Awareness

IPR awareness program was organized on 14 November 2018

दिनांक 14.11.2018 को बौद्धिक सम्पदा अधिकार पर कार्यशाला का आयोजन

भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान रहमानखेड़ा, लखनऊ में आज दिनांक 14.11.2018 को बौद्धिक सम्पदा अधिकार पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला संस्थान के वैज्ञानिकों के द्वारा विकसित नयी तकनीकियों को सुरक्षित करने एवं तकनीकी स्थान्तरण को ध्यान में रखकर आयोजित की गयी। इसके उद्घाटन अवसर पर संस्थान के निदेशक, डा. शैलेन्द्र राजन ने सभी वैज्ञानिको को इस पर अमल करने की सलाह दी। इस अवसर पर वक्ता के रूप में श्री अमित कलकल, बिजनस मैनेजर, एग्रीइनोवेट इंडिया ने तकनीकी स्थान्तरण के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की| उन्होंने बताया कि एक इनोवेटिव आईडिया और प्रोटोटाइप से विकसित उत्पाद/तकनीकी का मूल्यांकन कैसे करें एवं ऐसे तकनीकी को किसी स्टार्टअप, इंटरप्रेन्योर को स्थानांतरित करने के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखें। इसके लिए तकनीकी से सम्बंधित सत्यापित तथ्यों एवं सम्बंधित एजेंसी से प्रमाणीकरण का होना बहुत आवश्यक है, इसके बिना तकनीकी समिति द्वारा तकनीकी स्थान्तरण पर कोई निर्णय नहीं किया जा सकता है| संस्थान द्वारा अभी तक ३० से अधिक तकनीकियों को विकसित किया है और उनमें से ११ तकनीकियों को विभिन्न कंपनियों को स्थान्तरित किया जा चुका है|

An Intellectual Property Rights (IPR) awareness program was organized at ICAR-Central Institute of Sub-tropical Horticulture (CISH) Lucknow on 14 November 2018. On this occasion, Mr. Amit Kalkal, Business Manager, Agrinnovate India Ltd. (AgIn), New Delhi discussed in detail on different aspects of this issue. He told about that how to move technology from an idea or prototype to a licensed product/ technology. Technology commercialization is the process of converting ideas into businesses. For this, certification from authorized agency and certified data of the experiment is essential, without this, any technical committee is not able to decide the value of IP of the technology and unable to recommend for commercialization. He also discussed the legal issues for technology commercialization. Institute has developed more than 35 technologies, out of this 11 technologies transferred to different companies/stakeholders. All Scientist of the Institute and agriculture officers from different state were attended the program.

Event Date:- 14-11-2018

Vigilance Awareness Week

सतर्कता जागरूकता सप्ताह

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ के वैज्ञानिकों, तकनीकी अधिकारियों और कर्मचारियों ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह को (दिनांक 29.10.2018- 03.11.2018) का आयोजन किया गया। इस अवसर पर दिनांक 29.10.2018 को संस्थान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा सतर्कता की शपथ ली गयी। शपथ के दौरान उन्होंने सतर्कता के बारे में लोगो को जागरूक किया। संस्थान में दिनांक 01.11.2018 को आमंत्रित अतिथि श्री धीरेन्द्र कुमार, सेवानिवृत्त, प्रशासन नियंत्रक, सीमैप ने सतर्कता के विषय पर व्यख्यान दिया।

The Scientists, Technical officers and other employees of ICAR- Central Institute of Subtropical and Horticulture, Rahmaankhera, Lucknow organized Vigilance Awareness Week from 29.10.2018 to 03.11.2018. On this occasion, oath was taken by staff of the institute on 29.10.2018. During the week awareness about vigilance was made. Shri Dhirendra Kumar, Retired, COA of CSIR-CIMAP delivered the lecture on vigilance on 01.11.2018.

Event Date:- 03-11-2018

Fruit fly management through rain sustainable pheromone traps developed by CISH

फल मक्खियों के प्रकोप से बारिश के मौसम में आकर्षक दिखने वाले फल और सब्जियां मैगट (सूंडियों) से भरी हो सकती हैं। बाहर से देखने पर इनकी उपस्थिति ज्ञात नहीं हो पाती है और काटने के बाद भी धोखा हो सकता है। अतः जरुरी है कि हर कोई इनको पहचाने और खाने से पहले गौर से देख कर इनकी अनुपस्थिति सुनिश्चित कर ले। मादा फल मक्खियां विकसित हो रहे सब्ज़ियों और फलों में अंडे देती हैं, जो एक सप्ताह के भीतर मैगट्स के रूप में विकसित हो जाते हैं और गूदे को खाते हैं। प्रारम्भ में इनकी उपस्थिति पहचानना कठिन होता है। यह गूदे से मिलते जुलते सफ़ेद या मटमैले रंग की होती हैं। अधिक संख्या होने पर गूदे में सड़न हो जाती हैं और फल ख़राब होकर गिर जाता है। प्रभावित फल और सब्जियां खाने के लिए अनुपयुक्त हो जाती हैं। बरसात के मौसम में इस तरह की क्षति बहुत अधिक होती है जो कि किसानों को भारी नुकसान पहुंचाती है। फलों के मक्खियों के गंभीर प्रकोप के कारण आम की देर से पकने वाली प्रजातियों, अमरुद की बरसात की फसल और सब्जी फसलों को अधिक हानि पहुंचती है। यदि समय पर उचित हस्तक्षेप नहीं किया जाता है तो बरसात के मौसम में लगभग 80 प्रतिशत फल क्षतिग्रस्त हो जाते हैं ।

कीट के महत्व को ध्यान में रखते हुए, प्रभावी फल मक्खी फेरोमोन ट्रैप विकसित किए गए हैं। ये फेरोमोन ट्रैप नर मक्खियों को आकर्षित करते हैं और इससे मादा मक्खियों द्वारा उत्पन्न होने वाले अण्डों के निषेचन में व्यवधान होता है। फल मक्खियों के प्रबंधन के लिए बाजार में विभिन्न प्रकार के ट्रैप उपलब्ध हैं जो कि या तो महंगे हैं या सस्ते लेकिन बरसात के मौसम के अनुरूप तकनीकी रूप से ठीक नहीं हैं। जुलाई महीने के दौरान उत्तरी भारत में भारी बारिश होती है। बारिश के कारण फल मक्खी ट्रैप में जल के प्रवेश से गुटके डूब जाते हैं और जल्द ही अप्रभावी हो जाते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, आईसीएआर-केंद्रीय उपोषण बागवानी संस्थान, लखनऊ ने दोषों को दूर करने के लिए ट्रैप का एक प्रभावी डिजाइन विकसित किया। संशोधित ट्रैप में गर्दन पर दोनों तरफ से मक्खी के प्रवेश छेद को विशेष फ्लैप बरसात के मौसम के दौरान पानी के प्रवेश को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। यह डिजाइन प्रभावी है और बारिश के पानी से गुटके की रक्षा करता है। बाजार में अन्य मौजूदा ट्रैप डिजाइनों की तुलना में यह सस्ता एवं प्रभावी है। फल मक्खियों के भारी प्रकोप के चलते बारिश के मौसम में अमरूद के अच्छे फलों की फसल कम होती है। यदि यह ट्रैप सही समय पर लगाया जाता है तो बरसात के मौसम में भी अमरूद की फसल कम प्रभावित होती है। किसानों के लिए उनकी आवश्यकता के अनुसार समय पर ट्रैप हर जगह उपलब्ध होना कठिन रहता है। अतः आईसीएआर-सीआईएसएच ने संस्थान से और डाक के द्वारा मामूली कीमत पर किसानों को ट्रैप की आपूर्ति करने के लिए सुविधा प्रदान की है। फल मक्खियों से फसल को बचाने के लिए इच्छुक किसान इस ट्रैप का लाभ उठा सकते हैं।

ट्रैप खरीदने के लिए, कृपया निदेशक को ई-मेल: nursery.cish@gmail.com या पोस्ट से पत्र भेजें।

पता: निदेशक, आईसीएआर-सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर, रहमानखेड़ा, पोस्ट : काकोरी, लखनऊ-226 101

एनईएफटी / आरटीजीएस के माध्यम से खाते में भुगतान किया जा सकता है :

खाता धारक : आईसीएआर-यूनिट-सीआईएसएच, लखनऊ

खाता क्रमांक। 1153012101000034, आईएफएससी कोड : PUNB0619500

प्रति 5 ट्रैप कीमत : ₹ 65×5 = ₹ 325/- + डाक व्यय (दूरी के अनुसार)

Fruits and vegetables may be full of maggots during rainy season due to infestation by the fruit flies. Female fruit flies lays eggs in the young vegetables and fruits, which hatches as maggots within a week and the young ones continues to feed on pulp. As result of which fruit starts decay and drop down. The affected fruits and vegetables become unfit for consumption. Such damage is very high during rainy season which cause enormous losses to farmers. Severe incidence of fruit flies has been observed in late season varieties of the mango, rainy season crop of the guava and many vegetable crops. It has been estimated that approximately 80 per cent of late season mango fruits get damaged by fruit flies if the timely appropriate intervention is not taken.

