Symposium/Seminar/Brainstorming/Workshop

XIV Agricultural Science Congress

XIV Agricultural Science Congress to be organized by National Academy of Agricultural Sciences, New Delhi & ICAR-Indian Agricultural Research Institute, New Delhi from February 20-23, 2019.

Please Visit: XIV Agricultural Science Congress 2019. Event Date:- 20-02-2019

Workshop on Nutrismart Tribal Village

"पोषणवाद आदिवासी गांव" पर कार्यशाला

भा.कृ.अनु.प.- केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, के मालदा स्थित क्षेत्रीय केंद्र ने दिनांक 13/10/2018 को डॉलपुर श्री श्री ज्ञानानंद सरस्वती आश्रम, चटना, बांकुरा, पश्चिम बंगाल के सहयोग से "पोषणवाद आदिवासी गांव" पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पोषणवाद आदिवासी गांव की अवधारणा को बढ़ावा देना था और संसाधन गरीब गांवों की वांछित मांग को पूरा करने के लिए स्थानीय लोगों को केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (आम-अंबिका, अरुणिकांद) और अन्य संस्थानों की सब्जी किस्मों की उगाने के लिए प्रोत्साहित करना था। इस कार्यक्रम में 210 से अधिक किसानों ने भाग लिया था । कार्यक्रम की व्यवस्था सचिव, डॉलपुर श्री श्री ज्ञानानंद सरस्वती आश्रम ने की थी। इस अवसर पर गणमान्य अतिथि, श्री सुभाषिस बटाबाल (उपाध्यक्ष, बांकुरा जिला परिषद), उप निदेशक कृषि (प्रशासन), बांकुरा, परियोजना निदेशक (एटीएमए), बीएलआरडीओ, चटना भी उपस्थित थे और उन्होंने अपने अनुभव साझा करके कार्यशाला की सराहना भी की।

The regional centre of ICAR-Central Institute of Subtropical Horticulture, organized a workshop on 'Nutrismart Tribal Village' in collaboration with Shree Shree Gyanananda Saraswati Ashrama, Chatna, Bankura, West Bengal on 13/10/2018. The main aim of this workshop had to promote the concept of nutrismart tribal village and encourage the local people to grow the improved fruit varieties of CISH (Mango- Ambika, Arunikaand) and vegetable varieties of other institutes to fulfil the desired demand of resource poor villages. More than 210 farmers were attended the programme. The arrangement of the programme was made by Secretary, Dolpur Shree Shree Gyanananda Saraswati Ashrama. Dignitaries, Mr. Subhasis Batabyal (Vice Chairperson, Bankura Zilla Parishad), Deputy Director of Agriculture (Admn.), Bankura, Project Director (ATMA), BLRDO, Chatna had been also present on this occasion and graced the workshop by sharing own experiences.

Event Date:- 13-10-2018

Lecture on Sexual harassment of women at working place

कार्यस्थल पर महिलाओं की यौन उत्पीड़न विषय पर व्याख्यान

भा. कृ. अनु. प.- कें. उ. बा. सं. में दिनांक 12/10/2018 को बागवानी अपशिष्ट प्रबंधन पर डॉ. नीलिमा गर्ग,विभागाध्यक्ष, फसल तुड़ाई उपरांत प्रबंधन, द्वारा "कार्यस्थल पर महिलाओं की यौन उत्पीड़न" विषय पर व्याख्यान दिया गया। जिसमें संस्थान के सभी स्टाफ ने भाग लिया। इस व्याख्यान का मुख्य उद्देश्य यौन उत्पीड़न के विषय में भा. कृ. अनु. प.- कें. उ. बा. सं लखनऊ के कर्मचारियों को जागरूक करना था। डॉ. नीलिमा गर्ग ने महिला कर्मचारियों को किसी भी प्रकार का डर न होने और इस तरह के उत्पीड़न से संबंधित समस्याओं की रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए भारत सरकार द्वारा अधिनियमित सभी नियमों और कृत्यों पर चर्चा की तथा कार्यस्थल पर महिलाओं के उत्पीड़न से संबंधित घटनाओं से निपटने के लिए गठित संगठनो के बारे में चर्चा की।

A Lecture has been given by Dr. Neelima Garg, Head, Division of Postharvest Management on "Sexual harassment of women at working place" at ICAR-CISH, Rahmaankhera Lucknow Campus. All staff were participated in this extreme lecture. The main aim of this lectured was to aware the staff from sexual harassment. She specially encourage and motivated the female staff have not to feared and report the problems, if any unusual thing happen to her. She discussed all the rules and acts enacted by Government of India for protection of women at work place and also talk about the established complaints committee for receiving and solving of matter related to sexual harassment.

Event Date:- 12-10-2018

Workshop on Bio-waste management

जैव-अपशिष्ट प्रबंधन पर कार्यशाला

भा.कृ.अनु.प.- कें.उ.बा.सं., लखनऊ में दिनांक २०/०८/२०१८ को बागवानी अपशिष्ट प्रबंधन पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें संस्थान एवं भा. कृ. अनु. प.- राष्ट्रीय कृषि मतस्य अनुसन्धान ब्यूरो के वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विभिन्न तरीकों द्वारा बागवानी, मंडियों, किसानों के खेतों और प्रसंस्करण कारखानों से प्राप्त अवशेष को मूल्यवर्धित उत्पादों में कैसे परिवर्तित किया जा सके, चर्चा करना था। इस अवसर पर श्रीमती नीलिमा गर्ग, विभागाध्यक्ष, फसल तुड़ाई उपरांत प्रबंधन ने "सूक्ष्मजीवो के प्रयोग द्वारा बागवानी अपशिष्ट का प्रबंधन" विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि कचरो में उपस्थित कार्बनिक घटक जैसे सेलूलोज़, स्टार्च, पेक्टिन, विटामिन, खनिजों आदि की प्रचुरता होती है और वर्तमान में बागवानी अवशेषों और प्रसंस्करण द्वारा उत्पन्न अपशिष्ट के कुशल प्रबंधन के लिए कोई उचित प्रबंधन प्रणाली उपलब्ध नहीं है। इसको प्रबंधन करने का एक तरीका यह भी है कि इस अपशिष्ट को सूक्ष्मजीवो के प्रयोग द्वारा उपयोगी चीजे जैसे कि आहार संबंधी फाइबर, इथेनॉल, टार्ट्रेट्स, रंगद्रव्य, बीज तेल और प्रोटीन, खाद्य, फ़ीड, कार्यात्मक खाद्य पदार्थ, कॉस्मेटिक उत्पाद, वर्मीकंपोस्ट इत्यादि जैसे मूल्यवर्धित पदार्थो का उत्पादन कर सकते है। इस तरह कचरे के उपयोग से न केवल आवश्यक उत्पाद तैयार होंगे बल्कि प्रदूषण स्तर भी कम होगा। डा० राम अवध राम, प्रधान वैज्ञानिक ने "भारत में फसल और नगरपालिका से प्राप्त अपशिष्ट प्रबंधन के समाधान" पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष किसानो के लिए बहुत उपयोगी हो सकते है । इन अवशेषों को ग्रामीण घरेलू उपयोग के लिए जैसे कि ईंधन, खाद, पशुओ के चारे के आदि के रूप में उपयोग करते है। हालांकि, इन अवशेषों का एक बड़ा हिस्सा फसल तुड़ाई उपरांत मैदान में जला दिया जाता है।

