’s interaction with reference to pros and cons of EUROGAP/GAP Certification and about its awareness amongst the farmers of Southern part of mango belt. Representatives from state government flagged the issues in respect of database pertaining to records of GAP at individual farmer level. Interacting with participants, Director, ICAR-CISH, Lucknow explained about the efforts made by ICAR-CISH, Lucknow in developing such a database and constitution of the society. In this programme, representatives from Mango Pack House, Lucknow, Mandi Parishad, Lucknow and Society for Conservation of Mango Biodiversity from Kasmandi Kalam, Mohammadnagar Talukedari, Sarsanda, Goparamau, Unnao and other parts of Lucknow were also participated. Event Date:- 2016-08-09

Training on squash and pulp preparation

Training programme on mango processing (squash and pulp preparation) for rural women was organised on 16-08- 2016 under Mere Gaon Mera Gaurav programme at CISH, Lucknow. A total of 15 rural women and one rural youth belonging to small and marginal farm families participated under the programme. Women were also getting acquainted with the protected vegetable cultivation for income and employment generation. Event Date:- 2016-08-16

Parthenium awareness week

Parthenium awareness week is being started on 17-08- 2016 in the leadership of Dr S, Rajan, Director, ICAR-CISH, Lucknow. An awareness programme about Parthenium identification, its harmful effects on biodiversity, human health and control was organised on 17-08- 2016 under Mera Gaon Mera Gaurav (MGMG) Programme at Primary and Middle School of Haphizkheda and Wazidnagar villages of Malihabad, Lucknow. Parthenium was removed in and around school premises with the participation of students during the programme. Event Date:- 2016-08-17

Mera Gaon Mera Gaurav

Interaction meeting with the primary school students to create awareness about health and cleanliness under Mera Gaon Mera Gaurav & Swachh Bharat Abhiyaan was held on 08.08.2016 at Muzasa village, Malihabad block, Lucknow. In this meeting, about 200 students (Class 1 to 8) attended and they were taught about good habits, cleanliness, nutrition and prevention as well as home remedy for some common diseases like Diarrhoea, typhoid, pneumonia, dengue and malaria. Event Date:- 2016-08-08

Tribal farmers’ meet

A Tribal farmers’ meet was organized at Salbona, Habibpur, Malda on 17.09.16 and inaugurated by Swami Shivasundaram Ji (Secretary, Bharat Sevashram Sangha) in the presence of Dr. S. Rajan (Director, CISH, Lucknow) and other dignitaries. Event Date:- 2016-09-16

Nutri-smart villages under TSP

Tribal farmers from 17 tribal villages from Malda and 9 tribal villages from Murshidabad joined hand with ICAR-CISH-RRS, Malda for acquiring nutritional security and enhanced profitability by creating Nutri-Smart village. A whopping number of tribal families (1150) came forward for establishing orchard of fruit crops such as mango, guava, jamun and bael along with kitchen garden comprising of 8-10 different vegetables. Nutri-smart villages will have composting units and water harvesting structure for sustainable production of fruits, vegetables, poultry and fishes. These adopted families under Tribal Sub Plan will not only get nutritional assurance from home grown fruit and vegetables but will be able to get required animal protein from poultry and fish. The farm waste will be diverted towards the poultry and as fish feed. The targeted families can exchange surplus produce with community members or earn extra bucks from selling this surplus produce to local market. Nutri-smart village initiative can change the face of tribal population of west Bengal with sustainable effort. The initiative was inaugurated by Mr. Abdur Rezzak Mollah (Hon’ble Minister In-charge, Department of FPI & Horticulture, Govt. of West Bengal) on September 16, 2016 at Ramakrishna Mission Ashrama, Sargachi, Berhampore in presence of Dr. S. Rajan (Director, CISH, Lucknow), Swami Viswamayananda Ji (Secretary, Ramakrishna Mission Ashrama, Sargachi) Dr. P. K. Pramanick (Director of Horticulture, Govt. of West Bengal) and other dignitaries. Dr. Dipak Nayak (Scientist & In-Charge, ICAR-CISH Regional Research Station, Malda) coordinated the programme & proposed vote of thanks. Event Date:- 2016-09-16

कवि सम्मेलन

भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ में दिनांक 23.09.2016 को कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया | इस कवि सम्मलेन में लखनऊ और उसके आस-पास के श्री कमलेश मौर्या, श्रीमती राधा पांडेय, श्री सूर्य कुमार पांडेय, श्री शिव कुमार व्यास, श्री गजेंद्र प्रियांशु तथा श्री अशोक अग्निपंथी सम्मलित हुए | इन कवियों एवं कवियत्री ने पद्यात्मक विधा के माध्यम से भारतीय दर्शन, रहस्यवाद से सम्बंधित, छायावादी, प्रगतिवादी कवितायें सुनाएँ | इन कविताओं में उपमा-उपमेय, अलंकारों का अद्भुत वर्णन दिखा | इस कवि समेलन की अध्यक्षता डॉ शैलेन्द्र राजन, निदेशक द्वारा किया गया | Event Date:- 2016-09-23

हिन्दी पखवाड़ा 2016 समापन समारोह

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ में दिनांक 28 सितंबर, 2016 को हिन्दी पखवाड़ा का समापन हो गया। इसके समापन समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में मिश्रिख (उ.प्र.) की माननीय सांसद, डॉ.(श्रीमती) अंजू बाला उपस्थित थीं। अपने मुख्य अतिथिये संबोधन में उन्होंने हिन्दी को सर्वोपरि तथा देश को एक सूत्र में पिरोने वाली भाषा बताया। उन्होंने अपनी अनुभूति के आधार पर बताया कि हिन्दी की महत्ता हम तभी समझते हैं जब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने फेसबुक, ट्वीटर, विकीपिडीया, गूगल तथा वाट्सएप जैसे अनेक माध्यमों का हिन्दी भाषियों द्वारा इस्तेमाल किये जाने को महत्वपूर्ण बताया। माननीय सांसद महोदया, डॉ. अंजू बाला भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ के हिन्दी पखवाड़ा 2016 के दौरान आयोजित हिन्दी की अनेक प्रतियोगिताओं के विजेता को दिये जा रहे प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम के अवसर पर बोल रहीं थीं । इस अवसर पर संस्थान के निदेशक, डॉ. शैलेन्द्र राजन ने अपने अध्यक्षीय संबोधन के दौरान हिन्दी की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा की हिन्दी न केवल राजभाषा है बल्कि संपर्क भाषा के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है। दूसरे अर्थ में हिन्दी देश की राष्ट्रभाषा भी है। उन्होंने प्रतियोगिताओं के विजेताओं को बधाई दी तथा आशा व्यक्त की कि संस्थान के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी पूरे वर्ष अपना सरकारी कार्य हिन्दी में ही करेंगे। समापन समारोह के अवसर पर हिन्दी पखवाड़ा 2016 के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाण-पत्र वितरित किये गये तथा साथ ही डॉ. अशोक कुमार मिश्र, प्रभारी अध्यक्ष, फसल सुरक्षा प्रभाग को उनके हिन्दी में किये गये उत्कृष्ट कार्यों के लिये सम्मानित भी किया गया। समापन समारोह के अवसर पर सभी गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत प्रभारी अध्यक्ष, फसल उत्पादन प्रभाग, डॉ. घनश्याम पाण्डेय द्वारा किया गया जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नीलिमा गर्ग, अध्यक्ष, तुड़ाई उपरान्त प्रबंधन प्रभाग द्वारा दिया गया। कार्यक्रम का संचालन श्री धीरज शर्मा, सहायक निदेशक (राजभाषा) ने किया। Event Date:- 2016-09-28