Keeping the importance of the pest, effective fruit fly pheromone traps have been developed. These pheromone traps attracts the male flies and there by its mating disruption is achieved. Different types of traps are available in the market for the management of fruit flies. The existing traps available in the market are either costlier or cheaper but not technically sound to suit the local conditions. In northern plains mango season will be there upto last week of July. During July month Northern India receive heavy rains. Due to rains water will enters into the fruit fly trap, lures are getting drowned and lose its viability soon. Keeping this in view, ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Lucknow developed a cost effective design of fruit fly trap to overcome technical drawbacks. Modified trap is having peculiar feature with entry holes made at both the sides at the neck and also the flap along the edge of cap top are designed in such a way to minimize the entry of water during rainy season. The design is effective and protects the lure from drowning in to the rain water. It is cost effective when compared to other existing trap designs in the market. These traps are economical, effective and suitable for efficient management of fruit flies infesting mango, guava and vegetable crops especially during rainy season. Due to heavy infestation of fruit flies in guava farmers are not taking the rainy season guava crop. If this trap installed timely good crop of guava can be grown even under rainy season also. It is difficult for farmers to procure ready to hang traps and lures as per their requirement on time. Therefore, ‘ICAR – CISH has developed a system to supply the traps to farmers at nominal price from Institute and even by post. The interested farmers can take the benefit of this trap to save the crop from fruit flies.

To procure traps, may please send letter through E-mail: nursery.cish@gmail.com or by post to the Director, ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Rehmankhera, PO: Kakori, Lucknow – 226 101.

Payment can be made through NEFT/RTGS to the Account: ICAR-UNIT-CISH, Lucknow

Account no. 1153012101000034, IFSC code: PUNB0619500.

Price per 5 traps:Rs.65x5=Rs.325/- + postal charges (as per distance).

Event Date:- 05-09-2018

Parthenium Awareness Week-2018

गाजरघास जागरूकता सप्ताह-अगस्त16-22,2018

Event Date:- 16-08-2018

Awareness Programme on Scientific Bee Keeping

भा.कृ.अनु.प.-के.उ.बा.सं-रीजनल रिसर्च स्टेशन मालदा, प.बं. और एआईसीआरपी मधुमक्खी एवं परागण ने संयुक्त रूप से 13 और 14 अगस्त 2018 को मालदा कॉलेज ऑडिटोरियम और धन्यागंगा कृषि विज्ञान केंद्र, सरगाची, मुर्शिदाबाद में पीआई फाउंडेशन, गुड़गांव से वित्तीय सहायता द्वारा वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन पर दो दिन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। डॉ. पी.के. चक्रवर्ती (एडीजी पीपी और बी, आईसीएआर, नई दिल्ली), डॉ. एस. राजन (निदेशक आईसीएआर-सीआईएसएच, लखनऊ), स्वामी विश्वमयनंदा जी (अध्यक्ष, धन्यागंगा केवीके, सरगाची), डॉ. सी.आर. सतपथी (सेवानिवृत्त प्रोफेसर, ओयूएटी, भुवनेश्वर), डॉ. हरीश शर्मा (प्रोफेसर, वाईएसपी यूएचएफ, नौनी, सोलन, हि.प्र.), डॉ. कुमारानाग (एआईसीआरपी एचबी और पी, नई दिल्ली), श्री प्रबीर कुमार गारैन (आरकेएमए केवीके, निमपिठ) की उपस्थिति में कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। 13 अगस्त 2018 को मालदा जिले से 350 मधुमक्खीपालकों की सक्रिय भागीदारी और 14 अगस्त 2018 को मुर्शिदाबाद जिले के 300 प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को सफल और जीवंत बनाया। डॉ. एस. राजन (निदेशक आईसीएआर-सीआईएसएच, लखनऊ) ने सभी गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया और मधुमक्खियों के प्रचार के लिए आईसीएआर-सीआईएसएच आरआरएस, मालदा के कार्यक्रम और भविष्य की योजना के महत्व पर बात की। उद्घाटन भाषण में डॉ. पी.के. चक्रवर्ती ने गुणवत्तायुक्त शहद और कुशल परागण के लिए मधुमक्खी पालन के महत्व पर बात की। डॉ. सी.आर. सतपथी, डॉ. हरीश शर्मा और श्री प्रबीर कुमार गारैन ने वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन पर अपने अनुभव साझा किए और गुणवत्तायुक्त शहद उत्पादन और मधुमक्खी आधारित उत्पादों हेतु मधुमक्खी उद्यमियों को प्रेरित करने के लिए कुछ सफल कहानियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने उल्लेख किया कि मधुमक्खियों का उद्योग ग्रामीण गरीब/जनजातीय/वन आधारित और भूमिहीन आबादी हेतु आजीविका का स्रोत है जिसके माध्यम से बेरोजगार युवा इस व्यवसाय को न्यूनतम धन (1.00 से 2.00 लाख रुपये) के साथ शुरू कर सकते हैं। उन्होंने विभिन्न प्रकार के मधुमक्खी उत्पाद, मास क्वीन मधुमक्खी पालन, शाही जेली निष्कर्षण, फसलों की उपज पर शहद मधुमक्खी के प्रभाव, कुशल परागणकों और परागण के लिए शहद मधुमक्खी उपनिवेशों के प्रबंधन पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि एकीकृत मधुमक्खियों के किसान को अपनाने से उनकी आय दोगुनी होकर उनकी सामाजिक आर्थिक स्थिति में वृद्धि हो सकती है। अंतिम सत्र में मधुमक्खी उद्यमियों के साथ बातचीत हुई जिसमें मधुमक्खी पालन की समस्या को समझने के लिए उद्यमियों की समस्या को तुरंत सुलझाने हेतु साथ ही भविष्य की रणनीतियों की योजना बनाने के विषय पर विचार विमर्श हुआ। गुणवत्तायुक्त शहद और निवेश की बेहतर वापसी हो सके। डॉ. दीपक नायक (वैज्ञानिक और प्रभारी, आईसीएआर-सीआईएसएच आरआरएस और केवीके, मालदा) ने डॉ. अशोक यादव (वैज्ञानिक, आईसीएआर-सीआईएसएच आरआरएस, मालदा) और आईसीएआर-सीआईएसएच आरआरएस और केवीके के स्टाफ सदस्यों, मालदा एवं पीआई फाउंडेशन के अधिकारियों की सहायता से कार्यक्रम का समन्वय किया।