ICAR-Central Institute of Subtropical Horticulture organised a workshop on horticulture waste management which was attended by its scientists and those of National Bureau for Fish Genetic Resources, Lucknow on 20.9.2018 with an objective to brainstorm on different ways by which the horticulture produce residue from mandis, households, farmers’ fields and processing factories can be converted into value-added products. Dr. Neelima Garg, head, Division of Postharvest Management delivered a talk on ‘Horticultural waste management by microbial interventions’. She emphasised that these wastes were very rich in organic constituents like cellulose, starch, pectin, vitamins, minerals etc and posed serious health hazards due to high biological oxygen demand (BOD) and led to environmental pollution. Presently there is no appropriate waste management system for the efficient management of huge waste generated by horticultural residues and processing waste. One way of managing the situation is to reduce the losses and to utilise the available material for producing value-added products such as dietary fibre, ethanol, tartarates, pigments, seed oil and protein, food, feed, functional foods, cosmetic products, vermin-compost etc. through microbial interventions and fermentation. The utilisation of wastes will not only economise the cost of finished products but also reduce the pollution level. Similarly, Crop residues are natural resources with tremendous value to farmers. These residues are used as animal feed, composting, thatching for rural homes and fuel for domestic and industrial use. Dr. Ram Avadh Ram, Pr. Scientist also delivered a talk on ‘Viable solutions to crop and municipal solid waste management in India’ on this occasion. He said that crop residues were natural resources with tremendous value to the farmers. However, a large portion of these residues is burned in field after the harvest of the crop.

Event Date:- 20-09-2018

Horti-Entrepreneurship Workshop on Green House, Nursery, Tissue Culture and Value Addition 18-08-2018

ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture in collaboration with Society for Development of Subtropical Horticulture, Lucknow will organize a Horti-Entrepreneurship Workshop on 18-08-2018 at ICAR-CISH, Rehmankhera, Lucknow. Horticultural technologies such as protected cultivation of high value horticultural crops, nursery, tissue culture and value addition could play a major role in developing entrepreneurship in India. The workshop will bring in policy makers, bankers, research institutions, private players and potential entrepreneurs under one platform to promote Horti-Food Processing Entrepreneurship in the country. Any citizen of India who is willing to develop Horti-Entrepreneurship can register online. A total number of 100 candidates will be selected on first cum first serve basis. Successful candidates will be informed subsequently.

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Traffic stats

Event Date:- 18-08-2018

CISH coaches young horti-entrepreneurs

भा.कृ.अनु.प.-के.उ.बा.सं में दिनांक 18.08.2018 को नर्सरी, संरक्षित खेती, मूल्यवर्धन, जैविक खेती और ऊतक संस्कृति पर होर्टी-उद्यमिता कार्यशाला का आयोजन किया गया। देश के युवाओं हेतु नौकरी के अवसर पैदा करने के लिए बागवानी क्षेत्र तीव्रगति से उभर रहा है। पिछले दो वर्षों में बागवानी आधारित उद्यमशीलता के लिए बड़ी संख्या में युवाओं ने के.उ.बा.सं, लखनऊ से संपर्क किया। ग्रामीण और शहरी युवाओं के बीच बढ़ती दिलचस्पी ने के.उ.बा.सं को इस कार्यशाला को आयोजित करने के लिए प्रेरित किया जो न केवल स्टार्टअप और उद्यमिता की मूल बातें बताता है बल्कि विशिष्ट बागवानी प्रौद्योगिकियों के आधार पर व्यापार मॉड्यूल भी प्रदान करता है। चार राज्यों (बिहार, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और उत्तर प्रदेश) के 16 जिलों का प्रतिनिधित्व करते हुए कुल 68 प्रतिभागियों (पीएचडी के स्नातक) और 4 शिक्षित किसानों ने कार्यशाला मंल भाग लिया। नर्सरी व्यवसाय शुरू करने में बहुत से लोग रुचि रखते हैं, इसलिए फल, सजावटी और सब्जी फसलों पर विशिष्ट नर्सरी में उद्यमशीलता के विषय पर एक सत्र आयोजित किया गया। रोपण सामग्री की बढ़ती मांग और बढ़ती भुगतान क्षमता के साथ, नर्सरी की संख्या बढ़ रही है। संस्थान द्वारा विकसित मॉडल नर्सरी को हजारों किसानों और उद्यमियों ने देखा और वे अपना स्वयं का उद्यम शुरू करने के लिए प्रेरित हुए। मूल्यवर्धन युवाओं को छोटे पैमाने पर उद्योग या मूल्यवर्धित उत्पादों के घरेलू स्तर के उत्पादन की स्थापना के लिए आकर्षित करता है। फल और सब्जी फसलों की प्रसंस्करण और उ.प्र. में छोटे पैमाने पर अचार उद्योग के दायरे में व्यापार के अवसर चर्चा की गई थी। उ.प्र. में ग्रीन हाउस की खेती लोकप्रिय हो रही है और सरकार द्वारा वित्तीय सहायता से संरक्षित खेती के तहत क्षेत्रों में वृद्धि भी हुई है। उच्च मूल्य वाले फल और सब्जी फसलों की संरक्षित खेती, कार्बनिक खेती और मशरूम उत्पादन उद्यमिता चर्चा के महत्वपूर्ण मुद्दे थे। ऊतक सुसंस्कृत केला पौधों की बढ़ती मांगों के साथ, ऊतक संवर्धन और सेकेंडरी हार्डनिंग में उद्यमिता ने कुछ महीनों के भीतर पैसे कमाने हेतु कई स्नातकों को आकर्षित किया है। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ बातचीत की और प्रशिक्षण पर टिशू कल्चर लैब, प्रसंस्करण प्रयोगशाला, मशरूम उत्पादन सुविधा, नर्सरी / हाइड्रोपोनिक्स, पॉलीहाउस आदि का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

Horti-Entrepreneurship Workshop on nursery, protected cultivation, value addition, organic farming and tissue culture was organized at ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Rehmankhera, Lucknow on 18-08-2018. Horticulture sector is proving to be boom for creating job opportunities for youth of this country. Large number of youths contacted CISH Lucknow during last two years for horticulture based entrepreneurship. The growing interest among rural as well as urban youth prompted CISH to schedule this workshop which not only deal with the basics of startup and entrepreneurship but also caters to specific horticulture technologies based business modules. A total of 68 participants (graduate to Ph. D.) and 7 well educated farmers representing 16 districts of 4 states (Bihar, Jammu & Kashmir, Rajasthan and Uttar Pradesh) participated in the workshop. A good number of people are interested in starting the nursery business, therefore a session was planned for entrepreneurship in dealing with specific nurseries on fruit, ornamental and vegetable crops. With the growing demand of planting material and increasing paying capacity, number of nurseries are increasing. Institute has developed a model nursery, visited by thousands of farmers and entrepreneurs and they get motivated for starting their own venture. Value addition attracts youth for establishing small scale industry or household level production of value added products. Business opportunities in processing of fruits and vegetable crops and scope of small scale pickles industry in U.P. were discussed. Green house cultivation is becoming popular in UP and financial support by the Government has led to increase in areas under protected cultivation. Protected cultivation of high value fruit and vegetable crops, entrepreneurship in organic farming and mushroom production were the important issues for discussion. With increasing demands of tissue cultured banana plants, entrepreneurship in tissue culture and secondary hardening has attracted many graduates for earn money within few months. The participants interacted with specialists and visited tissue culture lab, processing lab, mushroom production facility, nursery/hydroponics, polyhouse hands on training.