स्वच्छ भारत अभियान के अन्तर्गत स्वच्छता अभियान

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ में दिनांक 04 अक्टूबर, 2016 तथा दिनांक 05 अक्टूबर, 2016 को भी स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वच्छता अभियान जारी रहा। यह स्वच्छ भारत अभियान स्वच्छता पखवाड़ा कार्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए आयोजित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत दिनांक 04 अक्टूबर, 2016 को डा. राम कुमार, प्रधान वैज्ञानिक की अध्यक्षता में संस्थान के वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के एक दल ने काकोरी रेलवे स्टेशन पर जाकर न केवल सफाई की बल्कि रेलवे कर्मचारियों तथा रेलगाड़ियों की प्रतीक्षा कर रहे यात्रियों में स्वच्छता संबंधी जागरूकता भी पैदा की। दिनांक 05 अक्टूबर, 2016 को डा. ए. के.भट्टाचार्जी, प्रधान वैज्ञानिक की अध्यक्षता में संस्थान के वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के एक दल ने मेरा गाँव मेरा गौरव के अंतर्गत काकोरी ब्लॉक के मोइदीपुर नामक अंगीकृत गाँव में जाकर वहाँ के प्राथमिक विद्यालय में सफाई अभियान चलाया। इसी क्रम में प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों एवं वहाँ उपस्थित बच्चों को स्वच्छता संबंधी जानकारी भी प्रदान की। Event Date:- 2016-10-04

Swachhta Pakhwada

The ICAR-CISH, Lucknow continued its Swachhata Pakhwada even on 4th and 5th October, 2016. On 4th October, a team of scientists, officers and staff headed by Dr. Ram Kumar, Principal Scientist visited the Kakori railway station. The raison d’etre of the visit was to clean the platforms of the Kakori railway station and create awareness amongst the railways staff as well as the passengers. On October 5, 2016 under the leadership of Dr. Anup Bhattacharya, Principal Scientist, members of the committee visited the adopted village Moiddipur under Mera Gaon Mera Gaurav and cleaned the school premise of the Primary School. The visiting officials also gave valuable suggestions to teachers and students regarding the Swachh Bharat Abhiyan. A team of scientists headed by Dr. Dinesh Kumar, visited the Malihabad railway station on 9th October, 2016 to clean the entrance & platforms of the Malihabad railway station and to create awareness among the railway employees as well as the passengers. In continuation of cleanliness drive, a team of CISH staffs visited Primary schools of Golakuan & Mandauli on 13.10.16 and Bukhtiyarnagar on 14.10.16. ICAR-CISH staffs had taken oath for Swachh Bharat during initiation of Swachhta Pakhwada on 17.10.2016 which is presided over by Director, ICAR- CISH. All the officials of institute had promised to keep their surroundings neat and clean. Farm men & women were enlightened about utilization of decomposable garbage and agricultural biodegradable waste into compost to improve the soil fertility as well as reduce the environmental pollution. Awareness also created about cleanliness, child healthcare and demerits of open defecation at Bukhtiyarnagar, Malihabad. On 18.10.16, A team of ICAR-CISH staffs visited two villages viz. Tikatganj and Mandouli. On this occasion, farm men & women were educated about demerits of open defecation, water conservation, and importance of personal, home and surrounding cleanliness. Seedlings of vegetables were also distributed among the farmers to assist nutritional security. On 19.10.2016, ICAR-CISH staffs had collected biodegradable agricultural waste from the surroundings to prepare compost and it would be used as organic manure. It was demonstrated to a group of twenty farmers from the Department of Agriculture, Shivpuri, M.P. to make compost using farm waste using beneficial bacteria & fungus An essay competition was conducted to create awareness on the importance of cleanliness at Inter college, Vidyasthali, Kanar on 20.10.16. Fifty students comprising of two groups from Class 8-10th and 11-12th were participated in this competition. Event Date:- 2016-10-04

Visit of Financial Advisor, DARE

Dr. S. K. Singh, Additional Secretary, Government of India and Financial Adviser, ICAR, New Delhi visited ICAR-CISH, Lucknow on 30th September, 2016. In course of his visit, he took stock of the CISH Nursey situated at 1st block. He also chaired the meeting of the Institutes; scientists and told them about the ongoing developments at the ICAR management level. Event Date:- 2016-09-30

Mera Gaon Mera Gaurav

Distribution of quality seedlings to farmers at Mandauli on 13.10.16. Event Date:- 2016-10-14

Farmer Awareness Programme at Kannauj

On 14.10.2016, Farmer Awareness Programme was conducted at Bhawanipur and Ladpur, Gursahayganj, Kannauj, U.P. by PFDC, ICAR-CISH, Lucknow. About 25 farmers participated in the same. The participants were made aware about technologies developed by PFDC, ICAR-CISH like Drip irrigation, mulching and protected cultivation. Practical use of polyethylene mulching in potato was demonstrated at farmer’s field. Event Date:- 2016-10-14