Two days Awareness Programme on Scientific Bee Keeping was jointly organized by ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture Regional Research Station Malda, W.B & AICRP Honey Bees and Pollination on 13th & 14th August 2018 at Malda college auditorium and Dhannyaganga Krishi Vigyan Kendra, Sargachi, Murshidabad respectively with financial support from PI Foundation, Gurgaon. The programmes were inaugurated in gracious presence of Dr. P.K. Chakraborty (ADG PP & B, ICAR, New Delhi), Dr. S. Rajan (Director ICAR-CISH, Lucknow), Swami Viswamayananda Ji (Chairman, Dhannyaganga KVKendra, Sargachi), Dr. C. R. Satapathy (Retd. Professor, OUAT, Bhubaneswars), Dr. Harish Sharma (Professor, YSP UHF, Nauni, Solan, H.P.), Dr. Kumaranag (AICRP HB&P, New Delhi), Mr. Prabir Kumar Garain (RKMA KVK, Nimpith). Active participation of 350 beekeepers from Malda district on 13th August 2018 and 300 participants from Murshidabad district on 14th August 2018 made the programme colourful and vibrant. Dr. S. Rajan (Director ICAR-CISH, Lucknow) welcomed all the dignitaries and spoke on importance of the programme and future plan of ICAR-CISH RRS, Malda for promotion of beekeeping. In inaugural speech, Dr. P.K. Chakraborty (ADG PP & B, ICAR, New Delhi) spoke on importance of beekeeping for quality honey and efficient pollination. Dr. C. R. Satapathy, Dr. Harish Sharma and Mr. Prabir Kumar Garain has shared their experiences on Scientific Beekeeping and highlighted few success stories for motivating beekeepers of quality honey production and bee based products. They mentioned that beekeeping industry is source of livelihood for rural poor/tribal/forest based and landless population through which unemployed youth can start this business with minimal funds (Rs. 1.00 to 2.00 lakhs). They also discussed on diversified bee product, mass queen bee raring, royal jelly extraction, effect of honey bee on yield of crops, efficient pollinators and management of honey bee colonies for pollination. He emphasized that by adopting integrated beekeeping farmer can increase their socioeconomic status by doubling their income. The last session was kept for interaction and dialogue with beekeepers to understand the problem of beekeepers for providing on spot solution and in planning future strategies for providing possible support to beekeepers to have quality honey and better return. Dr. Dipak Nayak (Scientist & In-charge, ICAR-CISH RRS & KVK, Malda) coordinated the event with assistance from Dr. Ashok Yadav (Scientist, ICAR-CISH RRS, Malda) and staff members of ICAR-CISH RRS & KVK, Malda as well as officials of PI Foundation.

Event Date:- 13-08-2018

CISH organised Livelihood and Skill Development Diwas

आजीविका एवं कौशल विकास दिवस का आयोजन

संस्थान द्वारा दिनांक 05.05.2018 को लखनऊ जिले के बाबू त्रिलोकी सिंह इंटर कॉलेज, काकोरी और बड़ी गढ़ी गांव में ग्राम स्वराज अभियान के तहत आजीविका एवं कौशल विकास दिवस का आयोजन किया गया। डॉ. नीलिमा गर्ग, डॉ. घनश्याम पांडे, डॉ. नरेश बाबू, श्री सुभाष चन्द्रा एवं श्री अरविंद कुमार ने कार्यक्रम का समन्वय किया। इस अवसर पर छात्रों को संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा आजीविका और कौशल विकास में सुधार के बारे में जागरूक और संवेदनशील बनाया गया। वैज्ञानिकों ने गुणवत्ता युक्त रोपण सामग्री, उपयुक्त अन्तःफसल, मधुमक्खी पालन, आम बागवानी के साथ मुर्गीपालन द्वारा आय बढ़ाने के लिए विभिन्न तकनीकों के बारे में भी चर्चा की। छात्रों को कीटों को नियंत्रित करने के लिए कीटनाशकों के न्यायिक अनुप्रयोग के बारे में भी सलाह दी गई। डॉ. नीलिमा गर्ग ने नुकसान को कम करने के लिए आम फसल प्रबंधन और आम के मूल्यवर्धित उत्पादों पर जोर दिया। फलों के कटाई दक्षता और शेल्फ जीवन में वृद्धि के लिए छात्रों के बीच आम तुड़ाई यंत्र और पैकेजिंग सीएफबी बॉक्स का भी प्रदर्शन किया गया। कक्षा 12 के लगभग 60 छात्रों और संकाय सदस्यों ने कार्यक्रम में भाग लिया।

बड़ी गढ़ी में वैज्ञानिकों ने आय बढ़ाने एवं परिवार की पोषण सुरक्षा के लिए सब्जियों, फूलों, फलों, छत बागवानी और रसोई बागवानी, फसल कटाई प्रबंधन और आम के मूल्यवर्धित उत्पाद हेतु सुझाव दिए। कार्यक्रम में लगभग 30 महिलाओं और पुरुषों ने भाग लिया। डॉ. एस के शुक्ला, डॉ. नरेश बाबू, श्री सुभाष चन्द्रा और श्री अरविंद कुमार ने इस कार्यक्रम का समन्वय किया।

Institute organised Aaajivika evam Kausal Vikas Diwas under Gram Swaraj Abhiyan on 05.05.2018 at Babu Triloki Singh Inter collage, Kakori and Bari Garhi village of Lucknow district. Dr. Neelima Garg, Dr. Ghanshyam Pandey, Dr. Naresh Babu, Shri Subhash Chandra and Shri Arvind Kumar coordinated the programme. On this occasion students were made aware and sensitized about improving livelihood and skill development by the scientists of institute. Scientist also discussed about various technologies viz production of quality planting materials, suitable intercrops, bee keeping, poultry farming in mango orchard for increasing income. Students were also advised about judicious application of pesticides to control of insect pest. Dr. Neelima Garg emphasised upon post harvest management and value added products of mango to reduce losses. Mango harvester and packaging CFB box were also demonstrated among the students for increasing harvesting efficiency and shelf life of fruits. About 60 students of class 12 and faculty members attended the programme.

At Bari Garhi scientists uggested theg stakeholders about nursery management of vegetables, flowers fruits, roof gardening and kitchen gardening, post harvest management and preparation of value added products of mango for income generation and nutrition security of the family. About 30 women and men participated in the event. Dr. S K. Shukla, Dr. Naresh Babu, Dr. Subhash Chandra and Arvind Kumar coordinated the event

Event Date:- 05-05-2018

Polyhouse tomatoes to help raise farmers’ earnings

पाॅलीहाउस में टमाटर की खेती से किसानों की आय में बढ़ोत्तरी

मौसम में लगातार परिवर्तन के कारण खुले वातावरण में सब्जियों का उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही है जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है। इस प्रकार की समस्याओं से बचने के लिए पाॅलीहाउस में सब्जियों का उत्पादन एक अच्छा विकल्प साबित हो रहा है। केन्द्र सरकार की योजना ”किसानों की लागत आधी करने और उत्पादकता बढ़ाने“ के लक्ष्य पर काम करते हुए भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ में स्थित सुनियोजित कृषि विकास केन्द्र (पी.एफ.डी.सी.) को पौष्टिक तत्वों से भरपूर गुणवत्तायुक्त टमाटर के उत्पादन में बड़ी सफलता हासिल हुयी। यह केन्द्र अधिक उपज के लिए प्लास्टीकल्चर से सम्बन्धित कृषि एवं बागवानी की प्रौद्योगिकी परिष्करण एवं क्षमता संवर्धन पर मुख्यतः कार्य कर रहा है। विगत 5-6 वर्षों से टमाटर की संकर प्रजातियों पर शोध के उपरान्त यह पाया गया कि पाॅलीहाउस में टमाटर की कुछ विषेष किस्में जैसे- हिमषिखर, हिमसोना, एनएस-1218, अभिलाष, अविनाष-2, नवीन, सरताज प्लस, देव, शहंषाह, अर्का रक्षक, अर्का सम्राट एवं चेरी टमाटर का उत्पादन संरक्षित खेती के माध्यम से लम्बे समय तक सफलतापूर्वक किया जा सकता है। पाॅलीहाउस में पौधों का उत्पादन बाहर लगाये गये उसी प्रजाति के पौधों की उत्पादकता से लगभग 3-5 गुना अधिक पाया गया। कुछ प्रजातियों में इसका उत्पादन पाॅलीहाउस में 15-20 किग्रा. प्रति पौधा तक मिला जबकि उसी प्रजाति के बाहर लगाये पौधों में मात्र 5-8 किग्रा प्रति पौधा पाया गया। इसके साथ ही प्रमुख पौष्टिक तत्व लाइकोपीन, पेक्टिन एवं अन्य एंटीआॅक्सीडेंट्स की मात्रा चेरी टमाटर में सबसे ज्यादा (8.7 मिग्रा./100 ग्रा.) पायी गयी। पाॅलीहाउस में लगाये गये पौधों में फलों का एकसमान आकार, लाल रंग, अधिक भण्डारण क्षमता जो कि मूल्य निर्धारण का एक प्रमुख कारक है भी बाहर के फलों की तुलना में ज्यादा अच्छा पाया गया है। परियोजना अन्वेषक एवं प्रधान वैज्ञानिक डा. वी. के. सिंह बताते हैं कि यह सफलता पौधों में छत्र प्रबन्धन, टपक सिंचाई, तथा मल्चिंग तकनीक को अपनाकर मिली है। इस तकनीक के तहत टमाटर के पौधों के केवल दो शाखाओं को फसल के अन्त तक रखा जाता है। यह शाखायें जड़ से समान रूप से पोषण प्राप्त करती हैं। जिसके उपरान्त दोनों शाखाओं पर समान आकार व गुणवत्तायुक्त फल आते हैं। इस तकनीक से उत्पादन लागत में काफी कमी पायी गयी, जिससे टमाटर उत्पादन द्वारा किसानों की आय वृद्धि में समुचित बढ़ोत्तरी हो सकती है। सामान्यतः टमाटर के एक पौधे पर 8-12 गुच्छे आते हैं। एक गुच्छे में 6-10 टमाटर पाये जाते हैं। परन्तु कुछ प्रजातियों में 14-18 गुच्छे तथा एक गुच्छे में 8-10 फल पाये गये जिसमें एक फल का वजन लगभग 150-180 ग्राम तक होता है। परन्तु चेरी टमाटर के एक गुच्छे में 25 फल तक पाये गये हैं जिसमें एक टमाटर का वजन 15-25 ग्राम तक होता है। इसके साथ-साथ पाॅलीहाउस में टमाटर की पैदावार 6 महीने तक ली जा सकती है। इसमें लगभग 2500-3000 कुन्तल सामान्य प्रजाति के टमाटर तथा 800-1000 कुन्तल चेरी टमाटर प्रति हेक्टेयर उत्पादन किया जा सकता है। अतः इस नयी तकनीक को अपनाकर किसान टमाटर की फसल उत्पादन की लागत में कमी करके अपनी आय में 3-4 गुना तक बढ़ोत्तरी कर सकते हैं। चेरी टमाटर में प्रचुर मात्रा में पोषण तत्वों के कारण इसकी उपयोगिता दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। पाॅलीहाउस ही एक सही विकल्प है जिससे इसकी आपूर्ति की जा सकती है। पाॅलीहाउस में टमाटर उत्पादन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उत्पादन का उच्चतम स्तर हमें तब प्राप्त हो जब बाजार में टमाटर का भाव अधिकतम हो जिससे किसान पाॅलीहाउस में टमाटर की खेती से कम समय में अधिक लाभ कमा सकें।