Event Date:- 18-08-2018

Workshop on integration of rural poultry in mango orchard ecosystem

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ ने दिनांक 09.08.2018 को आम बागान पारिस्थितिकी तंत्र में ग्रामीण कुक्कुट के एकीकरण पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। संस्थान के निदेशक डॉ. शैलेन्द्र राजन ने बताया कि देश की प्रसिद्ध आम फल पट्टी, मलिहाबाद के किसानों की आजीविका आधार को बढ़ाने के लिए आम के बागों के तहत ग्रामीण कुक्कुट का प्रदर्शन किया गया। एक साल के भीतर ही यह मॉड्यूल इतना लोकप्रिय हो गया कि यह मलिहाबाद के चार से अधिक गांवों में फैल गया। इस तकनीक को फैलाने में मीडिया द्वारा निभाई गई सक्रिय भूमिका के कारण, अब यह मॉड्यूल अन्य बागान पारिस्थितिक तंत्रों में भी अपनाया जा रहा है। उत्साही कुक्कुट किसानों ने कार्यशाला में भाग लिया और वैज्ञानिकों से कई प्रश्न पूछे। डॉ. आर.बी. राय, प्रसिद्ध पोल्ट्री विशेषज्ञ एवं पूर्व निदेशक- सी.ए.आर.आई. पोर्टब्लैयर, ने किसानों से बातचीत की और उन्हें प्रोत्साहित किया कि एज़ोला को आम बाग में पोल्ट्री फ़ीड के रूप में एकीकृत किया जाना चाहिए। यह न केवल लागत को कम करेगा बल्कि यह प्रोटीन और खनिजों का अच्छा स्रोत होगा। फार्मर्स फर्स्ट परियोजना मलिहाबाद के किसानों के बीच एज़ोला फ़ीड को फैलाएगी। डॉ. राय ने किसानों को सूचित किया कि वे कार्बनिक पोल्ट्री को अपनाने से अपनी आय बढ़ा सकते हैं। किसानों ने वचन दिया कि वे आम के लिए जैव कीटनाशकों और जैव उर्वरकों का उपयोग करेंगे। डॉ. राय ने मुर्गी के लिए हल्दी, अदरक और लहसुन आधारित मिश्रण तैयार करने के लिए सुझाव दिया और पूरी तरह से एंटीबायोटिक दवाओं को छोड़ने को कहा। उन्होंने कार्बनिक पोल्ट्री के लिए विस्तृत एसओपी दिया। डॉ. मनीष मिश्रा, परियोजना अन्वेषक, फार्मर्स फर्स्ट परियोजना और डॉ. राम अवध राम, प्रधान वैज्ञानिक, केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान ने किसानों के साथ बातचीत करते हुए बताया कि यह एक नई पहल है क्योंकि देश में कार्बनिक पोल्ट्री खेती का अभ्यास नहीं किया जा रहा है। किसान प्रारंभ में अप्रमाणिक कार्बनिक उपज के रूप में कुक्कुट मांस और अंडे बेच सकते हैं। डॉ. राजन ने कहा कि बाजार स्थापित करने के लिए जैविक आम बागों को प्रमाणित करने के प्रयास किए जाएंगे। डॉ. राजन ने बताया कि इस उद्यम को स्वयं टिकाऊ बनाने के लिए फार्मर्स फर्स्ट परियोजना के तहत गांव में दो हैचरियां स्थापित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय पक्षी अनुसन्धान संस्थान, बरेली के वैज्ञानिकों को आम बागों के लिए उपयुक्त कुक्कुट स्ट्रेन को विकसित करने के लिए तैयार किया जाएगा। वर्तमान में कड़कनाथ स्ट्रेन मलिहाबाद के आम बागानों में लोकप्रिय विकल्प है क्योंकि इसकी बाजार में उच्च कीमत प्राप्त होती है। उच्च मूल्य प्राप्ति के अलावा, कड़कनाथ आम कीट को नियंत्रित करने के लिए भी उपयुक्त है। यह ऊंची उड़ान भर सकता है एवं आम कीटों को खा सकता है और इस तरह यह कीटनाशकों की आवश्यकता को कम करता है। कुक्कुट आम बागों हेतु एक उपयुक्त आवास है क्योंकि इसे खाने के लिए बहुत सारी कीड़े मिलते हैं। यह आम के बागों की मिट्टी को भी समृद्ध करता है।

ICAR-CISH, Lucknow organized one day workshop on integration of rural poultry in mango orchard ecosystem on 09.08.2018. Dr. Shailendra Rajan, Director, CISH, Lucknow informed that in order to enhance livelihood base of farmers of Malihabad, a famous mango fruit belt of the country, we demonstrated rural poultry under mango orchard. Within a year, this module became so popular that it spread to more than four villages in Malihabad. Due to active role played by media in spreading this technology, now this module is being adopted in other orchard ecosystems. Enthusiastic poultry farmers attended the workshop and asked several questions to scientists. Dr. R.B. Rai, renowned poultry expert and Ex-Director- CARI Portblair, A & Island interacted with farmers and exhorted that Azolla must be integrated in mango orchard as poultry feed. This will not only reduce the cost substantially but its good source of protein and minerals. Farmer FIRST project will spread Azolla feed among the farmers in Malihabad. Dr. Rai informed the farmers that they can augment their income by adopting organic poultry. Farmers pledged that they will use bio pesticides and bio fertilizers for mango. Dr. Rai gave tip to prepare turmeric, ginger and garlic based concoction for poultry and completely shun antibiotics. He gave detailed SOP for organic poultry. Dr. Maneesh Mishra, Principal Investigator, Farmer FIRST and Dr. Ram Awadh, Principal Scientist, CISH while interacting with farmers informed that this is a new initiative as organic poultry farming is not being practiced in the country. Farmers can sell poultry meat and egg as uncertified organic produce initially. Dr Rajan said efforts will be made to certify organic mango orchards for establishing niche market. Dr. Rajan informed that two hatcheries will be installed in the village under Farmer First project to make this venture self sustainable. He said scientist of CARI, Barelli will be roped in to develop suitable strain of poultry for mango orchards. At present Kadaknath strain is getting popular choice in mango orchards of Malihabad as it fetches high price in market. Besides high price realization, Kadaknath is suitable strain for controlling mango pest. It can fly high and feed on mango pests from the canopy and thereby reduce the need for pesticides. Poultry finds suitable habitat under mango orchards as it gets plenty of insects to feed. It also enriches soil of mango orchards.