स्वच्छता अभियान

लखनऊ, 22.10.2016। भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ के वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा लखनऊ के मलिहाबाद ब्लॉक के कसमंडी गाँव के ज्ञान द्वीप विद्यालय में स्वच्छता अभियान चलाया गया। इसके अंतर्गत स्कूल के प्रांगण की सफाई की गयी तथा 300 से अधिक बच्चों को सफाई, स्वास्थ्य एवं शिक्षा संबंधी जागरूकता पैदा की गयी। यह समस्त कार्यक्रम मिश्रिख लोकसभा क्षेत्र की सांसद डॉ. अंजू बाला जी की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के अवसर पर बोलते हुए डॉ. अंजू बाला जी ने स्कूल के विद्यार्थियों को स्वच्छता की शपथ दिलायी तथा आशा व्यक्त की कि बच्चे अपने घर, आस-पास के क्षेत्र तथा विद्यालय को भी साफ रखने में सहयोग देंगे। उन्होंने गंदगी के कारण फैल रहे डेंगू, चिकनगुनिया आदि की रोकथाम में भी सफाई के योगदान की चर्चा की। इस अवसर पर सांसद महोदया ने दिनांक 20 अक्टूबर, 2016 को मलिहाबाद के कनार स्थित विद्यास्थल नामक विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए अयोजित स्वच्छ भारत अभियान शीर्षक निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया। कक्षा 8 एवं 9 के विद्यार्थियों में कुमारी सुकृति मौर्या प्रथम रहीं जबकि कक्षा 10 से 12 के विद्यार्थियों के बीच लैबा अकील को प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ। इस अवसर पर अपने संबोधन में डॉ. शैलेन्द्र राजन, निदेशक केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान ने बताया कि संस्थान के अधिकारी एवं कर्मचारी दैनिक रूप से संस्थान के आस-पास के गाँव का भ्रमण कर स्वच्छता अभियान चला रहे हैं तथा साथ ही वहाँ स्थित विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के बीच स्वच्छता संबंधित जागरूकता पैदा करते हैं। डॉ. राजन ने इस अवसर पर बताया कि संस्थान अभी तक मलिहाबाद तथा काकोरी रेलवे स्टेशनों के प्लेटफॉर्मों को भी दो बार साफ कर चुका है। इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि 31 अक्टूबर, 2016 तक भारत सरकार के स्वच्छता पखवाड़ा के अंतर्गत और भी गाँवों तथा आस-पास के क्षेत्रों की सफाई की जाएगी। सांसद महोदया का स्वागत डॉ. नीलिमा गर्ग, अध्यक्ष, तुडाई उपरान्त प्रबंधन प्रभाग द्वारा किया गया जबकि समस्त कार्यक्रम का संचालन डॉ. अंजू बाजपेई, प्रधान वैज्ञानिक द्वारा किया गया। Event Date:- 2016-10-22

Farmers training on HDP in Guava

Farmer Training cum awareness programme on HDP and UHDP in Guava and other horticulture crops was conducted by the ICAR-CISH, Lucknow for up-gradation of the technical knowledge of about ten progressive farmers from Theni District of Tamil Nadu on 21 October, 2016. Detailed deliberations on HDP and UHDP systems in guava, canopy management, drip irrigation system, polyethylene mulching in different horticultural crops along with field visit and practical training was given. Event Date:- 2016-02-11

सफाई अभियान

संस्थान के 13 वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों की एक टीम ने लखनऊ के मलिहाबाद ब्लॉक स्थित बड़ीगड़ी प्राथमिक विद्यालय में आज दिनांक 26.10.2016 को स्वच्छता पखवाड़ा के अन्तर्गत सफाई अभियान चलाया। इस टीम की नेतृत्व डॉ. सुशील कुमार शुक्ल, प्रधान वैज्ञानिक ने की। स्वच्छता पखवाड़ा के दौरान डॉ. सुशील कुमार शुक्ल ने बड़ी गड़ी प्राथमिक विद्यालय में सफाई की साथ में 25 विद्यार्थियों को स्वच्छता की शपथ भी दिलायी और जीवन में स्वच्छता के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. देवेन्द्र पाण्डेय ने इस अवसर पर संस्थान द्वारा चलाये जा रहे स्वच्छता कार्यक्रम की भी संक्षिप्त जानकारी भी दी। उन्होंने आगे बताया कि स्कूल के बच्चों में जागरुकता पैदा करने का मुख्य उददेश्य है कि बच्चे अपने-अपने घरों एवं क्षेत्रों में जाकर अपने रिश्तेदारों एवं आसपास के लोगों में स्वच्छता संबंधी जागरुकता पैदा करें। स्वच्छता अभियान में विद्यार्थियों ने भी रुचि दिखायी। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं अन्य शिक्षक-शिक्षिकायें भी उपस्थित थीं। स्वच्छता कार्यक्रम के अन्त में संस्थान की ओर से विद्यालय को एक बड़ा कूड़ादान भेंट किया गया ताकि भविष्य में बच्चे विद्यालय प्रांगण के कूड़ा एकत्र करने के लिये इसका उपयोग करें। इस दौरान संस्थान की ओर से विद्यालय के प्रांगण में आम, अमरुद एवं बेल के पौधे भी लगाये गये। Event Date:- 2016-10-26

सफाई अभियान

The ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Lucknow sent a 17 member team of scientists, officers and staff to perform cleanliness drive and create awareness amongst its students and teachers under Swachhta Pakhwada in the Poorv Madhyamik Vidyalay of the Amethia Salempur of the Kakori block of Lucknow on 27th October, 2016. The team was led by Dr. Shyam Raj Singh, Principal Scientist who gave an oath of Swachhta to students of the Poorv Madhyamik Vidyalay in the presence of its Principal, Shri Mohd. Salem. He further briefed about the importance of the swachh jeevan. Dr. Shyam Raj Singh also apprised the teachers and students of the school about the activities being carried out under Swachhta Abhiyan by ICAR-CISH, Lucknow. In his remarks, he informed that the Swachhta Pakhwada is being accomplished to create awareness amongst the students so that the younger generation could generate more awareness about cleanliness in their own houses, schools as well as surrounding areas. The students of the school displayed keen interest in the cleanliness drive. A dustbin was handed over to the School Principal by Dr. Shyam Raj Singh so that, in future, littering should stop and the garbage amassed could be thrown into it. The visiting Institute team also planted three plants of mango, guava and jamun in the school premises. Vegetable seedlings were also dis

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ के 17 सदस्यी वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों की एक टीम ने लखनऊ के काकोरी ब्लॉक के अमेठिया सलेमपुर स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में आज दिनांक 27.10.2016 को स्वच्छता पखवाड़ा के अन्तर्गत सफाई अभियान चलाया। इस टीम का नेतृत्व डॉ. श्याम राज सिंह, प्रधान वैज्ञानिक ने किया। स्वच्छता पखवाड़ा के दौरान डॉ. श्याम राज सिंह ने पूर्व माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों को स्वच्छता की शपथ दिलायी और जीवन में स्वच्छता के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. श्याम राज सिंह ने इस अवसर पर संस्थान द्वारा चलाये जा रहे स्वच्छता कार्यक्रम की भी संक्षिप्त जानकारी भी दी। उन्होंने आगे बताया स्कूल के बच्चों में जागरुकता पैदा करने का मुख्य उददेश्य है कि बच्चे अपने-अपने घरों एवं आसपास के क्षेत्रों में जाकर अपने रिश्तेदारों एवं अन्य लोगों में स्वच्छता संबंधी जागरुकता पैदा करेंगे। स्वच्छता अभियान में विद्यार्थियों ने विशेष रुचि दिखायी। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य मो. सलीम एवं अन्य शिक्षक भी उपस्थित थे। स्वच्छता कार्यक्रम के अन्त में संस्थान की ओर से विद्यालय को एक बड़ा कूड़ादान दिया गया ताकि भविष्य में स्कूल में बच्चे कूड़ा फेंकने के लिये इसका उपयोग करें। इस दौरान संस्थान की ओर से विद्यालय के प्रांगण में आम, अमरुद एवं जामुन के पौधे भी लगाये गये। कार्यक्रम के अन्त में सब्जियों के सीडलिंग वितरित किये गये।