Due to continuous change in the weather, both the production and quality of vegetables are being affected in the open environment and farmers are facing huge losses. To avoid such problems, the production of vegetables in polyhouse is being considered as a good alternative to increase farmers’ income. Director of Central Institute of Horticulture (CISH) Shailendra Rajan pointed out that they were working to promote government’s policy of reducing input cost and increasing productivity. “Precision farming development centre (PFDC) located at CISH has achieved significant success in the production of quality tomato rich in nutrients. This centre is mainly working on the standardization of technology and capacity enhancement of agriculture and horticulture related to plastics for higher yield. After conducting research on tomato hybrids of the last 5-6 years, it was found that in polyhouse, there are some specific suitable varieties of tomatoes and cherry tomatoes which can be produced successfully through long-term sustainable farming. The plants in the polyhouse resulted in yield 3-5 times more than the productivity of the same crop in open conditions. “Some varieties produce 15-20 kg tomatoes in polyhouse conditions. In open conditions, they may produce 5-8 kg tomatoes per plant. Cherry tomatoes are the richest in major nutraceutical lycopene and other antioxidants. Plants cultivated in the polyhouse yielded uniform size and red coloured tomatoes, which is a major factor in indicating the market value. Dr. V.K. Singh, Principal Scientist and Project Investigator explained that success had been achieved by adopting canopy management drip irrigation, fertilizers applied with irrigation water and mulching in the plants. “Under this technique, after 20-25 days of planting, plants are pruned at the height of 30 cm to develop branches from the top cut and are allowed to grow. In this technique, there is a significant reduction in the cost of providing nutrients from fertilisation. Water use efficiency is increased and weeds are effectively controlled, thus this technology can increase the income of farmers by high productivity and low cost. Generally, a tomato plant yield 8-12 bunches and each bunch may have 6-10 tomatoes. But in some varieties, 14-18 bunches of 8-10 fruits per cluster have been harvested. Fruit weighs around 150-180 grams is attained in most of the varieties. But in a bunch of cherry tomatoes, 25 fruits have been found, weighing 15-25 grams,” he added. The scientists said that the storage capacity of tomatoes produced in the polyhouse was much higher than the fruits produced in the open due to number of fungi, yeast, bacteria which may affect the upper surface of the fruit is open conditions. “In addition, a tomato crop can be grown in the polyhouse for up to 6 months, whereas in the open environment it is roughly half the period. In the polyhouse, per hectare about 2500-3000 quintals of tomato and 800-1000 quintals of cherry tomatoes can be produced. Therefore, by adopting this new technique, farmers can increase their income by 3-4 times. The success of tomato production in the polyhouse depends on peak production when the price of tomatoes is very high in the market, so that farmers can make more profit in short time than tomatoes cultivation in the open conditions. Consumption of cherry tomato is increasing due to health benefits as they are rich in potassium, lycopene and many antioxidants which protect human body damage of cells, lowering risk of a number of chronic diseases, including heart disease and cancer. “With increasing awareness, the market of cherry tomatoes will definitely grow in India as well. Since, cherry tomatoes are mostly consumed as salad and for producing high quality fruits, polyhouse cultivation is the best option for meeting the demand.

Event Date:- 26-04-2018

Root-knot nematode emerging as major threat to guava nursery industry

Shailendra Rajan, Director (CISH) apprising the magnitude of the problem conveyed that extensive/intensive surveys undertaken by Principal scientist Dr. R.M. Khan have brought to fore that Private and govt. nurseries located especially in Lucknow, Badaun and Farrukhabad regions have been principally found the source of inoculums and subsequent cause of infestation build up first in nurseries itself followed by its spread and subsequent infestation in the newly established orchards in the areas of Rajasthan where guava cultivation has captured significant acreage.

Symptoms of infestation appear in form of swelling of roots which goes unnoticed and eventually turn into elongated swelling giving an appearance of beads. Severe infestation leads to formation of galls of varying shape and size ranging from oval, globose to spherical. Root infestation and formation of galls restricts the root growth which is reflected in form of poor plant growth with lesser number of branches having leaves of smaller size. Severely infested grafts succumb to mortality even in poly bags/beds. Such grafts in poly bags when uprooted exhibit blackened and rotten roots due to subsequent infection of fungi. Grafts having smaller size galls become the potential source of spread of pest infestation in far and wider areas. Infested plant when introduced in the newer areas carries the infestation along. Infested plants initially depending upon the infestation level may exhibit normal growth initially for a period of 1 to 2 year. However, gradually the population increases resulting in poor stand of plants having smaller size, lesser number of leaves. Plants having infestation of nematodes becomes vulnerable to fungal infection and starts exhibiting rotting of the whole root system resulting in complete mortality of even grown up established plants on the orchards. The craze for a higher profit margin, poor understanding of the pests and disease scenario and non-adoption of good nursery maintenance practices (GNMP) has led to the emergence of root-knot nematode a soil-based pest responsible for ruining even the grown-up guava orchards as one of the important factors in the arena of pest complex.

Event Date:- 26-04-2018

ICAR-CISH Technologies for Expression of Interest

Application are invited from interested entrepreneur for the purchase of following technologies.

CISH- Herbal Chew

CISH- Aonla Cider

CISH-Aonla Fibre Biscuits

CISH- Aonla Tea

CISH- Mango Wine

CISH- Aonla Dill Squash and RTS

CISH- Aonla Fennel Squash and RTS

CISH- Aonla Coriander Squash and RTS

CISH-Sugar cane Aonla Vinegar

Please send expression of interest latest by 7.4.2018 to Director ICAR-CISH, Lucknow by email to cish.lucknow@gmail.com, with a copy to itmu.cish@gmail.com (0522-2841022) on the following format along with a application fee of Rs. 10,000 (refundable).

The Firm bidding highest will be selected. Decision of Director ICAR-CISH will be final.