Event Date:- 09-08-2018

CISH-RRS, Malda organized a workshop on vegetable seed production

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान द्वारा क्षेत्रीय स्टेशन मालदा, पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय बीज कारपोरेशन (एनएससी) पश्चिम बंगाल के सहयोग से 27-28 जुलाई, 2018 को सब्जी बीज उत्पादन पर एकीकृत बागवानी (एमआईडीएच) प्रायोजित कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पहल पर बात करते हुए, के.उ.बा.सं. के निदेशक शैलेंद्र राजन ने कहा कि राज्य सब्जी उत्पादन में पहले स्थान पर है तथा बंगाल राज्य में सब्जी बीज की बहुत खपत है। गुणवत्ता बीज उत्पादन में वृद्धि कर सकता है और इसे राज्य की किसानों द्वारा अपनी आय बढ़ाने के लिए एक उद्यम के रूप में भी लिया जा सकता है। के.उ.बा.सं.-मालदा किसानों के लिए प्रजनकों के बीज उपलब्ध कराने हेतु बीज उत्पादन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। के.उ.बा.सं. किसानों के लाभ के लिए मालदा में बीज प्रसंस्करण संयंत्र की स्थापना कर रहा है। एनएससी के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम, उत्पादकों से विपणन विशेषज्ञों तक मजबूत बीज श्रृंखला स्थापित करने में मदद करेगा। संस्थान बीज श्रृंखला को मजबूत करने के लिए गुणन हेतु नव विकसित किस्मों के ब्रीडर के बीज प्रदान कर रहा है। इस कार्यशाला में 250 आदिवासी किसानों ने भाग लिया एवं चर्चा की। एनएससी ने खेती के लिए प्रत्येक प्रतिभागी को बीज किट प्रदान की।

A Mission for Integrated Horticulture (MIDH) sponsored programme on vegetable seed production was organized on July 27-28, 2018 by CISH at its Regional Station Malda, West Bengal in collaboration with National Seed Carporation (NSC), West Bengal. Talking on this initiative, CISH director Shailendra Rajan said that the state ranks first in vegetable production and there is a lot of vegetable seed consumption in the state of Bengal. Quality seed production can increase the production and it can also be taken up as a venture by the state farmers for increasing their income. CISH-Malda is instrumental in promoting seed production through farmers by making breeders seed available to farmers. CISH is establishing seed processing plant at Malda for the benefit of farmers. This collaborative programme, will help in establishing strong seed chain from producers to marketing experts. The institute is providing breeder’s seed of newly developed varieties for multiplication for strengthening the seed chain. 250 Tribal farmers attended the workshop and participated in the discussions. NSC provided seed kits for distribution to each participant for cultivation in their field.

Event Date:- 27-07-2018

Reschedule National Conference on Strategies and Challenges in Doubling Farmers Income ......

Reschedule National Conference on Strategies and Challenges in Doubling Farmers Income through Horticultural Technologies in Subtropics on 21-22 June 2018 at ICAR-CISH, Lucknow Event Date:- 21-06-2018

Workshop on doubling the farmers income

किसानों की आय को दोगुनी करने हेतु कार्यशाला का आयोजन

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ और अवध आम उत्पादक एवं बागवानी समिति (मलिहाबाद) ने 2022 तक किसानों की आय को दोगुनी करने हेतु दिनाँक 4 मई 2018 को एक कार्यशाला का आयोजन किया। संस्थान के निदेशक डॉ. एस. राजन ने बताया कि संस्थान किस प्रकार अपनी प्रौद्योगिकियों के माध्यम से किसानों को उनका लक्ष्य हासिल करने में मदद हेतु प्रयत्नशील है।

ICAR-Central Institute for subtropical Horticulture Rehmankhera Lucknow and Awadh Aam Utpadak Evam Bagwani Samiti (Malihabad) organized a workshop on 04.05.2018 on doubling the farmers income of mango growers by 2022. ICAR- CISH Director Dr. S. Rajan spoke about how they are trying to help farmers to achieve their target through institute technologies.

Event Date:- 04-05-2018

Kisan Kalyan Karyashala under Gram Swaraj Abhiyan

ICAR-Central Institute Subtropical Horticulture (CISH) participated in ‘Kisan Kalyan Karyashala’ for farmer outreach at Malihabad and Kakori blocks on May 02, 2018. Deputy Chief Minister Dr. Dinesh Sharma was the chief guest at the function presided over by local MP Sh. Kaushal Kishore in Malihabad. Sharma said that officials should stay in the office till the problems of the people present in the meeting were solved. He explained how various activities mobilized at village level were benefiting people who were deprived earlier. He also explained how direct benefit transfer policy of the government had benefited the poor. Sh. Kaushal Kishore laid emphasis on the steps being taken for the uplift of the poor and how various insurance provisions and financial support have changed the view of people. Five progressive farmers were awarded by the deputy CM and their success stories were shared for changing their views about traditional agriculture. The farmer-scientist interaction was one of the important component of this programme. Many booklets and farmer-friendly literature were distributed for their benefit. The programme was attended by government officials, farmers and functionaries helping rural populace in improving their living standards. The programme was also attended by scientists from ICAR-CISH and ICAR-IISR. The officials explained how different development programmes were useful for farmers and in which the farmers of Malihabad block can get financial and technical support from the government. Block level officers projected achievements made under different Central government-supported schemes and the strategy for completing the targets in stipulated time.

Event Date:- 02-05-2018

Farmers Welfare Day Workshop organized under Gram Swaraj Abhiyan

ग्राम स्वराज अभियान के तहत किसान कल्याण दिवस कार्यशाला का आयोजन

अपर कृषि निदेशक (प्रसार), उत्तर प्रदेश द्वारा ग्राम स्वराज अभियान (14 अप्रैल से 5 मई 2018 तक) के तहत किसान कल्याण दिवस कार्यशाaला का आयोजन लखनऊ जनपद के काकोरी ब्लॉक के सभागार में दिनांक 02.05.2018 को किया गया। जिसमे संस्थान के डॉ. (श्रीमती) नीलिमा गर्ग, विभागाध्यक्ष, तुड़ाई उपरांत प्रबंधन, डॉ. घनश्याम पाण्डेय, विभागाध्यक्ष, फसल उत्पादन एवं श्री सुभाष चन्द्रा, वैज्ञानिक कृषि प्रसार ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का शुभारंभ करके काकोरी के ब्लॉक प्रमुख ने सम्मिलित कृषकों को सम्बोधित करते हुए प्रदेश सरकार एवं भारत सरकार द्वारा कृषकों के हित में चलाई जा रही योजनाओं का लाभ उठाकर उनकी आमदनी को बढ़ाने पर बल दिया। इस संदर्भ में विभिन्न विभागों से आये अधिकारियों द्वारा कृषकों को प्रदेश सरकार की योजनाओं के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी गयी। संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा कृषकों को उपोष्ण फलों पर विकसित तकनीकों की जानकारी दी गयी। साथ ही आम, अमरुद के साथ सब्जियों की सह-फसल उगाने, फलों की नर्सरी तैयार करने, बागवानी के साथ मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, आम की तुड़ाई आम तोड़क यंत्र की सहायता से करने, आम को दूर की बाजार में पहुचाने हेतु सी.एफ.बी बाक्स का प्रयोग एवं फलों से विभिन्न उत्पाद तैयार करने सहित संस्थान में कृषकों के लिये समय पर आयोजित होने वाले प्रशिक्षण, गोष्ठी, संस्थान में आकर वैज्ञानिकों से परामर्श, तथा संस्थान में कृषकों-वैज्ञानिकों के सीधे संवाद हेतु निःशुल्क किसान काल सेण्टर सेवा एवं फोन-इन-लाईव सेवा के बारे में जानकारी दी गयी। इस कार्यशाला में लगभग १०० किसानो ने भाग लिया। किसान कल्याण दिवस के अवसर पर काकोरी ब्लॉक के ग्राम सैदपुर में भी एक वैज्ञानिक-कृषक संपर्क कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें उपस्थित कृषकों को संस्थान द्वारा विकसित तकनीकों की जानकारी संस्थान के डॉ. नरेश बाबू, प्रधान वैज्ञानिक एवं श्री अरविन्द कुमार द्वारा प्रदान की गयी।

Under Gram Swaraj Abhiyan (from 14 April to 5 May 2018) a Farmers Welfare Day Workshop was organized by Department of Agriculture on 02.05.2018 in the Auditorium of Kakori Block in Lucknow district. Dr. (Mrs.) Neelima Garg, Head PHM, Dr. Ghanshyam Pandey, Head Crop Production and Shri Subhash Chandra, Scientist, Agriculture Extension participated in the workshop. Inaugurating the programme, Incharge of Kakori Block invited the farmers to take advantage of the schemes being run in the interest of the farmers. In this context, detailed information about the schemes of the government was given in detail by the officials from different departments. ICAR–CISH scientists provided information on growing inter-crops of vegetables in mango and guava orchards, nursery raising, bee keeping, post harvest management practices of mango and value addition. Information regarding free phone-in- service and mobile apps developed by the Institute were also given. About 100 farmers attended this workshop. On the occasion of Farmers Welfare Day a scientist-farmers interaction meet was also organized at village Saidpur of Kakori Block. Dr. Naresh Babu, Principal Scientist and Shri Arvind Kumar provided the information on the technology developed by the Institute.