Event Date:- 2016-10-27

Training for Sikkim farmers

Training on "Nursery and Orchard management of Guava" under NEH plan in collaboration with KVK South Sikkim was organised by ICAR-CISH, Lucknow from 21-23, Nov 2016. Twenty participants of Sadam Panchayat including three officials from KVK, South Sikkim attended the training. Event Date:- 2016-11-21

Constitution Day oath & Celebration

Constitution Day celebration and Oath taken by ICAR-CISH staffs on 26.11.2016 to commemorate the adoption of Constitution of India. Event Date:- 2016-11-26

Sri Girdhari Lal Chadha memorial Award

Dr S Rajan bagged prestigious Sri Girdhari Lal Chadha Memorial Gold medal in Fruit science for year 2016 for his significant contributions in field of Horticulture. The award was conferred to him during platinum jubilee of HSI at 7th Indian Horticulture Congress 2016" at B.P. Pal Auditorium, IARI, New Delhi. Event Date:- 2016-11-27

International Soil Day celebration (Dec5, 2016)

The ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Rehmankhera, Lucknow celebrated the International Soil Day on December 5, 2016. On the occasion, soil health cards were distributed amongst the farmers of the Mohammadnagar Talukedari village under Malihabad Tehsil, Lucknow. Speaking on the occasion, Dr. Ghanshyam Pandey, Incharge Head and Principal Scientist, Crop Production Division delivered a lecture on the importance of soil health in view of production and productivity of fruit crops. Dr. Ram Awadh Ram, Principal Scientist addressed the farmers and appraised them about the significance of organic farming. Dr. Tarun Adak and Dr. Atul Singha, scientists of the Institute, displayed the method of pH testing and soil sampling to the farmers. A scientist-farmers meet was also conducted by Dr. Barsati Lal, Senior Scientist and Shri Subhash Chandra, Scientist at the Mohammadnagar Talukedari Village. Event Date:- 2016-12-05

Visit of Agriculture Commissioner GOI

Dr. S. K. Malhotra, Agriculture Commissioner and Horticulture Commissioner, Government of India visited the Institute on December 5, 2016. In course of his visit, he displayed keen interest in the ongoing activities of the Institute. He also reviewed the ongoing activities under Precision Farming Development Centre, ICAR-CISH, Lucknow. Event Date:- 2016-12-05

Agriculture Education Day (3 Dec, 2016)

Agriculture Education Day was celebrated on 03.12.2016 at two Schools located in Kanar & mallihabad, Lucknow on the eve of birth anniversary of Bharat Rathna Dr. Rajendra Prasad with aim of strengthening future agriculture of the country and attract youth towards agricultural education. The objective of this day was to expose students including schools to various facets of agriculture and inspire and attract them towards agriculture, so that they develop interest in agriculture and allied subjects to engage themselves in agriculture and related activities or become Agrientrepreneurs in future. कृषि शिक्षा दिवस 2016, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली से प्राप्त परिपत्र संख्या 1-10/2016 शि.यो. एवं गृ.वि. दिनांक 29 नवम्बर, 2016 के अनुपालन में डॉ. देवेंद्र पांडेय, प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रभारी अध्यक्ष, फसल सुधर एवम जैवप्रौद्योगिकी प्रभाग की अध्यक्षता में एक चार सदस्यीय दल ने दिनांक 03 दिसम्बर, 2016 को कृषि शिक्षा दिवस के अवसर पर लखनऊ के कनार स्थित विद्यास्थली तथा मलिहाबाद स्थित जी.जी.आई.सी. विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए कृषि शिक्षा के महत्व विषय पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया | इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में कृषि शिक्षा के महत्व को बढ़ावा देना था | प्रतियोगिता के पश्चात डॉ. देवेंद्र पांडेय एवं श्री धीरज शर्मा, सहायक निदेशक (राजभाषा) ने कृषि शिक्षा एवं उसके महत्व पर उपस्थित विद्यार्थियों को प्रेरणार्थक व्याख्यान के माध्यम से जानकारी प्रदान की | व्याख्यान उपरांत विद्यार्थियों ने कृषि शिक्षा से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे जिसका अधिकारियों ने यथोचित उत्तर दिया गया | इस कार्यक्रम के सफल सञ्चालन में डॉ. विनोद कुमार सिंह, सहायक मुख्य तकनीकी अधिकारी तथा डॉ. बालाजी राजकुमार, वैज्ञानिक ने भी योगदान दिया | Event Date:- 2016-12-03

Exposure visit-cum-Training

A two-day Exposure visit-cum-Training programme, sponsored by Agri Clinic Business Training Institute, Kathota Crossing, Vinamra Khand, Gomti Nagar, Lucknow was conducted at the ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Rehmankhera, Lucknow from December 05 to 06, 2016. On this occasion, Dr. Shailendra Rajan, Director apprised the participants about the significant contributions of the Institute besides informing them about nursery management of subtropical fruits. Scientists of the Institute also guided them on various aspects of improved cultivation of fruits & vegetables. Sixty-five agriculture graduates (trainees) from various districts of Uttar Pradesh & 170 students of B.Sc (Ag.) & B.Sc (Hort.) of the final semester from Sam Hingginbottom Institute of Agricultutre, Technology & Science (SHIATS), Naini, Allahabad took part in it. A field visit of experimental plot of rejuvenated mango trees, high density plantation of mango & meadow orcharding of guava and fruit processing laboratory was also arranged for participants during the training. Event Date:- 2016-12-05

Visit of Director Horticulture Uttarakhand

Dr. B. S. Negi, Director, Horticulture and Food Processing, Government of Uttarakhand, along with his Deputy Directors, visited the Institute on December 4, 2016 to look into the developments of high density planting as well as potato cultivation. Dr. V. K. Singh, Principal Scientist and Incharge, Precision Farming Development Centre accompanied his to Institute’s experimental farm and showed his the ongoing activities in the sphere of high density planting as well as potato cultivation. Event Date:- 2016-12-04

Workshop on Green Climate Fund

A Workshop on Climate Change was conducted in our Regional Office, NABARD, Lucknow on December 7, 2016. The Workshop was chaired by Shri A.K. Panda, CGM, NABARD, UPRO, Lucknow. From ICAR-CISH, Lucknow, Dr. Shailendra Rajan, Director, Dr. Ashok Kumar and Dr. Tarun Adak attended the Workshop. Dr. S. Rajan suggested that a follow up exercise need to be organized by NABARD for developing full-fledged Project Concept Notes. The objective of the Green Climate fund was to provide support to developing countries in combating climate change with funding by developed countries and other public and private sources. Event Date:- 2016-12-07