FORMAT FOR EXPRESSION OF INTEREST

1. Name and full address of the Organization:

2. Brief description of the present business:

3. Current operational area and qualification:

4. Contact person with Designation:

5. Contact telephone numbers and email:

6. Turnover for last three years, if any:

7. Company registration with GST No.:

8. Reason for interest :

Signature of authorized person

Event Date:- 28-03-2018

Farmers excelling in strawberry cultivation

युवाओं द्वारा स्ट्रॉबेरी की खेती के सफल प्रयास

लखनऊ के आसपास के क्षेत्रों में स्ट्रॉबेरी की खेती अपनी पहचान बना रही है और विशेषकर युवा आय सृजन के लिए एक प्रमुख फसल के रूप में स्वीकार कर रहे हैं| इसकी खेती लखनऊ के आसपास लगभग दो दशकों से हो रही है परंतु विगत 3 सालों में जो उत्साह किसानों ने इसकी खेती के लिए दिखाया है वह उत्साहवर्धक है| कई नए युवाओं ने केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान से परामर्श करके इसकी खेती सफलतापूर्वक प्रारंभ की| लखनऊ में कानपुर रोड के बन्थरा में श्री धीरेंद्र सिंह और श्रीमती सरिता गुप्ता ने लीज भूमि पर स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू करने के लिए 2015 में सीआईएसएच के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ अशोक कुमार से परामर्श किया। वैज्ञानिक के मार्गदर्शन में उन्होंने चांडलर किस्म के 500 पौधों के साथ इस उपक्रम की शुरूआत की और पहले वर्ष में सफलतापूर्वक अच्छी फसल का उत्पादन किया। वर्तमान में वे 10,000 से अधिक पौधे लगाकर अच्छी गुणवत्ता वाले स्ट्रॉबेरी का उत्पादन कर रहे हैं| उनका उत्पाद माल एवं स्ट्रॉबेरी के विपणन कर्ताओं के बीच में अपनी पहचान बना चुका है | यह विशेषज्ञों से परामर्श और दिए गए सुझावों को कार्य रूप में लाने का ही फल है कि एक बड़े क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की खेती करते हुए यह किसान प्रतिदिन 40 से 50 किलो स्ट्रॉबेरी का उत्पादन कर रहे हैं जिसका उन्हें बाजार फरवरी में डेढ़ सौ से 200 रुपये प्रति किग्रा मूल्य मिल रहा है| महमूदनगर तालुकेदारी (मलिहाबाद) गांव के एक अन्य भूमिहीन मजदूर श्री विरेंद्र रावत ने पूरे उत्साह के साथ स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। उन्होंने 1000 पौधे लगाए और हर वैकल्पिक दिन 5 से 6 किलोग्राम फल प्राप्त किये और उन्हें 200 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से आसानी से बेचा।

Farmers in areas nearby Lucknow have identified strawberry as one of the paying crops and thus its cultivation is being adopted by many of the youngsters for increased income. Although, strawberry was grown in subtropics for last few decades, but the enthusiasm which has been observed during last three years is remarkable as the farmers are not only consulting scientists from research institutes, but also they are ready to get the planting material transported from long distant places of Himachal Pradesh. This has empowered them for the cultivation as well as innovations in the cultivation of this exotic fruit crop under subtropics. Mr. Dhirendra Singh and Mrs. Sarita Gupta at Banthra, Kanpur Road, Lucknow consulted Dr. Ashok Kumar, Senior Scientist from CISH in 2015 for starting strawberry cultivation in the leased land. In close association with scientist they started this venture with 500 plants of variety Chandler and successfully produced a good crop in first year. Now, they are more than 10000 plants and a good quality strawberry is being produced which has created their identity in malls and among the strawberry suppliers. Learning by doing and consultation with expert for different problems faced in strawberry had made them successful. Gradually, they have become the expert of this crop and are able to guide others for its cultivation. This resulted into cultivation of strawberry at a larger area and these farmers are able to harvest 40 to 50 kg strawberry on alternate days with a market price of Rs.150/- to Rs. 200/- per kg from February onwards. Another land less farm worker Shri Virendra Rawat of Village Mehmoodnagar Talequdari (Malihabad) also started strawberry cultivation with full enthusiasm. He planted 1000 plants and every alternate day he is able to harvest 5 to 6 kg of fruits and has become self employed and sells his produce at Rs. 200 per kg easily.

Event Date:- 26-03-2018

Krishi Unnati Mela at IARI New Delhi on 17 March 2018

It is inform that Honorable Prime Minister, Sri Narendra Modi will address to farmers, scientists and extension personnel form Krishi Unnati Mela Ground, IARI, New Delhi on 17.03.2018. Please Visit: http://iari.res.in/kum2018/kum/index.html Event Date:- 17-03-2018

Webcast for Krishi Unnati Mela-2018

Live Webcast of Honorable Prime Minister Address to Farmers, Agriculture Scientists and Other Stakeholders in Krishi Unnati Mela 2018 on 17th March 2018 at 11:30 AM. Please Visit: Webcast link of live telecast of Krishi Unnati Mela 2018. Event Date:- 17-03-2018

Participation in TEDx Event at SRM University, Lucknow

डॉ. शैलेन्द्र राजन, निदेशक. भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान लखनऊ ने दिनांक 20.01.2018 को एस आर एम यूनिवर्सिटी, लखनऊ में आयोजित टीईडी एक्स (TEDx) के अवसर पर फलो के राजा "आम" और उसकी किस्मो के बारे में व्याख्यान दिया। टीईडी एक्स सफल उद्यमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओ, कलाकारों, इंजीनियरों, डॉक्टरों आदि लोगो को अपने अनुभवों को साझा करने के लिए एक मंच प्रदान करता है। डॉ. सुधीर के. मिश्रा, महानिदेशक (ब्रह्मोस) डीआरडीओ, रक्षा मंत्रालय ने बताया कि भारत डिजिटल क्रांति के सहयोग से अपनी सभ्यता और संस्कृति की विरासत को समृद्ध बनाने के लिए अग्रसर है। श्री आर पी सिंह, फास्ट-मीडियम तेज गेंदबाज ने एक छोटे शहर रायबरेली से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व करने की यात्रा को साझा किया। रोहतक की निवासी ऋतु सैन ने अपने ऊपर एसिड हमले की कहानी को साझा किया।

Dr. Shailendra Rajan delivered lecture on KING OF FRUITS "MANGO" and the craft that goes into creating new varieties in TEDxSRMU at SRM University, Lucknow on 20.01.2018. TEDx provides a platform where many successful en¬trepreneurs, social workers, artists, engineers, doctors etc share their experiences. Dr Sudhir K Mishra, Director General (BrahMos), DRDO, Ministry of Defense, talked about how the country was experiencing a digital revolution that has taken, over India, a country with rich heritage, civilization and culture. RP Singh fast-medium pacer recalled journey from a small town Rae Bareli to representing India in interna¬tional cricket. Rohtak resident Ritu Sain acid attack survivor shared her story.

Event Date:- 20-01-2018

Technology demonstration and awareness programme organised at farmers field

तकनीक स्थानान्तरण कार्यक्रम के तहत किसानों के प्रक्षेत्र में प्रदर्शन

भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ के वैज्ञानिक डा. वी. के. सिंह, डा. ए. के. भट्टाचार्य, डा. ए. के. त्रिवेदी तथा पी.एफ.डी.सी. परियोजना में कार्यरत डा. मनोज कुमार सोनी, नीरज कुमार शुक्ला द्वारा दिनांक 16.12.2017 को ग्राम-बेलगढ़ा, विकास खंड-मलिहाबाद, जनपद-लखनऊ में टमाटर की खेती एवं सब्जियों के उच्च गुणवत्तायुक्त उत्पादन हेतु तकनीकी जानकारी देने के लिए किसान के प्रक्षेत्र में प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि प्रो-ट्रे या प्लास्टिक ट्रे नर्सरी उगाने की एक नवीन पद्धति है जिसमें उच्च पैदावार वाली टमाटर की संकर किस्मों को लगाकर उच्च गुणवत्ता वाली फसलों की नर्सरी का उत्पादन सफलता पूर्वक किया जा सकता है। प्लास्टिक ट्रे में उगाये गये पौधों में रोपाई के दौरान पौधों की जड़ों को कम नुकसान पहुँचता है तथा कीट एवं व्याधियों का प्रकोप नहीं पाया जाता है और किसान टमाटर की अच्छी फसल प्राप्त कर सकते हैं। इस अवसर पर किसानों को प्रो-ट्रे का वितरण भी किया गया। इसके बाद किसानों ने सब्जियों के उत्पादन में होने वाली अन्य समस्याओं पर चर्चा की। टमाटर की हिमसोना प्रजाति (इनडिटरमिनेट टाइप) का किसान के प्रक्षेत्र में लगभग 6000 वर्ग फ़ीट में टमाटर का पौध रोपण कर प्रदर्शन किया गया।