Event Date:- 02-05-2018

Horti-Entrepreneurship Seminar on Value Addition, Nursery and Tissue Culture 12-02-2018

ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Lucknow in Collaboration with Centre for Agriculture & Rural Development will organize a Horti-Entrepreneurship Seminar on 12-02-2018 at ICAR-CISH, Rehmankhera, Lucknow. Horticultural technologies such as value addition, protected cultivation of high value horticultural crops, nursery and tissue culture could play a major role in developing entrepreneurship in Uttar Pradesh. The seminar will bring in policy makers, bankers, research institutions, private players and potential entrepreneurs under one platform to promote Horti-Food Processing Entrepreneurship in the state. Any citizen of Uttar Pradesh who is willing to develop Horti-Entrepreneurship can register online. A total number of 100 candidates will be selected on first cum first serve basis. Successful candidates will be informed subsequently. Registration Closed Event Date:- 12-02-2018

Horti-Entrepreneurship Seminar organized on 19 January, 2018

बागवानी -उद्यमिता सेमिनार का आयोजन

लखनऊ में कृषि और ग्रामीण विकास केंद्र (कार्ड) के सहयोग से भाकृअनुप-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ ने दिनांक 19-01-2018 को एक दिवसीय संगोष्ठी होर्टि-उद्यमिता का आयोजन किया। इसका उद्घाटन श्री सुधीर गर्ग, प्रधान सचिव (बागवानी), उत्तर प्रदेश सरकार ने किया | डॉ. अनिस अन्सारी, अध्यक्ष कार्ड, डॉ. एस. राजन, निदेशक, भाकृअनुप-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ, श्री नबीन रॉय, सहायक महानिदेशक, नाबार्ड, श्रीमती नीरा चक्रवर्ती, जोनल मैनेजर, इंडियन बैंक तथा आईसीएआर-सीआईएसएच और विभिन्न अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों ने भी संगोष्ठी में हिस्सा लिया। संगोष्ठी के दौरान, टिशू कल्चर के क्षेत्र में उद्यमशीलता के विकास पर तकनीकी सत्र, ग्रीन हाउस की खेती, हाई टेक नर्सरी और मूल्य वृद्धि का आयोजन किया गया जिसमें सत्तर उद्यमिता उम्मीदवारों, विशेषज्ञों और बैंकरों ने भाग लिया। बागवानी-उद्यमिता के विभिन्न क्षेत्रों के लिए वित्तीय सहायता की उपलब्धता पर राज्य सरकार के अधिकारियों, बैंकरों और प्रतिनिधियों द्वारा चर्चा की गई। इस अवसर पर विभिन्न प्रतिभागियों को वित्तीय आवश्यकता से संबंधित कानूनी मुद्दे, पंजीकरण और सरकारी मंजूरी को विशेषज्ञों द्वारा समझाया गया।

The ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Lucknow in collaboration with Center for Agriculture and Rural Development (CARD) organized a one day seminar Horti-entrepreneurship on 19 January, 2018. It was inaugurated by Shri Sudhir Garg, Principal Secretary, (Horticulture), Lucknow Dr Anis Ansari, Chairman CARD, Horticulture; Dr. S. Rajan, Director, ICAR-CISH, Mr. Nabin Roy, AGM, NBARD, Ms. Neera Chakrabvarty, Zonal Manager, Indian Bank and scientists from ICAR-CISH and different other Institutes attended the seminar. During the Seminar, technical sessions on entrepreneurship development in the field of tissue culture, green house cultivation, high tech nursery and value addition were organized and attended by seventy experts and entrepreneurship aspirants and bankers. Financial assistance available for different areas of Horti-entrepreneurship was discussed among state department officers, bankers and delegates. The potential Horti-entrepreneurs attended the seminar from various districts of the Uttar Pradesh. On this occasion, Legal issues, registration and government clearances related with financial requirement of different technologies were explained by the resource persons.

Event Date:- 19-01-2018

Awareness workshop on ‘Safe use of pesticides in Agriculture’

मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर कीटनाशकों के कुप्रभाव को कम करने एवं प्रयोग के दौरान सावधानी पर चर्चा करने के लिए संस्थान में दिनांक 11 दिसंबर 2017 को बायर क्रॉप साइंस लिमिटेड के सहयोग से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कीटनाशकों के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने, अच्छे कृषि अभ्यासों को प्रोत्साहित करने तथा किसानों के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की भागीदारी के महत्व पर भी विचार-विमर्श किया गया। फार्मर फर्स्ट परियोजना के किसानों ने भी कार्यशाला में भाग लिया तथा अपने प्रश्नों के द्वारा सम्बन्धित समस्याओं से अवगत कराया।

One day workshop organized on December 11, 2017 on ‘Safe use of pesticides in Agriculture’ was organized in collaboration with Bayer Crop Science Limited for discussing careful use of pesticide to reduce its dreadful effects on the human health and environment. Importance of Public Private Partnership to create awareness among the farmers to inculcate good agricultural practice to reduce the adverse effects of the pesticides was also deliberated. Farmers of the farmer FIRST project also participated in the workshop.

Event Date:- 11-12-2017

Agriculture Education For Rural Youth

ग्रामीण युवाओं के लिए कृषि शिक्षा

कृषि शिक्षा दिवस को आईसीएआर-सीआईएसएच, लखनऊ द्वारा ग्रामीण छात्रों के बीच मल्लीहाबाद, उत्तर प्रदेश के नबी पनाह में मनाया गया। युवाओं को कृषि शिक्षा एवं उसके विभिन्न पहलुओं से परिचित कराने के लिएवैज्ञानिक, प्रगतिशील किसानों और शिक्षकों ने गोल्डन जुबली स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। छात्रों को कृषि, जैविक खेती आदि के विभिन्न क्षेत्रों के बारे में सिखाया गया। कृषि के ग्रामीण युवाओं को कृषि मेंप्रोत्साहित करने के लिए फार्मर फर्स्ट गांव में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। दो गैर सरकारी संगठनों अवध आम उत्पादक एवं बागानी समिति और सोसाइटी फॉर कन्जर्वेशन ऑफ मैंगो डायवर्सिटी ने भी इस कार्यक्रम मेंभाग लिया। केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान रहमान खेड़ा के वैज्ञानिकों एवं समुदाय आधारित संगठनों ने छात्रों को कृषि शिक्षा के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी दी तथा बैंक, कृषि विभाग, राज्य कृषिविश्वविद्यालयों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं प्राइवेट क्षेत्र में कृषि विद्यार्थियों के लिए बढ़ते हुए अवसरों के बारे में जानकारी पर चर्चा की।

In order to make young children acquaint about agriculture education, scientists of ICAR-CISH, progressive farmers and teachers organized a sensitization program at Golden Jublee School at Nabi Panah (Malihabad). Director of the Institute stressed on importance of agriculture education in improving health and wealth of the nation. Students were taught about the various fields of agriculture, organic farming etc. The program was organized in Farmer FIRST village to encourage rural youth in agriculture. Two NGOs Awadh Aam Utpadak Bagwani Samiti and Society for Conservation of Mango Diversity also participated in the event. Scientist from the ICAR-CISH along with the local members of the community based organization organized awareness programme and explained the students about the prospects and requirements for the career in Agricultural Sciences. This steam of education can make them ready for available opportunities in banks, agriculture departments, state agriculture universities, ICAR and not the least in the increasing number of private companies working on production of agricultural inputs.