ICAR-CISH in News

ICAR-CISH in News: 1. ICAR-CISH helps farmer grow, sell exotic vegetables (News: The Pioneer daily, Saturday, December 10, 2016) 2. ICAR-CISH is promoting off season mango varieties (News: The Pioneer daily, December 15, 2016) Event Date:- 2016-12-10

किसान गोष्ठी का आयोजन

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ ने सहयोगी संस्थान के रूप में अवध आम उत्पादक एवं बागवानी समिति के नेतृत्व में दिनांक 22.12.2016 को मलिहाबाद के नबीपनाह नामक गाँव में किसान गोष्ठी का आयोजन किया। इस किसान गोष्ठी में कसमंडीकलॉं, मसीढा, मोअद्दीपुर, मोहम्मद नगर तालुकेदारी आदि गाँवों के 300 से अधिक किसान एवं बागवान सम्मिलित हुए। इस समिति के प्रमुख उददेश्यों मे एक है दशहरी आम के जी.आई. का व्यवसायीकरण कर किसानों का लाभ पहुंचाना है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश मंडी समिति के निदेशक, श्री राज शेखर ने कहा कि इस प्रकार के संगठित सामुदायिक संगठन छोटे किसानों एवं बागवानों के लिए अत्यन्त ही लाभप्रद सिद्ध होंगे। अपने संबोधन में उन्होंने भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस समिति को बनाने में संस्थान की जो भूमिका रही है वह निःसंदेह ही प्रशंसनीय है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि न केवल नबीपनाह बल्कि लखनऊ के सभी किसान एवं बागवान संस्थान द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों एवं तकनीकियों से भविष्य में लाभ पायेंगे। उन्होंने किसानों को आशवासन दिया कि भविष्य में छोटे किसानों को भी मैंगो पैक हाउस में प्रसंस्करण की सुविधा दिये जाने पर विचार दिया जा रहा है। श्री राज शेखर ने कहा मैंगो पैक हाउस में उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं को दूर करने पर भी कार्य जारी है। इस अवसर पर विशिष्ठ अतिथि के रूप में बोलते हुए संस्थान के निदेशक, डॉ. शैलेन्द्र राजन ने उपस्थित लोगों को अवध आम उत्पादक एवं बागवानी समिति को तैयार करने में किये गये कार्यों की जानकारी दी। डॉ. राजन ने कहा कि आम के बागवानों को सामुदायिक आधारित संगठनों से ही लाभ की प्राप्ति हो सकती है। उन्होंने सलाह दी कि इसके लिए सभी बागवानों को सामुदायिक संगठन बनाकर कार्य करने चाहिए। डॉ. राजन ने किसान गोष्ठी के दौरान दर्जनों किसानों द्वारा पूछे गये प्रश्नों के उत्तर भी दिये। गोष्ठी के दौरान वरिष्ठ बागवान, श्री विजय सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि किसानों में जागरूकता की कमी है जिसके कारण अनेक समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने आम के बाग का प्रबंधन पर जोर देते हुए कहा कि समय से रोगों एवं कीटों का प्रबंधन कर किसान संस्थान से अधिक-से-अधिक लाभान्वित हो सकते हैं। किसान गोष्ठी के दौरान संस्थान की ओर से डॉ. नीलिमा गर्ग, अध्यक्ष तुड़ाई उपरान्त प्रबंधन प्रभाग, डॉ. घनश्याम पाण्डेय, अध्यक्ष फसल उत्पादन प्रभाग, डॉ. पी.के. शुक्ला, वरिष्ठ वैज्ञानिक, डॉ. गुंडप्पा, वैज्ञानिक, डॉ. मनीष मिश्रा, प्रधान वैज्ञानिक एवं डॉ. राम कुमार, प्रधान वैज्ञानिक ने किसानों के बागवानी संबंधित प्रश्नों के उत्तर दिए। कार्यक्रम का संचालन अवध आम उत्पादक एवं बागवानी समिति के सचिव, श्री उपेन्द्र सिंह द्वारा किया गया जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री निर्मल सिंह जी ने की। Event Date:- 2016-12-22

दिव्यांगों को फल एवं सब्जी प्रसंस्करण प्रशिक्षण

भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ के तुड़ाई उपरान्त प्रबंधन प्रभाग में गोरखपुर के पूर्वांचल ग्रामीण सेवा समिति के 27 दिव्यांगों को फल एवं सब्जियों से विभिन्न प्रकार के अचार बनाने तथा आंवला के जूस निकालने की तकनीकी से अवगत कराया गया | इन विधियों को इं धर्मेंद्र कुमार शुक्ला तथा श्रीमती रेखा चौरसिया द्वारा बताया गया | इस अवसर पर संस्थान के प्रभारी निदेशक एवं अध्यक्ष, तुड़ाई उपरान्त प्रबंधन प्रभाग, डॉ. नीलिमा गर्ग ने दिव्यांगों को संस्थान में जारी तुड़ाई उपरान्त प्रबंधन संबंधी अनुसन्धान कार्य की जानकारी दी | दिव्यांगों का नेतृत्वा श्री आनंद पांडेय द्वारा किया गया | Event Date:- 2016-12-21

Students visit

Fifty-seven students from Stafford Public School, situated in the Mango belt of Lucknow, visited the Institute on December 27, 2016. Dr. Shailendra Rajan, Director of the Institute interacted with the students and generated awareness amongst them on the issues of conservation of mango diversity, unique plant varieties, ecological disturbances and environment pollution in the wake of rampant spraying of pesticides and insecticides. The teachers and students of the school displayed significantly keen interest in Institute’s activities. The school management assured Dr. Rajan that they would be planting rare varieties of mango and guava in their premise in the times to come. Students were exceedingly interested that their family members ought to be a part of the custodian farmers national database as many of them conserve more than 10 varieties in their orchards. Event Date:- 2016-12-27

Development of Community Based Organization for Better Profits to Mango Growers in West Bengal

ICAR-CISH Regional Research Station, Malda has been taking initiative on conservation and utilization of local varieties of mango and Murshidabad districts of West Bengal. In this regard, mobilization campaign had organized in different mango growing belts of both the districts for on farm conservation and utilization of rich diversity of mango. In this direction, custodian farmers and mango growers of Murshidabad district has come forward for establishing a society in the name of Murshidabad Indigenous Mango Growers Society during the meeting with mango growers held at office of the District Horticulture Officer on 29.12.2016 in the presence of Dr. Dipak Nayak, Scientist & In-charge, ICAR CISH Regional Research Station, Malda. CISH-RRS, Malda will facilitate for establishing the society and its smooth activities. . Event Date:- 2016-12-29

Nursery Production Using Green Energy

During harsh summer, management of nursery becomes exceedingly difficult owing to paucity of electricity supply leading to plant and economic losses. It also compels us to depend on generator for electricity supply which is not cost effective and environment safe and requires extra amount of money. Keeping in view the challenges the nursery is facing, the Institute has signed an agreement with M/S Genesis Innovation Limited, Jaipur for the installation of the rooftop solar PV panel system by which there would be help in the supply of green energy for the nursery. Electricity requirement will be met by solar panels for saving plants from desiccation and scorching Sun during day hours of hot summers. Event Date:- 2016-12-28