ICAR- CISH Lucknow scientists Dr. V.K. Singh, Dr. A.K. Bhattacharya and Dr. A.K. Trivedi conducted a demonstration trial and awareness programme for high quality nursery production with assistance of PFDC staffs Dr. Manoj Kumar Soni and Shri Neeraj Kumar Shukla at Belgarha, Malihabad, Lucknow on 16.12.2017. During this programme, scientists create awareness among farmers about advance technology; pro-tray and plastic tray for nursery production. This technology would beneficial for high quality production of nursery for tomato and vegetable crops. Nursery raising in soil less culture in pro tray was demonstrated for successful quality production of tomato. About 300 seedling of tomato cv. Heemsona in pro tray were also distributed. Thereafter, farmers discussed about problems faced during vegetable production. The appropriate management practices were also demonstrated in planted indeterminate tomato cv. Heemsona.

Event Date:- 16-12-2017

P.F.D.C., ICAR-CISH, Lucknow organized Farmers’ Awareness Programme at Sitapur district

पी.एफ.डी.सी., भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ द्वारा बागवानी फसलों में उपयोगी नई प्रौद्योगिकियों की तकनीकी जानकारी देने हेतु सीतापुर जिले में कृषक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

बागवानी फसलों में उपयोगी नई प्रौद्योगिकियों की तकनीकी जानकारी देने के लिए दिनांक 24.11.2017 को ग्राम-पाल्हापुर, जिला-सीतापुर में कृषक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में अनेक प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। इस अवसर पर डा. वी. के. सिंह, पी.आई., सुनियोजित कृषि विकास केन्द्र (पी.एफ.डी.सी.), एन.सी.पी.ए.एच., भारत सरकार, भा.कृ.अनु.प.-के.उ.बा.सं., लखनऊ ने टपक सिंचाई प्रणाली एवं संरक्षित खेती के महत्व एवं पोलीहॉउस द्वारा तकनीक अपनाकर उच्च गुणवत्तायुक्त उत्पादन के विषय में जानकारी प्रदान की । किसानों को बागवानी में जल संरक्षण को ध्यान में रखकर टपक सिंचाई और मल्चिंग का उपयोग कर कम से कम पानी से सिंचाई करने के साथ-साथ पाॅलीहाउस अथवा लो टनल बनाकर सब्जियों को उगाने की भी सलाह दी। साथ ही किसानों से आम, अमरूद एवं सब्जियों के गुणवत्तायुक्त उत्पादन में हो रही समस्याओं पर विस्तृत रूप से चर्चा की गयी एवं समय-समय पर मिट्टी की जाँच कराने की सलाह दी गयी।

An awareness programme was organized at Village-Palhapur, District-Sitapur on 24.11.2017 to impart technical knowledge of new technologies useful in horticultural crops. a number of progressive farmers participated in this programme. On this occasion Dr. V.K. Singh, Project Investigator of Precision Farming Development Centre (P.F.D.C.), N.C.P.A.H., Govt. of India, ICAR-CISH, Lucknow explained the importance of drip irrigation system and protected farming for high quality production of horticultural crops. To keep the water conservation in the horticulture farmers were advised to use drip irrigation for minimizing water requirement of the crop. They have also advised to grow good high value vegetables crop under polyhouse or low tunnel condition for extending their production pierod. After that the farmers discussed in details on the problems being faced in quality production of mango, guava and vegetables and advised to check the field nutrient level of soil time to time.

Event Date:- 24-11-2017

Vigilance Awareness Week 2017

सतर्कता जागरूरकता सप्ताह 2017

भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान रहमानखेड़ा, लखनऊ में 30 अक्टूबर से 04 नवंबर,2017 तक सतर्कता जागरूरकता सप्ताह 2017 मनाया गया | इसके अंतर्गत दिनांक 03.11.2017 को एक कार्यशाला का आयोजन किया गया | कार्यशाला का विषय था "मेरा लक्ष्य - भ्रष्टाचार मुक्त भारत" | इस विषय राष्ट्रीय मत्स्य अनुसंधान संसाधन ब्यूरो के प्रशासनिक अधिकारी श्री अभिषेक राणा ने व्याख्यान दिया | कार्यशाला के दौरान संस्थान के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे |

The Central Institute for Subtropical Horticulture, Rehmnakhera, Lucknow organised Vigilance Awareness Week 2017 from 30th October to 04 November, 2017. In course of the Week, a Workshop was organised on 03.11.2017. During the Workshop, Shri Abhishek Rana, Administrative Officer delivered a lecture on Mera Lakshya - Bhrashtachar Mukt Bharat. During the Workshop, scientists and staff of the Institute were present.

Event Date:- 03-11-2017

Mahila Kishan Diwas at ICAR CISH Krishi Vigyan Kendra, Malda

महिला किसान दिवस

आईसीएआर-सीआईएसएच, कृषि विज्ञान केंद्र, मालदा में दिनांक 15.10.2017 को महिला किसान दिवस का आयोजन किया गया। बंगा रत्न पुरस्कार प्राप्तकर्ता डॉ देबाव्रत मजूमदार, वैज्ञानिक-एफ, टीआईएफएसी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार ने विशेष अतिथि के रूप में और जिले के लाइन विभाग के अधिकारियों एवम लगभग 75 आदिवासी दीदी (जनजातीय फार्म महिला) ने कार्यक्रम में भाग लिया।

Mahila Kishan Diwas was organized at ICAR CISH Krishi Vigyan Kendra, Malda on 15.10.17 in presence of Banga Ratna Awardee Dr. Debabrata Majumdar, Scientist-F, TIFAC, Ministry of Science and Technology, Govt of India as Special Guest and officials from District Line Departments. About 75 Adibasi Didis (Tribal Farm Women) attended the programme. Their wholehearted participation and performance was witnessed as celebration of ADIBASI MAHILA KISHAN DIWAS.

Event Date:- 15-10-2017

Sensitization workshop on micronutrient management, crop diversification, and post harvest management for doubling farmers’ income

किसानों की आय बढ़ाने के लिए सूक्ष्म पोषक प्रबंधन और अन्य बागवानी तकनीकी हस्तक्षेपों पर संवेदीकरण कार्यशाला