Event Date:- 03-12-2017

ICAR- Zonal Tournament (North Zone) 2017

भा.कृ.अनु.प.- आंचलिक खेल कूद प्रतियोगिता (उत्तर क्षेत्र) २०१७

भा.कृ.अनु.प.- आंचलिक खेल कूद प्रतियोगिता (उत्तर क्षेत्र) 2017 का आयोजन, भा.कृ.अनु.प.- भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में दिनांक 30 अक्टूबर से 2 नवंबर, 2017 के मध्य संपन्न हुआ। डॉ. प्रभात कुमार शुक्ल, वरिष्ठ वैज्ञानिक (पादप रोग) और श्रीमती रेखा चौरासिया, सहायक मुख्य तकनीकी अधिकारी ने भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागबानी संस्थान, रेहमानखेड़ा, लखनऊ का प्रतिनिधित्व करते हुए क्रमशः शतरंज और कैरम प्रतियोगिता में रजत पदक प्राप्त किये। संस्थान के निदेशक के साथ-साथ सभी कर्मचारियों ने उनके उज्ज्वल भविष्य का शुभकामनाएं एवं बधाई दी।

The ICAR- Zonal Tournament (North Zone) 2017 was organized at ICAR- Indian Institute of Sugarcane Research, Lucknow during 30th October to 2nd November, 2017. Dr. Prabhat Kumar Shukla, Senior Scientist (Plant Pathology) and Mrs. Rekha Chaurasia, Assistant Chief Technical officer of the Instituite have received Silver Medal in Chess and Carrom events respectively. The Director along with all staff members of Institute congratulate both of them and wish them a bright future.

Event Date:- 02-11-2017

Memorandum of Cooperation MoC on development of Food Processing Sector in Andhra Pradesh signed between ICAR-CISH and The State Government of AP

आईसीएआर-सीआईएसएच और आंध्र प्रदेश राज्य सरकार के बीच खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विकास पर सहयोग ज्ञापन-पत्र (एमओसी)

डॉ. एस. राजन, निदेशक, आईसीएआर-सीआईएसएच ने आंध्र प्रदेश की राज्य सरकार द्वारा 16 अक्तूबर, 2017 को विश्व खाद्य दिवस पर आयोजित खाद्य प्रसंस्करण शिखर सम्मेलन में भाग लिया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य मंत्री एन चंद्राबाबू नायडू और सरकार के अतिरिक्त सचिव ए.पी.एम.गिरिजा शंकर ने की। इस अवसर पर, आंध्र प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विकास पर आईसीएआर-सीआईएसएच और आंध्र प्रदेश की राज्य सरकार के बीच सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

Dr, S. Rajan, Director, ICAR-CISH participated in Food Processing Summit organized by State Government of Andhra Pradesh on 16 October, 2017 by celebrating World Food Day. This event chaired by chief minister N Chandrababu Naidu and presided over by secretary to government of A.P. M Girija Shankar. On this occasion, Memorandum of Cooperation (MoC) signed between ICAR-CISH and The State Government of Andhra Pradesh on development of Food Processing Sector in Andhra Pradesh.

Event Date:- 16-10-2017

Training farmers from Eastern Uttar Pradesh

पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण

उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों के 30 किसानों के लिए 9 अक्टूबर, 2017 से आईसीएआर-सीआईएसएच में उपोषण फलों के उत्पादन लिए विभिन्न तकनीकों पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। प्रशिक्षण बस्ती में स्थित आम के लिए उत्कृष्टता केंद्र द्वारा प्रायोजित है। प्रशिक्षुओं को किस्मों, फसल उत्पादन, व्याधि एवं कीट प्रबंधन और के पहलुओं के विभिन्न सिद्धांतों और व्यावहारिक पहलुओं के प्रशिक्षित किया जाएगा । यह प्रशिक्षण नर्सरी प्रबंधन बेहतर खेती की तकनीकों, मूल्य वृद्धि और पूर्व उत्तर प्रदेश में फल के लिए बड़े पैमाने पर नर्सरी स्थापित करने के लिए उपयोगी होगा।

A three days training programme started on various technologies for subtropical fruit production at ICAR-CISH from 9th October, 2017 with 30 farmers from eastern districts of Uttar Pradesh. The training is sponsored by the centre of excellence from for mango situated at Basti. The trainees will be exposed to various theory and practical aspects on varieties, crop production, insect pest management and post harvest management aspects. This training will be usefull for learning various aspects of advance nursery management practices,improved cultivation practices, value addition and setting up large scale nursery for fruits in Eastern UP.

Event Date:- 09-10-2017

Workshop on Methodological framework on Implementation of Farmer FIRST

फार्मर फर्स्ट के क्रियान्वयन हेतु कार्यविधि रूपरेखा पर कार्यशाला

संस्थान में दिनांक 3-6 अक्टूबर, 2017 को फार्मर फर्स्ट परियोजना के क्रियान्वयन हेतु कार्यविधि रूपरेखा पर एक चार दिवसीय कार्यशाला का आईसीएआर-एनएआरएम, हैदराबाद और आईसीएआर-सीआईएसएच, लखनऊ द्वारा संयुक्त रूप से आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में ग्यारह आईसीएआर संस्थान और राज्य कृषि विश्वविद्यालय जोन -2 और जोन-3 ने भाग लिया। आईसीएआर-एनएआरएएम, आईसीएआर-डीकेएमए, आईसीएआर-आईएएसआरआई और आईसीएआर-एनसीएपी के विशेषज्ञों ने गुणात्मक और मात्रात्मक प्रभाव मूल्यांकन विश्लेषण, भागीदारी प्रौद्योगिकी विकास, सहभागिता मूल्यांकन उपकरण, दस्तावेज और रिपोर्ट लेखन और डेटाबेस प्रबंधन पर प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया। परियोजना प्रबंधन समिति ने आईसीएआर-सीआईएसएच की फार्मर फर्स्ट परियोजना की प्रगति की समीक्षा के लिए मलहिबाद लखनऊ के नबीपनाह और मोहम्मदनगर तालुकदारी गांवों का दौरा किया।

A four day workshop on Methodological framework on Implementation of FFP was organized jointly by ICAR-NAARM, Hyderabad and ICAR-CISH, Lucknow during 3-6 October, 2017 at Institute. Eleven ICAR Institute and SAU from zone-II and zone-III participated in the workshop. Experts from ICAR-NAARM, ICAR-DKMA, ICAR-IASRI and ICAR-NCAP gave training to participants on qualitative and quantitative impact assessment analysis, participatory technology development, participatory appraisal tools, documentation and report writing and database management. Project Management Committee also visited Nabi Panah and Mohammad Nagar Talukedari villages of Malihabad to review the progress of Farmer FIRST project of ICAR-CISH, Lucknow.