मेरा गाँव मेरा गौरव कार्यक्रम

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा मेरा गाँव मेरा गौरव कार्यक्रम के अन्तर्गत मलिहाबाद ब्लॉक के बेलगढ़ा गॉंव में 27 दिसम्बर, 2016 को किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वैज्ञानिकों एवं किसानों के बीच आम एवं अन्य फसलों की समसामयिक समस्याओं पर चर्चा हुई तथा किसानों की समस्याओं का निदान बताया गया। किसानों द्वारा आम के बगीचों में गुजिया (Mealy bugs) के प्रकोप की समस्या बतायी गयी जिसके निदान हेतु वैज्ञानिकों द्वारा आम के पेड़ों में तने के चारों तरफ 15-20 सेमी मिट्टी चढ़ाने के बाद क्लोरपाइरीफास डस्ट (250 ग्राम प्रति पेड़) के बुरकाव का प्रदर्शन कर दिखाया गया। गोष्ठी के दौरान डॉ. घनश्याम पाण्डेय, प्रधान वैज्ञानिक एवं डॉ. ए.के. त्रिवेदी, वरिष्ठ वैज्ञानिक द्वारा बेलगढ़ा एवं लद्यौसी के किसानों/बागवानों के मृदा स्वास्थ्य कार्ड ग्राम प्रधान, श्री राजेश यादव को सौंपे गये। Event Date:- 2016-12-27

टपक सिंचाई, प्लास्टिक मल्चिंग एवं संरक्षित खेती की उपयोगिता पर दो दिवसीय प्रशिक्षण

सुनियोजित कृषि विकास केन्द्र (पी.एफ.डी.सी.), नेशनल कमेटी ऑन प्लास्टिकल्चर एप्लीकेशन इन हार्टीकल्चर (एन.सी.पी.ए.एच.) भारत सरकार, आई.सी.ए.आर.-सी.आई.एस.एच., रहमानखेड़ा, लखनऊ के डा. वी. के. सिंह, प्रधान वैज्ञानिक एवं पी.आई., पी.एफ.डी.सी द्वारा बड़ोखर ब्लाक, बाँदा के प्रशिक्षण सभागार में टपक सिंचाई, प्लास्टिक मलि्ंचग एवं संरक्षित खेती की उपयोगिता पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बाँदा जिले के विभिन्न ब्लाकों से आये प्रगतिशील किसान शिव नारायण सिंह, इन्द्रवीर सिंह, शरीफ खाँ, गिरिराज कुमार दीक्षित, सन्तोष कुमार तिवारी सहित लगभग 63 किसानों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम के अवसर पर डा. वी. के. सिंह ने बागवानी, टपक सिंचाई प्रणाली एवं संरक्षित खेती के महत्व को बताते हुए यह भी बताया कि पॉलीहाउस तकनीक अपनाने से पौधों के दैहिकीय गुणों को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर उच्च गुणवत्तायुक्त उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। जिले के उपनिदेशक, उद्यान श्री लक्खी सिंह एवं जिला उद्यान अधिकारी श्री परवेज़ खान ने प्रदेश सरकार द्वारा किसानों के लिए चलायी जा रही लाभकारी योजनाओं से किसानों को अवगत कराया। पी.एफ.डी.सी. लखनऊ से श्री अनुराग सिंह एवं डा. मनोज कुमार सोनी ने प्रोजेक्टर के माध्यम से किसानों को बागवानी की नई तकनीकों की जानकारी दी और जल संरक्षण को ध्यान में रखकर टपक सिंचाई और मल्चिंग का उपयोग कर कम से कम पानी से सिंचाई करने की बात कही। उसके बाद किसानों द्वारा किये गये प्रश्नों का उत्तर विशेषज्ञों द्वारा दिया गया। श्री नीरज कुमार शुक्ला ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में पूर्ण सहयोग किया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय के उद्यान निरीक्षक श्री लक्ष्मी प्रसाद सहित कार्यालय के समस्त स्टाफ उपस्थित रहे। Event Date:- 2016-12-28

Swachh Bharat Abhiyan Meeting

A Swachh Bharat Abhiyan Meeting of the Committee members was held under the guidance of Dr. (Mrs.) Neelima Garg, Incharge Director, ICAR-CISH, Lucknow on January 06, 2016 to chalk out the plan for the month of January, 2017. Event Date:- 2017-01-06

Lecture on Genetically Engineered Crops

Dr. Bidyut Sarmah, ICAR-National Professor (Norman Borlaug Chair) and Director, DBT-AAU Centre, Assam Agriculture University, Jorhat delivered a lecture on Genetically Engineered Crops : A Contribution of Modern Biotechnology at the Committee Room of the ICAR-CISH, Lucknow on January 4, 2017. All the scientists and RAs/SRFs were present during the talk. Event Date:- 2017-01-04

राजभाषा कार्यान्वयन समिति की बैठक

भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ की दिनांक 01 अक्टूबर से 31 दिसम्बर, 2016 तक की संस्थान राजभाषा कार्यान्वयन समिति की बैठक दिनांक 30 दिसम्बर, 2016 को निदेशक, डॉ. शैलेन्द्र राजन की अध्यक्षता में संस्थान के समिति कक्ष में आयोजित की गयी | Event Date:- 2016-12-31

Best Research Paper Award-2016

Dr Prananath Barman bagged Best Research Paper Award-2016 for his Research Paper entitled “Synergistic interaction of arbuscular mycorrhizal fungi and mycorrhiza helper bacteria improving antioxidant activities in Troyer citrange and Cleopatra mandarin under low moisture stress”, published in Indian Journal of Horticulture, 2015, Vol. 72 (1): 33-37 during Inaugural Function of 7th Indian Horticulture Congress 2016 on November 15, 2016. Event Date:- 2016-12-11

Workshop on Micro Irrigation

The Precision Farming Development Centre (PFDC) of the ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Lucknow organized a one-day Workshop on Micro Irrigation to enlighten farmers and officers about the utility of micro irrigation/drip irrigation in view of the depleting water resources on February 4, 2017. The Workshop was presided over by Dr. Shailendra Rajan, Director, ICAR-CISH, Lucknow who remarked that there are ample possibilities to increase agricultural production and productivity with the help of micro irrigation in spite of water scarcity. Dr. K.M Tiwari, Professor, IIT Khadakpur and a resource person of the Workshop, talked about the various components of micro irrigation including traditional irrigation and suggested how micro irrigation facilities are better than the traditional ones. Er. Ravindra Verma of the Jain Irrigation dealt with the component of micro irrigation and described about the their cost effectiveness.