पोषण प्रबंधन, फसल विविधीकरण, संरक्षण, फसल के तुड़ाई उपरांत मूल्य में वृद्धि और अन्य संबंधित बागवानी तकनीकियों के माध्यम से किसानों की आय के वृद्धिकरण की आवश्यकता है। इस दिशा में,आई.सी.ए.आर. नेटवर्किग परियोजना "बागवानी की पैदावार और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए पौधों में सूक्ष्म पोषक प्रबंधन" के तहत ग्राम कीटनाखेड़ा, माल, लखनऊ में 16 सितंबर, 2017 को एक संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। डॉ नीलिमा गर्ग, डॉ तरुण अदक, डॉ दिनेश कुमार और डॉ ए.के. भट्टाचार्य ने प्रतिभागियों के साथ बातचीत की और अपनी आय बढ़ाने के लिए कई तरीकों का सुझाव दिया। किसान, महिलाओं, ग्रामीण युवाओं और लड़कियों ने उत्साहपूर्वक इस कार्यक्रम में भाग लिया और गुणवत्ता वाले फल और सब्जियों के उत्पादन के लिए कई सवाल उठाए। डॉ तरुण अदक ने आम और अमरूद में फलों के फटने की समस्या को हल करने के लिए जिंक और बोरान प्रबंधन की सलाह दी तथा अक्टूबर के महीने तक मिट्टी में ज़िंक और बोरोन के प्रयोग के साथ ही फलों के विकास की विभिन्न अवस्थाओं में करने का सुझाव दिया। गुणवत्तायुक्त फल उत्पादन के लिए भी ज़िंक और बोरोन की कमी को दूर करने का सुझाव दिया गया। अक्टूबर के अंत तक आम और अमरूद के लिए पोषक तत्वों के प्रयोग और जल प्रबंधन के बारे में भी किसानों को जाग्रत किया गया। जल की कमी के दौरान नमी संरक्षण और गुठली के पास जेली नियंत्रण के लिए कैल्शियम क्लोराइड के छिड़काव के बारे में भी सुझाव दिया। इसके अलावा,आम और अमरूद में कीटों तथा रोग के नियंत्रण उपायों के बारे में सलाह दी। डॉ नीलिमा गर्ग ने किसानों और खेतीहर महिलाओं को आम तौर पर कच्चे आमों से अमचूर बनाकर आय पैदा करने के लिए प्रेरित किया। यह उत्पाद कम से कम 300 रुपये प्रति किलोग्राम की अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकता है। आम का गूदा व अन्य उत्पादों को बनाने के लिए भी सलाह दी गई थी। किसानों को आम और अमरूद के बगीचों में कीटनाशकों के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी गई। डा दिनेश कुमार ने किसानों को प्रभावी कैनोपी प्रबंधन,अन्तः फसल, नर्सरी उत्पादन, सब्जियों का उत्पादन विशेषकर ऑफ-सीजन सब्जियों के बारे में सुझाव दिया त कि ग्रामीणों द्वारा अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें। उन्होंने गांव में पोषक स्मार्ट उद्यान के निर्माण में पोषण और अतिरिक्त कमाई के लिए,बेल,आंवला तथा केला की फसल की शामिल करने का पर जोर दिया। जागरूकता कार्यक्रम में सभी प्रासंगिक साहित्य को किसानों के बीच वितरित किया गया।

Doubling the farmers’ income is the thrust area of scientific community through nutrient management, crop diversification, protection, post harvest value addition and other related horticultural interventions. Keeping this in view, sensitization workshop was organized at Kitnakhera village, Maal, Lucknow under the ICAR networking project on “Micronutrient management in Horticultural Crops for Enhancing Yield and Quality” on 16th September, 2017. Dr Neelima Garg, Dr Tarun Adak, Dr Dinesh Kumar and Dr. AK Bhattacharjee interacted with the participants and suggested several ways to enhance their income. Farmers, farm women, rural youths and girls enthusiastically participated in this programme and raised several question for quality fruit and vegetables production. Dr Tarun Adak advised for Zinc and Boron management to solve fruit cracking in mango and guava and their soil application by the end of October as well as spraying at fruit developmental stages. Nutrient application for mango and guava by the end of October was also suggested and farmers were also sensitized about water management. Farmers made aware about mulching for moisture conservation during dry periods and application of calcium chloride for control of jelly seed formation in mango. Further, control measures of mango and guava pests were advised. Dr Neelima Garg motivated the farmers and farm women for income generation by making aam chur using unripe mangoes (Kaccha mango). This product may fetch additional income of at least Rs. 300 per kg of unripe mango as compared to their local marketing. Value addition of riped mangoes for making pulp and other products were also advised. Farmers made aware about safe use of pesticides in mango and guava orchards. Dr. Dinesh Kumar interacted and suggested farmers regarding effective canopy management, intercropping, nursery production, vegetable production particularly off-seasons vegetables may earn extra income by the villagers. He had emphasized on creation of nutri smart garden in the village for nutrition and extra earning, incusion of bael, aonla and banana cultivation. All relevant literatures were distributed.

Event Date:- 16-09-2017

Doubling farmers’ income through awareness programme on micronutrient management, value addition and other horticultural technologies for fruits and vegetables

फलों और सब्जियों के लिए सूक्ष्म पोषक प्रबंधन, मूल्य वर्धन और अन्य बागवानी पौधोगिकियों पर जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से किसानों की आय को द्विगुणीकृत करना

सूक्ष्म पोषक प्रबंधन, मूल्यवर्धन और अन्य बागवानी पौधोगिकियों पर जागरूकता कार्यक्रम के जरिए किसान की आय बढ़ाने के लिए, आई.सी.ए.आर. नेटवर्किग परियोजना "बागवानी की पैदावार और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए पौधों में सूक्ष्म पोषक प्रबंधन" के तहत 15 सितंबर, 2017 को टिकैतगंज गांव, मलिहाबाद, लखनऊ में आयोजित किया गया। गुणवत्तायुक्त फल उत्पादन, प्रभावी सूक्ष्म पोषक प्रबंधन, ड्रिप सिंचाई और वास्तविक समय आधारित कीट नियंत्रण उपायों के अपनाने के लिए सुझाव दिया गया। फसल विविधीकरण, मशरूम की खेती, सघन बागबानी, तथा प्रसंस्करण द्वारा आम और अन्य फलों के मूल्य में वृद्धि के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि पर जोर दिया गया। किसानों के बीच सभी प्रासंगिक साहित्य हिंदी में वितरित किया गया।

Doubling farmer’s income through awareness programme on micronutrient management, value addition and other horticultural technologies for fruits and vegetables was organized at Tikaitganj village, Malihabad, Lucknow under the ICAR networking project on “Micronutrient management in Horticultural Crops for Enhancing Yield and Quality” on 15th September, 2017. For quality fruit production, effective micronutrient management, drip irrigation and real time based pest control measures were suggested to participants. Doubling farmers’ income through crop diversification, mushroom cultivation, high density plantations and value addition of mango and other fruits were advocated. All relevant literatures were distributed among the farmers.

Event Date:- 15-09-2017

Mobile apps on methods for preparing RAW and RIPE MANGO PRODUCTS

कच्चे और परिपक्व आम के गुणवत्ता युक्त उत्पाद बनाने की विधियों के लिए मोबाइल ऐप्स

आईसीएआर-सीआईएसएच, लखनऊ के द्वारा कच्चे और परिपक्व आम के गुणवत्ता युक्त उत्पाद बनाने की विधियों के लिए, हिन्दी भाषा में मोबाइल ऐप्स विकसित किए हैं। इनमें दी हुई विधियों को अपना कर घरेलू अथवा कुटीर उदयोग स्तर पर आम का प्रसंस्करण किया जा सकता है।

CISH- ICAR has developed two mobile apps on methods for preparing RAW MANGO PRODUCTS and RIPE MANGO PRODUCTS. These apps will be helpful in preparing mango products at home or cottage scale. The apps are in Hindi for easy understanding by Hindi speaking people. The apps also have audio facility.

To visit the apps please copy and paste these following links:

Raw Mango Products - Click Here to Download Mango Raw Product App

Ripe Mango Products - Click here to Download Mango Ripe Product App

Event Date:- 29-06-2017

Awareness workshop

One day awareness workshop was organized on “Creating awareness on providing consultancy/contract service/research/training and generating agricultural technology Portfolio for Business / Entrepreneurship Development/ Start - Ups” for the scientific staffs. Dr. Shailendra Rajan, Director and chairman ITMU, ICAR-CISH, Lucknow briefed the purpose of the workshop and explained in detail through his presentation the importance of research and clear demarcation between good, bad and great research. Dr. R.M Khan, Chairman, PME cell described the central role of PME cell for providing the scope and processing of professional services in ICAR system. Ms. P. J Singh, Senior Scientist, ICAR-NBFGR, Lucknow and her team made presentation on Startups and entrepreneurship development. Event Date:- 2016-08-29

Awarness programme on GI

Programme was organized on the 30th July 2016 to make the farmers aware about Geographical Indication of “Malihabadi Dusseheri” to generate entrepreneurship amongst the farming community through constituting a registered society. About 25 mango growers/ farmers from Kasmandi Kalam, Mohammadnagar Talukedari, Sarsanda, Goparamau, Unnao and other parts of Lucknow participated. Dr. S Rajan, Director, ICAR-CISH motivated the farmers to develop and register a trademark of the registered society. Ms. Poonam Jayant Singh, IPR Expert from ICAR-NBFGR, Lucknow elaborated about GI and its uses in different country and exhorted the participants to make use of GI in mango season for promotion of eco/agri-horti tourism. Dr. Neelima Garg, Head, Post Harvest Management, ICAR-CISH, Lucknow highlighted the benefit accrual pertaining to minimizing the post harvest losses coupled with the availability of umpteen number of GI mango products. Event Date:- 2016-07-30