Event Date:- 03-10-2017

Workshop on income generation from Mushroom diversity for rural women and landless farmers

मशरूम विविधता अंगीकरण कार्यशाला

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ द्धारा किसानों की आय के स्रोत को बढ़ाने हेतु ‘‘फार्मर्स फर्स्ट परियोजना’’ के अंतर्गत दिनांक 20 सितंबर 2017 को ‘‘मशरूम विविधता अंगीकरण कार्यशाला’’ का आयोजन किया गया। जिसमें लखनऊ, उन्नाव, लखीमपुर खीरी और हरदोई जिलों के 70 कृषकों ने सहभागिता की। इस कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक डॉ. शैलेन्द्र राजन ने अगले पाँच वर्षो में कृषकों की आय को दो गुना करने हेतु मशरूम उत्पादन, मुर्गी पालन और उच्च कीमत वाली अन्तः फसलों को आम के बागों में समावेश करने पर जोर दिया। चन्द्र शेखर कृषि एवं प्रोद्यौगिक वि.वि., कानपुर के प्रो. वेद रतन ने बटन मशरूम उत्पादन की सविस्तार चर्चा की। इस अवसर पर कृषकों को मशरूम उत्पादन प्रारंभ करने हेतु मशरूम किट का वितरण भी किया गया।

The income opportunities for rural women and landless labors are scanty in Malihabad, a famous mango belt in Uttar Pradesh. Viable livelihood options are needed for this most vulnerable group of farmers. In this connection ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture Rehmankhera, Lucknow has organized “Mushroom Diversity Adoption Workshop” on 20-09-2017 under Farmer FIRST program to augment income of this targeted group of farmers. Seventy farmers mostly rural women and small and landless farmers from Lucknow, Unnao, Lakhimpur Kheri and Hardoi districts participated in the workshop.

Event Date:- 20-09-2017

सिरका बनाने की उन्नत विधि का प्रशिक्षण कार्यक्रम

दिनांक 18 सितम्बर 2017 को विज्ञान भवन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उ.प्र. के नवप्रवर्तन खण्ड में केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ द्वारा विकसित मीठे फलों के रस से सिरका बनाने की उन्नत विधि का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें औद्योगिक संस्थानों एवं स्वयं सहायता समूहों के साथ ग्रामीण लोगों ने प्रतिभाग किया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उ.प्र. के संयुक्त निदेशकों डॉ. शशि राणा एवं श्री राधे लाल की उपस्थिति में डॉ. नीलिमा गर्ग, केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान द्वारा इस विधि से औद्योगिक स्तर पर सिरका निर्माण करने की विधि का प्रदर्शन किया गया। इस विधि से औद्योगिक एवं व्यावसायिक स्तर पर भी मीठे फलों के रस से सिरके का उत्पादन करके आय के साधनों तथा रोजगार में वृद्धि भी की जा सकती है। कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले प्रशिक्षणार्थियों को परिषद के द्वारा प्रमाण पत्र भी प्रदान किये गये।

Event Date:- 18-09-2017

Workshop on Sensitization on Agri incubation for Startup

कृषि स्टार्टअप विषय पर कार्यशाला

भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान रहमानखेड़ा, लखनऊ में दिनांक 17.08.2017 को कृषि स्टार्टअप विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक, डॉ. शैलेन्द्र राजन ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए बागवानी में उद्यमिता के बारे में अनेक दृष्टांतों के माध्यम से विस्तारपूर्वक बताया। भा.कृ.अनु.प. के विभिन्न संस्थानों से वक्ता के रूप में आये वैज्ञानिकों: डॉ. पूनम जयंत सिंह, डॉ. ए. के. शर्मा, डॉ. टी. दामोदरन ने उद्यमिता एवं कौशल विकास पर विचार प्रस्तुत किये। डॉ. सिंह ने अटल नवोन्मेषी मिशन, नीति आयोग की योजना, सीड कैपिटल, एंजिल इन्वेंटर्स और वेंचर कैपिटल आदि विषयो पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. ए. के. शर्मा ने राष्ट्रीय उद्यमिता नीति, ई-एग्रीकल्चर स्टैटेजीएस तथा उद्यमिता विकास नीति एवं “ग्रामीण युवाओं में उद्यमिता एवं कौशल विकास” की विस्तृत पहलुओं पर जानकारी दी। डॉ. दामोदरन ने अपने संबोधन में विभिन्न जीवित उदाहरणों से बायो-फ़र्टिलाइज़र एवं बायो- पेस्टिसाइडस एंटरप्रेन्योरशिप, सीएसआर बायो-फार्मूलेशन, बायोफ़र्टिलाइज़र एक्ट 1985, सीआईबी रजिस्ट्रेशन के बारे में बताया। डॉ. तरुण अदक, आईटीएमयू के सदस्य सचिव ने किसानो को उद्यमिता एवं स्टार्टअप के लिए कौशल विकास कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण के सम्बन्ध में जानकारी दी।

Workshop on “Sensitization on Agri-incubation for Startup” was organized at ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Rehmankhera, Lucknow on 17 August, 2017. On this occasion, Dr. Shailendra Rajan, Director, ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture welcomed all participants and enlightened on entrepreneurship in horticulture. Dr. Poonam Jayant Singh, Dr. A. K. Sharma and Dr. T. Damodaran Scientists from different ICAR institute delivered lectures on entrepreneurship and startup. Dr. Singh from ICAR-NBFGR, Lucknow told about Atal Innovation Mission, NITI AYOG Policy, Seed Capital, Angle Inventors and Venture Capitals. Dr. Sharma from ICAR-IISS, Lucknow said about National Entrepreneurship Policy, E- Agriculture Strategies, Entrepreneur Development Policy etc. Dr. T. Damodaran, RRS, ICAR- CSSRI, Lucknow delivered a lecture on “Prospects of Entrepreneurship Development in bio-hardening and bio-formulation production venture” and Dr. Tarun Adak, ICAR-CISH, Lucknow delivered a lecture on Training need of farmers under skill development programme for Entrepreneurship and start-up.

Event Date:- 17-08-2017

Workshop on Stress Management: Causes and Prevention

तनाव प्रबंधन: कारण एवं निवारण विषय पर कार्यशाला

भा.कृ.अनु.प.-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान रहमानखेड़ा, लखनऊ में दिनांक 29.07.2017 को तनाव प्रबंधन : कारण एवं निवारण विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसके उद्घाटन अवसर पर संस्थान के निदेशक, डॉ. शैलेन्द्र राजन ने समय प्रबंधन द्वारा तनाव को नियंत्रित किये जाने की सलाह दी एवं संस्थान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्व-मूल्यांकन कर आत्म अन्वेषण करने के लिये कहा। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय औषधीय सगंध पौधा संस्थान, लखनऊ के संयुक्त निदेशक (राजभाषा), डॉ. विजय नारायण तिवारी ने तनाव एवं उसके कारकों पर विशेष जोर देते हुए मस्तिष्क एवं हॉर्मोन्स के संबंध पर प्रकाश डाला तथा सामाजिक एवं धार्मिक पहलुओं पर भी जोर दिया। डॉ. नीलिमा गर्ग, प्रभागाध्यक्ष, तुड़ाई उपरांत प्रबंधन प्रभाग ने तनाव प्रबंधन विषय के विस्तृत पहलुओं पर जानकारी दी।

A Workshop on stress management: causes and prevention was organized at ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture, Rehmankhera, Lucknow on July 29, 2017. On this occasion, Dr. Shailendra Rajan, Director ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture suggested that how to controlled stress through time management and advised to all officials & employees of institute for self evaluation and self reconnoiter. Chief Guest, Dr. Vijay Narayan Tiwari, Joint Director (Rajbhasha), CSIR- CIMAP, Lucknow focused on correlation between brain, hormones and stress that is created due to mental, physical, social and religious issues. Dr. Neelima Garg, Head, Division of Post Harvest Management discussed various issues on stress management.