On this occasion, Dr. N.L.M Tripathi, Nodal Officer, Horticulture and food Processing Department, Government of Uttar Pradesh expatiated upon the flagship programme titled per drop more crop of the Hon’ble Prime Minister. Convener of the Workshop, Dr. V.K. Singh Principal Scientist and Principal investigator, PFDC, in his speech, informed that in spite of water scarcity in Maharashtra and Andhra Pradesh, farmers of both the states have been successful in increasing production and productivity by dint of using micro irrigation facilities. The Workshop was attended by all Heads of the Divisions, Scientists, Officers and 25 farmers of the nearby areas. Event Date:- 2017-02-04

‘Horti India 2017’ at Horticulture Technology Park, Greater Noida (NCR)

A Workshop cum Exhibition event ‘Horti India 2017’ was organized on 9th and 10th February, 2017 by Institute of Horticulture Technology (IHT) and co-organized by Ministry of Agriculture and Farmers Welfare, Government of India. at Horticulture Technology Park, Greater Noida. The event was focused on “Conventional and Alternative Horticultural Production Systems”. ICAR-CISH, Lucknow participated in the same on behalf of National Committee on Plasticulture Applications in Horticulture (NCPAH), Ministry of Agriculture & Farmers’ Welfare and put up a stall for showcasing the modern horticulture technologies. Event Date:- 2017-02-09

Training programme on Integrated Pests and Diseases Management

CISH Krishi Vigyan Kendra, Malda has organized a training programme on Integrated Pests and Diseases Management with 55 mango growers. The progressive farmers of the region took very active participation and appreciated the efforts of CISH for providing exclusive training on Pests and Diseases Management. Event Date:- 2017-03-07

An initiative to conserve traditional mango diversity of Malda and Murshidabad

Scientists of ICAR-CISH Regional Research Station, Malda has been working on documentation, conservation and exploring the potential of traditional and rare varieties of mango from Malda and Murshidabad districts.

This programme has been implemented under leadership of Dr. Shailendra Rajan (a renowned mango researcher cum breeder & Director, ICAR-CISH, Lucknow) with active collaboration of District Horticulture Offices, Malda & Murshidabad (Dept. of FPI& Hort., Govt. of West Bengal). So far, more than 200 traditional mango varieties have been documented and characterized fruit quality at ICAR-CISH RRS, Malda and it has been observed that many varieties having very good pulp quality. ICAR-CISH RRS, Malda with support of, Mr. Rahul Chakraborty, District Horticulture Officer of Malda have been trying to do market promotion of traditional mango varieties through providing a stall with rare collection mangoes at Bandh Road, Malda (Rani Pasand, Kancha Mitha, Misrikand, Madhu Chsuki, Safder Pasand, Sahi Pasand, Naku Bhog, Sarada Bhog, Mithua, Madhu Rashmi, Choto Brindabani, Kishan Bhog etc.) from experimental farm of ICAR-CISH, Malda and receiving very good response from local dwellers (Informed by Dr. Dipak Nayak, Scientist & In-charge, ICAR-CISH RRS, Malda).

It has been observed that many traditional varieties have very good market potential if we promote the variety with highlighting its special characters. Mango growers of Malda & Murshidabad districts usually not getting good market rate of traditional varieties as non-descriptive variety & non-commercial varieties (guthi/ aathi varieties). As a result, mango growers are losing interest for cultivation of traditional varieties, not doing any take care of traditional varieties and sometimes cutting down the tree for meeting their urgent expenses. In this way, we have been losing the very rich traditional mango diversity of Malda and Murshidabad districts. This initiative will be strengthen and intensified in coming years with group of traditional mango growers for commercial production of traditional mangoes.

Dr. Dipak Nayak informed that Hon’ble Minister In-charge & Director of Horticulture, Dept. of FPI & Horticulture, Govt. of West Bengal have also encouraged ICAR-CISH RRS, Malda to intensify the work on documentation, conservation and exploring the potential of traditional and rare varieties of mango from Malda and Murshidabad districts.

Event Date:- 2017-06-12

ICAR-CISH training for students on subtropical fruits ends

A training programme on the cultivation of subtropical fruits was organized at CISH from June 12 to July 3 (Monday). As many as 12 students from Nagaland, Orissa and MP participated in the training programme on production technology of subtropical fruit crops. Participants were made aware of new high yielding varieties, high-density planting, integrated nutrient and water management, pest and disease management. During the training program, the students were exposed to nursery management of fruit crops as well as tissue culture. Hands-on training of grafting, budding, pruning and other techniques used in orchards and nursery management were also demonstrated. The participants were exposed to various modern equipment required for research in the field of horticulture, biotechnology and other related subjects. The students had practical exposure to various techniques to which they had not been exposed so far. Exposure to the post Harris division was one of the interesting parts of the training. The students also learned how to manage polyhouse and shade net houses. The training included with strawberry cultivation under subtropics. Event Date:- 2017-03-07

1st SAC Meeting of CISH KVK, Malda

सी.आई.एस.एच.- कृषि विज्ञान केन्द्र, मालदा की वैज्ञानिक सलाहकार समिति की प्रथम बैठक की पूर्व संध्या पर डा. शैलेन्द्र राजन, निदेशक सी.आई.एस.एच. लखनऊ, डा. पी.पी. पाल, प्रधान वैज्ञानिक, भा.कृ.अ.प. अटारी, कोलकाता एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में दिनांक 14.7.2017 को स्वामी विश्वमायानन्दा जी महाराज, सचिव रामकृष्ण मिशन, सरगाची द्वारा नवस्वीकृत की गयी परियोजना एवं सी.आई.एस.एच.- कृषि विज्ञान केन्द्र, मालदा की पहल के फलस्वरूप नवनिर्मित तालाब में चार प्रकार की मछलियों के संग्रहण द्वारा एकीकृत कृषि प्रणाली प्रतिमान का उद्घाटन किया गया।

दिनांक 14.7.2017 को आयोजित सी.आई.एस.एच.- कृषि विज्ञान केन्द्र, मालदा की वैज्ञानिक सलाहकार समिति की प्रथम बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में स्वामी विश्वमायानन्दा जी महाराज, डा. एस. राजन, डा. पी.पी. पाल, कृषि विभाग के जिला प्रशासनिक प्रमुख, मतस्य विभाग, नाबार्ड, मालदा कृषि विज्ञान केन्द्र, गैर सरकारी संगठन, प्रगतिशील आम उत्पादक एवं आदिवासी कृषक महिलाओं ने भाग लिया। सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने सी.आई.एस.एच.- कृषि विज्ञान केन्द्र के भविष्य की योजना एवं उम्मीदों पर अपने विचार प्रकट किये।

In the eve of 1st Scientific Advisory Committee Meeting of CISH Krishi Vigyan Kendra, Malda, the newly sanctioned project and initiative of ICAR-CISH RRS, Malda for establishment of Integrated Farming System Models was inaugurated through stocking of 4 types of fishes in newly renovated/ developed ponds by Swami Viswamayananda Ji Maharaj (Secretary, Ramakrishna Mission Ashrama, Sargachi) on 14.07.17 in the presence of Dr. S. Rajan (Director, ICAR-CISH, Lucknow), Dr. P. P. Pal (Principal Scientist, ICAR-ATARI, Kolkata) and other dignitaries.