Awareness on “Conservation of mango diversity”

An awareness Program on “Conservation of mango diversity” (mango plantation and distribution of plants) was organised by ICAR-CISH, Lucknow on 11-8-16. The programme was organised under Mera Gaoan Mera Gaurav (MGMG) programme being implemented by the institute. The mango saplings of heirloom varieties conserved by the Society for Conservation of Mango Diversity (SCMD), Kashmandi kalam, Malihabad were distributed among the more than 50 farmers of 15 villages adopted under MGMG programme. Dr S. Rajan, Director, ICAR-CISH, briefed about SCMD and its achievements. Shri. Ram Kishore, a community farmer also shared his experience about the community participation and its advantages. Programme ended with vote of thanks proposed by Shri. Pardeep Joshi (L&T) and the event sponsored by Smt B. Joshi, a volunteer on her birthday. Event Date:- 2016-08-11

Brainstorming on “GAP certification in mango”

A brainstorming session on “GAP Certification in Mango” held on 09.08.2016 at ICAR-CISH, Rehmakhera Lucknow. Dr. Shailendra Rajan, Director, ICAR-CISH highlighted the importance of the subject and the benefits likely to be accrued to the stakeholders in terms of better marketing and price realization. Speaking at length, Mr. Mohit Sharma, Research Scholar from University of Rajasthan shared his experiences gathered through intensive tours and farmer’s interaction with reference to pros and cons of EUROGAP/GAP Certification and about its awareness amongst the farmers of Southern part of mango belt. Representatives from state government flagged the issues in respect of database pertaining to records of GAP at individual farmer level. Interacting with participants, Director, ICAR-CISH, Lucknow explained about the efforts made by ICAR-CISH, Lucknow in developing such a database and constitution of the society. In this programme, representatives from Mango Pack House, Lucknow, Mandi Parishad, Lucknow and Society for Conservation of Mango Biodiversity from Kasmandi Kalam, Mohammadnagar Talukedari, Sarsanda, Goparamau, Unnao and other parts of Lucknow were also participated. Event Date:- 2016-08-09

Parthenium awareness week

Parthenium awareness week is being started on 17-08- 2016 in the leadership of Dr S, Rajan, Director, ICAR-CISH, Lucknow. An awareness programme about Parthenium identification, its harmful effects on biodiversity, human health and control was organised on 17-08- 2016 under Mera Gaon Mera Gaurav (MGMG) Programme at Primary and Middle School of Haphizkheda and Wazidnagar villages of Malihabad, Lucknow. Parthenium was removed in and around school premises with the participation of students during the programme. Event Date:- 2016-08-17

कवि सम्मेलन

भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ में दिनांक 23.09.2016 को कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया | इस कवि सम्मलेन में लखनऊ और उसके आस-पास के श्री कमलेश मौर्या, श्रीमती राधा पांडेय, श्री सूर्य कुमार पांडेय, श्री शिव कुमार व्यास, श्री गजेंद्र प्रियांशु तथा श्री अशोक अग्निपंथी सम्मलित हुए | इन कवियों एवं कवियत्री ने पद्यात्मक विधा के माध्यम से भारतीय दर्शन, रहस्यवाद से सम्बंधित, छायावादी, प्रगतिवादी कवितायें सुनाएँ | इन कविताओं में उपमा-उपमेय, अलंकारों का अद्भुत वर्णन दिखा | इस कवि समेलन की अध्यक्षता डॉ शैलेन्द्र राजन, निदेशक द्वारा किया गया | Event Date:- 2016-09-23

हिन्दी पखवाड़ा 2016 समापन समारोह

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ में दिनांक 28 सितंबर, 2016 को हिन्दी पखवाड़ा का समापन हो गया। इसके समापन समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में मिश्रिख (उ.प्र.) की माननीय सांसद, डॉ.(श्रीमती) अंजू बाला उपस्थित थीं। अपने मुख्य अतिथिये संबोधन में उन्होंने हिन्दी को सर्वोपरि तथा देश को एक सूत्र में पिरोने वाली भाषा बताया। उन्होंने अपनी अनुभूति के आधार पर बताया कि हिन्दी की महत्ता हम तभी समझते हैं जब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने फेसबुक, ट्वीटर, विकीपिडीया, गूगल तथा वाट्सएप जैसे अनेक माध्यमों का हिन्दी भाषियों द्वारा इस्तेमाल किये जाने को महत्वपूर्ण बताया। माननीय सांसद महोदया, डॉ. अंजू बाला भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ के हिन्दी पखवाड़ा 2016 के दौरान आयोजित हिन्दी की अनेक प्रतियोगिताओं के विजेता को दिये जा रहे प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम के अवसर पर बोल रहीं थीं । इस अवसर पर संस्थान के निदेशक, डॉ. शैलेन्द्र राजन ने अपने अध्यक्षीय संबोधन के दौरान हिन्दी की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा की हिन्दी न केवल राजभाषा है बल्कि संपर्क भाषा के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है। दूसरे अर्थ में हिन्दी देश की राष्ट्रभाषा भी है। उन्होंने प्रतियोगिताओं के विजेताओं को बधाई दी तथा आशा व्यक्त की कि संस्थान के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी पूरे वर्ष अपना सरकारी कार्य हिन्दी में ही करेंगे। समापन समारोह के अवसर पर हिन्दी पखवाड़ा 2016 के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाण-पत्र वितरित किये गये तथा साथ ही डॉ. अशोक कुमार मिश्र, प्रभारी अध्यक्ष, फसल सुरक्षा प्रभाग को उनके हिन्दी में किये गये उत्कृष्ट कार्यों के लिये सम्मानित भी किया गया। समापन समारोह के अवसर पर सभी गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत प्रभारी अध्यक्ष, फसल उत्पादन प्रभाग, डॉ. घनश्याम पाण्डेय द्वारा किया गया जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नीलिमा गर्ग, अध्यक्ष, तुड़ाई उपरान्त प्रबंधन प्रभाग द्वारा दिया गया। कार्यक्रम का संचालन श्री धीरज शर्मा, सहायक निदेशक (राजभाषा) ने किया। Event Date:- 2016-09-28

Farmer Awareness Programme at Kannauj

On 14.10.2016, Farmer Awareness Programme was conducted at Bhawanipur and Ladpur, Gursahayganj, Kannauj, U.P. by PFDC, ICAR-CISH, Lucknow. About 25 farmers participated in the same. The participants were made aware about technologies developed by PFDC, ICAR-CISH like Drip irrigation, mulching and protected cultivation. Practical use of polyethylene mulching in potato was demonstrated at farmer’s field. Event Date:- 2016-10-14

ICAR-CISH in News

ICAR-CISH in News: 1. ICAR-CISH helps farmer grow, sell exotic vegetables (News: The Pioneer daily, Saturday, December 10, 2016) 2. ICAR-CISH is promoting off season mango varieties (News: The Pioneer daily, December 15, 2016) Event Date:- 2016-12-10

Development of Community Based Organization for Better Profits to Mango Growers in West Bengal

ICAR-CISH Regional Research Station, Malda has been taking initiative on conservation and utilization of local varieties of mango and Murshidabad districts of West Bengal. In this regard, mobilization campaign had organized in different mango growing belts of both the districts for on farm conservation and utilization of rich diversity of mango. In this direction, custodian farmers and mango growers of Murshidabad district has come forward for establishing a society in the name of Murshidabad Indigenous Mango Growers Society during the meeting with mango growers held at office of the District Horticulture Officer on 29.12.2016 in the presence of Dr. Dipak Nayak, Scientist & In-charge, ICAR CISH Regional Research Station, Malda. CISH-RRS, Malda will facilitate for establishing the society and its smooth activities. . Event Date:- 2016-12-29

Lecture on Genetically Engineered Crops

Dr. Bidyut Sarmah, ICAR-National Professor (Norman Borlaug Chair) and Director, DBT-AAU Centre, Assam Agriculture University, Jorhat delivered a lecture on Genetically Engineered Crops : A Contribution of Modern Biotechnology at the Committee Room of the ICAR-CISH, Lucknow on January 4, 2017. All the scientists and RAs/SRFs were present during the talk. Event Date:- 2017-01-04