Event Date:- 29-07-2017

Brainstorming session on success stories

Institute organized one day Brainstorming Session on Success Story on 04-10-2016 to promote awareness among scientific fraternity on documenting and writing success stories. Director Dr. Shailendra Rajan chaired the session and he spoke about ‘Success Stories under Adversities’. Dr. Maneesh Mishra elaborated on ‘How to Pen & Popularize Success Stories’, Dr. Neelima Garg deliberated on ‘Role of Scientists in Creating Success Stories’ Dr. Barsati Lal showed the Success Stories of CISH and Dr. Sharmila Roy gave examples of Successful Stories from other Institution. All Scientists participated in the session enthusiastically. Event Date:- 04-10-2016

Workshop on ‘Creating awareness’ on providing consultancy

परामर्श देने के विषय में जागरूकता पर कार्यशाला

संस्थान में परामर्श देने/ठेका सेवा/अनुसंधान/प्रशिक्षण तथा कृषि प्रौद्योगिकी तैयार करने पर 29 जुलाई, 2016 को जागरूकता पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। संस्थान के निदेशक ने इस अवसर पर अपने व्याख्यान में अच्छा, बुरा उपयोगी तथा अनुकरणीय अनुसंधान पर जानकारी प्रदान की।

One Day Workshop on ‘Creating awareness’ on providing consultancy/contract service/research/training and generating agricultural technology portfolio for business/entrepreneurship development/ Start-Ups” on July 29, 2016 at Institute. A lecture was delivered by the Director ICAR-CISH, Lucknow on “Good, Bad, Useful and Great Research” 29.07.2016).

Event Date:- 29-07-2016

National Workshop on Sustainable Mango Production Organized

सतत आम उत्पादन पर राष्ट्रीय कार्यशाला

भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान-क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र, माल्दा (पश्चिम बंगाल) में 18-19 जून, 2016 को सतत आम के उत्पादन: उष्ण एवं उपोष्ण क्षेत्रों में हो रहे जलवायु परिवर्तन तथा आम विविधता पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। स्वामी विश्वमयानन्द जी (सचिव, रामकृष्ण मिशन आश्रम, सर्गाची, मुर्शिदाबाद) ने डॉ. पी. के. चक्रवर्ती (सहायक महाप्रबंधक-संयंत्र संरक्षण, भा.कृ.अनु.प., नई दिल्ली), डॉ. आर. के. ठाकुर (परियोजना समन्वयक, ए.आई.सी.आर.पी.-हनी बी और पोलिनेटर), डॉ. एस. राजन, निदेशक, केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। दस कार्यशाला में देश के विभिन्न हिस्सों से पचास आम शोधकर्ताओं, 100 आम उत्पादक और अन्य सहभागी सम्मिलित हुए। कार्यशाला में सतत आम उत्पादन के प्रासंगिक और उपयोगी विषयों को चर्चा की गयी। डॉ. पी.के. चक्रवर्ती ने कीट और रोगों के प्रबंधन के साथ-साथ आम में रासायनिक कीटनाशकों और फफूँदनाशियों के विवकेपूर्ण प्रयोग पर भी जोर दिया। डॉ. राजन ने पूर्वी भारत के किसानों के किस्मों के फार्म संरक्षण और पंजीकरण का दस्तावेज़ीकरण किये जाने पर दिया। कई विशिष्ट दिग्गजों की उपस्थिति में डॉ. पी.के. चक्रवर्ती (सहायक महानिदेशक-प्लांट प्रोटेक्शन, आईसीएआर, नई दिल्ली) ने आम डायवर्सिटी शो का उद्घाटन किया। पूर्वी और उत्तरी भारत के विभिन्न हिस्सों से आम किसानों और अन्य हितधारकों ने 350 किस्मों के आम का प्रदर्शन किया।

ICAR CISH-Regional Research Station, Malda (West Bengal) organized National Workshop on Sustainable Mango Production: Challenges under Changing Climate in Tropics and Subtropics and Mango Diversity Show during June 18-19, 2016. Swami Viswamayananda Ji (Secretary, Ramakrishna Mission Ashrama, Sargachi, Murshidabad) inaugurated the workshop in august presence of Dr. P. K. Chakrabarti (Assistant Director General-Plant Protection, ICAR, New Delhi), Dr. R. K. Thakur (Project Coordinator, AICRP-Honey Bee & Pollinators) and Dr. S. Rajan (Director, CISH, Lucknow) & other dignitaries. Fifty mango researchers, 100 mango growers & other stakeholders were part of the programme from different parts of country. The workshop covered relevant and useful topics of sustainable Mango Production. Dr. P. K. Chakrabarti emphasized for integrated pests & diseases management as well as judicious use of chemical pesticides and fungicides in mango. Dr. Rajan stressed for documentation, on farm conservation and registration of farmers varieties of mango from Eastern India. The Mango Diversity Show was inaugurated by Dr. P. K. Chakrabarti (Assistant Director General-Plant Protection, ICAR, New Delhi) in the presence of many distinguished diginitaries. 350 varieties of mango were exhibited by mango growers, mango federation and other stake holders from various parts of Eastern & Northern India.

Event Date:- 18-06-2016

Sri Girdhari Lal Chadha memorial Award

Dr S Rajan bagged prestigious Sri Girdhari Lal Chadha Memorial Gold medal in Fruit science for year 2016 for his significant contributions in field of Horticulture. The award was conferred to him during platinum jubilee of HSI at 7th Indian Horticulture Congress 2016" at B.P. Pal Auditorium, IARI, New Delhi. Event Date:- 2016-11-27

Workshop on Green Climate Fund

A Workshop on Climate Change was conducted in our Regional Office, NABARD, Lucknow on December 7, 2016. The Workshop was chaired by Shri A.K. Panda, CGM, NABARD, UPRO, Lucknow. From ICAR-CISH, Lucknow, Dr. Shailendra Rajan, Director, Dr. Ashok Kumar and Dr. Tarun Adak attended the Workshop. Dr. S. Rajan suggested that a follow up exercise need to be organized by NABARD for developing full-fledged Project Concept Notes. The objective of the Green Climate fund was to provide support to developing countries in combating climate change with funding by developed countries and other public and private sources. Event Date:- 2016-12-07

Best Research Paper Award-2016

Dr Prananath Barman bagged Best Research Paper Award-2016 for his Research Paper entitled “Synergistic interaction of arbuscular mycorrhizal fungi and mycorrhiza helper bacteria improving antioxidant activities in Troyer citrange and Cleopatra mandarin under low moisture stress”, published in Indian Journal of Horticulture, 2015, Vol. 72 (1): 33-37 during Inaugural Function of 7th Indian Horticulture Congress 2016 on November 15, 2016. Event Date:- 2016-12-11