Swami Viswamayananda Ji Maharaj was the Chief Guest in the maiden Scientific Advisory Committee Meeting of CISH Krishi Vigyan Kendra held on 14.7.2017. Dr. S. Rajan, Dr. P. P. Pal, District Administrative heads of Department of Agriculture, Department of Fisheries, NABARD, Malda KVK, NGO, progressive mango growers and tribal farm women were attended the programme. All the distinguish guests and participants expressed their views regarding future plan of CISH KVK and points of expectation from the KVK.

Event Date:- 2017-07-14

Training programme on subtropical fruits for B.Sc. (Ag.) students

दिनांक 20 जुलाई, 2017 को संस्थान मे आई.टी.एम. विश्वविद्यालय ग्वालियर (एमपी) के बीएससी (कृषि) के 12 छात्रो हेतु उपोष्ण फलों के सुधार, फसल स्वास्थ्य एवम फसल तुडाई उपरांत प्रबंधन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर एक महीने का प्रशिक्षण शुरु किया गया ।

One month training on subtropical fruits started on July, 2017 at the Institute. The students (B.Sc. Ag) from ITM University, Gwalior (M.P.) will be trained on various aspects pertaining to improvement, crop health and postharvest management of subtropical fruits.

Event Date:- 2017-07-20

Training Programme on Milky mushroom cultivation

दूधिया मशरूम उत्पादन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा में दूधिया मशरूम की खेती पर दिनांक 21.03.2018 को एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. शैलेन्द्र राजन ने कहा कि दूधिया मशरूम किसानों में आम नहीं है लेकिन उपभोक्ताओं के क्रमिक हित के साथ यह लोकप्रिय हो रहा है और संस्थान इस पर प्रशिक्षण का विचार करता है। प्रशिक्षण में 120 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। मोहम्मद नगर तालुकेदारी गांव से 10 महिलाओं ने भी मशरूम उत्पादन के गुर सीखे। किसानों को बहुत से ऐसे सुझाव दिए गए जिससे यह उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार कर सकते हैं और मशरूम के सफेद रंग एवं ताजगी को बनाए रख सकते हैं। मशरूम उत्पादन में स्वच्छता के महत्व पर भी चर्चा की गई। डॉ. पी.के. शुक्ला ने उद्यमियों को नियमित रूप से संस्थान द्वारा मशरूम उत्पादकों को तकनीकी सहायता एवं परामर्श देने हेतु आश्वस्त भी किया।

A training programme on the cultivation of milky mushroom was organized at ICAR-CISH in Lucknow on 21.03.2018. Milky mushroom is not common among the farmers but with the gradual interest of consumers increasing in it. It is becoming popular and CISH thought of conducting training on it for increasing the profit of the farmers as well as use of resources when the season of button mushroom is over. ICAR-CISH has overcome the problem of mushroom growers by regular production and supply of spawn to the growers as per the season. About 120 farmers participated in this programme along with 10 rural women of Village Mohammad Nagar Talukedari. Farmers were given tips on how they could improve the quality of the produce as well as retain its white color and freshness for a longer period. The importance of cleanliness in mushroom production was also discussed. Dr. P.K. Shukla assured the entrepreneurs to regularly provide technical assistance and consultation to the Mushroom Producers by the institute.

Event Date:- 21.03.2018

Participation in Krishi Unnati Mela-2018

कृषि उन्नति मेला-2018 में संस्थान की प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ ने आई.ए.आर.आई., नई दिल्ली में मार्च 16-18, 2018 को आयोजित कृषि उन्नति मेला-2018 में संस्थान की प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया। मेले का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने माननीय कृषि मंत्री श्री राधा मोहन सिंह के साथ दिनांक 17.03.2018 को किया। मेले में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों एवं सरकारी गतिविधियों को दर्शाने वाले एवं उन तक सीधी पहुंच बनाने वाले लगभग 600 स्टॉल लगाये गये। भारत के विभिन्न राज्यों से आये लगभग 1000 किसानों ने संस्थान के स्टॉल का भ्रमण किया एवं उन्हें फलों की वैज्ञानिक खेती एवं अन्य तकनीकियों से भी अवगत कराया गया।

ICAR-CISH, Lucknow participated and displayed its exhibits in the Krishi Unnati Mela-2018 with a theme of “Doubling Farmers Income by 2022” organised by ICAR-IARI, New Delhi during March 16-18, 2018 at Mela Ground ICAR-IARI, New Delhi. Mela was inaugurated by Honourable Prime Minister Shri Narendra Modi along with Honourable Minister for Agriculture Shri Radha Mohan Singh on March 17, 2018. More than 600 stalls to display and provide direct access to latest technologies and Government initiatives were there. About 1000 farmers from various states of India visited the Institute stall and were apprised about scientific cultivation of fruit crops.

Event Date:- 17.03.2018

Visit of Students

छात्रों का दौरा

चन्द्र शेखर आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर के छात्रों (40) ने बागवानी के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से 22.3.2018 को भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान का दौरा किया। संस्थान के निदेशक डॉ. शैलेंद्र राजन ने कहा कि यह विश्वविद्यालय में प्रथागत हो रहा है ताकि छात्रों को विभिन्न शोध संस्थानों में विकसित प्रौद्योगिकियों की जानकारी प्राप्त हो सके। यद्यपि छात्र कई प्रौद्योगिकियों से अवगत होते हैं, लेकिन उन्हें अनुसंधान संस्थानों पर सजीव प्रदर्शन देखना अधिक दिलचस्प लगता है । वे पाठ्यपुस्तक में कई सिद्धांतों और तकनीकों को पढ़ते हैं, लेकिन उनके समग्र विकास और उद्यमिता विकास के लिए व्यावहारिक अनुभव महत्वपूर्ण होता है। कई छात्रों ने अपनी शोध समस्याओं और किस तरह से वे अनुसंधान में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकते हैं पर चर्चा की।

Students (40 nos.) of Chandra Shekhar Azad University of Agriculture and Technology, Kanpur, visited the Central Institute of Subtropical Horticulture (CISH) on 22.3.2018 with an objective to learn more about horticulture. ICAR-CISH Director Shailendra Rajan said it is becoming customary in the university to expose the stu¬dents to technologies generat¬ed in different research insti¬tutes. “Students are aware of several technologies but it is fascinating for them to see the live demonstration at the research organization which has developed the technology. They read many principles and techniques in the textbook but practical exposure is becoming important for their overall development and entrepreneurship develop¬ment,” he said. Several stu¬dents discussed their research problems and the way they can excel in research.

Event Date:- 22.03.2018